♡ Horizon of Hope ♡🥀✍️
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This channel is made with intent to spread message of inner happiness as it contains motivation/self love quotes /songs which will enhance happiness and bliss in the life of readers.😌❣️ RadheKrishna ❤️
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Sabko ramji or sita mata ji prem kahani dikhati h . Lekin laxman ji or Urmila mata kahi kho hi jate h ramayan me unka oo prem jisme mata 14 varsh tak neend me or laxman ji 14 varsh tak jage hue .
Dono ka atut pyar sansar ki moh se dur ..
मैं तुम्हारी उर्मिला बनना चाहूंगी क्या तुम मेरे लक्ष्मण बन पाओगे। मुघे संसार की किसी चीज़ का लोभ नहीं क्या तुम हमसे लोभ से बच जाओगे। मैं तुम्हारा इंतजार हूं मैं अपनी जिंदगी बिता दूं क्या तुम मेरे लिए थोड़ा समय निकल पाओगे। सथ रह पाओगे।
आप कितना भी रो लो, गिड़गिड़ा लो,
चीख चीख कर मांग लो, सामनेवाला
आपको उतना ही देगा,
जितना उसके हृदय में होगा,
फिर चाहे वो प्यार हो सम्मान हो,
अपनापन हो या चिंता जो हृदय में ही नहीं वो मांगने से भी मिलेगा नहीं..
एक पत्ता,
सूखने वाला था,
और अलग होने वाला था ,
अपने पेड़ से,
फ़िर,
उस आखरी वक्त में,
उसने अपने पेड़ को बोला,
ज़रा आहिस्ता,
चुपके से अलग करना,
वरना लोगों का रिश्तों से ऐतबार उठ जाएगा।
देखना
एक दिन तितलियाँ तुम्हारा शहर छोड़ देंगी,
एक दिन फूल मुरझा जायेंगे..
जब तुम रूठी हुई बैठी रहोगी,
कोई तुम्हे मनाने नहीं आयेगा..
एक दिन रास्ते तुम्हे लिए जाने से इंकार कर देंगे,
एक दिन हवायें तुम्हे छू कर गुजरना छोड़ देंगी..
जब तुम अश्क़ बहाते बैठी रहोगी,
कोई तुम्हे गले लगाने नहीं आयेगा..
एक दिन हँसी तुम्हारे होंठों से गिर जायेगी,
एक दिन ग़म तुम्हारे हमसफ़र बन जायेंगे..
जब तुम सबसे तन्हा बैठी रहोगी,
कोई तुम्हे अपनाने नहीं आयेगा
और देखना...ऐसे तमाम हादसों से गुज़रकर भी तुम्हे,
इश्क़ के फ़रिश्तों की माफ़ी नहीं मिलेगी.....
🤍✨
मैं बहुत दूर चले जाना चाहता हूँ, इतना दूर कि मेरे नाम का उच्चारण भी थक जाए, मेरी पहचान रास्ते में कहीं उतर जाए और मैं खुद को ढोते-ढोते अचानक हल्का हो जाऊँ। ये कोई पलायन नहीं है, ये बचाव है उस शोर से जो अब आवाज़ नहीं, हिंसा बन चुका है।
ये समाज अब मनुष्यों का नहीं रहा। यहाँ पशु बनना एक रणनीति है। दाँत दिखाना, झपटना, अपने हिस्से से ज़्यादा नोचना और फिर खुद को सभ्य कहलाना। अजीब विडंबना है पशुओं में आज भी इंसान नज़र आता है, और इंसानों में केवल भूख, क्रूरता और चालाकी।
मैं थक गया हूँ हर चेहरे पर नकाब पढ़ते-पढ़ते, हर संवाद में छुपी नीयत समझते-समझते। यहाँ संवेदना कमजोरी समझी जाती है और मौन को अपराध। जो चीख नहीं सकता, उसे कुचल दिया जाता है, और जो सहता है, उसे मूर्ख कह दिया जाता है।
इसलिए मैं विलुप्त होना चाहता हूँ। किसी जंगल में नहीं, किसी पहाड़ पर नहीं, बल्कि उस जगह जहाँ मनुष्य होना अब शर्म की बात न हो। जहाँ आँखें डर नहीं, भरोसा देख सकें, जहाँ हाथ पकड़ने से पहले हिसाब-किताब न किया जाए।
अगर कभी कोई पूछे कि मैं कहाँ चला गया, तो बस इतना कहना, वो इंसान रहने चला गया उस समय में, जब इंसान होना अब यहाँ संभव नहीं रहा..
❤️🩹✨
इश्क़ गर है तो छुपाने की ज़रूरत क्या है
आग को दिल में दबाने की ज़रूरत क्या है
ये बिखर जाएं तो तुम और हसीं लगती हो
बाल भी तुमको बनाने की ज़रूरत क्या है
तेरे नखरे ही उठाऊ मैं सदा राम करे
मुझको दुख दर्द उठाने की ज़रूरत क्या है
तिल ही काफ़ी है तेरे मुख पे यक़ीं कर मेरा
इस पे कुछ और लगाने की ज़रूरत क्या है
मैं तो उँगली के इशारे से चला आता हूँ
तुझको आवाज़ लगाने की ज़रूरत क्या है
देर से आया करो आपका हक़ बनता है
आपको वक़्त पे आने की ज़रूरत क्या है!!
🤍
