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Bihar Naman GS (An Institute for UPSC and BPSC), Patna✌️

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🟢 Bihar Naman GS – UPSC & BPSC की सम्पूर्ण तैयारी का भरोसेमंद नाम यह संस्थान Offline और Online दोनों मोड में UPSC एवं BPSC की PT + GS Mains + Essay + Interview की व्यवस्थित और मार्गदर्शक कक्षाएं संचालित करता है. Visit करें- www.biharnaman.in

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📈 Análisis del canal de Telegram Bihar Naman GS (An Institute for UPSC and BPSC), Patna✌️

El canal Bihar Naman GS (An Institute for UPSC and BPSC), Patna✌️ (@biharnaman) en el segmento lingüístico de Hindú es un actor destacado. Actualmente la comunidad reúne a 12 771 suscriptores, ocupando la posición 15 561 en la categoría Educación y el puesto 30 627 en la región India.

📊 Métricas de audiencia y dinámica

Desde su creación el невідомо, el proyecto ha mostrado un crecimiento acelerado, reuniendo a 12 771 suscriptores.

Según los últimos datos del 29 septiembre, 2026, el canal mantiene una actividad estable. En los últimos 30 días la variación de miembros fue de 102, y en las últimas 24 horas de -8, conservando un alto alcance.

  • Estado de verificación: No verificado
  • Tasa de interacción (ER): El promedio de interacción de la audiencia es 12.04%. Durante las primeras 24 horas tras publicar, el contenido suele obtener 9.33% de reacciones respecto al total de suscriptores.
  • Alcance de las publicaciones: Cada publicación recibe en promedio 1 538 visualizaciones. En el primer día suele acumular 1 192 visualizaciones.
  • Reacciones e interacción: La audiencia responde de forma activa: el promedio de reacciones por publicación es 8.
  • Intereses temáticos: El contenido se centra en temas clave como bpsc, naman, bihar, 2026, सरकार.

📝 Descripción y política de contenido

El autor describe el recurso como un espacio para expresar opiniones subjetivas:
“🟢 Bihar Naman GS – UPSC & BPSC की सम्पूर्ण तैयारी का भरोसेमंद नाम यह संस्थान Offline और Online दोनों मोड में UPSC एवं BPSC की PT + GS Mains + Essay + Interview की व्यवस्थित और मार्गदर्शक कक्षाएं संचालित करता है. Visit करें- www.biharnaman.in”

Gracias a la alta frecuencia de actualizaciones (últimos datos recibidos el 30 septiembre, 2026), el canal mantiene la vigencia y un amplio alcance. La analítica demuestra que la audiencia interactúa activamente con el contenido, lo que lo convierte en un punto de referencia dentro de la categoría Educación.

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Suscriptores
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-237 días
+10230 días
Archivo de publicaciones
⚖️ वैधानिक चेतावनी एवं कॉपीराइट सूचना इस निबंध का मूल लेखन एवं प्रस्तुतीकरण Bihar Naman GS / संतोष कश्यप का है। इस निबंध के मूल पाठ, भाषा, संरचना एवं विशिष्ट अभिव्यक्ति पर लागू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त कॉपीराइट अधिकार सुरक्षित हैं। लेखक की पूर्व लिखित अनुमति के बिना इस निबंध अथवा इसके किसी महत्त्वपूर्ण अंश की पुनर्प्रस्तुति, व्यावसायिक उपयोग, अपने नाम से प्रकाशन या इस प्रकार उपयोग करना, जिससे लेखकीय स्वामित्व के संबंध में भ्रम उत्पन्न हो, प्रतिबंधित है। उचित श्रेय दिए बिना इसे अपना मौलिक लेखन बताना अनुचित है तथा परिस्थितियों के अनुसार कॉपीराइट या अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई का विषय हो सकता है। इस निबंध को साझा करते समय लेखक एवं Bihar Naman GS का नाम और मूल संदर्भ यथावत रखें। © Bihar Naman GS / Santosh Kashyap. सर्वाधिकार सुरक्षित।

