स्त्री के कलम से ✍️❣️
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✹अपनी रचना भेजे @stri_ke_kalam_se ✹ग्रुप मेंबर्स ✹नीलम सिंह ✹रुबिका खातून ✹प्रीति ✹सरिता चौहान ✹नेहा गुप्ता Aurat kitni khubsurat hai, ye uski surat Taye nhi karti, ye mard ki pasand aur khawahish taye karti hai_______
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सुन्दरता के ओना परिभाषा बहुत विशाल होइत छैक आ मिथिला मे लाख सुनराइ के एक गोराइ कहल गेल छैक मुदा सुन्दरता में हमरा हिसाबे आँखि के सुन्दरता बहुत पैघ बात होइत छैक। पैघ पैघ आँखि, अपना सभक ओहिठाम तऽ डोका जकाँ आँखि लोक कहैत छैक मुदा हिन्दी में मृगनयनी तऽ किदैन कहाँदैन शब्द सभ कहैत छैक आ ओहि झमेला मे हमरा सभके नहिं पड़वाक अछि मुदा आँखि के सुन्दरता वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण होइत छैक। अहाँ सभ के की लगैत अछि...?
होंठ है रसीले निगाहें जानसार हैं,
तेरे इश्क में ये पागल और बीमार हैं,,,
तुम ही हो जो इस दिल को भा गई,
वर्ना तेरे जैसे तो वहां हजारों हजार है,,,
अंजली 🖋️
रिश्तों में सबकी हिस्सेदारी अच्छी लगती है
उन्नत भाल, रौब, खुद्दारी अच्छी लगती है।
व्यक्ति की पहचान तो व्यक्तित्व से होती है।
रेशमी कढ़ाई,तो टाट पर भी अच्छी लगती है।
✍️✍️वन्दना शुक्ला
Madhu✍️
#मैं_हर_किसी_पर_नहीं_मरती,
#मेरे_लिए_तुम_ही_सर्वश्रेष्ठ_हो,
#और_तुम_हजारों_में_नहीं_प्रिये,
#करोड़ों_में_एक_हो...!!
काजल श्रीवास्तव 🖋️
तू दूर है मुझसे और पास भी है,
तेरी कमी का अह्सास भी है 💋
दोस्त तो हमारे लाखों है इस जहां में, 💋
पर तू प्यारा भी है खास भी है 💋
तेरी मित्रता का हमे गर्व है ।।
कविता गुप्ता 🖋️
चलती रही वो लहर हूं,
थकती नहीं वो पहर हूं,
डूबती हुई साँझ नहीं,
उजालों सजी सहर हूं
ममता शर्मा 🖋❤
तेरी ख्वाईशों के लिए मुझे दूर जाना पड़ेगा,
मैने जो देखा है ख़्वाब वो मिटाना पड़ेगा...
मिलता नहीं अब तुम्हें वक्त रहबर के लिए,
पर तेरे इंतजार में आँखों को बिछाना पड़ेगा...
तुम बदल गए या प्यार का मौसम बदल गया,
पर वफा का रस्म निभाना पड़ेगा....
हमारे हाथों में नहीं है तेरे नाम की लकीरें,
पर तक़दीरो से तुम्हें चुराना पड़ेगा...
तुम हो उगता सूरज और मैं ढलती शाम,
कभी तो तुमसे बिछड़ के जाना पड़ेगा....
चंद फूल खिले जो मुहब्बत के,
उन्हें वफा के मजार पर चढ़ाना पड़ेगा....
फासला हर मिट जायेगा,
रूह को रूह से मिलने आना पड़ेगा....
जिंदगी तो बेवफा हैं, मौत ही सच हैं,
इस बंधन को छोड़ कर एक दिन जाना पड़ेगा...
🖋️ अशिरता
तेरी नशीली आंखों के नशे से, दिल बेकरार क्या हुआ
लोगों ने शराबी होने का खिताब दे दिया
सुप्रिया शर्मा 🖋️
मेरे किरदार में यही तो खराबी है...
न बनावट है••••न अदाकारी है.....!!
Vasundhara Kahar 🖋️
✍️✍️अपनी प्रेरणा हम स्वयं हैं✍️✍️
बेशक़!
तू हो जा अकेला इस दुनियां में...
पर!
न करना समझौता कभी अपने सपनो के साथ...
बहने देना नदियों के भाँति...
अपने स्वछंद विचारों को....
मत सिमटने देना उसे कूप की भाँति....
कल-कल,छल-छल करते झरनों के मानिंद...
बिखरने देना अपनी मधुर आवाज़ को....
तुम क्या चाहते हो किसी को समझाने में
मत बर्बाद करना अपना वक़्त...
बस!
कोशिश करते रहना,कभी हार मत मानना,
फिर!
देखना एक दिन दौर तुम्हारा होगा!!
उस वक़्त!
लोगों के प्रशनों का काफ़िला तुम्हारे इर्द-गिर्द होगा!
बस!
इक ही सवाल हर जुबां पे होगा!
कि....
यह प्रेरणा आपको कहाँ से मिली...?
उस वक़्त...
स्वयं के कंधे पर हाथ रख उसे थपथपाना..
स्वयं के विश्वास को सराहना....
क्योंकि....
अपनी प्रेरणा आप स्वयं हो.....
दुनियां साथ छोड़ सकती है...
लेकिन..
आपके अंदर का साथी.....
आपको...
कभी अकेला नही छोड़ सकता...
इसलिए...
स्वयं की ताक़त को पहचानों...
और...
निरन्तर बढ़ते रहो मंज़िल की ओर...
जिसका इन्तज़ार मंज़िल को भी है...
बस!
