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हमारे बीच हुई बातें पूर्ण रूप से गुप्त रहेगी
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साथियो, हिंदी में इंडियन सेक्स स्टोरीज का मजा जारी है. आप अपने कमेंट्स कर सकते हैं.@mboombasti
इस कहानी का अगला पार्ट तीन बहनों की चुत चुदाई की कहानी-2 जल्द ही लेके आऊंगा @mboombasti हमारी कहानी को प्यार देने के लिए शुक्रिया
आलोक ने धीरे धीरे सिमरन का ब्लाउज और उसकी टाईट ब्रा को खोल दिया और सिमरन की कसी हुई चूचियों को मादक निगाहों से देखने लगा.
सिमरन ने अपनी आंखें आलोक के आंखों में डाल कर पूछा- सर, कैसी है मेरी चूचियां … आपको पसंद आई या नहीं?
आलोक तो सिमरन की गोल गेंदों सी चूचियों को देख कर पहले ही पागल सा हो गया था.@deshikahani2
वो उसकी एक चूची को सहलाते हुए बोला- सिमरन, तुम मेरी पसंद ना पसंद पूछ रही हो … जबकि आज तक मैंने इतनी शानदार चूचियां कभी नहीं देखी हैं. तुम्हारी चूचियां बहुत ही ज्यादा सुंदर हैं सिमरन रानी और यह मुझको पागल बना रही हैं. इनको देख कर मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रहा हूँ.
सिमरन बोली- मेरी चूचियां देख कर आपको क्या कुछ हो रहा है?
आलोक ने बोला- हां मैं अब तुम्हारी इन रसभरी चूचियों को चूसना और काटना चाहता हूँ.
ये कह कर आलोक ने सिमरन की एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और मज़े ले लेकर चूसने लगा.
अपनी चूची की चुसाई शुरू होते ही सिमरन पगला सी गयी और अपने हाथ को बढ़ा कर आलोक का लंड उसकी पैंट के ऊपर से ही पकड़ कर मरोड़ने लगी.
सिमरन की गर्मी देख कर आलोक ने अपने हाथों से अपना पैंट उतार दिया और फिर से सिमरन की एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
वो दूसरी चूची को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा.
सिमरन भी अब अपने आपको रोक नहीं पाई और उसने अपने हाथ से आलोक का अंडरवियर उतार दिया.
आलोक का अंडरवियर उतरते ही उसका 7 इंच का मोटा लंड बाहर आकर अपने आप ऐसे हिलने लगा मानो वो इन हसीन बहनों को अपना सलाम बज़ा रहा हो.
तीनों बहनें आलोक का लम्बा और मोटा लंड देख कर हैरान हो गईं.
आलोक ने सिमरन को अपनी गोद में उठाया और नीचे उतर कर फिर से पलंग पर किनारे से लिटा दिया.
सिमरन को लिटाने के बाद आलोक ने सिमरन की साड़ी को उसकी कमर से खींच कर निकाल दिया और अब वो पलंग पर सिर्फ पेटीकोट पहने चित लेटी हुई थी.
आलोक सिमरन की बुर को उसके पेटीकोट के ऊपर से पकड़ कर दबाने लगा. सिमरन की बुर को अपने हाथों से मसलते हुए उसने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया.@deshikahani2
सिमरन ने भी पेटीकोट का नाड़ा खुलते ही अपनी कमर ऊपर कर दी, जिससे आलोक को उसके पेटीकोट को उसके चूतड़ों से नीचे खींचने में आसानी हो और वो पेटीकोट को निकाल सके.
आलोक ने सिमरन का पेटीकोट उसके फूले फूले चूतड़ों के नीचे कर दिया और उसको सिमरन के पैर से अलग करके पलंग के नीचे फैंक दिया.
अब सिमरन आलोक के सामने अपने गुलाबी रंग की पैंटी पहन कर लेटी हुई थी.
आलोक ने 69 में आकर अपना मुँह सिमरन की बुर के पास को किया और उसकी पैंटी के ऊपर से बुर को चूमने लगा.
इधर आलोक सिमरन को नंगी कर रहा था तो उधर सिमरन भी चुप नहीं थी.
सिमरन आलोक का लंड हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी और उसके लंड का सुपारा खोल कर उसको अपने मुँह में ले लिया और जीभ से चाटने लगी.
इससे आलोक का लंड अब और भी कड़क हो गया.
तब तक आलोक, सिमरन की बुर को उसकी पैंटी के ऊपर से ही अपने नाक लगा कर सूंघ रहा था और चूम रहा था.
सेक्स कहानी के अगले भाग में इन तीनों चुदासी बहनों की चुदाई के रस को आगे लिखूंगा. सिमरन को अपनी कुंवारी बुर में आलोक के लंड से कैसा मजा आया … इसका पूरा वर्णन लिखूंगा. आप सेक्सी कॉलेज गर्ल्स स्टोरी पर कमेंट्स करना न भूलें.
आपका @mboombasti
आलोक बोला- अरे … तुम लोग अचानक से यहां कैसे?
तीनों बहनों ने एक साथ प्रोफेसर आलोक से पूछा- सर, आप टीवी पर क्या देख रहे थे?
प्रोफेसर आलोक ने उन तीनों बहनों के चेहरे देख कर उनके मन की बात पहचान ली और उनसे पूछा- मैं जो कुछ टीवी पर देख रहा था … क्या तुम लोग भी देखना चाहोगी?
तीनों बहनों ने एक साथ अपनी मुंडी हिला कर हामी भर दी.
प्रोफेसर आलोक ने फिर से टीवी ऑन कर दिया और सब लोग पलंग और सोफ़ा पर बैठ कर ब्लू फिल्म देखने लगे.
आलोक एक सोफ़ा पर बैठा था और उसके बगल वाले सोफ़ा पर हरलीन और शीरीन बैठी थीं … जबकि पलंग पर सिमरन बैठी थी.
उधर प्रोफेसर आलोक ने देखा कि ब्लू फिल्म की चुदाई के सीन देख कर तीनों बहनों का चेहरा लाल हो गया था और उन तीनों की सांसें भी जोर जोर से चल रही थीं.
उनकी सांसों के साथ साथ उनकी चुचियां भी उनके कपड़ों के अन्दर उठ बैठ रही थीं.
क्या हसीन नजारा था. एक साथ तीन जोड़ी चुचियां आलोक की आंखों के सामने उठ बैठ रही थीं और सांसें गर्म हो रही थीं.
कुछ देर के बाद सिमरन, जो कि इन बहनों में सबसे बड़ी थी, अपना हाथ अपने बदन पर और चूचियों पर फेरने लगी.
आलोक उठ कर सिमरन के पास पलंग पर बैठ गया. उसने पहले सिमरन के सर पर हाथ रखा और एक हाथ से उसके कंधों को पकड़ लिया.
इससे सिमरन का चेहरा प्रोफेसर आलोक के सामने हो गया.
आलोक ने धीरे से सिमरन के कानों के पास अपना मुँह रख कर पूछा- क्या तुमको बहुत गर्मी लग रही है, पंखा चला दूं क्या?
सिमरन बोली- नहीं सर, ऐसे ही ठीक है.
फिर सिमरन आलोक सर के चेहरे को आंखें गड़ा कर देखने लगी.
आलोक पलंग से उठ कर पंखा फ़ुल स्पीड में चला दिया.
पंखा चलते ही सिमरन की साड़ी का आंचल उड़ने लगा और उसकी दोनों चूचियां साफ़ साफ़ दिखने लगीं.
अब आलोक पलंग पर ही सिमरन के बगल में बैठ गया. उसने सिमरन का एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और धीरे से पूछा- क्या मैं तुम्हारे हाथ को चूम सकता हूँ?
ये सुनते ही सिमरन ने पहले तो अपनी बहनों की तरफ़ देखा, फिर अपनी हथेली आलोक के हाथों में देकर अपना हाथ ढीला छोड़ दिया.@deshikahani2
आलोक ने भी फुर्ती से सिमरन का हाथ खींच कर अपने मुँह के पास किया और उसकी हथेली पर एक चुम्मा रख दिया.
चुम्मा देकर वो बोला- बहुत मीठी है तुम्हारी हथेली … मुझे मालूम है कि तुम्हारे होंठों का चुम्मा इससे भी ज्यादा मीठा लगेगा.
यह कह कर आलोक सिमरन की आंखों में देखने लगा.
पहले तो सिमरन कुछ नहीं बोली, फिर उसने अपनी हथेली आलोक के हाथों से खींचते हुए अपने मुँह के पास रख लिया.
अब सिमरन बोली- जब आपको मालूम है कि मेरे होंठों का चुम्मा और भी मीठा होगा … और आपको सुगर की बीमारी नहीं है, तो देर किस बात की है … जल्दी से और मीठा खा लीजिए.
उसकी बात सुनकर आलोक ने अपने होंठों को आगे बढ़ाया और सिमरन के होंठों पर रख दिए.
सिमरन ने भी अपने होंठों को ढीला छोड़ दिया और वो आलोक के होंठों से अपने होंठ मिला कर गर्म सांसों का अहसास करने लगी.
आलोक अपने होंठों से सिमरन के होंठों को खोलते हुए उसका निचला होंठ चूसने लगा.