बिहार में ऐसे अनेक शिक्षक हैं, जिन्होंने वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों का जीवन बनाया। उनकी असली उपलब्धि उनके विद्यार्थियों की सफलता, उनके विचारों की स्पष्टता और उनके व्यक्तित्व में आए बदलाव में दिखाई देती है। दूसरी ओर, किसी व्यक्ति की चर्चा उसके काम से अधिक उसके प्रचार के कारण भी हो सकती है। इसलिए केवल लोकप्रियता को योग्यता का प्रमाण मान लेना उचित नहीं है। मैं अक्सर सोचता हूँ कि अगर किसी शिक्षक की असली पहचान उसके पोस्टर और बैनर से ही तय होने लगे, तो फिर उसके विद्यार्थियों की सफलता का महत्त्व क्या रह जाएगा? किसी शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि तो तब है, जब उसका विद्यार्थी अपने पैरों पर खड़ा हो, अपने परिवार का सहारा बने और समाज में अपनी पहचान बनाए। पोस्टर कुछ दिनों में पुराने हो जाते हैं, लेकिन किसी विद्यार्थी के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव लंबे समय तक बना रह सकता है। यही बात सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर भी लागू होती है। किसी के पास कितनी किताबें हैं, वह कितने बड़े संस्थान में पढ़ता है, सोशल मीडिया पर उसकी कितनी चर्चा होती है—इन सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि वह वास्तव में कितना सीख रहा है और अपनी तैयारी में कितना आगे बढ़ रहा है। जीवन में अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना गलत नहीं है। कठिन परिश्रम के बाद सफलता मिलती है, तो उसका आनंद लेना चाहिए। अपने काम को लोगों तक पहुँचाना भी जरूरी हो सकता है। लेकिन आत्मविश्वास और अहंकार के बीच एक महीन अंतर है। आत्मविश्वास कहता है, “मैंने मेहनत की है और मैं आगे भी बेहतर कर सकता हूँ।” अहंकार कहता है, “मैं सब कुछ जानता हूँ और मुझे किसी से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।” पहली सोच मनुष्य को आगे बढ़ाती है, जबकि दूसरी सोच उसके विकास के रास्ते बंद कर सकती है। इसीलिए व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्न होने के साथ-साथ दूसरों के योगदान का सम्मान करना भी सीखना चाहिए। पद, पैसा, प्रतिष्ठा और लोकप्रियता जीवन के महत्त्वपूर्ण पड़ाव हो सकते हैं, लेकिन वे किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का मापदंड नहीं हैं। यह भी समझना आवश्यक है कि हर परिस्थिति में मौन रहना बुद्धिमानी नहीं है। जहाँ अन्याय हो, वहाँ आवाज उठाना जरूरी है। जहाँ अपने विचार रखने से किसी का भ्रम दूर हो सकता हो, वहाँ बोलना चाहिए। शिक्षक को पढ़ाना है, लेखक को लिखना है और नेतृत्वकर्ता को अपनी बात लोगों तक पहुँचानी है। इसलिए समस्या बोलने में नहीं, बल्कि बिना समझे बोलने में है। समस्या अपनी योग्यता बताने में नहीं, बल्कि दूसरों को छोटा दिखाकर स्वयं को बड़ा साबित करने में है। वास्तविक परिपक्वता इस बात में है कि मनुष्य कब बोले, कितना बोले और जो बोले, उसमें कितनी सत्यता, सार्थकता तथा संवेदनशीलता हो। उपसंहार बिहार की मिट्टी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और अनेक ऐसे व्यक्तित्व दिए, जिनका जीवन हमें अपने काम, विचार और मूल्यों के महत्त्व की याद दिलाता है। उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अर्थ यही है कि व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद या परिचय से नहीं, बल्कि उसके योगदान और उसके मूल्यों से भी बनती है। आखिरकार, जीवन में आगे बढ़ना चाहिए, अपनी उपलब्धियों पर गर्व भी करना चाहिए और अपने काम को दुनिया तक पहुँचाना भी चाहिए। लेकिन इस क्रम में यह नहीं भूलना चाहिए कि सीखने के लिए हमेशा कुछ न कुछ शेष रहता है। एक शिक्षक के रूप में मेरी एक छोटी-सी समझ है—ज्ञान जितना बढ़ता है, व्यक्ति को अपनी सीमाओं का उतना ही एहसास होता है। इसलिए बड़ा बनने की कोशिश जरूर कीजिए, लेकिन बड़ा दिखने की जल्दबाजी में मत पड़िए। किसी को उसके कम ज्ञान के कारण अपमानित करने के बजाय उसे सीखने का अवसर दीजिए। किसी के अधिक बोलने मात्र से उसे कमतर मत आँकिए। व्यक्ति को उसके पूरे व्यवहार, कार्य और विचारों के आधार पर समझने की कोशिश कीजिए। क्योंकि अंत में लोग यह कम याद रखते हैं कि आपने अपने बारे में क्या-क्या कहा था; वे यह अधिक याद रखते हैं कि आपने उनके लिए किया क्या था। इतने गहरे बनिए कि आपको अपनी गहराई का शोर न मचाना पड़े, इतने योग्य बनिए कि आपका काम आपकी पहचान बने और इतने विनम्र बनिए कि उपलब्धियाँ बढ़ने के साथ आपका अहंकार नहीं, आपका व्यक्तित्व बड़ा होता जाए। क्योंकि शोर कुछ समय के लिए ध्यान आकर्षित कर सकता है, लेकिन गहराई, विनम्रता और सार्थक कर्म ही लंबे समय तक सम्मान अर्जित करते हैं। Santosh Kashyap Bihar Naman GS Patna #bpsc #essay #proverb #lokokti

