Don't get caught by a cheater! Telemetrio finds and tags such channels 👉 If you want to see the tag, subscribe 👈
Deshi ♥️ chudai ✍️ kahani
Open in Telegram
मेरे से आप खुद बात करना चाहते हो तो संपर्क करे @pubgplayer098 Paid promotion available ❤️ Payment:--- pubgplayer098
Show more1 428
Subscribers
No data24 hours
No data7 days
No data30 days
No data
Post views
No data24 hours
No data48 hours
No data
Engagement rate
No data
Posts per day
Posts Archive
Deshi kahani:--
पार्किंग लॉट में असिस्टेंट मैनेजर से चुद गई
ऑफिस में मैंने सीनियर सेक्स किया प्रोमोशन के लिए। मेरी टीम की एक इंटर्न चुदकर हमारे असिस्टेंट मैनेजर को पटा रही थी. मैंने उसका ये घमंड कैसे तोड़ा?
मुझे पता है कि तुम सब मर्द देर रात तक अपने खड़े लंड के साथ बहुत सारी सेक्स स्टोरीज पढ़ रहे होंगे।
मेरी पिछली कहानी थी: शादी में पति और दो अजनबी लौड़ों से चुदी
अब अपनी मर्दानगी का जोश दिखाओ और अपनी सारी सेक्सुअल टेंशन मेरी लेटेस्ट स्टोरी पढ़ते हुए वीर्य के साथ बाहर निकाल दो।
तुम्हारी सेक्सी बेब सिमरन ने एक बार अपनी ऑफिस की एक कुतिया को ऐसा सबक सिखाया था कि वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने ऑफिस छोड़ दिया।
यहां देखो कि सीनियर सेक्स असल में हुआ कैसे था …
मैं अपनी साइट वर्क के एक लंबे टूर से बहुत दिनों बाद अपने ऑफिस के डेस्क पर लौटी थी।
ऑफिस में प्रोमोशन की बातें चल रही थीं। ऑफिस का हर बंदा अपने बॉस की गांड चाटने में लगा था ताकि उसका प्रोमोशन हो जाए।
मगर अदिति की तरह नहीं … वो कुछ ज्यादा ही गांड में घुस रही थी।
अदिति मेरे से एक या दो साल छोटी है, नॉर्मल सी हाइट है उसकी, स्लिम है मगर फिगर बहुत अच्छी है।
उसने कंपनी में एक इंटर्न की तरह ज्वॉइन किया था और वो मेरी ही टीम में काम रही थी।
उसने मेरे कुलीग (सहकर्मी) सिद्धार्थ को पटाने की कोशिश की, जिसे असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया था।
अदिति चाहती थी कि वो भी इस प्रोजेक्ट में एक स्थायी कर्मचारी बन जाए।
मैं शुरू वाले दिन से ही उसकी नजरों में देख सकती थी कि वह जल्दी से जल्दी आगे बढ़ना चाह रही थी और सफलता की सीढ़ी जल्दी चढ़ना चाहती थी।
ऐसा नहीं है कि मुझे इसकी परवाह थी!
कम से कम में भी नहीं।
मगर जब भी हम कर सकते थे हमने एक दूसरे की टांग खींची।
एक दिन बोर्डरूम मीटिंग के बाद मैं वाशरूम में चली गयी।
जब मैं आईने में अपनी सुडौल चूतड़ों को देख रही थी (और ऐसा करते हुए बहुत गर्व महसूस कर रही थी!), अदिति वॉशरूम में चली गई और मेरी बॉडी को लेकर उसने एक चुभने वाला कमेंट किया।
अदिति- हम्म … ये सही है, इस पिलपिली गांड पर किसी को तो ध्यान देना चाहिए क्योंकि और तो कोई ऑफिस में इसको देखता नहीं है, ऊह्ह … बहुत ही दुख की बात है।
मैं- हम्म … तुझे भी गुड मार्निंग ऑफिस की रंडी, यहां अपनी चूत साफ करने आई है शायद!
अदिति जाहिर तौर पर नाराज़ लेकिन खुद को संभालती हुई- चूत ने मुझे याद दिलाया … सिद्धार्थ उस दिन बात कर रहे थे कि हम तुम्हें ऑन-साइट ड्यूटी पर वापस भेज दें।
मैं- तुम्हारा मतलब है, जब तुम उसका लौड़ा चूस रही थी तो तुमने उससे ऐसा करने के लिए विनती की? और फिर उसने तेरे चेहरे पर माल निकाला और बिना ध्यान दिए तुझे वहीं अकेली छोड़ दिया?
अदिति- एक्सक्यूज मी! हम पार्टनर हैं। इतना जलो मत क्योंकि तुम्हारी चूत को उसका लंड नहीं मिला, हुह …
यह सुनकर मैंने उसे सबक सिखाने का फैसला किया।
मुझे पता था कि सिद्धार्थ बस उसके शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहा था जैसे वह उसे एक सिफारिशी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही थी।
अदिति को यह नहीं पता था कि जब मैं सिंगल थी तो सिद्धार्थ मेरे साथ फ्लर्ट करता था।
मैं चाहती थी कि अदिति सुने कि सिद्धार्थ वास्तव में उसके बारे में क्या कहता है।
ऐसा करने के लिए, मैंने एक चालू प्लान बनाया और सिद्धार्थ के केबिन में चली गई।
जब सिद्धार्थ मेरा स्वागत करके मेरे ऑन-साइट काम और मैरिड लाइफ के बारे में पूछ रहा था, मैं सीधी उसकी ओर चल पड़ी और उसकी गोद में बैठ गयी.
मैं अपने बैठने की पोजीशन को एडजस्ट करते हुए उसके लंड पर गांड को रगड़ते हुए उसके बालों को सहलाने लगी।
सिद्धार्थ- ओह्ह फक … प्लीज कह दो कि ये कोई सपना नहीं है!
मैं- नहीं स्वीटहार्ट, ये तुम्हारी फेंटेसी है जो आज पूरी हो रही है।
मादक धीमी आवाज में ये बोलते हुए मैं अपने होंठ उसके चेहरे के पास ले गयी.
सिद्धार्थ ने मुझे उठाया और केबिन से अगले दरवाजे के अंदर ले गया जहां पर एक सोफा रखा था।
मैंने उसको मेरी गांड को भींचने से रोका।
मैं नहीं चाहती थी कि उसको पूरा मजा मिले।
सिद्धार्थ- ओह ठीक है, कम से कम मैं इतना तो करके बिना थप्पड़ खाए दूर हो गया। उस एक बार तुमने मुझे सिर्फ अपनी गांड छूने के लिए थप्पड़ मारा था।
मैं- मैं उस वक्त इसके लिए तैयार नहीं थी और सच कहूं तो वह मुझे मेरी बेइज्जती लगी थी।
इससे पहले वो कुछ और कहता, मैंने ही आगे कह दिया- आज की बात अलग है। आज मैं कुछ गंदा करने के मूड में हूं।
सिद्धार्थ- तो चलो, शुरू करते हैं।
उसने मुझे मेरे होंठों पर किस करने के लिए चेहरा पास लाया मगर मैंने उसे समय रहते रोक दिया।
मैं- रुको … ये ठीक जगह नहीं है, हम यह सब पार्किंग लॉट में लंच टाइम के दौरान करेंगे।
मैंने उसकी पकड़ से खुद को छुड़ा लिया और अपनी पहली उंगली से उसके होंठों को सहलाते हुए उसको असली काम (चुदाई) के लिए उकसाया।
कोई आंटी या भाभी फ्री हो तो मैसेज करो 💋
आपकी और हमारी बाते गुप्त रहेगी
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
कोई भी भाभी या आंटी अपनी निजी सेक्स लाइफ से जुड़ी समस्या मुझसे शेयर करना चाहती है तो आपका स्वागत है मुझे DM करके जरूर बताएं ।
हमारे बीच हुई बातें पूर्ण रूप से गुप्त रहेगी
@pubgplayer098
मैं चुपचाप अपनी चूत को अपने ही हाथों से दबाये उल्टा लेटी रही, वो भूखे कुत्ते की तरह मेरी गाण्ड पर टूट पड़ा।
दर्द के मारे मेरी चीख निकल गई पर वो कब रुकने वाला था, जैसे जैसे मेरी चीख की आवाज बढ़ती जाती।
उसके झटके से मेरी गांड और फटती जाती, उसने दोनों हाथों से मुझे कमर से पकड़ रखा था और जोर जोर से गांड में अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहा था, मानो किसी लड़की की नहीं किसी कुतिया की गांड मार रहा हो।
मैंने सुना था कि जब लड़की के साथ पहली बार सेक्स करते हैं तो उनकी चूत से खून निकलता है, आज मेरी गांड की हालत कुछ ऐसी ही थी।
मेरी गांड से खून निकल रहा था लेकिन वो खून की परवाह न करते हुए धक्के मारता ही रहा।
उसका लंड जल्दी से झड़ने का नाम नहीं ले रहा था क्योंकि अभी वो जवान था, शायद पहली बार किसी की गांड मार रहा था?