सिमरन अपने होंठों की चुसाई से गर्म हो गई. उसने आलोक के कंधों पर अपना सिर रख दिया.
आलोक ने सिमरन का ये हाल देख कर धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी एक चूची को पकड़ कर दबा दिया.
इससे सिमरन के कंठ से मादक आवाज निकल गई और वो आलोक से और ज्यादा चिपक गई.
अब आलोक अपने एक हाथ से सिमरन की एक चूची को सहला रहा था और अपने दूसरे हाथ को वो सिमरन के चूतड़ों पर फेर रहा था.
सिमरन उसकी इस हरकत पर पहले तो थोड़ा कसमसाई और अपनी बहनों के तरफ़ देखने लगी और अंततः उसने भी आलोक को जोर से अपने बांहों में भींच लिया.
आलोक ने अब सिमरन के दोनों चूचों पर अपने दोनों हाथ जमा दिए और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा.
यह पहली बार था कि जब किसी मर्द का हाथ सिमरन के शरीर को मसल रहा था.
वो जल्दी ही बहुत ज्यादा गर्मा गयी और उसकी सांसें जोर जोर से चलने लगीं.
आलोक सिमरन की चूचियों को मसलते हुए उसके होंठों को चूमने लगा.
आलोक इधर सिमरन को चोदने की तैयारी कर ही रहा था कि तभी उसने देखा कि सिमरन की दोनों बहनें हरलीन और शीरीन भी अपने अपने मम्मों को सहला रही हैं.
वो दोनों बड़ी गौर से आलोक और सिमरन के बीच चल रही जवानी का खेल देख रही हैं.
आलोक समझ गया कि वो अब इन तीनों बहनों के साथ कुछ भी कर सकता है. ये तीनों बहनें अब उसके काबू में हैं और वो जो भी चाहेगा वो इनके साथ कर सकता है.
आलोक ने फिर से अपना ध्यान सिमरन की शरीर पर डाल दिया.
उसने सिमरन की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलते हुए उसे जोर से चूमा और अपना एक हाथ उसके ब्लाउज के अन्दर ले गया. अब आलोक जोर जोर से सिमरन की दोनों चुचों को पकड़ कर दबाने लगा. कभी कभी वो अपने दो उंगलियों के बीच सिमरन के निप्पल को लेकर मींज रहा था और सिमरन आलोक के कनधो से लिपटी हुई चुपचाप आंखें बंद करके अपनी चूचियों को मसलवा रही थी.
तीन बहनों की चुत चुदाई की कहानी- 1
BY @mboombasti
AT @deshikahani2
सेक्सी कॉलेज गर्ल्स स्टोरी तीन सगी बहनों की है. तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ती हैं. तीनों सेक्स की प्यासी हैं मगर उनके चाचा के दबदबे के कारण कोई उनकी ओर नहीं देखता.
हैलो फ्रेंड्स, ये सेक्सी कॉलेज गर्ल्स स्टोरी एक जागीरदार परिवार की तीन सुंदर सेक्सी लड़कियों की कुंवारी चुत चुदाई की कहानी है.
बलवान सिंह की हवेली में हर समय तीन खूबसूरत हसीन बहनों की हंसी मजाक की आवाजें सुनाई पड़ती थीं.
ये तीनों हसीन बहनें बलवान सिंह के स्वर्गीय भाई का निशानी थीं.
लेकिन इन तीन लड़कियों का बाप बलवान सिंह ही था.@deshikahani2
इन तीन हसीन बहनों का नाम सिमरन (24 साल), हरलीन (22 साल) और शीरीन (20 साल) था.
तीन बहनों की फिगर बहुत ही सेक्सी थी. उनकी चूचियों और चूतड़ों का आकार बहुत फूला हुआ था.
किसी भी मर्द को उनको देख कर अपने आपको रोकना बहुत ही मुश्किल हो जाता था.
इन तीनों के असली बाप और चाचा बलवान सिंह का शहर में बहुत दबदबा था और इसलिए कोई लड़का इनकी तरह अपनी आंख उठा कर देखने की भी जुर्रत नहीं करता था.
ये तीनों बहनें अभी तक कुंवारी ही थीं और अपनी वासना खत्म करने का काम अपनी चुत में उंगली या बैगन खीरा मूली गाजर आदि डालकर चलाती थीं.
वे सब एक दिन कार में सवार होकर कॉलेज जा रही थीं. कार की ड्राइविंग सीट पर हरलीन बैठी थी और वो मस्ती से कार चला रही थी.
अचानक एक जोरदार ब्रेक लगने के साथ कार एक झटके से रुक गयी.
पीछे बैठी सिमरन और शीरीन ने उसी समय हलकान होते हुए हरलीन की तरफ देखा.
सिमरन ने पूछा- क्यों क्या हुआ … तुमने अचानक कार क्यों रोक दी?
हरलीन बोली- चिल्ला क्यों रही हो … कार के सामने का नजारा तो देखो. कितना नशीला नजारा है.
अब सिमरन और शीरीन ने सामने का सीन देखा कि कार के सामने बीच सड़क पर एक कुत्ता और कुतिया गांड से गांड मिला कर चिपके हुए थे. यानि कुत्ता और कुतिया चुदाई कर रहे थे और अपनी अपनी जीभ निकाल कर हांफ़ रहे थे.
सिमरन और शीरीन चहक कर बोलीं- वाह … सच में क्या हसीन नजारा है.
हरलीन बोली- हमसे तो ज्यादा किस्मत वाली ये कुतिया है. क्या मस्ती से अपनी चूत चुदवा रही है.
इस पर सिमरन और शीरीन ने एक साथ कहा- हां, हमारे चाचा बलवान सिंह के डर के मारे कोई लड़का हमें घास भी नहीं डालता है. लगता है कि अपने नसीब में कुंवारी ही रहना लिखा है और हम तीनों को अपनी चूत की आग अपनी उंगलियों से ही बुझानी है.
ये ही सब बातें करते हुए उन तीनों के दिमाग में उसी समय चुदने के लिए एक आइडिया आया.
उन्होंने आपस में कुछ बात की और फैसला ले लिया.
तीनों के फैसला लेते ही हरलीन ने कार को प्रोफेसर आलोक के घर की तरफ़ घुमा दी.
प्रोफेसर आलोक की उम्र उस समय लगभग 35 साल की थी और उसकी शादी अभी नहीं हुई थी. वो बहुत ही रंगीन मिजाज का था … मतलब वो एक बहुत चोदू किस्म का आदमी था. उसके लंड की लम्बाई 7 इंच और मोटाई 4 इंच की थी.
ये बात कॉलेज की लगभग सभी लड़कियां और मैडम लोग को मालूम थी.
प्रोफेसर आलोक को अपने नायाब लंड और अपनी चुदाई की कला पर बहुत गर्व था. पूरे कॉलेज की काफी सारी लड़कियां और मैडम उनसे अपनी चूत चुदवा चुकी थीं.@deshikahani2
आलोक इन सब लड़कियों और मैडमों को बातों बातों में फंसा कर अपने घर ले जाया करता था और फिर उनको नंगी करके उनकी चूत चोदा करता था.
प्रोफेसर आलोक चोरी चोरी इन तीनों बहनों की जवानी को भी घूरा करता था … मगर वो बलवान सिंह के डर से इनसे दूर ही रहता था.
आलोक की नजरों में खुद के लिए वासना को देखना और ललचाने वाली बात इन तीनों बहनों को मालूम थी.
आज कुछ तय करके इन तीनों बहनों ने अपनी कार प्रोफेसर आलोक के घर के सामने जाकर रोक दी.
प्रोफेसर आलोक उस समय अपने घर पर ही था और एक लुंगी पहन कर अपना लंड सहलाते हुए एक ब्लू फिल्म देख रहा था.
प्रोफेसर आलोक ने इन तीन बहनों को कार से उतरते देखा तो जानबूझ कर टीवी ऑफ़ नहीं किया.
उसने ऐसा दिखाया कि उसे इन लोगों के आने की बात मालूम ही नहीं पड़ी.
टीवी पर उस समय एक गर्मागर्म चुदाई का सीन चल रहा था जिसमें एक आदमी दो लड़कियों को एक साथ मजा दे रहा था.
वो एक लड़की की चुत में अपने लंड को पेल रहा था और दूसरी लड़की की चुत को अपनी जीभ से चोद रहा था.
लड़कियां अपनी चूत चुदाई के समय अपनी अपनी कमर उछाल कर लंड और जीभ अपनी अपनी चूत में ले रही थीं.
ये तीनों बहनें सीधे प्रोफेसर आलोक के कमरे में पहुंच गईं.
प्रोफेसर आलोक इन तीन बहनों को देख कर घबराने का नाटक करने लगा.
फिर उसे रिमोट नहीं मिला तो उसने उठ कर टीवी ऑफ़ कर दिया.
मगर तब तक टीवी पर चल रही चुदाई की फिल्म पर इन तीनों चुदासी बहनों की नजर जा चुकी थी.
English में सेक्स STORY का अलग से चैनल बनाना चाहिए क्या ...?
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इस कहानी का अगला पार्ट शीला और पण्डित जी की चुदाई-2 जल्द ही लेके आऊंगा @mboombasti हमारी कहानी को प्यार देने के लिए शुक्रिया
शीला- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
पण्डित- अब पान का पत्ता मेरे साथ अग्नि में डाल दो.