निबंध का शीर्षक: अधजल गगरी छलकत जाए By: संतोष कश्यप निबंध प्रभा एवं बिहार नमन Book Series के लेखक ------------------------------------------ प्रस्तावना गहराई मौन रहती है, उथलापन शोर करता है। हमारे हिन्द प्रदेश में एक बहुत प्रचलित कहावत है— “अधजल गगरी छलकत जाए।” यानी जो घड़ा आधा भरा होता है, वही अधिक छलकता है। इस कहावत का प्रयोग अक्सर उन लोगों के लिए किया जाता है, जिन्हें किसी विषय की थोड़ी-सी जानकारी होती है, लेकिन वे अपने ज्ञान का प्रदर्शन कुछ इस तरह करते हैं, मानो उनसे बड़ा जानकार कोई दूसरा है ही नहीं। संस्कृत में भी एक सूक्ति है— “अर्धो घटो घोषमुपैति नूनम्।” भावार्थ यह है कि आधा भरा हुआ घड़ा ही अधिक आवाज करता है। यह सूक्ति हमें बताती है कि अधूरा ज्ञान कई बार मनुष्य में आवश्यकता से अधिक आत्मविश्वास पैदा कर देता है, जबकि वास्तविक ज्ञान के साथ अक्सर विनम्रता और गंभीरता आती है। मुख्य भाग प्रकृति हमें जीवन के अनेक गूढ़ सत्य सिखाती है। पहाड़ों से निकलने वाली नदी जब चट्टानों के बीच से गुजरती है, तो उसका प्रवाह शोर करता है। लेकिन वही नदी जब मैदानों में पहुँचकर विस्तृत होती है, तो उसका स्वरूप बदलने लगता है। समुद्र की विशालता भी हमें यही सिखाती है कि वास्तविक गहराई को अपनी उपस्थिति का शोर नहीं मचाना पड़ता। मनुष्य का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही है। जिसके भीतर ज्ञान, अनुभव और विवेक की गहराई होती है, उसे बार-बार अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उसकी वाणी में संयम, व्यवहार में विनम्रता और निर्णयों में गंभीरता दिखाई देती है। उसके व्यक्तित्व का परिचय उसके शब्दों से अधिक उसके कर्म देते हैं। हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कम बोलने वाला हर व्यक्ति विद्वान होता है या अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करने वाला हर व्यक्ति अहंकारी होता है। असली बात यह है कि हम जो कहते हैं, उसके पीछे कितना ज्ञान, अनुभव और सत्य है। वास्तव में विद्वान व्यक्ति वह नहीं है, जो प्रत्येक बातचीत में अपने ज्ञान का प्रदर्शन करे, बल्कि वह है जो यह समझता हो कि ज्ञान का संसार असीमित है और उसकी अपनी जानकारी सदैव अपूर्ण रह सकती है। जिस दिन मनुष्य यह मान लेता है कि उसे सब कुछ ज्ञात है, उसी दिन उसकी सीखने की यात्रा बाधित होने लगती है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति अपनी सीमाओं को पहचानता है, दूसरों के विचारों को सुनता है और नई चीजें सीखने के लिए सदैव तत्पर रहता है, उसके व्यक्तित्व का निरंतर विकास होता है। ज्ञान मनुष्य को विनम्र बनाता है, जबकि अहंकार उसे अपनी ही सीमाओं में कैद कर देता है। आज के समय में अपने कार्यों, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान का प्रदर्शन करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। सोशल मीडिया के इस दौर में व्यक्ति अपने हर छोटे-बड़े काम को लोगों तक पहुँचा सकता है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। अच्छे कामों का प्रचार दूसरों को प्रेरित करने और किसी उपयोगी पहल को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। समस्या तब उत्पन्न होती है, जब प्रचार ही उद्देश्य बन जाए और काम केवल प्रचार का साधन। कुछ लोग अपने छोटे-से योगदान का भी बार-बार उल्लेख करते हैं, जबकि कुछ लोग वर्षों तक समाज के लिए काम करते रहते हैं और उनके कार्यों की चर्चा उन्हें स्वयं नहीं करनी पड़ती। फिर भी, केवल प्रचार के आधार पर किसी के योगदान को छोटा या बड़ा नहीं माना जा सकता। वास्तविक मूल्यांकन उसके काम और उससे हुए प्रभाव के आधार पर होना चाहिए। किसी व्यक्ति की विद्वता केवल उसके परिचय-पत्र, पद, प्रतिष्ठित लोगों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों अथवा उसके अपने दावों से निर्धारित नहीं होती। उसके विचारों की गुणवत्ता, आचरण की शुचिता और दूसरों के प्रति उसका व्यवहार भी उसके व्यक्तित्व के महत्त्वपूर्ण परिचायक हैं। प्रचार और प्रतिष्ठा में अंतर है। प्रचार स्वयं किया जा सकता है, लेकिन स्थायी प्रतिष्ठा दूसरों के विश्वास से बनती है। बिहार में ही देख लीजिए। यहाँ चाय की दुकानों से लेकर विश्वविद्यालयों और राजनीतिक चौपालों तक हर विषय पर चर्चा होती है। कोई अर्थशास्त्र का विशेषज्ञ है, कोई विदेश नीति का जानकार, तो कोई शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा विश्लेषक। चर्चा करना अच्छी बात है, अपनी राय रखना भी अच्छी बात है, लेकिन समस्या तब होती है, जब हम किसी विषय को ठीक से जाने-समझे बिना ही उस पर अंतिम फैसला सुनाने लगते हैं। कई बार किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला विद्यार्थी भी दो-चार किताबें पढ़कर अपने आपको उस विषय का अंतिम जानकार समझने लगता है। वहीं, वर्षों तक पढ़ाने वाला शिक्षक भी हर प्रश्न का उत्तर देने का दावा नहीं करता। वह जहाँ जानता है, वहाँ पूरे विश्वास के साथ समझाता है और जहाँ नहीं जानता, वहाँ स्वीकार करता है कि इस विषय पर उसे और अध्ययन करना होगा। मेरी नजर में यही ज्ञान और अधूरे ज्ञान के बीच का एक बड़ा अंतर है।