लगभग बीस मिनट बाद उसका लंड से पिचकारी जैसे पानी निकला और वो निढाल होकर मेरी गांड के ऊपर ही लेट गया।
मैं कुछ देर इन्तजार करती रही और फिर उसे बराबर में धकेल दिया, अनमने मन से अपने कपड़े पहने और चुपचाप अपनी चूत का पानी चूत में ही लिए अपने घर लौट आई।
इस दिन के बाद मैंने मन ही मन सोच लिया अब कभी किसी मर्द से चुदवाने का ख्याल भी अपने मन में नहीं आने दूँगी।
पर मन तो मन है, कब फिसल जाये कोई नहीं जानता !
इस बार जो मेरा मन फिसला तो बस ऐसे की आज तक भी उसके भाई के साथ अटका हुआ है!
क्या चोदता है… उफ्फ्फ तौबाआह… फिर कभी बताऊँगी…
मुझे जरूर बताना आपको यह कहानी कैसी लगी।
@deshikahani2
weddingpic6@gmail.com
मैंने तुरन्त उससे उस रात उसके घर आने की बात लिखकर चिट्ठी उसके दरवाजे पर फेंक दी। वो चिट्ठी पढ़ कर फ़ूला नहीं समा रहा था।
और मैं… मैं तो मन ही मन किसी मोरनी की भांति नाच रही थी, मानो जिंदगी की सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गई हो।
किसी ने कुबेर का खज़ाना दे दिया हो…
उसके लंड की गर्मी को महसूस करना, उसको चूमना चाटना, अपनी चूत पर उसके लंड को रगड़ना का ख्याल किसी कुबेर के खजाने से कम भी तो नहीं था।
उस दिन तो उसका लौड़ा भी अलग ही तेवर में दिखा रहा होगा…
तनतनाया हुआ खम्बे की तरह खड़ा उसके पजामे से बार बार बाहर आ रहा होगा मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करने, मेरे मुँह में समा जाने के लिए और मेरी उभरी हुई मस्त गांड में धकापेल करने के लिए?
तभी तो वो बार बार छत पर आ जा रहा था…
मैं उसकी मनोदशा देखकर बहुत खुश थी और बार बार अपनी ब्रा के अन्दर से हाथ ले जाकर अपनी चूचियों को मसल रही थी।
उस दिन की रात भी कितनी बेरहम थी, होने को ही नहीं आ रही थी!
ख़ुशी-ख़ुशी में मैंने रात को खाना भी नहीं खाया।
धीरे-धीरे रात के बारह बज गए।
मैं रजाई से निकल कर उनके घर के बराबर वाली दीवार से उनकी छत पर पहुँच गई।
उनकी छत पर एक कमरा था जिसमें वो पढ़ा करता था।
उसी कमरे में मिलने के बारे में मैंने चिट्ठी में लिखा था।
जैसे ही मैंने दरवाजा खटखटाना चाहा तो दरवाजा पहले से ही खुला मिला।
उस वक़्त मेरी खुशियाँ सातवें आसमान पर थी।
कमरे में काफी अँधेरा था, मैं धीरे-धीरे उसका नाम पुकारते हुए उसके बेड पर पहुँच गई जिस पर कोई सोया हुआ था।
तब मुझे लगा कि वो शायद शरमा रहा है और सोने का नाटक कर रहा है।
मुझे लगा कि हम दोनों का यह पहला ही अनभव होगा, पर मुझे शर्म से ज्यादा चुदने का उत्साह था और उसे शर्म के साथ साथ चोदने का !
मैं उसके बराबर में जाकर लेट गई और धीरे धीरे उसके गालों को सहलाने लगी।
अब उसकी शर्म भी फ़ूँ करके उड़ गई और उसका हाथ मेरे मम्मों पर आ गिरा।
वो उन्हें बेसब्री से मसलने लगा, उसका लंड मेरी जांघों से टकरा टकरा कर वापस लौट जाता, मानो विनती कर रहा हो ‘मुझे अपनी टांगों के बीच में समा लो !’
उसने दूसरे हाथ से धीरे धीरे मेरे चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया, मैं आनन्द और मस्ती में पागल हुए जा रही थी…
मेरा हाथ उसके लंड को टटोल रहा था, पजामे के अन्दर एकदम फुंकारते सांप की तरह, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैं तो हाथ में लेकर उसके लंड से खिलवाड़ करना चाहती थी, उसे किसी आम के तरह चूस चूस कर उसका सारा रस पी जाना चाहती थी…
तो बिना समय गवाए मैंने पजामे का नाड़ा खोल दिया और उसमें से बाहर झांकते तनतनाते लंड को अपनी मुट्ठी में जोर से भींच लिया।
उसने एक बार तो उफ़्फ़ की मगर फिर मेरी चूचियों और चूतड़ों को सहलाने पुचकारने में लग गया।
मैं उठी और गप्प से उसका लंड मुख में भर कर जैसे निगल गई।
उसकी चीख निकल गई्…
पर मुझसे इन्तजार ही नहीं हो रहा था तो मैंने तो अपने दांतों से जोर से उसका लौड़ा काट लिया।
वो दर्द में उई मा… करके चिल्लाया तो मुझे होश आया…
और मैंने धीरे धीरे अपने होटों से उसको ऊपर नीचे करना शुरू किया।
उसे मजा आ रहा था और उसकी पकड़ मेरी गांड के उभारों पर बढ़ती जा रही थी…
पर मैं तो अपनी ही मस्ती में उसका बड़ा सा लंड चूस चूस कर अपनी चूत की आग को और भड़काने में लगी थी।
अब उसका लौड़ा उसे और इन्तजार करने की इजाजत नहीं दे रहा था,
वो धीरे से उठा और मुझे कंधों से पकड़ कर ऊपर उठाया…
मैंने सोचा अब वो मेरी चूत को चाटेगा, अपनी जीभ को मेरी चूत के अन्दर तक घुसा देगा, अपने लंड से जांघों की दीवारों से टकरा टकरा कर मेरा बैंड बजा देगा…
पर जब उसने ऐसा कुछ नहीं किया तो मेरा नशा उतरने लगा, मैं तडफ़ने लगी और अपने ही उंगलियों को चूत पर ले जाकर उसको सहलाने लगी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था उसका बर्ताव…
मैंने सोचा शायद वो घबरा रहा होगा, मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी चूत के पास ले गई, उसकी एक उंगली अपनी फुद्दी में डाल दी सोचा वो उत्तेजित होकर अपना लंड मेरी बुर में डाल देगा…
पर उसने ऐसा नहीं किया, वो तो और जोर जोर से मेरे चूतड़ों को दबाने लगा, उसके छेद में अपनी उंगली डालने लगा।
दर्द से मेरी चीख निकल गई, मैं समझ गई उसको मेरी चूत में नहीं मेरी गाण्ड में ज्यादा दिलचस्पी है।
मेरा काम का बुखार उतरने लगा, चुदवाने की सारी कल्पना पर पानी फिर गया, पर मजबूरी थी, मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था तो मैंने कोई विरोध नहीं किया और जो वो कहता गया, वो मैं करती गई, जो वो करता गया गया, वो सहती रही।
उसने धीरे धीरे मुझे पूरी नंगी कर दिया और बिस्तर पर उल्टा लिटा दिया।
उस वक़्त मैं सोच रहा थी कि जो भी होना है, अब जल्दी हो जाए !