दोनों ने हाथ में हाथ लेकर पान का पत्ता आग में डाल दिया.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. अब मैं तुम्हारे चरण धोऊंगा.. अपने चरण यहाँ सीधे करो.
शीला ने अपने पैर सीधे किये.. पण्डित ने एक गिलास में से थोड़ा पानी हाथ में लिया और शीला के पैरों को अपने हाथों से धोने लगा.
पण्डित- तुम अपने पति का ध्यान करो.
पण्डित मन्त्र पढ़ने लगा.. शीला आँखें बंद करके पति का ध्यान करने लगी.
शीला इस वक्त टांगें ऊपर की तरफ़ मोड़ कर बैठी थी.
पण्डित ने उसके पैर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पैर धोने लगा.
टांग उठने से शीला की साड़ी के अन्दर का नजारा दिखने लगा. उसकी जांघें दिख रही थीं और साड़ी के अन्दर के अँधेरे में हल्की हल्की उसकी सफेद कच्छी भी दिख रही थी. लेकिन शीला की आँखें बंद थीं.. वो तो अपने पति का ध्यान कर रही थी और पण्डित का ध्यान उसकी साड़ी के अन्दर के नज़ारे पर था.
पण्डित के मुँह में पानी आ रहा था.. लेकिन वो जबरदस्ती करने से डर रहा था.. सो उसने सोचा लड़की को गरम किया जाए. पैर धोने के बाद कुछ देर उसने मन्त्र पढ़े.
पण्डित- पुत्री.. आज इतना ही काफी है.. असली पूजा कल से शुरू होगी. तुम्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना है. वो प्रसन्न होंगे तभी तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति मिलेगी. अब तुम कल आना.
शीला- जो आज्ञा पण्डित जी.
अगले दिन..@deshikahani2
पण्डित- आओ पुत्री.. तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं.. अगर कोई देख लेगा तो तुम्हारी पूजा का कोई लाभ नहीं.
शीला- नहीं पण्डित जी.. किसी ने नहीं देखा.. आप मुझे आज्ञा दें.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. तुम्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना है.
शीला- पण्डित जी.. वैसे तो सभी भगवान बराबर हैं लेकिन पता नहीं क्यों..भगवान शिव के प्रति मेरी श्रद्धा ज्यादा है.
पण्डित- अच्छी बात है.. पुत्री..शिव को प्रसन्न करने के लिए तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा. सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा. शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे.. और थोड़ा श्रृंगार करना होगा.
शीला- श्रृंगार पण्डित जी?
पण्डित- हाँ.. शिव स्त्री-प्रिय (विमन लविंग) हैं, सुन्दर स्त्रियाँ उन्हें भाती हैं. यूं तो हर स्त्री उनके लिए सुन्दर है.. लेकिन श्रृंगार करने से उसकी सुन्दरता बढ़ जाती है. जब भी पार्वती जी को शिव को मनाना होता है.. तो वे भी श्रृंगार करके उनके सामने आती हैं न..!
शीला- लेकिन पण्डित जी.. क्या एक विधवा का श्रृंगार करना सही रहेगा ?
पण्डित- पुत्री.. शिव के लिए कोई भी काम किया जा सकता है.. विधवा तो तुम इस समाज के लिए हो.
शीला- जो आज्ञा पण्डित जी.
पण्डित- अब तुम स्नानगृह (बाथरूम) में जा कर कच्चे दूध का स्नान करो.. मैंने वहाँ पर कच्चा दूध रख दिया है क्योंकि तुम्हारे लिए कच्चा दूध घर से लाना मुश्किल है.. और हाँ, तुम्हारे वस्त्र भी स्नानगृह में ही रखे हैं.@deshikahani2
पण्डित ने नारंगी कलर का ब्लाउज और पेटीकोट बाथरूम में रखा था.. पण्डित ने ब्लाउज के हुक निकाल दिए थे. हुक्स पीठ की साइड में थे. वैसे तो ब्लाउज में महिलाओं की सुविधाओं के लिए हुक्स सामने मम्मों की तरफ होते हैं.
शीला दूध से नहा कर आई.. सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में उसे पण्डित के सामने शर्म आ रही थी.
शीला- पण्डित जी..
पण्डित- आ गई.
शीला- पण्डित जी.. मुझे इन वस्त्रों में शर्म आ रही है.
पण्डित- नहीं पुत्री.. ऐसा ना बोलो.. शिव नाराज़ हो जाएंगे. ये जोगिया वस्त्र शुद्ध हैं, यदि तुम शुद्ध नहीं होगी, तो शिव प्रसन्न कदापि नहीं होंगे.
शीला- लेकिन पण्डित जी..इस.. स्स.. ब..ब्लाउज के हुक्स नहीं हैं.
पण्डित- ओह.. मैंने देखा ही नहीं.. वैसे तो पूजा केवल दो घंटे की ही है.. लेकिन यदि तुम ब्लाउज के कारण पूजा नहीं कर सकती को हम कल से पूजा कर लेंगे.. लेकिन शायद शिव को ये विलम्ब अच्छा ना लगे.
शीला- नहीं पण्डित जी.. पूजा शुरू कीजिये..
पण्डित- पहले तुम उस शीशे पे जाकर श्रृंगार कर लो.. श्रृंगार की सामग्री वहीं है.
शीला ने लाल लिपस्टिक लगाई.. थोड़ा रूज़.. और थोड़ा परफ्यूम लगा लिया.
श्रृंगार करके वो पण्डित के पास आई..
पण्डित- अति सुन्दर पुत्री.. तुम बहुत सुन्दर लग रही हो.
शीला शरमाने लगी.. ये फीलिंग्स उसने पहली बार अनुभव की थीं.
पण्डित- आओ पूजा शुरू करें.
वो दोनों अग्नि के पास बैठ गए.. पण्डित ने मन्त्र पढ़ने शुरू किए.
हवनकुंड की अग्नि से थोड़ी गरमी हो गई थी इसलिए पण्डित ने अपना कुरता उतार दिया.. उनसे शीला को आकर्षित करने के लिए अपनी छाती पूरी शेव कर ली थी. उसकी बॉडी पहलवानों जैसी थी. अब वो केवल एक लुंगी में था. शीला थोड़ा और शरमाने लगी. दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे.
शीला ने पण्डित के पैर पकड़ लिए और अपना सर उसके पैरों में झुका दिया. इस अवस्था में शीला के ब्लाउज के नीचे उसकी नंगी पीठ दिख रही थी.. पण्डित की नज़र उसकी नंगी पीठ पर पड़ी तो .. उसने सोचा यह तो विधवा है.. और भोली भी.. इसके साथ कुछ करने का मौक़ा है.. उसने शीला के सर पे हाथ रखा.
पण्डित- पुत्री.. यदि जैसा मैं कहूँ तुम वैसा करो तो तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति अवश्य मिलेगी.
शीला ने सर उठाया और हाथ जोड़ते हुए कहा.
शीला- पण्डित जी, आप जैसा भी कहेंगे मैं वैसा ही करूँगी.. आप बताइये क्या करना होगा?
शीला की नज़रों में पण्डित भी भगवान का रूप था.
पण्डित- पुत्री.. हवन करना होगा.. हवन कुछ दिन तक रोज़ करना होगा.. लेकिन वेदों के अनुसार इस हवन में केवल स्वर्गवासी की पत्नी और पण्डित ही भाग ले सकते हैं और किसी तीसरे को इस बारे में खबर भी नहीं होनी चाहिये. अगर हवन शुरू होने के पश्चात किसी को खबर हो गई तो स्वर्गवासी की आत्मा को शान्ति कभी नहीं मिलेगी.
शीला- पण्डित जी..आप ही हमारे गुरू हैं आप जैसा कहेंगे, हम वैसा ही करेंगे. आज्ञा दीजिए, कब से शुरू करना है.. और क्या क्या सामग्री चाहिए होगी?@deshikahani2
पण्डित- वेदों के अनुसार इस हवन के लिए सारी सामग्री शुद्ध हाथों में ही रहनी चाहिए.. अत: सारी सामग्री का प्रबंध मैं खुद ही करूँगा.. तुम सिर्फ एक नारियल और तुलसी लेते आना.
शीला- तो पण्डित जी, शुरू कब से करना है?
पण्डित- क्योंकि इस हवन में केवल स्वर्गवासी की पत्नी और पण्डित ही होते हैं. इसलिए ये हवन उस समय होगा जब कोई विघ्न ना करे.. और हवन पवित्र स्थान पर होता है.. जैसे कि मन्दिर.. परन्तु.. यहाँ तो कोई भी विघ्न डाल सकता है. इसलिए हम हवन इसी मन्दिर के पीछे मेरे कक्ष (रूम) में करेंगे. इस तरह स्थान भी पवित्र रहेगा और और कोई विघ्न भी नहीं डालेगा.
शीला- पण्डित जी.. जैसा आप कहें.. किस समय करना है?
