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शायरी और ज़िंदगी...

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"कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई , तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया " @peacefulshayari

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तुम्हारे दिल पे अपना नाम लिक्खा हम ने देखा है, हमारी चीज़ फिर हम को इनायत क्यूँ नहीं करते क़यामत देखने के शौक़ में हम मर मिटे तुम पर, क़यामत करने वालो अब क़यामत क्यूँ नहीं करते..!!

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उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में, इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए मैं लाख चाहूँ मगर हो तो ये नहीं सकता, कि तेरा चेहरा
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में, इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए मैं लाख चाहूँ मगर हो तो ये नहीं सकता, कि तेरा चेहरा मेरी ही नज़र का हो जाए..!!
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ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है, ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है..!!
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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ, याद क्या तुझ को दिलाएँ तिरा पैमाँ जानाँ दिल ये कहता है कि शायद है फ़सुर्दा तू भी, दि
अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ, याद क्या तुझ को दिलाएँ तिरा पैमाँ जानाँ दिल ये कहता है कि शायद है फ़सुर्दा तू भी, दिल की क्या बात करें दिल तो है नादाँ जानाँ अव्वल अव्वल की मोहब्बत के नशे याद तो कर, बे-पिए भी तिरा चेहरा था गुलिस्ताँ जानाँ होश आया तो सभी ख़्वाब थे रेज़ा रेज़ा, जैसे उड़ते हुए औराक़-ए-परेशाँ जानाँ..!!
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सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा, तेरे सामने आसमाँ और भी हैं..!!
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उसे 'फ़राज़' अगर दुख न था बिछड़ने का, तो क्यूँ वो दूर तलक देखता रहा मुझ को..!!
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कोई भी शक्ल मेरे दिल में उतर सकती है, इक रिफ़ाक़त में कहाँ उम्र गुज़र सकती है तुझ से कुछ और त'अल्लुक़ भी ज़रूरी है मेरा, ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँ, वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है..!!
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ज़रुरत एक तवायफ़ की तेरह मुजे नाचती है, मैं जितना काम करता हूँ मशीन भी नहीं करती..!!
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वो वक़्त न आए कि दिल-ए-ज़ार भी सोचे, इस शहर में तन्हा कोई हम सा है कि तुम हो ऐ जान-ए-'फ़राज़' इतनी भी तौफ़ीक़ किसे थी, हम को ग़म-ए-हस्ती भी गवारा है कि तुम हो..!!
308
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ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी, 'फ़राज़' तुझ को न आईं मोहब्बतें करनी ये लोग कैसे मगर दुश्मनी निबाहते हैं, हमें तो रास न आईं मोहब्बतें करनी..!!
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सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते, वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते इस की वो जाने उसे पास-ए-वफ़ा था कि न था, तुम 'फ़राज़' अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते..!! Death Anniversary of Faraz Saab
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इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिर्या से भी महरूम, ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्‌म को तुझ से हैं उमीदें, ये आख़िरी शम'एँ भी बुझाने के लिए आ..!!
513
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ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने, लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई..!!
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भरी दुनिया में जी नहीं लगता, जाने किस चीज़ की कमी है अभी वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर', ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी..!!
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अगर तुम्हे मुझसे ज़्यादा है जमाने का ख़याल, फिर मेरी याद में अश्क बहाती क्यों हो तुम में हिम्मत है तो दुनिया से बग़ावत कर लो, वरना माँ बाद जहाँ कहते हैं शादी कर लो..!!
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किस क़दर यादें उभर आई हैं तेरे नाम से, एक पत्थर फेंकने से पड़ गए कितने भँवर..!!
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आइने का साथ प्यारा था कभी, एक चेहरे पर गुज़ारा था कभी आज सब कहते हैं जिस को नाख़ुदा, हम ने उस को पार उतारा था कभी आज कितने ग़म हैं रोने के लिए, इक तेरे दुख का सहारा था कभी इश्क़ के क़िस्से न छेड़ो दोस्तो, मैं इसी मैदाँ में हारा था कभी..!!
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जो हक़ीक़त है उस हक़ीक़त से, दूर मत जाओ लौट भी आओ हो गईं फिर किसी ख़याल में गुम, तुम मिरी आदतें न अपनाओ..!!
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सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों से, सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं, ये बात है तो चलो बात कर के देखते..!!
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हमारे घर की दीवारों पे 'नासिर', उदासी बाल खोले सो रही है..!!
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