मेरा मन खिन्न हो रहा था, मुझे सिर्फ गांड मरवाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी…
मैं तो चुदना चाहती थी फिर भले ही वो मेरी गांड मारे या अपनी मुठ…
Deshi kahani:--
क्या चोदता है… उफ्फ्फ तौबाआह…
मैं अरविन्द कुमार,
प्रस्तुत कहानी मेरी पुत्रवधू की सहेली अनुष्का (संयोग से मेरी छोटी बेटी का नाम भी अनुष्का है), उसकी किशोरावस्था की है, इसे मैंने अपनी पुत्रवधू सोनम के आग्रह पर ही लिखा है.
पेश है अनुष्का के अपने शब्दों में जैसे मुझे सोनम ने बताया वैसे ही !
@deshikahani2
उम्र के साथ साथ हम सबकी जरूरतें भी बदलती रहती हैं और लालसा भी!
मैं अनुष्का शर्मा अभी इसी साल मैंने बारहवीं कक्षा की परीक्षा पास की है।
और मेरे शरीर के साथ हो रहे परिवर्तनों के साथ ही मेरे मन में भी सेक्स को लेकर अजीब अजीब से भाव आते जाते रहते हैं।
अब मैं आपको अपनी आपबीती बताने जा रही हूँ और यह भी कि कुछ पाने का लालच क्या-क्या गुल खिलवा सकता है, काम वासना कहाँ से कहाँ तक ले जा सकती है और कुछ पाने के चक्कर में क्या क्या नहीं देना पड़ सकता है।
यह बात तब की है जब मैं बारहवीं क्लास की परीक्षा देकर चुकी ही थी।
हमारे घर के ठीक साथ वाले मकान में हमारे ही कुनबे के दो खूबसूरत लड़के रहते थे, उनके पिता मेरे ताऊ लगते थे।
वे दोनों ही देखने में किसी फिल्म अभिनेता से कम न थे और न ही इधर उधर की बातों से उन्हें कोई लेना देना था, बस अपने काम से काम और उनकी यही बात मुझे सबसे अच्छी लगती थी।
मोहल्ले की सभी लड़कियाँ उन्हें पटाना चाहतीं थीं क्योंकि उनमें कुछ अलग ही बात थी।
मैं भी उन लड़कियों में से एक थी और उनके बारे में सोचकर कर ही मेरी चूत के रेशमी बाल गीले हो जाया करते थे, उनके लंड की चाहत में मैं अन्दर ही अन्दर घुली जा रही थी और रात-दिन बस एक बार उनमें से कम से कम किसी एक एक लण्ड अपने हाथ में लेकर उसे मुँह में लेकर चूसने का, उनसे चुदवाने की कल्पना किया करती थी।
पर कोई मौका ही नहीं मिल रहा था बात करने का, उन्हें अपनी इच्छा बताने का।
ऐसा नहीं कि उनसे मुलाकात ही नहीं होती थी, मैं कभी कभार उनके घर भी जाती थी, थोड़ा ही आना जाना था।
किस्मत हमेशा एक सी नहीं होती, जब मेहरबान होती है तो बिन बताये ही सब कुछ दे देती है।
उस दिन मेरी किस्मत भी मेरे साथ थी। कम से कम मुझे तो यही लग रहा था।
पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और जो किस्मत को मंजूर हो उस पर मेरा, मेरी चूत का तो कोई बस चल नहीं सकता, तो चला भी नहीं।
हर रोज की तरह उस दिन भी मैं जब अपनी छत पर घूम रही थी और उनमें से एक अपनी छत पर था।
मैं टकटकी लगाए एकटक उसको देख रहा थी तो एकदम उसने मुझे देखा।
और मैं मुस्कुराने लगी और वो भी प्रति-उत्तर में मुझे देख कर मुस्कुराये बिना न रह सका।
मैं समझ गई कि यहाँ मेरी दाल गल सकती है और मेरी तमन्ना पूरी हो सकती है।
मुझे रह रह कर अपने शरीर में सिहरन सी महसूस होने लगी, मेरे अंग अंग से आग बरसने लगी, चूचियाँ सख्त होने लगीं, चूत की बाहरी पंखुड़ियों में हलचल होने लगी और दिमाग में उसके लंड का ख्याल घूमने लगा।
न जाने वो मानेगा भी कि नहीं, कितना बड़ा और मोटा है इस सुन्दर से दिखने वाले लड़के का लौड़ा?
क्या इसी की तरह इसका लंड भी हट्टा कट्टा और रसीला है?
और ऐसे न जाने कितने ख्याल एक एक कर के आने-जाने लगे।
वो भी कभी मुझे देख रहा था और कभी धीरे से अपने लंड को टटोल रहा था, लगता था उसके दिमाग में भी मेरी चूत को लेकर, मेरे उभारों और चूचियों को लेकर उथल पुथल हो रही थी।
इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था, मैंने अपने मन के भावों को छुपाते हुए उसकी तरफ पत्थर में लपेट कर एक कागज़ का टुकड़ा भेजा जिसमें लिखा था- तुम मुझे बड़े अच्छे लगते हो, मुझसे दोस्ती करोगे?
शायद मेरी पहल का ही इन्जार कर रहा था, उसने भी झट से उत्तर दिया- अनु, तुम भी मुझे बहुत अच्छी लगती हो पर कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई, तुमसे दोस्ती करके मैं अपने को धन्य समझूंगा।
धीरे-धीरे हम एक दूसरे से प्रेम-पत्रों से बात करने लगे क्योंकि उन दिनों बात करने का और कोई अच्छा साधन नहीं था।
अब तो हर रोज ही हम लोग छत पर मिलने लगे और बस एक दूसरे को हसरत भरी आँखों से देखते रहते और मन ही मन उस दिन की कल्पना करते रहते जिस दिन हम एक दूसरे की बाँहों में समा पाएँगे।
मैं उसके लंड को धीरे धीरे सहला हुए अपने मुँह में भर लूंगी और वो मेरी बुर के काले काले बालों के बीच में से अपने होटों और अपनी जीभ से मेरी चूत के दरवाजे पर दस्तक देगा।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
आखिर वो दिन आ ही गया…
इन्तजार ख़त्म हुआ…
मन में ख़ुशी भी थी और डर भी…
चुदवाना भी चाहती थी और प्रेगनेंट होने का डर भी सता रहा था…
पर जीतना तो चुदने-चोदने के खेल ने ही था तो प्रेगनेंट होने का डर जाता रहा और मैं सज धज कर, अपनी बुर के रेशमी बालों को साफ़ करके रात की प्रतीक्षा करने लगी।
हुआ यूँ कि एक दिन उसने मुझे रात को मिलने के बारे में पूछा।
कोई आंटी या भाभी फ्री हो तो मैसेज करो 💋
आपकी और हमारी बाते गुप्त रहेगी
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
@pubgplayer098
कोई भी भाभी या आंटी अपनी निजी सेक्स लाइफ से जुड़ी समस्या मुझसे शेयर करना चाहती है तो आपका स्वागत है मुझे DM करके जरूर बताएं ।
हमारे बीच हुई बातें पूर्ण रूप से गुप्त रहेगी
@pubgplayer098
फिर क्या … उसने मुझे धीरे से नीचे लिटाया, मेरी गांड के नीचे एक तकिया लगा दी तो मेरी चूत थोड़ा ऊपर उठ गयी।
वह अपना लंड मेरी चूत पर रख कर रगड़ने लगा, मुझे एक नए तरह का मज़ा आने लगा।
लंड उसका भी गीला था चूत मेरी भी गीली थी। रास्ता साफ़ नज़र आ रहा था।
उसने गच्च से लंड पेला तो लंड सरसराता हुआ अंदर घुसने लगा।
मुझे थोड़ा दर्द तो हुआ, मैं चिल्ला पड़ी- उई माँ … मर गयी मैं! फट गयी मेरी चूत! बड़ा मोटा है तेरा लंड बसंत बाबू! थोड़ा रहम कर … हाय रे मैं तो मर जाऊँगी. मैं कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहूंगी। ये क्या हो गया … तुमने तो पूरा लंड एक ही बार में घुसा दिया।
लेकिन जब लंड बार बार अंदर बाहर हुआ तो मज़ा आने लगा।
मैं भी एन्जॉय करने लगी और उसका साथ देने लगी।
आज पहली बार मुझे एहसास हुआ कि चुदाई कितनी अच्छी होती है।
कितनी मजेदार होती है चुदाई!