पण्डित- दोपहर 12:30 बजे से लेकर 4 बजे तक मन्दिर बंद रहता है.. सो इस समय में ही हवन शान्ति पूर्वक हो सकता है. तुम आज 12:45 बजे आ जाना.. नारियल और तुलसी लेकर. लेकिन मेरे कमरे का सामने का द्वार बंद होगा. आओ मैं तुम्हें एक दूसरा द्वार दिखा देता हूँ जो कि मैं अपने प्रिय भक्तों को ही दिखाता हूँ.
पण्डित उठा और शीला भी उसके पीछे पीछे चल दी. पण्डित ने शीला को अपने कमरे में से एक दरवाज़ा दिखाया जो कि एक सुनसान गली में निकलता था. उसने गली में ले जाकर शीला को आने का पूरा रास्ता समझा दिया.
पण्डित- पुत्री तुम रास्ता तो समझ गई ना..?
शीला- जी पण्डित जी.
पण्डित- ये याद रखना कि ये हवन की विधि सबसे गुप्त रहना चाहिये.. वरना तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति कभी ना मिल पाएगी.
शीला- पण्डित जी.. आप मेरे गुरू हैं.. आप जैसा कहेंगे..मैं वैसा ही करूँगी.. मैं ठीक 12:45 बजे आ जाऊंगी.
ठीक 12:45 पर शीला पण्डित के बताए हुए रास्ते से उसके कमरे के दरवाज़े पर आ गई और खटखटाया.
पण्डित- आओ पुत्री..
शीला ने पहले पण्डित के पैर छुए.
पण्डित- किसी को खबर तो नहीं हुई?
शीला- नहीं पण्डित जी.. मेरे पापा मम्मी जा चुके हैं और जो रास्ता आपने बताया था, मैं उसी रास्ते से आई हूँ.. किसी ने नहीं देखा.
पण्डित ने दरवाज़ा बंद किया.
पण्डित- चलो फिर हवन आरम्भ करें.
पण्डित का कमरा ज्यादा बड़ा ना था.. उसमें एक खाट थी.. बड़ा सा शीशा था.. कमरे में सिर्फ एक 40 वाट का बल्व ही जल रहा था. पण्डित ने कमरे में ईंटों का हवनकुंड बनाया हुआ था, उसी में हवन के लिए आग जलाई.. और सामग्री लेकर दोनों आग के पास बैठ गए.
पण्डित मन्त्र बोलने लगा.. शीला ने वही सुबह वाला साड़ी ब्लाउज पहना था.
पण्डित- ये पान का पत्ता दोनों हाथों में ले लो.@deshikahani2
शीला और पण्डित साथ साथ बैठे थे.. दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे. दोनों की टांगें एक दूसरे को टच कर रही थी.
शीला ने दोनों हाथ आगे करके पान का पत्ता ले लिया.. पण्डित ने फिर उस पत्ते में थोड़े चावल डाले.. फिर थोड़ी चीनी.. थोड़ा दूध.
फिर उसने शीला से कहा.
पण्डित- पुत्री.. अब तुम अपने हाथ को मेरे हाथ में रखो.. मैं मन्त्र पढूंगा और तुम अपने पति का ध्यान करना.
शीला ने अपने हाथ पण्डित के हाथों में रख दिये.. ये उनका पहला स्किन टू स्किन कांटेक्ट था.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. तुम्हें ये कहना होगा कि तुम अपने पति से बहुत प्रेम करती हो.. जो मैं कहूँ मेरे पीछे पीछे बोलना.
शीला- जी पण्डित जी.
शीला के हाथ पण्डित के हाथ में थे.
पण्डित- मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ.
शीला- मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ.
पण्डित- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
शीला और पण्डित जी की चुदाई-1
(Sheela Aur Pandit Ji Ki Chudai- Part 1)
@deshikahani2
प्रस्तुतकर्ता @mboombasti
एक लड़की है शीला, बिल्कुल सीधी सादी, भोली-भाली, भगवान में बहुत विश्वास रखने वाली. अचानक शादी के एक साल बाद ही उसके पति का स्कूटर से एक्सीडेंट हो गया और वो ऊपर चला गया. तब से शीला अपने पापा-मम्मी के साथ रहने लगी. अभी उसका कोई बच्चा नहीं था. उसकी आयु 24 वर्ष थी. उसके पापा मम्मी ने उसको शादी के लिए कहा, लेकिन शीला ने फिलहाल मना कर दिया था. वो अब भी अपने पति को नहीं भुला पाई थी, जिसे ऊपर गए हुए आज 6 महीने हो गए थे.
शीला शारीरिक रूप से कोई बहुत ज्यादा खूबरसूरत नहीं थी लेकिन उसकी सूरत बहुत भोली थी. वह खुद भी बहुत भोली थी, ज्यादातर चुप ही रहती थी.
उसकी लम्बाई लगभग 5 फुट 4 इंच थी, रंग रूप गोरा था, बाल काफी लंबे थे, गोल चेहरा था. उसके चूचे भारतीय औरतों जैसे बड़े थे, कमर लगभग 31-32 इंच थी, चूतड़ गोल और बड़े यही कोई 37 इंच के थे.
वो हमेशा सफेद या फिर बहुत हल्के रंग की साड़ी पहनती थी. उसके पापा सरकारी दफ्तर में काम करते थे. उनका हाल ही में दूसरे शहर में तबादला हुआ था. वे सब नये शहर में आकर रहने लगे.
शीला की मम्मी ने भी एक स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली. शीला का कोई भाई नहीं था और उसकी बड़ी बहन की शादी 6 साल पहले हो गई थी. उनका घर छोटी सी कॉलोनी में था जो कि शहर से थोड़ी दूर थी. रोज़ सुबह शीला के पापा दफ्तर और उसकी मम्मी स्कूल चले जाते थे. पापा शाम 6 बजे और मम्मी 4 बजे वापस आती थीं.
उनके घर के पास ही एक छोटा सा मंदिर था. मंदिर में एक पण्डित था, यही कोई 36 साल का. देखने में गोरा और बॉडी भी सुडौल, लंबाई 5 फुट 9 इंच. सूरत भी ठीक ठाक थी.. बाल भी बड़े थे.
मंदिर में उसके अलावा और कोई ना था. मंदिर में ही बिल्कुल पीछे उसका कमरा था. मंदिर के मुख्य द्वार के अलावा पण्डित के कमरे से भी एक दरवाज़ा कॉलोनी की पिछली गली में जाता था. वो गली हमेशा सुनसान ही रहती थी क्योंकि उस गली में अभी कोई घर नहीं था.
नये शहर में आकर शीला की मम्मी ने उसे बताया कि पास में एक मंदिर है, उसे पूजा करनी हो तो वहाँ चली जाया करे. शीला बहुत धार्मिक थी. पूजा पाठ में बहुत विश्वास था उसका. रोज़ सुबह 5 बजे उठ कर वह मंदिर जाने लगी.
पण्डित को किसी ने बताया था एक पास में ही कोई नया परिवार आया है और जिनकी 24 साल की विधवा बेटी है. शीला पहले दिन सुबह 5 बजे मंदिर गई, मन्दिर में और कोई ना था.. सिर्फ पण्डित था. शीला ने सफेद साड़ी ब्लाउज पहन रखा था. शीला पूजा करने के बाद पण्डित के पास आई.. उसने पण्डित के पैर छुए.
पण्डित- जीती रहो पुत्री.. तुम यहाँ नई आई हो ना..?@deshikahani2
शीला- जी पण्डित जी!
पण्डित- पुत्री.. तुम्हारा नाम क्या है?
शीला- जी, शीला!
पण्डित- तुम्हारे माथे की लकीरों ने मुझे बता दिया है कि तुम पर क्या दुख आया है.. लेकिन पुत्री.. भगवान के आगे किसकी चलती है!
शीला- पण्डित जी.. मेरा ईश्वर में अटूट विश्वास है.. लेकिन फिर भी उसने मुझसे मेरा सुहाग छीन लिया..!
ये कहते हुए शीला की आँखों में आँसू आ गए थे.
पण्डित- पुत्री.. ईश्वर ने जिसकी जितनी लिखी है..वह उतना ही जीता है.. इसमें हम तुम कुछ नहीं कर सकते. उसकी मरज़ी के आगे हमारी नहीं चल सकती.. क्योंकि वो सर्वोच्च है.. इसलिए उसके निर्णय को स्वीकार करने में ही समझदारी है.
शीला आँसू पोंछ कर बोली.
शीला- मुझे हर पल उनकी याद आती है.. ऐसा लगता है जैसे वो यहीं कहीं हैं.
पण्डित- पुत्री.. तुम जैसी धार्मिक और ईश्वर में विश्वास रखने वाली का ख्याल ईश्वर खुद रखता है.. कभी कभी वो इम्तिहान भी लेता है.
शीला- पण्डित जी.. जब मैं अकेली होती हूँ.. तो मुझे डर सा लगता है.. पता नहीं क्यों?
पण्डित- तुम्हारे घर में और कोई नहीं है?
शीला- हैं.. पापा मम्मी.. लेकिन सुबह सुबह ही पापा अपने दफ्तर और मम्मी स्कूल चली जाती हैं. फिर मम्मी 4 बजे आती हैं.. इस दौरान मैं अकेली रहती हूँ और मुझे बहुत डर सा लगता है.. ऐसा क्यों हैं पण्डित जी?