💻 BPSC TRE 4.0 | PGT (11–12) COMPUTER SCIENCE By – Kundan Sir BPSC TRE 4.0 के अनुसार Complete Computer Science Preparation 📚 प्रमुख विषय Computer Fundamentals & Computer Organization Number System & Data Representation Boolean Algebra & Logic Gates Digital Logic & Basic Electronics Programming Concepts C / C++ / Python Programming Data Structures Algorithms & Problem Solving Object-Oriented Programming Operating System Database Management System (DBMS) SQL & Relational Database Computer Networks Internet & Web Technologies Information & Cyber Security Software Engineering Discrete Mathematics Sets, Relations & Functions Probability & Mathematical Foundations Computer Architecture Data Communication Emerging Technologies & Computer Applications ये विषय उपलब्ध TRE Computer Science syllabus references में दिए गए core areas के अनुरूप हैं। 📝 परीक्षा पैटर्न Language – 30 Questions | 30 Marks General Studies – 40 Questions | 40 Marks Computer Science – 80 Questions | 80 Marks कुल – 150 Questions | 150 Marks समय – 2 घंटे 30 मिनट 🎯 Course Highlights ✅ Complete Syllabus Coverage ✅ Concept + MCQ Based Preparation ✅ BPSC TRE Pattern Based Classes ✅ Regular Practice & Revision ✅ Test Series – Online Students के लिए भी उपलब्ध ✅ 3 Days FREE Demo Class 💰 Fee Online Fee: ₹2,499/- Offline Fee: ₹6,000/- Test Series: Online Students के लिए भी उपलब्ध 🔥 3 DAYS FREE DEMO CLASS Time: 10:00 AM – 11:30 AM 📅 Batch Starts 2 October 2026 🚨 ADMISSION OPEN Bihar Naman GS 3rd Floor, A. K. Pandey Building, Opp. Nala Road Petrol, Near Dinkar Golambar, Road No. 2, Rajendra Nagar, Patna, Bihar – 800016 📞 Mob.: 8368040065 🌐 www.biharnaman.in नोट: आधिकारिक TRE 4.0 विज्ञापन में Computer Science PGT (11–12) के लिए concerned-subject section 80 अंकों का है। #highlight #BPSCTRE40 #BPSCTRE4 #BPSC #TRE4 #BPSCTeacherRecruitment #PGT #PGTComputerScience #ComputerScience #ComputerScienceTeacher #PGT1112 #BPSCComputerScience