वह भी मस्त होकर चोदने लगा और मैं भी अपनी कमर हिला हिला कर चुदवाने लगी।
मेरे मुंह से कुछ न कुछ अपने आप ही निकलने लगा- हाय दईया … बड़ा मज़ा आ रहा है. ओ हो हां हां ऐसे ही चोदे जाओ … पूरा पेल दो लंड … हां हां वाह ऐसे … ऊँऊहूँ ऊँ ऊँ हां हाय बहुत बढ़िया लग रहा है, मज़ा आ रहा है यार! मुझे ऐसे ही चोदते रहना. क्या बात है … मैं आज पहली बार चुद रही हूँ। पहली ही बार में इतना मज़ा … वॉवो!
यह सब करते करते उसे भी मज़ा आया.
मैं चरम सीमा में पहुँचने वाली ही थी बल्कि मैं खलास भी हो गयी थी।
मेरी चूत ढीली हो गयी थी।
तब उसने भी अपना लंड बाहर निकाला और मुझे पकड़ाकर बोला- लो इसका मुट्ठ मार दो पूजा!
मैंने जैसे ही मुट्ठ मारा तो लंड ने मेरे मुँह में सारा वीर्य उगल दिया. जिसे मैं बड़े मजे से चाट गयी.
उसने मुझे बड़े प्यार से चिपका लिया।
मुझे वह पहली चुदाई आज भी याद है।
उसकी फैमिली आने के पहले मैंने उससे 4-5 बार चुदवाया और खूब एन्जॉय किया।
तो दोस्तो, आपको कैसी लगी यह मेरी यह इंडियन सेक्सी गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी?
बताइयेगा जरूर!
weddingpic6@gmail.com
@deshikahani2
मेरे मुंह से अनायास ही निकला- हाय दईया, ये तो पहले से ही खड़ा है।
मैंने मस्ती से उसका लंड पकड़ लिया।
उसने पूछा- क्या है यह पूजा?
मैं समझ गयी कि यह मेरे मुंह से क्या कहलवाना चाहता है।
तो मैं थोड़ा चुप रही.
उसने दुबारा पूछा.
तब मैंने बड़े प्यार से कहा- लंड है ये बसंत बाबू … इसे लंड कहते हैं लंड!
उसने मुझे खूब कस के चूमा और अपने गले से लगा लिया।
मैं भी मस्ती से चिपक गयी।
वहीं एक स्टूल पड़ा था, मैं उस पर बैठ गयी तो लंड बिल्कुल मेरे मुंह के सामने आ गया।
मैंने उसकी चुम्मी ली कई बार ली और उसका टोपा खोल कर चाटा।
फिर मैंने एक हाथ से पेल्हड़ थाम कर दूसरे हाथ से लंड मुट्ठी में ले लिया और आगे पीछे करने लगी।
लंड और कड़क होने लगा लंबा और मोटा होने लगा.
मैं थोड़ी देर तक लंड चूमती और चाटती रही; फिर उसे मुंह में भर लिया और अंदर ही अंदर टोपा के चारों ओर जबान घुमाने लगी।
उसे मज़ा आने लगा और वह सिसयाने लगा।
मैंने पहले बार कोई लंड पकड़ा तो मैं बहुत ही उत्तेजित थी। मैंने लंड को अपने माथे से लगाया, अपनी आँखों पर घुमाया, अपनी नाक पर लंड रगड़ा, अपने गालों पर फिराया और होंठों पर रख लिया लंड।
मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैंने जी भर के लंड को प्यार किया, चुम्मी चुम्मी ले ले कर पुचकारा और फिर मजे से चूसने लगी लंड!
कुछ देर बाद मैंने लंड का मुठ मारना शुरू कर दिया।
मुझे मालूम था कि मुठ कैसे मारा जाता है क्योंकि यह सब मैंने पोर्न से सीखा था; अन्तर्वासना की कहानियों में भी पढ़ा था।
इतने में उसने लंड पूरा मेरे मुंह में घुसा दिया; मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और लंड अंदर बाहर करने लगा.
धीरे धीरे वह स्पीड बढ़ाने लगा।
मैं समझ गयी कि अब यह मेरे मुंह को चूत समझ कर चोद रहा है.
मुझे भी मज़ा आने लगा तो मैंने कुछ कहा नहीं, रोका नहीं उसे और उसे करने दिया।
वह स्पीड बढ़ाता गया और मैं साथ देती गयी।
फिर अचानक उसने लंड बाहर निकाल लिया।
मैंने फिर उसे मुट्ठी में लिया और मुट्ठ मारने लगी, जल्दी जल्दी लंड आगे पीछे करने लगी।
वह भी मस्ती में आ गया।
उसे मज़ा आने लगा तो वह सिसियाने लगा, बोला- हां हां पूजा … और तेज करो. अच्छा लग रहा है. हां हो आ हूँ …. उऊ हो हां हां … ये हो हो आ हूँ आऊं … हूँ हूँ वो हाय रे और तेज करो जल्दी करो … पूजा तुम बहुत अच्छी हो. वाह क्या बात है … हां ऊँ हो हो ही ऊँ … ओ हो मैं निकलने वाला हूँ.
मैं भी बोली- वाओ क्या मस्त लौड़ा है, बड़ा प्यारा लौड़ा है यार तेरा, बड़ा शानदार लौड़ा है। हाय रे लंड बाबा, अब तू निकाल दे माल … मैं उसे पूरा पी जाऊंगी।
फिर क्या लंड ने उगल दिया सारा वीर्य मेरे मुंह में और मैं उसे गटक गयी फिर लंड का टोपा चाटने लगी।
अगले दिन रविवार था।
मम्मी दिन भर के लिए अपने मायके चली गयी थी और मैं घर पर अकेली ही थी।
मैंने कहा- बसंत बाबू, आप बाहर कहीं मत जाइयेगा मैं आपके लिए लंच बना रही हूँ। आप 12.30 बजे आ जाइयेगा।
मैं 15 मिनट पहले ही खाना बनाकर मेज पर रख चुकी थी।
उस समय मैं गाउन पहने हुए थी, उसमें बटन नहीं थे, सिर्फ एक फीता लगा हुआ था।
मैंने बीच में फीता बांध लिया तो मेरा बदन ढक गया था।
बसंत बाबू सही टाइम पर आ गए।
मैंने बड़े आदर और प्यार से उसे बैठाया।
वह मुझे बड़े गौर से देखने लगा, बोला- तुमने तो बहुत जल्दी खाना बना दिया पूजा!
