कहो दिल से 🌹💞
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मेरे जज्बात-ए-दिल से मेरी दुनिया बेखबर नही हैं फिर भी न जाने क्यों उसे मेरी फिकर नही हैं..!!
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तुझे खुश देखने के लिए मैं खुदके बुरे हालत करलूँ
खुदा की क़सम मेरे कभी जहन में नहीं आया की मैं कुछ ग़लत तेरे साथ करलूँ
हर वक़्त इंतज़ार रहता है तेरी आवाज़ सुने दिल करता है हर वक़्त तुझसे बात करलूँ
तुम मुझसे नहीं मिलोगे ये मैं जानता हूँ फिर सोचता हूँ अब मैं काबू मेरे जज़्बात करलूँ
मैं क्या करूँ दिल तेरा दीदार चाहता है दिल चाहता है की मैं तुझसे मुलाक़ात करलूँ
खुदा करे तू मेरे सामने बैठी रहे मैं तुझे देखता हुआ दिन से रात करलूँ....
| 2 | तेरी साँसों की ख़ुशबू में ठहर जाऊँ मैं तेरी बाँहों की दुनिया में बिखर जाऊँ मैं तेरी आँखों का काजल मेरी तक़दीर बने तेरे होठों की हँसी का ही फ़क़ीर बनूँ मैं
तेरे माथे को चूमूँ तो दुआ हो जाए तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव में सुबह हो जाए तेरे नाम से शुरू हो मेरी हर दास्ताँ तेरे नाम पे ही आकर रुके हर दास्ताँ
तू जो सीने से लगा ले तो जहाँ मिल जाए इश्क़ क्या चीज़ है जीने का सबब मिल जाए तेरे साथ ही हर शाम सुहानी कर दूँ अपनी हर साँस तेरी ही निशानी कर दूँ... | 33 |
| 3 | तेरे ख़यालों में ऐसा डूबूँ सुबह से शाम हो जाए
कर दूँ ऐलान ज़माने में तू मेरी सरेआम हो जाए
तू रखे हाथ ताजमहल पर और सातों अजूबे तेरे
नाम हो जाएँ
क्या बारूद क्या असला क्या खतरा
तू अगर उठा दे अपनी नज़रें तो सारे हथियार
नाकाम हो जाएँ... | 49 |
| 4 | तेरी मोहब्बत में किताबें लिख डाली तेरी याद में तेरी यादें लिख डाली
मेरी किताबों में गूंजती थी खामोशी मैंने उसमें तेरी बातें लिख डाली
अपने शहर के सुनसान रास्तों पर मैंने तेरी - मेरी मुलाकातें लिख डाली
अब इस ग़ज़ल को ग़ज़ल भला कौन कहे मैंने इस में अपनी चाहत लिख डाली
अब लिखने को बाकी और क्या रह गया है मैंने मोहब्बत की दास्तानें लिख डाली
वैसी करनी थी मुझे तुमसे शिकायतें मगर फिर भी तेरी तारीफें लिख डाली... | 63 |
| 5 | सुनो ना
अगर होना चाहूँ तेरा तुम होने दोगी क्या
अगर रोना चाहूं तेरे पास आके रोने दोगी
क्या
चैन नहीं मिल रहा मुझे अब कही पे
तुम अपनी बाहों में चैन से रहने दोगी क्या... | 73 |
| 6 | इश्क़ के बाजार में हुस्न का मेला रह गया
लाखों की भीड़ में दिल अकेला रह गया
दिखावा करने वाले ले गए अपनी मोहब्बत
सच्चा प्यार करने वाला हर इंसान अकेला रह गया... | 91 |
| 7 | तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून
मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है... | 105 |
| 8 | गुल कहूं तो खुशबू बन कर बिखर जाओगी चांद कहूं तो रातों में उतर जाओगी
बारिश कहूं तो रूह को भिगो जाओगी ख्वाब कहूं तो पलकों में ठहर जाओगी
नज़्म कहूं तो अल्फ़ाज में ढल जाओगी दुआ कहूं तो रब की रहमत बन जाओगी
नूर कहूं तो हर जर्रे में चमक जाओगी साँस कहूं तो मेरी रूह में बस जाओगी
सोचा हर नाम तुम पर छोटा पड़ जाएगा चलो तुम्हारा नाम सुकून ही रख दूं
जब जब याद आओगी हर बार होठों पर मुस्कुराहट छोड़ जाओगी... | 115 |
| 9 | वो फूलों की तरह नाज़ुक हवाओं सी प्यारी है
मेरी हर ख़ुशी से बढ़कर उसकी ज़िम्मेदारी है
मैं लिखूं भी तो कैसे उसकी तारीफ के किस्से
मेरी हर ग़ज़ल से खूबसूरत उसकी एक मुस्कान
प्यारी है... | 101 |
| 10 | होने थे जितने खेल मुकद्दर के हो गए हम टूटी नाव ले कर समंदर के हो गए
खुशबू हमारे हाथों को छू कर गुजर गई हम फूल सब को बांट कर पत्थर के हो गए... | 123 |
| 11 | इतनी पराई हो गयी है वो
गैरों से पूछती है कैसा है वो... | 127 |
| 12 | जरा सा अंधेरा क्या हुआ वो साये भी साथ छोड़ गए
जो कल तक रौशनी में वफादारी की कसमे खाते थे... | 132 |
| 13 | लाऊँ कहा से कुछ ऐसा सबूत की यकीन हो
तुम्हे
दिल ज़िगर नज़र होश सब तो तेरी कैद में है... | 134 |
| 14 | मैं वादे वो नहीं करता जो हवाओ में बिखर जाए
मेरी हैसियत के हर दायरे में तुम मुझे अपने साथ ही पाओगे... | 147 |
| 15 | कलम थोड़ी कमजोर है हमारी तारीफे तुम्हारी एक साथ नहीं लिख पाएंगी
अपनी आँखों से कहो जरा कम इतराएं इन्हें पता है शुरुआत इन्हीं से की जाएंगी... | 146 |
| 16 | बरबादी रांझे की हुई थी हीर की नहीं
मसला पैसे का था तकदीर का नहीं
इश्क हमने भी किया था एक रानी से
बस भूल गए थे
रानी राजा की होती है फकीर की नहीं... | 178 |
| 17 | किन शब्दों में लिखूं तेरी अहमियत
बस तू समझ ले तेरे बिना कुछ अच्छा
नहीं लगता... | 164 |
| 18 | उस को देख लूँ तो भूख मिट जाती है मेरी
मेरी आँखों का रिज़्क है मेरे महबूब का चेहरा... | 182 |
| 19 | मै वो नमक हूं जो
सीधा जले पर लगता
हैं... | 188 |
| 20 | ऐसा नहीं की पाव में छाले नहीं रहे
तकलीफ़ है की देखने वाले नहीं रहे... | 193 |
