Pankaj Magadh
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Draft Statutes for Appointment of Assistant Professor including contractual appointments of Assistant professor, in the Universities of Bihar, 2026.pdf
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आप सबके प्रेम और सपोर्ट से पंकज मगध की फैमिली 15000 प्लस हो चुकी है और आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद!
एक लड़का जिसका कोई अस्तित्व नहीं कोई पहचान नहीं एक नई पहचान पंकज मगध चैनल से शुरू होकर आज एक फैमिली बनी है मैं आप सभी का हाथ जोकर शुक्रिया अदा करता हूं जो मेरा काम है मैं हमेशा करता रहूंगा
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मुसल्लहपुर हाट में रहने वाले एक व्यक्ति का कहना है कि ....
रोशन आनंद ऑफलाइन पढ़ाई पर ज्यादा फोकस करते हैं। ऑफलाइन में सिर्फ बिहार पुलिस और वन डे परीक्षाओं के लिए उनके 3 सेंटरों पर लगातार 12 घंटे तक क्लास चलती है।
इसमें कोई शक नहीं है कि ऑनलाइन में खान सर का मुकाबला करना बहुत मुश्किल है। लेकिन ऑफलाइन में ग्यान बिंदु ने खान सर को उनके ही कैंपस में रहकर टक्कर दी है।
कैसे टक्कर दी, यदि आप मॉडर्न हिस्ट्री खान सर से पढ़ेंगे, तो वह लगभग 30 से 40 घंटे में पूरी हो जाती है। वहीं ग्यान बिंदु में उसी विषय के 70 से 80 घंटे के लेक्चर होते हैं।
लेक्चर के घंटे बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि सर अपनी थ्योरी तो पढ़ाते ही हैं, उसके बाद अलग-अलग भर्तियों और परीक्षाओं के प्रश्न भी करवाते हैं। जिन टॉपिक्स के बारे में उन्हें लगता है कि उन्हें पहले नहीं पढ़ाया गया है, उन्हें वे हर चैप्टर में अलग से "मिसलेनियस" हेडिंग बनवाकर पढ़ाते हैं।
मतलब ऑफलाइन में वे लाजवाब मेहनत करते हैं। साथ ही छात्रों से रोज होमवर्क भी पूछते हैं। कभी गुस्सा आ जाए तो लाठी भी चला देते हैं छात्रों पर, लेकिन वह अलग बात है।
यदि किसी को इस बात पर विश्वास नहीं है, तो उनका ऑनलाइन कोर्स लेकर देख लीजिए और खान सर का भी कोर्स देख लीजिए। फिर प्रश्नों को हल कीजिए, आपको खुद अंतर समझ में आ जाएगा।
और आपको यह भी बता दूँ कि ग्यान बिंदु 2023-24 से चर्चा में आया है, जबकि खान सर 2020-21 से ही प्रसिद्ध हैं।
साथ ही दोनों एक ही कैंपस में भी हैं।
यदि एक ही कैंपस में रहकर ग्यान बिंदु ने खान सर को टक्कर दी है, तो इसका मतलब है कि उन्होंने असाधारण मेहनत की है।
क्योंकि एक बड़ी मछली के पास छोटी मछली का बढ़ना बहुत कठिन होता है, लेकिन रोशन आनंद ने यह करके दिखा दिया।
और दूसरी बात, यदि आज पूरे पटना में पढ़ाई के मामले में कोई खान सर को टक्कर दे रहा है, तो वह ग्यान बिंदु ही है।
मेरे अनुसार यह बात खान सर को हजम नहीं हो रही है।
खान सर चाहते हैं कि किसी भी तरह ग्यान बिंदु उनके कैंपस से बाहर निकल जाए, ताकि वह वाली बिल्डिंग भी उनके पास आ जाए।
लेकिन ग्यान बिंदु उस कैंपस को छोड़ना नहीं चाहता है। और खान सर पूरी ताकत लगा रहे हैं। इसी वजह से कैंपस के मालिक से भी बयानबाजी करवाई गई है।
यदि आप उस कैंपस में गए होंगे, तो आपने देखा होगा कि वहाँ की अधिकांश बिल्डिंग खान सर ने ले रखी है।
इसीलिए खान सर चाहते हैं कि किसी भी तरह ग्यान बिंदु इस कैंपस से निकल जाए।
एक कार्यक्रम से शुरू हुआ यह विवाद -
सबसे पहले खान सर ने ग्यान बिंदु के मुख्य बोर्ड के ऊपर बिहार पुलिस कार्यक्रम का बैनर लगवा दिया।
इस बैनर की कहानी भी मैं आपको विस्तार से बताता हूँ।
खान सर ने बिहार पुलिस का एक कार्यक्रम आयोजित किये थे। उस कार्यक्रम के लिए पूरे कैंपस को सजाया गया और जगह-जगह बैनर लगाए गए। ग्यान बिंदु के मुख्य बोर्ड के ऊपर भी बैनर लगा दिया गया।
शुरुआत में इससे कोई परेशानी नहीं थी।
लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अगले दिन वह बैनर हटा देना चाहिए था। इसके बावजूद कार्यक्रम खत्म होने के दो दिन बाद तक भी बैनर वहीं लगा रहा।
इसी बात को लेकर ग्यान बिंदु वाले नाराज़ हो गए। उन्होंने बैनर हटाने के लिए वहाँ के गार्ड से भी कहा, लेकिन गार्ड ने बैनर हटाने से मना कर दिया।
यहीं से विवाद शुरू हुआ और मामला बढ़ गया।
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बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक घटना है कि आज गया कॉलेज, गया में परीक्षा दे रही एक छात्रा बहन को कॉलेज प्रशासन द्वारा कथित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद छात्रा ने नीतीश कुमार भवन की ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी। यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली है, बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसी भी छात्र-छात्रा के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता, जिससे वह मानसिक दबाव और भय में इस हद तक पहुँच जाए। शिक्षा संस्थानों का दायित्व विद्यार्थियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक वातावरण देना है, न कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर मामले में प्राचार्य महोदय द्वारा लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थी परिषद इस प्रकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक उदासीनता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।
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