मैंने कहा- मुझे टाइम पर काम करना अच्छा लगता है.
वह उठा और मुझे अपनी बाहों में भर लिया, बोला- पूजा, जाने क्यों मुझे तुम पर बड़ा प्यार आ रहा है। मैं तुम्हें तहे दिल से चाहने लगा हूँ।
मैंने कहा- मुझे छोड़ो न … पहले खाना तो खा लो. नहीं तो ठंडा हो जायेगा।
उसने कहा- आज तो मैं कुछ करने के बाद ही खाना खाऊंगा। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, बहुत प्यारी लगती हो पूजा!
ऐसा कहते कहते उसने आहिस्ते से मेरे गाउन का फीता खोल डाला तो मेरी चूचियाँ एकदम नंगी नंगी उसके आगे छलक पड़ीं।
वह मेरी चूचियाँ चूमने लगा चूसने लगा और साथ साथ अपना हाथ मेरे कमर में डाल दिया।
गाउन खुलने से मैं पूरी तरह नंगी हो चुकी थी।
उसकी उंगलियां मेरी झांटों से होती हुई मेरी चूत तक पहुँच गयी।
वह बोला- वॉवो क्या मस्तानी चूत है तेरी पूजा! आज मैं नहीं रुक सकता।
उसने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर पटक दिया, मेरा पजामा खोल डाला।
मैं पूरी तरह नंगी हो गयी।
मेरी छोटी छोटी झांटों वाली चूत उसके सामने खुल गयी।
फिर मैंने भी बड़ी बेशर्मी से उसका पजामा खोल कर उसे भी पूरा नंगा कर दिया।
मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुकी थी।
मैंने अपने बालों का जूड़ा बनाया और उसे चित लिटा कर उसके ऊपर चढ़ कर अपनी चूत उसके मुंह पर रख दिया।
मैं झुक कर चाटने लगी उसका लंड और वह चाटने लगा मेरी बुर!
हम दोनों 69 हो गए और वासना में पूरी तरह डूब गए।
गर्म मैं भी हो चुकी थी गर्म वह भी हो चुका था।
न वह रुक सकता था और न मैं रुक सकती थी।
उसका सामान सब शाम तक सेट भी हो गया और मम्मी ने उसे रात को भी खाना खिला दिया।
अगले दिन सवेरे मम्मी ने मेरे हाथ उसे चाय नाश्ता भिजवा दिया।
मैं जब नाश्ता लेकर ऊपर पहुंची तब वह नहा धोकर बाथरूम से निकला ही था।
मैंने उसे नंगे बदन देखा।
उसने केवल एक तौलिया लपेट रखी थी. उसकी चौड़ी छाती और छाती पर घने घने बाल सेक्सी लग रहे थे। उसका बदन कसरती बदन था।
मैं समझ गयी कि बंदा जिम जरूर जाता होगा।
मुझे देखकर वह बोला- अरे पूजा तुम चाय ले आयी हो. अच्छा इसे टेबल पर रख दो, मैं अभी आता हूँ।
वह अंदर गया और लुंगी बनियान पहन कर मेरे सामने आ गया।
उसने मुझे आधी कप चाय देकर कहा- लो तुम भी मेरे साथ चाय पियो।
इतने प्यार से उसने कहा कि मैं मना न कर सकी.
मुझे उसके साथ चाय पीना बहुत अच्छा लगा।
एक दिन मैं सवेरे सवेरे छत पर चली गयी।
गर्मी का मौसम था, ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, बड़ा अच्छा लग रहा था।
मेरे घर की छत बहुत बड़ी है, चारों तरफ रेलिंग हैं, कोई भी बाहर वाला कुछ देख भी नहीं सकता।
मैंने देखा कि बसंत एक कोने में कसरत कर रहा है।
मैं दूसरे कोने में खड़ी चुपचाप उसे देखने लगी।
वह एकदम नंगे बदन था। सिर्फ अपना लंड छिपाने के लिए उसने एक चड्डी पहन ली थी।
उसकी बॉडी के कट्स बहुत अच्छे लग रहे थे, देखने में बड़े सुन्दर और आकर्षक लग रहे थे।
मेरे मन में ख्याल आया कि अगर आज इसने अपनी चड्डी खोली दी होती तो मैं बड़े प्रेम से लंड के दर्शन कर लेती!
जाने क्यों मेरे मन में उसे नंगा देखने की प्रबल इच्छा पैदा हो गयी।
मेरे बदन में सुरसुरी होने लगी।
मुझे एहसास होने लगा कि मुझे बसंत बाबू से प्यार गया है।
मैं उसके नंगे बदन से चिपकना चाहती थी; उसके आगे नंगी होना चाहती थी।
यह बात मैं किसी से कह भी नहीं सकती थी।
जब तक वह कसरत करता रहा और योगा करता रहा, तब तक मैं उसे अपलक देखती ही रही।
उसको कतई यह नहीं मालूम हुआ कि मैं उसे देख रही हूँ।
मैं 10 बजे कॉलेज पहुंची तो मौक़ा पाकर अपनी सहेलियों से कॉलेज कैंपस में दूर खड़े होकर बातें करने लगी।
मैंने अपने मन की बात सबको बता दिया, पूछा- यार ऐसे में मैं क्या करूं … मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मैं बसंत बाबू का लंड देखना चाहती हूँ। सच पूछो तो मैं उससे चुदवाना चाहती हूँ।
एक बोली- तू तो बहुत बोल्ड है यार पूजा! तुझे कुछ सोचने की जरूरत है क्या? मौक़ा देख कर अपने मन की बात कह दे उससे और हाथ बढ़ाकर पकड़ ले उसका लंड! तेरे लंड पकड़ते ही वह जोश में आ जायेगा; बुरी तरह उत्तेजित हो जाएगा। फिर तू लंड का मज़ा ले लेना और पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में पेलवा लेना!
दूसरी बोली- मैं तेरी जगह होती तो उससे चुदवा कर ही सबको किस्सा सुनाती।
मैंने कहा- यार, मैं थोड़ा डर रही हूँ।
तीसरी बोली- डरने की कोई बात नहीं; कंडोम का इस्तेमाल कर लेना बस! या उससे कह देना कि लंड का मक्खन अंदर नहीं बाहर ही निकाल दे।
फिर उसने आगे कहा- यार मुझे ले चल उसके पास, मैं उसका लंड पकड़ कर तेरी बुर में पेल दूँगी।
सबने खूब ताली बजा कर ठहाका लगाया।
चौथी बोली- देखो पूजा, मौक़ा सुनहरा है। ऐसे में चूकना नहीं चाहिए। अब तुझे लंड की जरूरत है। हम सबको लंड की जरूरत है. मुझे देखो मैं इसी तरह एक नहीं, तीन तीन लंड पकड़ चुकी हूँ और दो से तो खूब झमाझम चुदवा भी चुकी हूँ।
इन सब बातों से मेरा हौसला बढ़ गया। मेरी हिम्मत बढ़ गयी।
मैं सोचने लगी कि किस तरह से बसंत बाबू का लंड पकड़ा जाए … उसके दर्शन किये जायें!
संयोग बस वह रात पूर्णमासी की रात थी … यानि फुल मून नाईट।
रात के 10 बज गये थे, मम्मी जी सो गयीं थीं लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मैं उठ कर अचानक छत पर चली गयी।
चांदनी रात बड़ी अच्छी लग रही थी। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी।
मैं उसी का मज़ा लेने लगी।
जब मैं पीछे मुड़ी तो देखा बसंत खड़ा है।
मुझे देख कर वह बोला- अरे पूजा, क्या नींद नहीं आ रही है तुमको?
