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Bhai yaaarrr yee modi aur modi ke paltu kutaa dekh itna chidhh ataa twitter open karo usii ka contain dikhtaa ha sala abhi tak life itna nafrat kisi se nhi hua jitna BJP party se hua
Abhi joo iss Sarakar ko support karega uss se bada Andhbhakt koi Nhii hoga
मामला क्या है?
ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी (GST) लगाने को लेकर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का बड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा टैक्स विवाद माना जा रहा है।
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पहले सरकार की स्थिति क्या थी?
पहले केंद्र सरकार बार-बार सुप्रीम कोर्ट में कहती रही थी कि—
“सट्टा और जुआ” (Betting & Gambling) संविधान के राज्य सूची (State List) का विषय है।
यानी इस पर कानून बनाने का अधिकार राज्यों का है, न कि केंद्र का।
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अब सरकार ने क्या बदला?
2025 में Promotion & Regulation of Online Gaming Act (PROGA) पास होने के बाद, केंद्र सरकार ने अचानक अपनी दलील बदल दी है।
अब सरकार कह रही है कि ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग यूनियन लिस्ट (Union List) में आते हैं।
यानी इस पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार का है, क्योंकि इसका असर पूरे भारत और भारत के बाहर तक जाता है।
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क्यों हुआ बदलाव?
12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की लंबी सुनवाई हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
25 अगस्त को सरकार ने अतिरिक्त हफ़्ता माँगा ताकि नई दलीलें पेश कर सके।
1 सितंबर को सरकार ने कहा कि PROGA कानून आने के बाद अब यह मामला सिर्फ राज्यों का नहीं है, बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर डालता है, इसलिए केंद्र को अधिकार है।
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गेमिंग कंपनियों की दलील:
बड़ी कंपनियाँ (Gameskraft, Delta Corp, AIGF, EGF, FIFS आदि) और उनके वकील कह रहे हैं कि—
स्किल-बेस्ड गेम्स (जैसे रमी, फैंटेसी स्पोर्ट्स, शतरंज आदि) को “जुआ और सट्टा” नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले (RMDC और K.R. Lakshmanan केस) भी यही कहते हैं कि कौशल-आधारित खेल जुआ नहीं है।
सरकार जो टैक्स माँग रही है, वह कानून और संविधान दोनों के हिसाब से ग़लत है।
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उद्योग का आरोप सरकार पर:
ऑनलाइन गेमिंग उद्योग का कहना है कि सरकार अपनी दलीलें बदलकर राज्यों से अधिकार छीनना चाहती है।
खासकर इसलिए क्योंकि PROGA कानून को लेकर कई जगह (जैसे कर्नाटक हाईकोर्ट) में अभी चुनौतियाँ लगी हुई हैं।
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अब दांव पर क्या है?
अगर सुप्रीम कोर्ट सरकार के पक्ष में फैसला देता है, तो केंद्र सरकार को ऑनलाइन गेमिंग पर सीधा नियंत्रण और टैक्स लगाने का पूरा अधिकार मिल जाएगा।
अगर कंपनियों का पक्ष मज़बूत माना गया, तो “गेम ऑफ स्किल” (Skill-based Games) को जुआ नहीं माना जाएगा और टैक्स माँगें रद्द हो सकती हैं।
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नतीजा:
यह फैसला सिर्फ टैक्स विवाद (2.5 लाख करोड़ रुपये) को तय नहीं करेगा, बल्कि यह भी ठहराएगा कि भारत में ऑनलाइन गेमिंग पर कानून बनाने का असली हक किसका है—राज्यों का या केंद्र का।
Madarchod yee Gaming bill ke liye itna meeting karwa raha jaisa madarchod ke liye isse bada koi issue nhi ha wahaa re madarchod ka bachaa
Madarchod jo maan hota woo karta hai sala kahi 10 saal baad North Korea Nhii banaa dee ye randi ki pilla
Bhai d11 football ka match bhi add kar do free wala contest me private contest bana ke khelte 😢
Madarchod kon se neta ko vote de Samaj me Nhii ataa ek se badh ek gandu neta bhare pade hai India me sala Amir hota to india ko choor kar chal jata .
Dil se dhyaabaad modi ji itna baad Devlopment karne ke liye abb to America Russia Japna china sbb modi ji isharo par nachega whaa modi ji wahaa
Issi sbb ke karna lagg raha tha India ke youth ko job Nhii mil raha thaa abb to sbb padhai par dhyan de raha hoga modi ji pass itna job hai India har yuva ko job milega
Gaming bill pass ke baad kya abb india ka youths ek dum sudhar gaya koi nash wagera nhii hota abb to koi bhi suside bhi nhi karenge thank you modi ji❤️👏.
