en
Feedback
⃪〬 ꯭🌸꯭𝗗𝗔𝗥𝗗 𝗘 𝗦𝗛𝗔𝗬𝗔𝗥𝗜🥀‌ٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖ⃝꯭ꜛ¤

⃪〬 ꯭🌸꯭𝗗𝗔𝗥𝗗 𝗘 𝗦𝗛𝗔𝗬𝗔𝗥𝗜🥀‌ٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖٖٖٖٖٖٜٖ⃝꯭ꜛ¤

Open in Telegram

ᴊᴏɪɴ ꜰᴏʀ ꜱʜᴀʏᴀʀɪ ᴅᴍ ꜰᴏʀ ᴘᴏꜱᴛ ᴘᴇʀᴍɪꜱꜱɪᴏɴ ⟶͇̽  @aishu_159 ᴀʟʟᴏᴡᴇᴅ ᴏɴʟʏ ᴘᴏᴇᴛʀʏ . ꜱʜᴀʏᴀʀɪ

Show more
751
Subscribers
No data24 hours
-27 days
-430 days
Posts Archive
बटोरने दो चांद को तारीफे बाकी सब से तुम अपनी खींची हुई फोटो मेरे पास भेजा करो...

तुझे खुश देखने के लिए मैं खुदके बुरे हालत करलूँ खुदा की क़सम मेरे कभी जहन में नहीं आया की मैं कुछ ग़लत तेरे साथ करलूँ हर वक़्त इंतज़ार रहता है तेरी आवाज़ सुने दिल करता है हर वक़्त तुझसे बात करलूँ तुम मुझसे नहीं मिलोगे ये मैं जानता हूँ फिर सोचता हूँ अब मैं काबू मेरे जज़्बात करलूँ मैं क्या करूँ दिल तेरा दीदार चाहता है दिल चाहता है की मैं तुझसे मुलाक़ात करलूँ खुदा करे तू मेरे सामने बैठी रहे मैं तुझे देखता हुआ दिन से रात करलूँ....

तेरी साँसों की ख़ुशबू में ठहर जाऊँ मैं तेरी बाँहों की दुनिया में बिखर जाऊँ मैं तेरी आँखों का काजल मेरी तक़दीर बने तेरे होठों की हँसी का ही फ़क़ीर बनूँ मैं तेरे माथे को चूमूँ तो दुआ हो जाए तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव में सुबह हो जाए तेरे नाम से शुरू हो मेरी हर दास्ताँ तेरे नाम पे ही आकर रुके हर दास्ताँ तू जो सीने से लगा ले तो जहाँ मिल जाए इश्क़ क्या चीज़ है जीने का सबब मिल जाए तेरे साथ ही हर शाम सुहानी कर दूँ अपनी हर साँस तेरी ही निशानी कर दूँ...

कि मुर्शद तुम्हारे साथ से कई बेहतर… . मुझे मेरा अकेला पण लगता है… . बडा लाजवाब तौफा दिया है तुमने… . @Sanaya_10_13

तेरे ख़यालों में ऐसा डूबूँ सुबह से शाम हो जाए कर दूँ ऐलान ज़माने में तू मेरी सरेआम हो जाए तू रखे हाथ ताजमहल पर और सातों अजूबे तेरे नाम हो जाएँ क्या बारूद क्या असला क्या खतरा तू अगर उठा दे अपनी नज़रें तो सारे हथियार नाकाम हो जाएँ...

तेरी मोहब्बत में किताबें लिख डाली तेरी याद में तेरी यादें लिख डाली मेरी किताबों में गूंजती थी खामोशी मैंने उसमें तेरी बातें लिख डाली अपने शहर के सुनसान रास्तों पर मैंने तेरी - मेरी मुलाकातें लिख डाली अब इस ग़ज़ल को ग़ज़ल भला कौन कहे मैंने इस में अपनी चाहत लिख डाली अब लिखने को बाकी और क्या रह गया है मैंने मोहब्बत की दास्तानें लिख डाली वैसी करनी थी मुझे तुमसे शिकायतें मगर फिर भी तेरी तारीफें लिख डाली...

सुनो ना अगर होना चाहूँ तेरा तुम होने दोगी क्या अगर रोना चाहूं तेरे पास आके रोने दोगी क्या चैन नहीं मिल रहा मुझे अब कही पे तुम अपनी बाहों में चैन से रहने दोगी क्या...

इश्क़ के बाजार में हुस्न का मेला रह गया लाखों की भीड़ में दिल अकेला रह गया दिखावा करने वाले ले गए अपनी मोहब्बत सच्चा प्यार करने वाला हर इंसान अकेला रह गया...

तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है...

वो फूलों की तरह नाज़ुक हवाओं सी प्यारी है मेरी हर ख़ुशी से बढ़कर उसकी ज़िम्मेदारी है मैं लिखूं भी तो कैसे उसकी तारीफ के किस्से मेरी हर ग़ज़ल से खूबसूरत उसकी एक मुस्कान प्यारी है...

. चाँद गया अब ना बुखार लग ना उसकी याद का कोई खुमार लग नज़र मिली चौराहे पर तो इश्क ए बेखबर तुझे ना कोई मेरी हाल ए खबर लग तेरी नज़र मुझपर आए जब तलक मेरी सुरत ए निगाह पर नकाब लग इक अंदाज़ इश्क मे मेरा भी हो "सनाया" ज़िद ए तिर अब तुझको लग चाँद गया अब ना बुखार लग ना उसकी याद का कोई खुमार लग @Sanaya_10_13✨ .

होने थे जितने खेल मुकद्दर के हो गए हम टूटी नाव ले कर समंदर के हो गए खुशबू हमारे हाथों को छू कर गुजर गई हम फूल सब को बांट कर पत्थर के हो गए...

इतनी पराई हो गयी है वो गैरों से पूछती है कैसा है वो...

जरा सा अंधेरा क्या हुआ वो साये भी साथ छोड़ गए जो कल तक रौशनी में वफादारी की कसमे खाते थे...

लाऊँ कहा से कुछ ऐसा सबूत की यकीन हो तुम्हे दिल ज़िगर नज़र होश सब तो तेरी कैद में है...

मैं वादे वो नहीं करता जो हवाओ में बिखर जाए मेरी हैसियत के हर दायरे में तुम मुझे अपने साथ ही पाओगे...

कलम थोड़ी कमजोर है हमारी तारीफे तुम्हारी एक साथ नहीं लिख पाएंगी अपनी आँखों से कहो जरा कम इतराएं इन्हें पता है शुरुआत इन्हीं से की जाएंगी...

बरबादी रांझे की हुई थी हीर की नहीं मसला पैसे का था तकदीर का नहीं इश्क हमने भी किया था एक रानी से बस भूल गए थे रानी राजा की होती है फकीर की नहीं...

किन शब्दों में लिखूं तेरी अहमियत बस तू समझ ले तेरे बिना कुछ अच्छा नहीं लगता...

उस को देख लूँ तो भूख मिट जाती है मेरी मेरी आँखों का रिज़्क है मेरे महबूब का चेहरा...