पण्डित- पुत्री.. तुम्हारे पति के स्वर्गवास के बाद तुमने हवन तो करवाया था ना..?
शीला- नहीं.. कैसा हवन पण्डित जी?
पण्डित- तुम्हारे पति की आत्मा की शान्ति के लिए.. यह बहुत आवश्यक होता है.
शीला- हमें किसी ने बताया नहीं पण्डित जी..
पण्डित- यदि तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति नहीं मिलेगी तो वो तुम्हारे आस पास भटकती रहेगी और इसलिए तुम्हें अकेले में डर लगता है.
शीला- पण्डित जी.. आप ईश्वर के बहुत पास हैं, कृपया आप कुछ कीजिए ताकि मेरे पति की आत्मा को शान्ति मिल सके.
पण्डित- तुम अपने पति का ध्यान करो.
पण्डित मन्त्र पढ़ने लगा.. शीला आँखें बंद करके पति का ध्यान करने लगी.
शीला इस वक्त टांगें ऊपर की तरफ़ मोड़ कर बैठी थी.
पण्डित ने उसके पैर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पैर धोने लगा.
टांग उठने से शीला की साड़ी के अन्दर का नजारा दिखने लगा. उसकी जांघें दिख रही थीं और साड़ी के अन्दर के अँधेरे में हल्की हल्की उसकी सफेद कच्छी भी दिख रही थी. लेकिन शीला की आँखें बंद थीं.. वो तो अपने पति का ध्यान कर रही थी और पण्डित का ध्यान उसकी साड़ी के अन्दर के नज़ारे पर था.
पण्डित के मुँह में पानी आ रहा था.. लेकिन वो जबरदस्ती करने से डर रहा था.. सो उसने सोचा लड़की को गरम किया जाए. पैर धोने के बाद कुछ देर उसने मन्त्र पढ़े.
पण्डित- पुत्री.. आज इतना ही काफी है.. असली पूजा कल से शुरू होगी. तुम्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना है. वो प्रसन्न होंगे तभी तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति मिलेगी. अब तुम कल आना.
शीला- जो आज्ञा पण्डित जी.
अगले दिन..
पण्डित- आओ पुत्री.. तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं.. अगर कोई देख लेगा तो तुम्हारी पूजा का कोई लाभ नहीं.
शीला- नहीं पण्डित जी.. किसी ने नहीं देखा.. आप मुझे आज्ञा दें.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. तुम्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना है.
शीला- पण्डित जी.. वैसे तो सभी भगवान बराबर हैं लेकिन पता नहीं क्यों..भगवान शिव के प्रति मेरी श्रद्धा ज्यादा है.
पण्डित- अच्छी बात है.. पुत्री..शिव को प्रसन्न करने के लिए तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा. सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा. शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे.. और थोड़ा श्रृंगार करना होगा.
शीला- श्रृंगार पण्डित जी?
पण्डित- हाँ.. शिव स्त्री-प्रिय (विमन लविंग) हैं, सुन्दर स्त्रियाँ उन्हें भाती हैं. यूं तो हर स्त्री उनके लिए सुन्दर है.. लेकिन श्रृंगार करने से उसकी सुन्दरता बढ़ जाती है. जब भी पार्वती जी को शिव को मनाना होता है.. तो वे भी श्रृंगार करके उनके सामने आती हैं न..!
शीला- लेकिन पण्डित जी.. क्या एक विधवा का श्रृंगार करना सही रहेगा ?
पण्डित- पुत्री.. शिव के लिए कोई भी काम किया जा सकता है.. विधवा तो तुम इस समाज के लिए हो.
शीला- जो आज्ञा पण्डित जी.
पण्डित- अब तुम स्नानगृह (बाथरूम) में जा कर कच्चे दूध का स्नान करो.. मैंने वहाँ पर कच्चा दूध रख दिया है क्योंकि तुम्हारे लिए कच्चा दूध घर से लाना मुश्किल है.. और हाँ, तुम्हारे वस्त्र भी स्नानगृह में ही रखे हैं.
पण्डित ने नारंगी कलर का ब्लाउज और पेटीकोट बाथरूम में रखा था.. पण्डित ने ब्लाउज के हुक निकाल दिए थे. हुक्स पीठ की साइड में थे. वैसे तो ब्लाउज में महिलाओं की सुविधाओं के लिए हुक्स सामने मम्मों की तरफ होते हैं.
शीला दूध से नहा कर आई.. सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में उसे पण्डित के सामने शर्म आ रही थी.
शीला- पण्डित जी..
पण्डित- आ गई.
शीला- पण्डित जी.. मुझे इन वस्त्रों में शर्म आ रही है.
पण्डित- नहीं पुत्री.. ऐसा ना बोलो.. शिव नाराज़ हो जाएंगे. ये जोगिया वस्त्र शुद्ध हैं, यदि तुम शुद्ध नहीं होगी, तो शिव प्रसन्न कदापि नहीं होंगे.
शीला- लेकिन पण्डित जी..इस.. स्स.. ब..ब्लाउज के हुक्स नहीं हैं.
पण्डित- ओह.. मैंने देखा ही नहीं.. वैसे तो पूजा केवल दो घंटे की ही है.. लेकिन यदि तुम ब्लाउज के कारण पूजा नहीं कर सकती को हम कल से पूजा कर लेंगे.. लेकिन शायद शिव को ये विलम्ब अच्छा ना लगे.@deshikahani2
शीला- नहीं पण्डित जी.. पूजा शुरू कीजिये..
पण्डित- पहले तुम उस शीशे पे जाकर श्रृंगार कर लो.. श्रृंगार की सामग्री वहीं है.
शीला ने लाल लिपस्टिक लगाई.. थोड़ा रूज़.. और थोड़ा परफ्यूम लगा लिया.
श्रृंगार करके वो पण्डित के पास आई..
पण्डित- अति सुन्दर पुत्री.. तुम बहुत सुन्दर लग रही हो.
शीला शरमाने लगी.. ये फीलिंग्स उसने पहली बार अनुभव की थीं.
पण्डित- आओ पूजा शुरू करें.
वो दोनों अग्नि के पास बैठ गए.. पण्डित ने मन्त्र पढ़ने शुरू किए.
हवनकुंड की अग्नि से थोड़ी गरमी हो गई थी इसलिए पण्डित ने अपना कुरता उतार दिया.. उनसे शीला को आकर्षित करने के लिए अपनी छाती पूरी शेव कर ली थी. उसकी बॉडी पहलवानों जैसी थी. अब वो केवल एक लुंगी में था. शीला थोड़ा और शरमाने लगी. दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे.
साथियो, हिंदी में इंडियन सेक्स स्टोरीज का मजा जारी है. आप अपने कमेंट्स कर सकते हैं.
@mboombasti
जल्द ही आपके साथ इस कहानी का पार्ट-2 लेके आऊंगा आपके सुझाव जरूर भेजे
@mboombasti
पण्डित- पुत्री.. यदि जैसा मैं कहूँ तुम वैसा करो तो तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति अवश्य मिलेगी.
शीला ने सर उठाया और हाथ जोड़ते हुए कहा.
शीला- पण्डित जी, आप जैसा भी कहेंगे मैं वैसा ही करूँगी.. आप बताइये क्या करना होगा?
शीला की नज़रों में पण्डित भी भगवान का रूप था.
पण्डित- पुत्री.. हवन करना होगा.. हवन कुछ दिन तक रोज़ करना होगा.. लेकिन वेदों के अनुसार इस हवन में केवल स्वर्गवासी की पत्नी और पण्डित ही भाग ले सकते हैं और किसी तीसरे को इस बारे में खबर भी नहीं होनी चाहिये. अगर हवन शुरू होने के पश्चात किसी को खबर हो गई तो स्वर्गवासी की आत्मा को शान्ति कभी नहीं मिलेगी.
शीला- पण्डित जी..आप ही हमारे गुरू हैं आप जैसा कहेंगे, हम वैसा ही करेंगे. आज्ञा दीजिए, कब से शुरू करना है.. और क्या क्या सामग्री चाहिए होगी?
पण्डित- वेदों के अनुसार इस हवन के लिए सारी सामग्री शुद्ध हाथों में ही रहनी चाहिए.. अत: सारी सामग्री का प्रबंध मैं खुद ही करूँगा.. तुम सिर्फ एक नारियल और तुलसी लेते आना.
शीला- तो पण्डित जी, शुरू कब से करना है?@deshikahani2
पण्डित- क्योंकि इस हवन में केवल स्वर्गवासी की पत्नी और पण्डित ही होते हैं. इसलिए ये हवन उस समय होगा जब कोई विघ्न ना करे.. और हवन पवित्र स्थान पर होता है.. जैसे कि मन्दिर.. परन्तु.. यहाँ तो कोई भी विघ्न डाल सकता है. इसलिए हम हवन इसी मन्दिर के पीछे मेरे कक्ष (रूम) में करेंगे. इस तरह स्थान भी पवित्र रहेगा और और कोई विघ्न भी नहीं डालेगा.
शीला- पण्डित जी.. जैसा आप कहें.. किस समय करना है?
