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अमान्य या गैर-कार्यात्मक फास-टैग वाले वाहनों पर उनकी श्रेणी के लिए लागू शुल्क से दोगुना टोल शुल्क लगाया जाएगा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जीएसआर 298ई, दिनांक 15 मई 2020 को राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन के लिए अधिसूचना जारी की है।अधिसूचनाके अनुसार यदि किसी वाहन में फास-टैग नहीं लगा है या वाहन वैध या कार्यात्मक फास-टैगकेबिना, शुल्क प्लाजा के "फास-टैग लेन" में प्रवेश करता है, तो वाहन को उस श्रेणी के वाहनों के लिए लागू शुल्क के दोगुने के बराबर शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। इस संशोधन से पहले, वाहन के उपयोगकर्ता को शुल्क प्लाजा पर केवल दो बार भुगतान करना पड़ता था, यदि वाहन में फास-टैगनहीं है और वाहन समर्पित फास-टैगलेन में प्रवेश कर गया है

वित्त मंत्री की आज की घोषणाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधारभूत ढांचे को मिलेगा प्रोत्साहन, करोड़ों गरीबों और प्रवासी कामगारों को उपलब्ध होंगे रोजगार : गृह मंत्री स्वास्थ्य, शिक्षा और कारोबार जगत में बड़े बदलाव लाएगा आर्थिक पैकेज : श्री अमित शाह कोविड-19 से निपटने में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व ने कई विकसित देशों को छोड़ा पीछे : गृह मंत्री केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज घोषित आर्थिक पैकेज के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, “आज की घोषणाएं आत्मनिर्भर भारत के विचार को साकार बनाने की दिशा में एक लंबा सफर तय करेंगी। ये स्वास्थ्य, शिक्षा और कारोबार के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाने वाले कदम साबित होंगे, जिनसे करोड़ों गरीबों को रोजगार मुहैया होगा।” ग्रामीण भारत के लिए किए गए आवंटन पर बात करते हुए श्री शाह ने कहा, “मोदी सरकार द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन से न सिर्फ गरीब और प्रवासी कामगारों के लिए रोजगार पैदा करने में सहायता मिलेगी, बल्कि इससे टिकाऊ आजीविका संपदाएं भी तैयार होंगी।” उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधारभूत ढांचे को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। गृह मंत्री ने कोविड-19 से निपटने में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि इस मामले में भारत ने कई विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाकर और सुधार के माध्यम से भविष्य में किसी भी महामारी के लिए भारत को तैयार करने का संकल्प लिया है। मोदी सरकार ने हर जिले में इंफेक्शस डिसीसेस हॉस्पिटल ब्लॉक (संक्रामक बीमारी अस्पताल खंड) तैयार करने, प्रयोगशाला नेटवर्क और निगरानी को मजबूत बनाने तथा शोध को प्रोत्साहन देने के लिए भारत के स्वास्थ्य खर्च को बढ़ाने का फैसला किया है। मुझे भरोसा है कि यह दूरदर्शिता भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी आगे ले जाएगी।” सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति पर फिर से विचार करने के फैसले, आईबीसी से संबंधित उपायों के माध्यम से कारोबारी सुगमता में सुधार पर ध्यान केन्द्रित करने और कंपनी अधिनियम से आपराधिक प्रावधान हटाने पर श्री शाह ने कहा कि ऐसे फैसलों से आत्म निर्भर भारत की दिशा में पीएम मोदी की भविष्य दृष्टि और उनकी प्रतिबद्धता का पता चलता है। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने राज्यों की उधारी सीमा बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे उन्हें 4.28 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त संसाधन हासिल होंगे। राज्यों को पूर्व में दी गई निधि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र अप्रैल में करों के विचलन (हस्तांतरण) के माध्यम से पहले ही 46,038 करोड़ रुपये; राजस्व घाटा अनुदान के 12,390 करोड़ रुपये; और एसडीआरएफ कोष के रूप में 11,000 करोड़ रुपये दे चुका है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी करके और जमीनी स्वास्थ्य संस्थानों में निवेश करके स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय को बढ़ाया जाएगा। सभी जिलों में संक्रामक रोगों के अस्पताल ब्लॉक स्थापित किए जाएंगे और महामारियों के प्रबंधन के लिए सभी जिलों और ब्लॉक स्तर के लैब और जन स्वास्थ्य इकाई में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं द्वारा लैब नेटवर्क और निगरानी को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, आईएमसीआर द्वारा स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय संस्थागत प्लेटफॉर्म, अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा। और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य खाका (एनडीएचबी) का कार्यान्वयन। 