मैंने कहा- हां पता नहीं नींद क्यों नहीं आ रही!
उसने मुझे अपनी बाँहों में भर कर कहा- अरी पगली, मुझे भी नींद नहीं आ रही है। मैंने जब से मुझे देखा है तबसे नींद नहीं आ रही है मुझे! मैं रोज़ रात को बड़ी देर तक जगता रहता हूँ।
उसने मेरी चुम्मी ले ली और मैं भी उसके बदन में समा गयी।
वह मेरे बदन पर हाथ फिराने लगा और मैं उसके बदन पर!
धीरे धीरे उसका हाथ मेरी चूचियों पर चला गया तो मेरा हाथ भी उसका लंड टटोलने लगा।
उसने मेरी चूचियाँ दबा दीं.
तो मैं सिहर उठी।
उसने झुक कर मेरी चूचियाँ चूम ली, मेरे निप्पल को भी चूमा और फिर से चूसने लगा मेरे मस्ताने बूब्स!
मैं निढाल हो गयी।
मुझे उसका मुझे छूना और मेरी चूचियाँ मसलना बहुत अच्छा लग रहा था।
मैं चाहती थी कि बड़ी देर तक वह ऐसा ही करता रहे, मुझे अपनी बाहों में ही भरता रहे।
फिर मैंने भी उसका लंड ऊपर से ही दबा दिया।
मैंने बड़ी बेशरमी से उसका इलास्टिक का पजामा नीचे घसीट दिया तो उसका लंड टनटना कर मेरे आगे खड़ा हो गया।
Deshi kahani:--
किरायेदार से लिया पहली चुदाई का मज़ा
@deshikahani2
इंडियन सेक्सी गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी में एक जवान कुंवारी लड़की उनके घर में आये नए किरायेदार लड़के पर फ़िदा हो गयी. लड़के ने देर ना करते हुए उसकी चूत फाड़ दी.
सुबह के लगभग 10 बजे होंगे।
मैं उस दिन अपने ड्राइंग रूम बैठी हुई अख़बार पढ़ रही थी।
तभी किसी ने डोर बेल बजा दी।
मैं फ़ौरन उठी और दरवाजा खोला तो देखा कि सामने एक मस्त नौजवान लड़का खड़ा है।
एकदम गोरा चिट्टा, घुंघराले बालों वाला, स्मार्ट और हैंडसम!
यह इंडियन सेक्सी गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी इसी लड़के के साथ की है.
मैंने कहा- जी कहिए क्या काम है?
वह बोला- मैंने आपका TO LET वाला बोर्ड देखा तो मैं आ गया। मेरा नाम बसंत अवस्थी है और मैं एक बैंक में काम करता हूँ। मैं अपने लिए एक किराये पर मकान की खोज में निकला हूँ। क्या मैं आपका मकान देख सकता हूँ?
उसकी बात का लहज़ा मुझे बहुत पसंद आया।
मैंने उसे अंदर बैठाया और कहा- आप बैठिये, मैं अभी मम्मी को बुला कर लाती हूँ, वही आपसे बात करेंगीं।
वह बैठ गया.
मैं अंदर सीधे मम्मी के पास पहुँच गई और बोली- मम्मी एक किरायेदार आया है, चलो बात कर लो।
वे बोली- तुम ही कर लो न! लेकिन कह देना कि मैं फैमिली वाले को मकान देती हूँ किसी कुंवारे लड़के को नहीं. फिर जो भी हो, मुझे बता देना!
मैं फ़ौरन वापस आयी और सीधे एक सवाल दाग दिया- भाई साहब, आप अकेले हैं या आपकी फैमिली भी है?
वह बोला- जी, मैं शादीशुदा हूँ, फैमिली वाला हूँ। मेरी बीवी सरकारी ऑफिस में काम करती है। वह भी मेरे साथ आएगी और मेरी माँ भी मेरे साथ है। पर वे लोग अभी नहीं, 3 महीने के बाद ही आ सकेंगें।
मैं यह बात मम्मी को बताने जा ही रही थी कि मम्मी खुद ही आ गयीं।
उन्हें देख कर बसंत भाई साहब ने फ़ौरन झुक कर मेरी माँ के पैर छुए तो मैं बड़ी खुश हुई।
मुझे लगा की आदमी तो बड़ा संस्कारी है.
मम्मी बोली- कोई बात नहीं बेटा, बहू बाद में आ जाएगी। तुम अपना नाम पता ठिकाना फोन नंबर सब लिखवा दो और फिर मकान ऊपर जाकर देख लो। पसंद आये तो फिर बात आगे की जाए। मम्मी ने मुझसे कहा- बेटी पूजा, जा इस लड़के को ऊपर का मकान अच्छी तरह से दिखा दे।
दोस्तो, मेरा नाम मिस पूजा है.
मैं 22 साल की हूँ और एम बी ए फाइनल ईयर में हूँ।
मेरा कद 5′ 4″ है, रंग गोरा है, मेरे काले घने बाल लम्बे लम्बे हैं.
मैं छरहरे बदन वाली, खूबसूरत, सेक्सी दिखने वाली हॉट लड़की हूँ।
मेरे बूब्स बड़े भी हैं, सुडौल और आकर्षक भी।
मैं अधिकतर स्लीवलेस कपड़े पहनती हूँ।
मेरी खुली खुली बाहें बड़ी मनमोहक लगतीं हैं.
मेरे उभरे हुए हिप्स और मटकती हुई गांड लोगों को बहुत पसंद है।
यह मैं नहीं कह रही हूँ मेरे कॉलेज के सभी लड़के कहते हैं।
मेरी जाँघों की गोलाइयाँ तो देखते ही बनती हैं।
मैं जब स्कर्ट पहन कर चलती हूँ तो लोगों की नज़रों से बच नहीं पाती।
मेरी चूत तो एकदम फ्रेश है, नई ताज़ी है।
मस्त जवान हो चुकी मैं और मेरी चूत भी!
उस पर काली काली घनी घनी झांटें बड़ी सेक्सी लगती हैं।
मैं उन्हें बस ट्रिम कर लेती हूँ, कभी भी पूरी तरह साफ़ नहीं करती।
स्वभाव से मैं चंचल, पढ़ने में अव्वल और शरारत करने में सबसे आगे रहती हूँ।
मुझे खुल कर बातें करना, हंसी मजाक करना और गप्पें मारना खूब आता है.
कॉलेज में मेरी अपनी एक धाक है जिसे मैं हमेशा बनाकर रखती हूँ।
तो फिर दोस्तो, मैं बसंत बाबू को ऊपर ले जाकर पूरा मकान दिखाने लगी।
मैं उस समय लो वेस्ट की जींस और टॉप पहने हुए थी।
टॉप की भी गाँठ बाँध रखी थी तो मेरी नाभि दिख रही थी और उसके नीचे जींस।
जींस इतनी नीची थी कि अगर एक इंच नीचे खसक जाए तो मेरी झांटें दिखने लगेंगी।
लो वेस्ट जींस में मैं बहुत ही हॉट दिख रही थी और मिस्टर बसंत की निगाहें या तो मेरे जींस पर थीं या फिर मेरे बूब्स पर!
बूब्स की झलक उसे इसलिए मिल रही थी कि मैंने उसके नीचे ब्रा नहीं पहना था और दो में से एक बटन खुली हुई थी।
मैं अक्सर घर में रहते हुए ब्रा नहीं पहनती थी।
मैंने बड़े प्यार से पूरा मकान दिखाया और उसे पसंद भी आ गया।
नीचे आकर उसने मम्मी से कहा- माँ जी मुझे मकान पसंद है।
मम्मी ने कहा- फिर ठीक है बेटा, तुम कल से आ सकते हो। किराया इसका 10000/- रुपया महीना होगा और बिजली का बिल अलग से! ऊपर मीटर लगा है उसका भुगतान तुम्हें करना पड़ेगा।
उसने 10000/- रुपया मम्मी को पकड़ा दिया और कल आने का वादा करके चला गया।
जाने क्यों … मेरा भी मन था कि वह आकर रहने लगे।
अगले दिन जब उसका सामान आना शुरू हुआ तो मैं सामान की गुणवत्ता देख कर समझ गयी कि इस आदमी की पसंद अच्छी है और यह एक अच्छे घराने का लग भी रहा है.