पण्डित- दोपहर 12:30 बजे से लेकर 4 बजे तक मन्दिर बंद रहता है.. सो इस समय में ही हवन शान्ति पूर्वक हो सकता है. तुम आज 12:45 बजे आ जाना.. नारियल और तुलसी लेकर. लेकिन मेरे कमरे का सामने का द्वार बंद होगा. आओ मैं तुम्हें एक दूसरा द्वार दिखा देता हूँ जो कि मैं अपने प्रिय भक्तों को ही दिखाता हूँ.
पण्डित उठा और शीला भी उसके पीछे पीछे चल दी. पण्डित ने शीला को अपने कमरे में से एक दरवाज़ा दिखाया जो कि एक सुनसान गली में निकलता था. उसने गली में ले जाकर शीला को आने का पूरा रास्ता समझा दिया.
पण्डित- पुत्री तुम रास्ता तो समझ गई ना..?
शीला- जी पण्डित जी.
पण्डित- ये याद रखना कि ये हवन की विधि सबसे गुप्त रहना चाहिये.. वरना तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति कभी ना मिल पाएगी.
शीला- पण्डित जी.. आप मेरे गुरू हैं.. आप जैसा कहेंगे..मैं वैसा ही करूँगी.. मैं ठीक 12:45 बजे आ जाऊंगी.
ठीक 12:45 पर शीला पण्डित के बताए हुए रास्ते से उसके कमरे के दरवाज़े पर आ गई और खटखटाया.
पण्डित- आओ पुत्री..
शीला ने पहले पण्डित के पैर छुए.
पण्डित- किसी को खबर तो नहीं हुई?
शीला- नहीं पण्डित जी.. मेरे पापा मम्मी जा चुके हैं और जो रास्ता आपने बताया था, मैं उसी रास्ते से आई हूँ.. किसी ने नहीं देखा.
पण्डित ने दरवाज़ा बंद किया.
पण्डित- चलो फिर हवन आरम्भ करें.
पण्डित का कमरा ज्यादा बड़ा ना था.. उसमें एक खाट थी.. बड़ा सा शीशा था.. कमरे में सिर्फ एक 40 वाट का बल्व ही जल रहा था. पण्डित ने कमरे में ईंटों का हवनकुंड बनाया हुआ था, उसी में हवन के लिए आग जलाई.. और सामग्री लेकर दोनों आग के पास बैठ गए.
पण्डित मन्त्र बोलने लगा.. शीला ने वही सुबह वाला साड़ी ब्लाउज पहना था.
पण्डित- ये पान का पत्ता दोनों हाथों में ले लो.
शीला और पण्डित साथ साथ बैठे थे.. दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे. दोनों की टांगें एक दूसरे को टच कर रही थी.
शीला ने दोनों हाथ आगे करके पान का पत्ता ले लिया.. पण्डित ने फिर उस पत्ते में थोड़े चावल डाले.. फिर थोड़ी चीनी.. थोड़ा दूध.@deshikahani2
फिर उसने शीला से कहा.
पण्डित- पुत्री.. अब तुम अपने हाथ को मेरे हाथ में रखो.. मैं मन्त्र पढूंगा और तुम अपने पति का ध्यान करना.
शीला ने अपने हाथ पण्डित के हाथों में रख दिये.. ये उनका पहला स्किन टू स्किन कांटेक्ट था.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. तुम्हें ये कहना होगा कि तुम अपने पति से बहुत प्रेम करती हो.. जो मैं कहूँ मेरे पीछे पीछे बोलना.
शीला- जी पण्डित जी.
शीला के हाथ पण्डित के हाथ में थे.
पण्डित- मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ.
शीला- मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ.
पण्डित- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
शीला- मैं उन पर अपना तन और मन न्यौछावर करती हूँ.
पण्डित- अब पान का पत्ता मेरे साथ अग्नि में डाल दो.
दोनों ने हाथ में हाथ लेकर पान का पत्ता आग में डाल दिया.
पण्डित- वेदों के अनुसार.. अब मैं तुम्हारे चरण धोऊंगा.. अपने चरण यहाँ सीधे करो.
शीला ने अपने पैर सीधे किये.. पण्डित ने एक गिलास में से थोड़ा पानी हाथ में लिया और शीला के पैरों को अपने हाथों से धोने लगा.
शीला और पण्डित जी की चुदाई-1
(Sheela Aur Pandit Ji Ki Chudai- Part 1)
एक लड़की है शीला, बिल्कुल सीधी सादी, भोली-भाली, भगवान में बहुत विश्वास रखने वाली. अचानक शादी के एक साल बाद ही उसके पति का स्कूटर से एक्सीडेंट हो गया और वो ऊपर चला गया. तब से शीला अपने पापा-मम्मी के साथ रहने लगी. अभी उसका कोई बच्चा नहीं था. उसकी आयु 24 वर्ष थी. उसके पापा मम्मी ने उसको शादी के लिए कहा, लेकिन शीला ने फिलहाल मना कर दिया था. वो अब भी अपने पति को नहीं भुला पाई थी, जिसे ऊपर गए हुए आज 6 महीने हो गए थे.
शीला शारीरिक रूप से कोई बहुत ज्यादा खूबरसूरत नहीं थी लेकिन उसकी सूरत बहुत भोली थी. वह खुद भी बहुत भोली थी, ज्यादातर चुप ही रहती थी.
उसकी लम्बाई लगभग 5 फुट 4 इंच थी, रंग रूप गोरा था, बाल काफी लंबे थे, गोल चेहरा था. उसके चूचे भारतीय औरतों जैसे बड़े थे, कमर लगभग 31-32 इंच थी, चूतड़ गोल और बड़े यही कोई 37 इंच के थे.
वो हमेशा सफेद या फिर बहुत हल्के रंग की साड़ी पहनती थी. उसके पापा सरकारी दफ्तर में काम करते थे. उनका हाल ही में दूसरे शहर में तबादला हुआ था. वे सब नये शहर में आकर रहने लगे.
शीला की मम्मी ने भी एक स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली. शीला का कोई भाई नहीं था और उसकी बड़ी बहन की शादी 6 साल पहले हो गई थी. उनका घर छोटी सी कॉलोनी में था जो कि शहर से थोड़ी दूर थी. रोज़ सुबह शीला के पापा दफ्तर और उसकी मम्मी स्कूल चले जाते थे. पापा शाम 6 बजे और मम्मी 4 बजे वापस आती थीं.
उनके घर के पास ही एक छोटा सा मंदिर था. मंदिर में एक पण्डित था, यही कोई 36 साल का. देखने में गोरा और बॉडी भी सुडौल, लंबाई 5 फुट 9 इंच. सूरत भी ठीक ठाक थी.. बाल भी बड़े थे.
मंदिर में उसके अलावा और कोई ना था. मंदिर में ही बिल्कुल पीछे उसका कमरा था. मंदिर के मुख्य द्वार के अलावा पण्डित के कमरे से भी एक दरवाज़ा कॉलोनी की पिछली गली में जाता था. वो गली हमेशा सुनसान ही रहती थी क्योंकि उस गली में अभी कोई घर नहीं था.
नये शहर में आकर शीला की मम्मी ने उसे बताया कि पास में एक मंदिर है, उसे पूजा करनी हो तो वहाँ चली जाया करे. शीला बहुत धार्मिक थी. पूजा पाठ में बहुत विश्वास था उसका. रोज़ सुबह 5 बजे उठ कर वह मंदिर जाने लगी.
पण्डित को किसी ने बताया था एक पास में ही कोई नया परिवार आया है और जिनकी 24 साल की विधवा बेटी है. शीला पहले दिन सुबह 5 बजे मंदिर गई, मन्दिर में और कोई ना था.. सिर्फ पण्डित था. शीला ने सफेद साड़ी ब्लाउज पहन रखा था. शीला पूजा करने के बाद पण्डित के पास आई.. उसने पण्डित के पैर छुए.
पण्डित- जीती रहो पुत्री.. तुम यहाँ नई आई हो ना..?
शीला- जी पण्डित जी!
पण्डित- पुत्री.. तुम्हारा नाम क्या है?
शीला- जी, शीला!
पण्डित- तुम्हारे माथे की लकीरों ने मुझे बता दिया है कि तुम पर क्या दुख आया है.. लेकिन पुत्री.. भगवान के आगे किसकी चलती है!
शीला- पण्डित जी.. मेरा ईश्वर में अटूट विश्वास है.. लेकिन फिर भी उसने मुझसे मेरा सुहाग छीन लिया..!
ये कहते हुए शीला की आँखों में आँसू आ गए थे.
पण्डित- पुत्री.. ईश्वर ने जिसकी जितनी लिखी है..वह उतना ही जीता है.. इसमें हम तुम कुछ नहीं कर सकते. उसकी मरज़ी के आगे हमारी नहीं चल सकती.. क्योंकि वो सर्वोच्च है.. इसलिए उसके निर्णय को स्वीकार करने में ही समझदारी है.
शीला आँसू पोंछ कर बोली.
शीला- मुझे हर पल उनकी याद आती है.. ऐसा लगता है जैसे वो यहीं कहीं हैं.
पण्डित- पुत्री.. तुम जैसी धार्मिक और ईश्वर में विश्वास रखने वाली का ख्याल ईश्वर खुद रखता है.. कभी कभी वो इम्तिहान भी लेता है.@deshikahani2
शीला- पण्डित जी.. जब मैं अकेली होती हूँ.. तो मुझे डर सा लगता है.. पता नहीं क्यों?