3. कोविड के बाद समानता के साथ प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा 'पीएम ई-विद्या', डिजिटल / ऑनलाइन शिक्षा तक बहु-माध्यम पहुंच के लिए एक कार्यक्रम है जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। 'मनोदर्पण', मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के सिलसिले में छात्रों, शिक्षकों और परिवारों का मनोवैज्ञानिक-सामाजिक समर्थन करने के लिए एक पहल है जो तुरंत शुरू की जाएगी। स्कूल, शुरुआती बचपन और शिक्षकों के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा भी शुरू किया जाएगा। साल 2025 तक प्रत्येक बच्चा कक्षा 5 में सीखने का स्तर और परिणाम प्राप्त सके यह सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय बुनियादी साक्षरता और गणना मिशन को दिसंबर 2020 तक शुरू किया जाएगा। 4.आईबीसी से संबंधित उपायों के माध्यम से कारोबार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और बेहतर होगी दिवाला कार्यवाही शुरू करने के लिए न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रु किया गया (पहले यह सीमा 1 लाख रु थी, इससे एमएसएमई को लाभ मिलेगा)। संहिता की धरा 240 ए के तहत एमएसएमई के लिए विशेष दिवाला संकल्प ढांचा जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। महामारी की स्थिति के आधार पर, एक वर्ष तक नई दिवाला कारवाई की शुरुआत नहीं की जायेगी। दिवाला कारवाई को शुरू करने के उद्देश्य से संहिता के तहत कोविड 19 से संबंधित ऋण को "डिफ़ॉल्ट" की परिभाषा से बाहर करने के लिए केंद्र सरकार को सशक्त बनाना। 5. कंपनी अधिनियम के तहत की गयी गलती (चूक) को अपराध की श्रेणी से बाहर करना कंपनी कानून की मामूली तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक को अपराधीकरण की श्रेणी से बाहर किया जाएगा। (सीएसआर रिपोर्टिंग में गलतियाँ, बोर्ड रिपोर्ट में कमियां, एजीएम आयोजित करने में विलम्‍ब आदि ) संशोधन से आपराधिक अदालतों और एनसेएलटी में मामलों के संख्या में कमी आएगी। 7 समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) अपराधों को पूरी तरह से हटा दिया गया है और 5 अपराधों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निपटाया जायेगा। 6. कंपनियों के लिए कारोबार करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) मुख्य सुधारों में शामिल हैं: • स्वीकृत विदेशी बाजारों में भारतीय सार्वजनिक कंपनियों द्वारा प्रतिभूतियों का प्रत्यक्ष सूचीबद्ध होना। • निजी कंपनियां जो स्टॉक एक्सचेंजों पर एनसीडी को सूचीबद्ध करती हैं, उन्हें सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में नहीं माना जाएगा। • कंपनी अधिनियम, 1956 के भाग 9 ए (निर्माता कंपनियों) के प्रावधानों को कंपनी अधिनियम, 2013 में शामिल करना। • एनसीएलएटी के लिए अतिरिक्त / विशिष्ट बेंच गठित करने की शक्ति • छोटी कंपनियों, एक-व्यक्ति के स्वामित्व वाली कंपनियों, निर्माता कंपनियों और स्टार्ट अप के द्वारा की गयी गलतियों के लिए आर्थिक दंड में कमी। 7. नए, आत्‍मनिर्भर भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति सरकार एक नई नीति की घोषणा करेगी जिसके द्वारा- सार्वजनिक हित में पीएसई की अपेक्षा रखने वाले रणनीतिक क्षेत्रों की सूची अधिसूचित की जाएगी। सामरिक क्षेत्रों में, कम से कम एक उद्यम सार्वजनिक क्षेत्र में रहेगा लेकिन निजी क्षेत्र को भी इजाजत दी जाएगी। अन्‍य क्षेत्रों में, पीएसई का निजीकरण किया जाएगा (समय का निर्धारण व्‍यवहार्यता पर आधारित होगा।) अनावश्‍यक प्रशा‍सनिक खर्च को कम करने के लिए, सामरिक क्षेत्रों में उद्यमों की संख्‍या आमतौर पर केवल एक से चार होगी; अन्‍य का निजीकरण/विलय कर दिया जाएगा/ होल्डिंग कम्‍पनियों के अंतर्गत लाया जाएगा।

राज्‍य सरकारों को सहायता केन्‍द्र ने केवल वर्ष 2020-21 के लिए राज्‍यों की उधार की सीमा 3% से बढ़ाकर 5% करने का फैसला किया है। इससे राज्‍यों को 4.28 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्‍त संसाधन मिल सकेंगे। इस उधार का हिस्सा कुछ विशिष्ट सुधारों से जोड़ा जाएगा (वित्त आयोग की सिफारिशों सहित)। सुधारों को चार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा: 'एक देश एक राशन कार्ड' का सार्वभौमिकरण, कारोबार में सुगमता, बिजली वितरण और शहरी स्थानीय निकाय। एक विशिष्ट योजना, व्यय विभाग द्वारा निम्नलिखित पैटर्न पर अधिसूचित की जाएगी: 0.50 प्रतिशत की बिना शर्त वृद्धि 0.25 प्रतिशत के 4 हिस्सों में 1 प्रतिशत, जिसमें प्रत्येक हिस्सा स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट, मापने योग्य और व्यवहार्य सुधार कार्यों से जुड़ा हुआ हो आगे 0.50 प्रतिशत और, अगर चार में से कम से कम तीन सुधार क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल कर लीजाएं। वित्‍त मंत्री ने आत्‍म निर्भर भारत बनने के लिए अब तक प्रदान किए गए प्रोत्‍साहन उपायों का ब्‍यौरा प्रदान कर अपनी बात समाप्‍त की।