ख़ैर वह अपना सामान सेट करवाने में लग गया।
इसी बीच मम्मी बोली- बेटी पूजा, बसंत से जाकर कह दो कि वह खाना यहीं खा ले, बाहर न जाये।
मैंने यह बात उसे बताई तो वह सच में बहुत खुश हुआ।
कोई भी भाभी या आंटी सेक्स से संबंधित गुप्त बातें करना चाहती हो तो तुरंत मैसेज करे
@professionalcricketer3
सरदार मेरी मासूम गांड के चीथड़े उड़ाने में लगा हुआ था।
मेरी गांड में अब जलन होने लगी थी।
कुछ देर के बाद वो झड़ने वाला था तो उसने अपना पूरा माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया । और वो मेरे ऊपर ही निढाल होकर पड़ गया ।
उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा । कभी मेरी चूत को तो कभी मेरी गांड को ।
तो पाठकों आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी मुझे मेल💌 भेजकर जरूर बताएं professionalcricketer33@gmail.com
🙏🙏
अब उसने स्पीड दोगुनी करते हुए दसएक जोरदार ठोकरें लगाई और अपना लन्ड निकाल कर मेरे मुंह के पास लाया।
मैंने चूस चूस के उसका पानी निगल लिया।
अब हम दोनों हाम्फते हुए अलग हो गए।
उसने एक लुंगी पहन कर ट्रक चलाना शुरू किया और हम आगे बढ़ गए।
मैं नंग धड़ंग उसी सीट पर गिरी पड़ी थी।
बाद में उठकर मैंने शॉर्ट और टॉप पहन लिया।
मुझे बहुत थकावट महसूस हो रही थी।
तबी मुझे शराब पीने का मन हुआ।
"शराब है सरदारजी?" मैंने पूछा।
"हां है ना मालकिन, आप के लिए तो जान हाजिर!" उसने कहा।
उसने एक बैग मुझे दिया जिसमें शराब की बोतल थी।
मैंने उसे खोला और गिलास में दारू डाली और पानी मिलाकर एक घूंट में ही गटक ली।
झट से मैंने दूसरा पेग बनाया और उसे भी ख़त्म किया।
अब मैंने एक और पेग बनाकर परविंदर को दे दी।
"आपके हाथ से शराब पीकर मालकिन मैं तो धन्य हो गया।" उसने कहा।
मैंने उससे पूछा- अब आगे क्या इरादा है?
उसने बताया- ओ जी, आगे अपने यार का ढाबा है। वहां खाना-पीना और रात में खूब मजे करेंगे मेरी जान!
मैंने कहा- यार सरदार जी, आप मजा तो बहुत देते हो। मैं तो बिल्कुल तृप्त हो गई।
परविंदर और मैं हंसने लगे।
मैंने एक और पेग मारा।
अब हमारा ट्रक ढाबे पे पहुंचा।
उसने मुझे उतरने को कहा।
हम उतर कर ढाबे के पिछले वाले दरवाजे से अंदर गए।
वह मुझे एक छोटे से कमरे में ले गया।
उसने ढाबे वाले को बुलाकर वो कमरा खुलवाया।
वह भी एक सरदार था।
उसने आते ही परविंदर को पूछा- ओ भाह जी, इतनी पटाखा आइटम? कहां से उठा लाए?
परविंदर बोला- मिली जामनगर में! सड़कछाप रण्डी है साली!
उसे क्या पता मैं तो इस ट्रक और पूरे कंपनी के मालिक की इकलौती बीवी हूं।
कमरे में एक चारपाई लगाई हुई थी।
हम उस पर बैठ गए।
परविंदर ने शराब मंगाई और खाना लगाने को कहा।
शराब आई और साथ में कुछ नॉन वेज भी था।
हमने पेग लगाना शुरू किया।
आज तक मैंने नॉन वेज नहीं खाया था मगर परविंदर के जोर देने पर मैं शराब के साथ चखने लगी।
इसके बाद खाना आया।
मुझे भूख लगी थी।
और इसके बाद हम जिस्म की भूख भी मिटानी थी तो हमने खाना खत्म किया और थोड़ा आराम करने उसी चारपाई पर लेट गए।
हम एक दूसरे को लिपट कर सो गए थे।
कुछ देर बाद मुझे मूतने की तलब लगी, मैंने सरदार को कहा और उठकर मूतने चलने लगी।
परविंदर मेरे पीछे पीछे आ गया।
मैं ढाबे के पीछे की ओर गई.
अंधेरा था तो वहीं पे मेरा शॉर्ट खिसका कर मूतने लगी।
हम दोनों पर शराब का नशा छाया हुआ था।
परविंदर आकर अपनी लुंगी उठाके सीधा मेरे मुंह पर मूतने लगा और मुझे बोला- रण्डी मालकिन, पीयेगी सरदार का मूत?
मैंने झट से अपना मुंह खोल दिया और परविंदर का मूत पीने में लग गई।
क्या स्वाद था उसके मूत का खारा खारा!
शराब के नशे में मैं धुत्त थी ... मैं जितना पी सकती, उतना मूत पी गई, बाकी सब मेरी टॉप पर गिर गया।
हम दोनों वापिस कमरे में आए।
आते ही मैं सरदार से मुंह लगाकर चूमती रही।
जल्द ही हमारे कपड़े उतर गए और हम दोनों मादरजात नंगे हो चुके थे।
परविंदर ने कहा- अब कैसा मजा चाहती है मेरी रण्डी मालकिन?
मैंने बोला- अम्मम्म ... सरदार जी, अब मेरी गांड की मरम्मत कीजिए ना अपने लोहे से!
अब उसने मुझे टांगें चौड़ी कर के लिटाया और मेरी पीठ के नीचे एक तकिया लगाया.
वह मेरी चूत से लेकर गांड को चाटने लगा।
फिर से मेरी वासना जाग उठी; मैं सिसकारियां भरते हुए तड़पने लगी।
उसने मेरी गांड में अपनी जीभ लगाकर उसे गीला कर दिया और उठ कर अपना लन्ड मेरी गांड की के छेद पर टिका दिया।
मैंने उसे रोका और उसका लन्ड चाट कर थोड़ा गीला कर दिया ताकि आसानी से वो मेरी गांड में घुसे।
अब उसने नीचे जाकर फिर से मेरी गांड में निशाना साधते हुए एक जोरदार धक्का लगाया।
मैं पहले भी गांड मरवा चुकी थी तो लन्ड अन्दर तो घुसा मगर बड़ा और मोटा होने की वजह से मेरी तो गांड फट गई।
उसने एक झटके में ही पूरा लौड़ा अंदर कर दिया।
पीठ के नीचे तकिया लगाने से मेरी गांड बिल्कुल खुल गई थी।
अब वह मेरी टांगें फैला कर मेरी गांड मारने लगा।
साथ ही वह मेरी चूत में उंगली करने लगा।
अब मेरी गांड में लन्ड और चूत में उंगली थी जिससे मेरा मजा डबल हो गया।
मैं आंखें बंद करके इस पल का आनंद ले रही थी।
चूत में उंगली मजा देती मगर गांड में लन्ड की ठोकर मुझे दर्द देने लगी- अअह्ह्ह ... मेरे सरदार, मेरे ठोकू ... मजा आ रहा है।
उस हरामी ने अब अपना एक अंगूठा टेढ़ा करके मेरी गांड में लन्ड के साथ ही अंदर फसा दिया।
यह बहुत ही अजीब था मेरे लिए!