पण्डित- तुम्हारे घर में और कोई नहीं है?
शीला- हैं.. पापा मम्मी.. लेकिन सुबह सुबह ही पापा अपने दफ्तर और मम्मी स्कूल चली जाती हैं. फिर मम्मी 4 बजे आती हैं.. इस दौरान मैं अकेली रहती हूँ और मुझे बहुत डर सा लगता है.. ऐसा क्यों हैं पण्डित जी?
पण्डित- पुत्री.. तुम्हारे पति के स्वर्गवास के बाद तुमने हवन तो करवाया था ना..?
शीला- नहीं.. कैसा हवन पण्डित जी?
पण्डित- तुम्हारे पति की आत्मा की शान्ति के लिए.. यह बहुत आवश्यक होता है.
शीला- हमें किसी ने बताया नहीं पण्डित जी..
पण्डित- यदि तुम्हारे पति की आत्मा को शान्ति नहीं मिलेगी तो वो तुम्हारे आस पास भटकती रहेगी और इसलिए तुम्हें अकेले में डर लगता है.
शीला- पण्डित जी.. आप ईश्वर के बहुत पास हैं, कृपया आप कुछ कीजिए ताकि मेरे पति की आत्मा को शान्ति मिल सके.
शीला ने पण्डित के पैर पकड़ लिए और अपना सर उसके पैरों में झुका दिया. इस अवस्था में शीला के ब्लाउज के नीचे उसकी नंगी पीठ दिख रही थी.. पण्डित की नज़र उसकी नंगी पीठ पर पड़ी तो .. उसने सोचा यह तो विधवा है.. और भोली भी.. इसके साथ कुछ करने का मौक़ा है.. उसने शीला के सर पे हाथ रखा.
कोई भी भाभी या आंटी अपनी निजी सेक्स लाइफ से जुड़ी समस्या मुझसे शेयर करना चाहती है तो आपका स्वागत है मुझे DM करके जरूर बताएं ।
हमारे बीच हुई बातें पूर्ण रूप से गुप्त रहेगी
@pubgplayer098
मैंने उसके मुलायम, असमान चूतड़ों पर थप्पड़ मारना शुरू कर दिया और उसे एक कसम खिलाई कि वह कभी भी मेरे साथ रंडी जैसा व्यवहार नहीं करेगा।
मैं- भौंको हरामी कुत्ते … क्या तुम इसी तरह मेरे दास बने रहोगे?
सिद्धार्थ – हाँ, हाँ, बंद करो, ये चुभ रहा है! मैं तुम्हारा कुत्ता बनूंगा। कृपया इस कुत्ते को संतुष्ट करो! प्लीज़.
मैंने उसका लंड अपनी चूत में डलवाया जबकि उसने मेरे चूचों में अपना चेहरा धंसा दिया।
उसने सहारा लेने के लिए मेरी गांड के गाल पकड़ लिए और मेरी चूत को तेज़ तेज चोदने लगा।
मगर जिस तरह से वह शुरू करने के बाद धीमा हो गया, मैंने महसूस किया कि वह खाली होने वाला था।
मैंने उसका लंड ठीक समय पर बाहर निकाल दिया और जैसे ही निकाला उसके लंड से वीर्य की मोटी पिचकारी छूट पड़ी।
उसके पास जितना भी माल था उसने सारा बाहर निकाल दिया।
उसका कुछ हिस्सा मेरी पैंटी में गिरा और बाकी का मेरे पेट पर लगा जिसे मैंने मसल दिया।
ये सब होने के बाद अब सिद्धार्थ के पैरों में खड़े होने लायक जान भी नहीं बची थी। वह नंगी ही पास के कोने में बैठ गया और भारी भारी सांसें लेने लगा।
दूसरी तरफ मैंने उससे और अदिति से सब कुछ निकाल लिया था।
अदिति भी वहीं खड़ी थी अब तक!
पैंटी पहने बिना ही मैंने अपने कपड़े ऊपर किए और उनको ठीक किया।
जल्दी से मैंने खुद को पूरी ठीक किया और मैं वहां से निकलने लगी।
मैंने सिद्धार्थ को वहीं पर हारे हुए इन्सान की तरह नंगा बैठा छोड़ दिया।
वहां से निकलते हुए मैंने अपनी वीर्य और पसीने से सनी पैंटी को अदिति के मुंह पर फेंक दिया।
पेंटी फेंक कर मैं उसके पास से संतुष्टि भरी स्माइल करती हुई निकल गयी।
दोस्तो, आप सब लौंडों और लौंडियों को मेरी सीनियर सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी।
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मैं तुम्हारी गुलाम और रानी दोनों ही बनने के लिए तैयार हूं, जो भी तुम्हें पसंद हो।
@deshikahani2
सिद्धार्थ ने मेरी पैंटी की नोक पर चबाया लेकिन फिर अपने हाथ डाले और मेरे चूतड़ों को सहलाया।
वह मेरी पैंटी खींच रहा था लेकिन मेरी गांड को दबा रहा था और उसका आनंद ले रहा था।
मैंने फिर उसके लंड पर पांव रखा जिससे वह दर्द से चिल्लाने लगा।
मैं- चालाकी मत दिखाओ, तुम एक कमबख्त कुत्ते हो और जैसा मैं कहूँगी वैसा ही करोगे।
उसने आखिरकार मेरी पैंटी निकाली और उसको लंबी-लंबी सांसों से सूंघने लगा।
मैंने उसके सूंघने के तरीके की तारीफ की और उसके हाथों से पैंटी खींच ली।
मेरी पैंटी के बिना मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही थी।
मैंने अपनी स्कर्ट ट्राउजर को उठा लिया और उसे अपनी क्लीन शेव पसीने से तर गुलाबी चूत दिखाई, जिसमें त्वचा की दो पंखुड़ियाँ थोड़ी उभरी हुई थीं।
मैं- कैसी है यह चूत? या तुम्हें अदिति की चूत ज्यादा पसंद है?
सिद्धार्थ- बिलकुल नहीं! उसकी चूत बालों वाली है और सेक्स के दौरान बदबू छोड़ती है। उस कुतिया को चोदते हुए मैं हमेशा अपना मूड खराब कर लेता हूं।
मैं- मेरे आज्ञाकारी कुत्ते! अब तुम मेरी चूत चाट सकते हो। ये ध्यान रखना कि चूत केवल अपना रस निकाले, पसीना नहीं।
सिद्धार्थ ने अपने होंठों को मेरी चूत के अंदर धकेल दिया और मेरी जीभ चुदाई करने लगा।
मुझे उसके लिए इसे आसान बनाने के लिए अपने पैरों को अजीब तरीके से फैलाना पड़ा।
सिद्धार्थ से जो मजा मिल रहा था, मैंने तय किया कि वो अदिति को जरूर दिखे।
मैं- अब किसके पास एक बदबूदार चूत है … साली, पागल कुतिया?
मैंने अदिति की ओर देखते हुए आँखों से जताया।
सिद्धार्थ ने असमंजस में ऊपर देखा, लेकिन मैंने अपनी स्कर्ट उस पर गिरा दी। कुछ मिनटों के बाद, मैंने उसे अपनी स्कर्ट से बाहर निकाला और पूछा कि अदिति के साथ उसका रिश्ता कैसा चल रहा है।
सिद्धार्थ- ओह, मैं उस कुतिया से तंग आ गया हूँ! मैं जल्द ही उससे छुटकारा पा रहा हूं। काश मैं बहुत समय पहले आपका गुलाम बन जाता।
यह सुनकर मुझे इतना अच्छा लगा कि मैंने उसे एक बार फिर अपनी चूत चाटने को कहा।
मेरी टांगें कांप रही थीं जबकि मैंने उसकी गीली जीभ को अपनी चूत की लाइन में तेजी से प्यार किया।
मैंने थोड़ा सीत्कार किया लेकिन जगह और लोगों की वजह से अपनी भावनाओं को कंट्रोल रखा।
मैं- ओह माय! मुझे लगा कि तुम दोनों एक कमिटेड रिलेशनशिप में हो!
सिद्धार्थ- नहीं … हम दोनों अपने अपने फायदे के लिए साथ थे। हम दोनों के इरादे छिपे हैं लेकिन एक-दूसरे से प्यार करने का दिखावा करते हैं। मेरा मतलब है, वह कुतिया सोचती है कि वह मुझे प्रोमोशन पाने के लिए बहका सकती है और फिर मुझे दूसरे लड़के के लिए डंप कर सकती है। बड़ा मौका! मैं उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर रहा हूं।
जब वह बात कर रहा था तो मैं उत्तेजना को चरम पर बनाए रखने के लिए अपनी चूत को रगड़ रही थी।
लेकिन उसने जो कहा उसे सुनने के बाद, मेरी चूत ने दो छोटी फुहारों में चिपचिपा पानी निकाल दिया।
सिद्धार्थ ने मौका देखा और मेरी गीली लाल चूत में उंगली करने लगा।
मैं- आह! हां हां हां! हम्म, कुत्ते … चोदते रहो … ऐसे ही … आह्ह।
मुझे अपनी चूत के बचे हुए पानी को थोड़ा सा धक्का देकर बाहर निकालना पड़ा।
उस तेज पल के बाद मैं जोर से सांस ले रही थी और सिद्धार्थ को अपने सीने से कसकर पकड़ने की इच्छा महसूस कर रही थी।
जैसे ही मैंने अपनी बाँहों को थोड़ा ऊपर उठाया, वह समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ।
सिद्धार्थ ने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने सख्त लंड को मेरी भीगी हुई चूत से रगड़ने लगा।
उसके पसीने से तर लंड का सिरा मेरी संवेदनशील चूत को छू रहा था।
वह मेरे कोमल गालों को अपने खुरदरे हाथों से भींच रहा था और उत्तेजना से उन्हें अलग कर रहा था।
मैंने उसे अपने से दूर धकेल दिया और उसका लंड पकड़ लिया- क्या? तुम उसे सीधे इग्नोर क्यों नहीं कर देते?
