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परछाइयों के अंधेरे से डरें नहीं, ये तो संकेत दे,
रही हैं कि उजाला यहीं कहीं आसपास ही है।
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो.
कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू,
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो.🥀
कभी कभी इतनी बैचैनी होती है
कि लगता है ।
काश ये शाम होती ही ना।
शाम से ये बैर हमेशा से नहीं रहा
बल्कि तुम्हारे जाने के बाद
ये तब्दीली आई है
शाम काटने को दौड़ती है
ऐसा लगता है कि बस ठहर गया है वक्त
तुम लौट आओ कि मुझे फिर से
एक खुशनुमा शाम गुजारनी हैं तुम्हारे साथ।
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो.
कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू,
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो.🥀
फिर से सो जा ए दर्द - ए - दिल 💔
धुन्ध बहुत हैं तेरे शहर में.....!
अपने दिखते नही हैं और
जो दिखते है वो अपने नही हैं!!😔
बाहर से मरे तो दुनिया दफना भी दे ।
अंदर से जो मर जाए कोई तब क्या रस्म की जाए ... ! !😔
जिंदगी के सफर में एक बात तो समझ आई
जिनके सपने हम देखते हैं वो भी सपना देखते हैं और चाहे कितने भी अपने क्यों ना हो पहले अपना देखते हैं..!!🙁
देखेने को औकात इनकी हम बड़ी खामोशी से बैठे हैं !
है कुछ रास्तो के कंकर...
जो खुद को पर्वत समझ बैठे हैं!!
वो सोचती होगी बड़े चैन से सो रहा हूँ मैं,
उसे क्या पता ओढ़ के चादर रो रहा हूँ मैं।.....
ना रोक कलम आज मुझे दर्द लिखने दे,
आज तो दर्द रोयेगा या फिर दर्द देने वाली.......
वो जिनको नींद नही आती उन्हें ही मालूम होता हैं
सुबह आने मे कितने जमाने लगते हैं ! 😒🥺
इतनी कमज़ोर नहीं है मेरी जिन्दगी की कहानी
कि कोई भी निभा ले ये किरदार हमारा..😒
जिनको आसानी से दीदार मयस्सर है तेरा,
वो कहां बाग में फूलों की तरफ देखते होंगे..