बढ़ते जाओ और सिर्फ बढ़ते जाओ!!
अब कहां आता है वो
सावन
अब कहां लगते हैं वो
झुलें
अब कहां आती है कोयल वो
बागों में
अब मैं भी खोयी सी रहती हूं
ख्यालों में 🖋❤️ #preetirajput
जब स्त्री ने एक पुरुष को चुना ...
पुरुष ने कहा वो प्रेमी है
स्त्री मुस्कुराकर आगे बढ़ गयी। ऐसा तो हर एक कहता है।
उसने कहा वो जीवन साथी है
स्त्री ने अपने बगल की जगह खाली कर दी वो प्रतिबध्द थी हमेशा से उसके प्रति ।
उसने कहा वो मित्र है
स्त्री खिलखिला उठी , दौड़कर उसे गले लगाया और देर तक उसके साथ हँसती रही , उसे मित्र ही तो चाहिए था ।
पुरूष ने कहा वो ऐसा प्रेमी है जो सदा मित्र बना रहेगा ,कभी उसका स्वामी नहीं बनेगा , उसने कहा स्त्री के निर्णय स्त्री के ही होंगे और वो निष्ठा से स्त्री के प्रेमसमर्पण की प्रतीक्षा करेगा।
स्त्री ने आगे बढ़कर उसका माथा चूम लिया। स्वयं को उसकी बाहों में निश्चिंत छोड़ दिया , उसे नींद आ रही थी औऱ उस पुरूष की उंगलियाँ स्त्री के बालों को सहला रही थीं।
स्त्री नम आंखों से उस पुरूष के आलिंगनबद्ध लिपटी सोती रही । ये प्रणय विश्राम था और अंतहीन प्रेम का आदर भाव भी।
यही था दोनों के अंतहीन समर्पण का प्रारंभ ..
यही वो प्रणय निवेदन था , यही वे प्रथम अंतरंग पल थे जिसकी प्रतीक्षा स्त्री को सदा से थी .....,✍️
सितम्बर एक खामोश महिना ... मेघगुच्छ की विदाई और हलकी हलकी तपिश सहता बिना उफ्फ किये अपने कर्तव्य निभाता….एक न समझ आने वाली फुसफुसाहट और खालीपन लिए यह कलैन्डर का वह हिस्सा है जैसे कि काली चींटी का पहाड़ पर चढ़ना। धीरे-धीरे मंजिल की ओर कदम बढ़ाता यह महिना ठिठका हुआ सा लगता है। पूर्वनिश्चित पितृ पक्ष के कर्तव्य निभाता जिसमे कोई उल्लास नही है
ऐसा लगता है जैसे थकी हुई शाम को रंगोली बनाने का काम दे दिया गया हो। अगस्त मे मित्रता दिवस और , रमाबंधन का शोर और अक्टूबर में नवरात्री व दीवाली का कोलाहल, दोनों के बीच मे मूक सितम्बर…..शोर को अलग-अलग हिस्सों में बांटता, ठीक उस तरह से जैसे हरे वृक्ष पर एकमात्र एक सूखी पत्ती का होना जिसे पता है उसे जल्दी ही वृक्ष विहिन होना है।
खुद को खोजना अनंत पुनरावृत्ति करता अपनी ही प्रतिध्वनि से बातें करने वाला सितम्बर मुझे उस मासूम बच्चे की तरह नजर आता है जिसके वीकली टेस्ट में नंबर कम आये हो। शायद उस व्यक्ति की तरह भी जिसकी आंखों में नींद भरी हो और उसे जागना भी जरूरी है यह वह विकल्प है जिसे खाली जगह को भरना है मगर इसका होना अप्रभावी है।
वाष्पित होती धूप अपनी खुशबू छोडती है जिसे सितम्बर जज्ब करके ठंडक में बदल देता है। मैंने न जाने सितम्बर को कितने खत लिखे मगर उसने एक का भी जवाब नहीं दिया कुछ तो कहते दोस्त। तुमने शिक्षक दिवस मनाया तुमने हिन्दी दिवस मनाया फिर क्यों खामोश हो। तुमने अपनी अलग राह बनायी है तुम साल के सफर का नवा कदम हो। तुम्हारी महत्ता उतनी ही है जितना एक शिशु नौ महीने कोख में रहकर दुनिया में आकर आंखें खोलकर मुस्कराता हो। तुम्हारी भी अपनी पहचान है और ज़िम्मेदारी भी कि तुम्हे अपनी गूंज खुद बनना है चाहे प्रतिध्वनि या प्रतिनिधि बनकर।
मेरे लफ़्ज़ों में....
✍️
आते हो जब तुम ख्यालों में,
मन में मीठी तरंगे उठने लगती हैं।
दिल की हर एक धड़कनों के संग,
आहत तुम्हारे नाम की होती है सनम।
❣️
नजरों से वार करना,
हमें भी आता है जनाब..
बस डरते हैं ,,
कहीं निशाना दिल पर ना लग जाए...
ममता द्विवेदी 🖋️
अगर वो पूछ ले मुझसे की किस बात का गम है
तो फिर किस बात का गम है अगर वो पूछ ले मुझसे
सच्चा हो तो हर रिश्ता निभाया जा सकता है,
झूठ से तो बस ख़्वाब दिखाया जा सकता है !
काग़ज़ से तुम दरिया पर नहीं कर सकते,
काग़ज़ से बस नाव बनाया जा सकता है !
@stri_ke_kalam_se
तेरे बगै़र मुकम्मल नहीं कोई महफ़िल..!
तेरा ख़्याल मेरी हर ख़ुशी में शामिल है...!!❤️
सोनिया 🖋️