सिद्धार्थ- क्या हम इस पर बाद में बात नहीं कर सकते? हाय भगवान्! जब मेरे पास समय था तो मैंने अपने लंड को अंदर क्यों नहीं धकेला?
कुछ देर की हताशा के बाद उसने बोलना जारी रखा- वह चूसने वाली कुतिया जैसी है। इससे पहले कि वह मेरे जीवन का आनंद चूस कर खत्म कर दे, मैं उससे दूर हो जाना चाहता हूँ। मैं उसे यह कहते हुए किसी दूसरी जगह पर भेज दूंगा कि यह फिलहाल अभी के लिए है। फिर, वहां का मैनेजमेंट उसे अलग अलग जगहों पर ट्रांसफर करता रहेगा।
अगर वह होशियार है, तो वह इस्तीफा दे देगी। अब प्लीज मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने दो! मुझे तुम्हारी चूत का स्वाद चखना है.
वह हताशा में गिड़गिड़ाया।
सिद्धार्थ ने अपने धड़कते हुए धड़कते हुए लंड को कसकर पकड़ लिया और मुझसे इसे देखने की भीख माँगी।
मैं उस लंड का स्वाद चखना चाहती थी इसलिए मैंने उसे पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया।
उसके पास कोई मांसपेशियों की ताकत नहीं थी और उसकी गंदी गांड ने मुझे उसके बेकार व्यवहार की याद दिला दी।
मैंने उसका लंड भींचा जो उत्तेजित हो गया और उसे साथ ही दर्द भी हुआ।
मैं- और याद रहे, मैं देखना चाहती हूं कि तुम मेरी बॉडी के लिए कितना तरस सकते हो, मैं आसानी से अपनी टांगें नहीं खोलने वाली।
सिद्धार्थ को अपने चंगुल में लेने के बाद मैं अदिति के पास गयी, उसको दूसरे तरीके से चिढ़ाने के लिए।
जब मैं उसके डेस्क पर पहुंची, मैंने देखा कि वो लैपटॉप की ब्लैक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थी।
मैं सहज रही और मैंने यह तय किया कि मैं अपनी एक कुलीग के साथ जो बातचीत करूंगी वो उसको जरूर सुनाई दे।
जब मैंने अपनी कुलीग से कहा कि मैं लंच के लिए जा रही हूं तो उसका चेहरा पीला पड़ गया।
लंच से पहले के वो घंटे अदिति के लिए बेचैनी भरे हो गए।
इस दौरान वो कई बार वॉशरूम गई।
लंच टाइम में मैं और सिद्धार्थ दोनों ही लिफ्ट के अंदर गए। मैंने देखा कि अदिति हमें देखने के बाद चौंक गई थी और वो अपने इस भाव को नॉर्मल रहते हुए छुपाने की कोशिश कर रही थी।
हम नीचे ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचे.
मगर इससे पहले कि मैं आगे जाती मैं ये देखना चाहती थी कि अदिति हमारा पीछा कर रही है या नहीं।
मैं वहीं रुक कर उसको देखने लगी।
सिद्धार्थ- सिमरन, हम यहाँ क्या कर रहे हैं? मैं बता रहा हूं; हमें छुट्टी लेकर अपने घर जाकर मजा करना चाहिए।
जब सिद्धार्थ मुझे बेवफा पत्नी बनने के लिए राजी कर रहा था उस वक्त मैं देख रही थी कि अदिति भूत बनकर सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी ताकि उसको कोई देख न ले।
जब मुझे इस बात का यकीन हो गया कि उसने हमें देख लिया है तो मैं बेसमेंट की ओर बढ़ने लगी।
सिद्धार्थ मेरे पीछे पीछे आ रहा था।
हम पार्किंग के एक कोने में गए और हमने वहां पर एक एसयूवी के पीछे अपनी जगह ले ली।
सिद्धार्थ ने मुझे मेरी गांड से पकड़ लिया और अपने होठों को मेरी गर्दन पर बेतहाशा रगड़ने लगा।
वह इतना उत्तेजित हो गया कि उसने अपना लंड मेरी जाँघों से कस रगड़ना शुरू कर दिया।
हर समय वह फुसफुसा रहा था कि वह मुझे कितना चाहता है और वह चीजें जो वह मेरे साथ करना चाहता है।
जब उसने मेरी कमीज का बटन खोलने की कोशिश की तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उससे कहा कि यह कोई तरीका नहीं है।
मैं- जैसा कि मैंने कहा, यह इतना आसान नहीं होने वाला है। मैं चाहती हूं कि तुम इसे मेहनत से पाओ, न कि इसे मुफ्त में लो।
सिद्धार्थ मेरी चूत में अपना लंड डालने के लिए मरा जा रहा था।
जब मैंने उसे रोका तो वह बेचैन हो गया और हताश आदमी की तरह अपने बाल खींचने लगा।
मैं उसके शरीर की गर्मी को महसूस कर सकती थी और उसके व्यवहार से काफी घबराया हुआ था वो!
मुझे डर था कि अगर मैंने उसे कंट्रोल नहीं किया तो वह गुस्से में आ सकता है।
मैं- शांत हो जाओ, डार्लिंग! मैं तुम्हें इस कार को उठाने के लिए नहीं कह रही हूं। बस मुझे दिखाओ कि तुम इस बॉडी की कितनी तारीफ करते हो। मुझे दिखाओ कि मेरे सीनियर होने के बावजूद, तुम मेरे हुक्म मानोगे। क्या तुम मेरे दास बनने को तैयार हो?
ये शब्द कहते ही मेरी नाक के सिरे से पसीने की बूंदें टपकने लगीं।
उस जगह को चुदाई के लिए चुनना सबसे खराब निर्णय था लेकिन उस तेज कामुक गर्म क्षण में, हम दोनों में से किसी ने भी परवाह नहीं की।
सिद्धार्थ- सिमरन, मैं तुम्हारे सभी हुक्म मानूंगा। मुझे बताओ, मुझे बताओ कि तुम मुझसे क्या चाहती हो?
जब मैं सिद्धार्थ की हालत का आनंद ले रही थी, मैंने देखा कि अदिति हमसे करीब 15 गज दूर उस खंभे के पास खड़ी थी।
मैं उसके पार्किंग लॉट के दायीं ओर से आने की उम्मीद कर रही थी।
इसके बजाय उस चालू कुतिया ने दूसरा रास्ता अपनाया था।
जैसे ही मैंने उसका उदास सा चेहरा देखा, मैं उत्साहित हो गयी।
निर्दयी डॉमीनेटरिक्स- मेरे अंदर के अस्थिर अहंकार को एक ही समय में दो लोगों को सबक सिखाने का मौका मिला।
मैं- सिद्धार्थ, मैं तुम्हारे साथ कुत्ते जैसा व्यवहार करना चाहती हूं। तो, आओ, अपने कपड़े उतारो और मेरे सामने झुको जैसे तुम अभी कर रहे हो।
उसने मेरे आदेश के अनुसार किया और जमीन पर घुटने टेक दिए।
उसका पसीना लगातार कंक्रीट के फर्श पर टपक रहा था।
लेकिन उस हालत में भी उसका लंड तना हुआ था और उसका तनाव साफ उसके कपड़ों में दिख रहा था।
मैंने अपनी पसीने से तर शर्ट का बटन खोल दिया और अपनी भीगी हुई ब्रा को खींच लिया ताकि मेरे सुनहरे और रसीले चूचों को उजागर किया जा सके।
इसने मुझे बेहतर महसूस कराया और उसके लंड का तनाव भी बढ़ता गया।
फिर मैंने उसे हुक्म दिया कि वह अपने मुंह से मेरी पैंटी खींचे और मेरी पसीने से तर चूत को चाटे।
उसने जोश के साथ अपनी नाक को मेरी स्कर्ट की में धकेल दिया।
मैं धीरे से कराह उठी, जब उसकी नाक के सख्त सिरे ने मेरी उत्तेजित चूत के होंठों को छुआ।
मगर सिद्धार्थ मेरी पैंटी खींचने की बजाय मेरी चूत चाटने लगा।
मैं उसके गाल पर जोर से थप्पड़ मारते हुए- मेरी चूत चाटना बंद करो! किस तरह के कुत्ते हो तुम? मैंने तुमसे कहा था कि मेरी पैंटी बाहर खींचो।
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