एक तो उसका तगड़ा लन्ड और साथ में अंगूठा, मेरा हाल दर्द से बेहाल हुआ।
मैं कराहने लगी- उई माआ आआआ ... भोसडी के सरदार ... बहुत दर्द हो रहा है ... अम्ह्ह्हह्ह ... उह्ह्ह्ह!
दर्द में मैं बिलबिलाने लगी।
अब वह मेरे मुंह पर आकर मुझे चूमने लगा।
सरदार का भारी भरकम शरीर अब मुझे असहाय महसूस कर रहा था।
मैंने कहा- अरे यार, मेरी मुनिया तो उस दिन से सिर्फ आपका बबुआ मांग रही है। आपका नाम याद आते ही बहने लगती है। कब मिलोगे?
उसने कहा- अरे मालकिन, कल राजकोट की ओर जा रहा हूं, मैटेरियल लाने। चलेंगी साथ में?
मैंने कहा- अरे पर वहां करेंगे कहां, कैसे? तुम्हारा साथी भी तो होगा।
वो बोला- वो सब आप मुझ पर छोड़ दीजिए मोहतरमा! कल शाम निकलना है। चलिए, रात भर मजे करेंगे।
मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे।
मैंने झट से हामी भर दी।
वैसे मेरा मायका भी राजकोट ही था।
मैंने मन बना लिया कि कुछ भी करके जाना तो है ही!
तब मैंने पहले मॉम को सब बता दिया।
मॉम ने तो ना कहना ही नहीं था।
अब मैंने रात में पति को बताया- मुझे कल मॉम के पास जाना है। मेरी एक फ्रेंड जा रही है, तो उसके साथ जाऊंगी।
उन्होंने भी हां कर दिया।
मैं अब जाने की तैयारी करने लगी।
मैंने एक छोटा बैग लिया जिसमें मेरे बढ़िया सेक्सी कपड़े ले लिए।
शाम पांच बजे मैं घर में सबको बता कर निकल गई।
मैं निकली तब एक हरे रंग की साड़ी पहन कर आई थी।
हमें शाम सात बजे निकलना था।
तब तक मैंने एक सहेली के यहां टाइमपास किया और परविंदर को कॉल करके सीधा हाई वे पर पिकअप का बता दिया।
सात बजे तक मैं हाई वे पहुंच गई।
थोड़ी ही देर में मेरा सरदार ट्रक लेकर आ गया।
शाम का वक्त था, मैं ट्रक में चढ़ गई।
तर्क ऊंचा था, सरदार में मेरे चूतड़ों को दोनों हाथों से ऊपर धकेल कर मुझे ट्रक में चढ़ाया.
मैंने अंदर जाकर देखा तो परविंदर अकेला ही था। आज उसका साथी ड्राइवर नहीं था।
ट्रक को अंदर से बिल्कुल एक कमरे की तरह सजाया हुआ था।
ड्राइवर सीट के पीछे एक आदमी को सोने का बेड बनाया हुआ था।
खाने पीने का सामान था।
मैं बैठी तो साइड की खिड़की बंद कर दी।
परविंदर ने मस्त पंजाबी गाने चला रखे थे।
उसने मुझे ऊपर से नीचे तक निहारा और आंख मार दी।
मैंने पूछा- क्या सरदार जी ... अब नजर लगाओगे?
उसने कहा- अरे मालकिन, उस रात आपको ठीक से देख नहीं पाया था। आज तो आप और भी ज्यादा कमाल लग रही हैं।
अब मुझे शरारत सूझी और उसे कहा- रुको और कुछ जलवा दिखाती हूं।
इतने में मैंने अपना पल्लू हटा दिया और साड़ी निकालने लगी।
जल्द ही मैंने अपनी साड़ी उतार दी।
साथ ही अपना पेटीकोट खोल कर सिर्फ पैंटी में आ गई।
सरदार एकदम हक्का बक्का रह गया और बोल पड़ा- मालकिन जान लोगी क्या अब?
मैंने उसको अनसुना करते हुए अपना ब्लाउज भी निकाल दिया।
अब मैं एक ट्रक में ड्राइवर सरदार के सामने सिर्फ एक सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में थी।
फिर मैंने अपने पैर मोड़ कर उसके जांघ पर ले गई और पैरों से उसकी जांघ सहलाने लगी।
मैंने सरदार की हालत खराब कर दी।
मैं हंस रही थी और वह गाड़ी चलाते हुए अपने आप को कंट्रोल करने में लगा था।
रात के आठ बज रहे थे।
अब उसने गाड़ी एक सुनसान जगह पर खड़ी कर दी।
फिर उसकी ओर की खिड़की बंद करके वह मेरे पास आया।
उसने एक झटके से मेरी ब्रा निकाली और पैंटी भी!
मैं अब ट्रक में पूरी तरह से नंगी हुई।
उसने अपना पजामा खोला, अंडरवीयर उतार कर वो नीचे से बिल्कुल नंगा हो गया।
मैं तो पहले से उसकी कायल थी।
मैंने उसे पीछे वाले सीट पर खींचा और उसे लिटाकर ऊपर चढ़ गई।
अब उसका लन्ड पकड़ कर मैं सीधी उस पे बैठ गई।
मैंने आहिस्ता से उसका लन्ड मेरी चूत में ले लिया और ऊपर नीचे होने लगी।
सरदार का मोटा लन्ड मेरी बच्चेदानी तक घुस चुका था।
मेरी सिसकारियां निकलने लगीं।
अब वह मेरे मम्मे दबाने लगा।
मैं झुककर उसके सीने पर लेट गई और उसके मुंह में मुंह डाल कर चूमने लगी।
वह भी मंद आहें भरने लगा- मालकिन, आप की चूत में तो स्वर्ग का अहसास होने लगा है। हाय ओ मेरे रब्बा क्या गजब की माल हो आप!
मैंने उसे उकसाते हुए एक चमाट उसके मुंह पर लगा डाली और कहा- साले चूतिये, ये क्या मालकिन की रट लगा रखी है। मैं तो तेरी रण्डी बनकर तेरे ही ट्रक में अपनी मरवा रही हूं। मुझे रण्डी बोल, रखैल बना अपनी! चोद मुझे जोर से!
अब उसका ईगो हर्ट हुआ।
वह तो था हट्टा कट्टा पंजाबी सरदार ... मैं उसके हमले के इंतजार में थी।
इतने में उसने एक जोरदार थप्पड़ मेरे मुंह पर लगा दिया।
मेरी तो आंखों से आंसू निकल पड़े।
मैं संभलती, उसके पहले ही उसने अपने दोनों हाथों से मेरे मुंह पर चांटों की झड़ी लगा दी।
वह एकदम वहशी हो गया- साली रण्डी, छीनाल औरत ... इज्जत दी तो तू मुझे नामर्द समझने लगी? अब देख तेरा क्या हाल करता है ये सरदार!
कह के उसने मुझे अपने ऊपर से हटाया.
और तब मुझे नीचे सीट पर लिटाकर मेरी टांगों के बीच आ गया और अपना डंडा मेरी चूत में एक ही बारी में ठूंस दिया।
मेरी हालत खराब हो गई।
उसका हर एक जबरदस्त शॉट मेरी बच्चेदानी तक टकराता।
मैं भी हार मानने के मूड में नहीं थी, उसके हर शॉट पर मैं 'अह्ह्ह ... चोद साले ... चोद ... ठोक अंदर तक ... क्या चोदता है मेरे ठोकू!" बोलकर उसे उकसाती।
Content available for users 18+
By signing in to the service, you confirm that you are 18 years of age or older.