Bihar Naman GS YouTube Channel को पिछले 28 दिनों में 1 लाख लोगों ने देखा है लेकिन नए Subscribe किए है केवल 329.. वैसे भी हमार
Bihar Naman GS YouTube Channel को पिछले 28 दिनों में 1 लाख लोगों ने देखा है लेकिन नए Subscribe किए है केवल 329.. वैसे भी हमारे Subscriber है भी बहुत कम. लोग बस अपना काम निकाल लेते हैं Subscribe नहीं करते 😁 खैर....

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BREAKING NEWS अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ हवा में साँस लेना नागरिकों का मौलिक अधिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के रेस्तरां और कैफे में हुक्का परोसने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेस्तरां और कैफे में निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों (Designated Smoking Areas) में भी हुक्का परोसने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का मुख्य आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 है, जो प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषणमुक्त हवा में साँस लेने के अधिकार को भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत माना गया है। फैसले के प्रमुख बिंदु 1\. स्वच्छ हवा में साँस लेना मौलिक अधिकार अदालत के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ हवा में साँस लेने का अधिकार है। किसी व्यक्ति के धूम्रपान के कारण दूसरे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। 2\. व्यापार के अधिकार पर जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) नागरिकों को कोई भी वैध व्यवसाय या व्यापार करने का अधिकार देता है। हालाँकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। जनस्वास्थ्य और दूसरे नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। 3\. निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का परोसने पर रोक अदालत ने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तथा उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में हुक्का परोसने पर रोक लगाई। इस प्रकार, केवल अलग धूम्रपान क्षेत्र बना देने से रेस्तरां या कैफे को हुक्का परोसने की स्वतः अनुमति नहीं मिल जाती। 4\. हुक्का परोसना एक सेवा है रेस्तरां संचालकों की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे ग्राहकों को केवल हुक्का उपकरण उपलब्ध कराते हैं। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और हुक्का तैयार करने तथा परोसने को एक सक्रिय सेवा माना। 5\. लाइसेंस देने की शक्ति पर सवाल अदालत ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग या नगर निकाय का लाइसेंस अपने आप में हुक्का बार चलाने की अनुमति नहीं देता। किसी व्यवसाय को संबंधित कानूनों का पालन करना आवश्यक है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्त्व यह फैसला भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों और जनस्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है। अनुच्छेद 21: जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण। अनुच्छेद 19(1)(g): व्यवसाय, व्यापार और पेशा अपनाने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 19(6): व्यापार करने के अधिकार पर उचित प्रतिबंध। अनुच्छेद 47: पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करना राज्य का कर्तव्य। COTPA, 2003: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, व्यापार और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से संबंधित प्रमुख कानून। इस मामले का व्यापक संदेश यह है कि किसी व्यक्ति की व्यावसायिक स्वतंत्रता का उपयोग दूसरे नागरिकों के स्वास्थ्य और अधिकारों को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं किया जा सकता। स्वच्छ हवा में साँस लेना स्वस्थ जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है। Team Bihar Naman GS Patna

Photo from Bihar Naman GS : An Institute for UPSC & BPSC
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