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साहित्य कलश

साहित्य कलश

Closed channel

इस channel पर आपको हिंदी साहित्य से संबंधित सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी। जैसे कहानियां, नाटक, उपन्यास व लेखकों की जीवनी।

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📈 Analytical overview of Telegram channel साहित्य कलश

Channel साहित्य कलश in the Hindi language segment is an active participant. Currently, the community unites 11 666 subscribers, ranking 3 273 in the Books category and 33 361 in the India region.

📊 Audience metrics and dynamics

Since its creation on невідомо, the project has demonstrated rapid growth, gathering an audience of 11 666 subscribers.

According to the latest data from 09 September, 2026, the channel demonstrates stable activity. Although there has been a change in the number of participants by -148 over the last 30 days and by -3 over the last 24 hours, overall reach remains high.

  • Verification status: Not verified
  • Engagement rate (ER): The average audience engagement rate is 12.86%. Within the first 24 hours after publication, content typically collects 5.51% reactions from the total number of subscribers.
  • Post reach: On average, each post receives 1 501 views. Within the first day, a publication typically gains 643 views.
  • Reactions and interaction: The audience actively supports content: the average number of reactions per post is 2.
  • Thematic interests: Content is focused on key topics such as अंके, गौड़ा, गाँव, किताब, देश.

📝 Description and content policy

The author describes the resource as a platform for expressing subjective opinions:
इस channel पर आपको हिंदी साहित्य से संबंधित सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी। जैसे कहानियां, नाटक, उपन्यास व लेखकों की जीवनी।

Thanks to the high frequency of updates (latest data received on 10 September, 2026), the channel maintains relevance and a high level of publication reach. Analytics show that the audience actively interacts with content, making it an important point of influence in the Books category.

11 666
Subscribers
-324 hours
-307 days
-14830 days
Attracting Subscribers
September '26
September '260
in 0 channels
August '26
+4
in 0 channels
Get PRO
July '26
+1
in 5 channels
Get PRO
June '26
+4
in 0 channels
Get PRO
May '260
in 1 channels
Get PRO
April '26
+1
in 0 channels
Get PRO
March '26
+1
in 0 channels
Get PRO
February '26
+5
in 0 channels
Get PRO
January '26
+8
in 0 channels
Get PRO
December '25
+20
in 1 channels
Get PRO
November '25
+4
in 0 channels
Get PRO
October '25
+22
in 0 channels
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September '25
+2
in 0 channels
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August '25
+3
in 1 channels
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July '25
+1
in 0 channels
Get PRO
June '25
+1
in 0 channels
Get PRO
May '250
in 0 channels
Get PRO
April '250
in 0 channels
Get PRO
March '25
+6
in 0 channels
Get PRO
February '250
in 0 channels
Get PRO
January '25
+4
in 0 channels
Get PRO
December '240
in 0 channels
Get PRO
November '24
+3
in 0 channels
Get PRO
October '24
+240
in 2 channels
Get PRO
September '24
+1 247
in 1 channels
Get PRO
August '24
+1 559
in 0 channels
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July '24
+2 371
in 1 channels
Get PRO
June '24
+2 117
in 2 channels
Get PRO
May '24
+1 809
in 0 channels
Get PRO
April '24
+1 756
in 1 channels
Get PRO
March '24
+1 956
in 1 channels
Get PRO
February '24
+1 759
in 0 channels
Get PRO
January '24
+1 176
in 0 channels
Get PRO
December '23
+742
in 0 channels
Get PRO
November '23
+23
in 0 channels
Get PRO
October '23
+33
in 0 channels
Get PRO
September '23
+60
in 0 channels
Get PRO
August '23
+28
in 0 channels
Get PRO
July '23
+117
in 0 channels
Get PRO
June '23
+15
in 0 channels
Get PRO
May '23
+23
in 0 channels
Get PRO
April '23
+38
in 0 channels
Get PRO
March '230
in 0 channels
Get PRO
February '23
+3
in 0 channels
Get PRO
January '23
+5
in 0 channels
Get PRO
December '22
+5
in 0 channels
Get PRO
November '22
+5
in 0 channels
Get PRO
October '22
+214
in 0 channels
Date
Subscriber Growth
Mentions
Channels
10 September0
09 September0
08 September0
07 September0
06 September0
05 September0
04 September0
03 September0
02 September0
01 September0
Channel Posts
सम्राट_अशोक_दया_प्रकाश_सिन्हा.pdf1.63 MB

2
दो घड़ी शिवपूजन सहाय.pdf
739
3
शिक्षा_मनोविज्ञान_अरुण_कुमार_सिंह.pdf
937
4
ईदो_उपन्यास_आचार्य_चतुरसेन_शास्त्री.pdf
927
5
लाल_किला_उपन्यास_आचार्य_चतुरसेन_शास्त्री.pdf
857
6
लाल_किले_की_चौखट_उपन्यास_आचार्य_चतुरसेन_शास्त्री.pdf
843
7
मारीचिका_उपन्यास_ज्ञान_चतुर्वेदी.pdf
1 013
8
धूप_छांव_उपन्यास_उपेंद्र_शर्मा.pdf
1 092
9
भग्न_मंदिर_उपन्यास_अनंत_गोपाल_.pdf
1 086
10
चोर_की_प्रेमिका_उपन्यास_कृष्णमूर्ति_कल्की.pdf
1 081
11
रात_की_दुल्हन_उपन्यास_रघुवीर_शरण_मित्र.pdf
1 061
12
शाल_वनों_का_द्वीप_उपन्यास_शानी.pdf
999
13
लौटे_हुए_मुसाफिर_उपन्यास_कमलेश्वर.pdf
1 319
14
हमआवाज़_दिल्लियाँ_उपन्यास_मीरा_कांत.epub
1 314
15
'हमआवाज़ दिल्लियाँ' दिल्ली को केंद्र बनाकर लिखे गए अपने चौथे उपन्यास में मीरा कांत ने कथा की डोर इतिहास और कल्पना के दो छोरों के बीच बाँधी है। यह डोर लगभग सौ वर्ष की दूरी नापती है--1826 से 1927 तक । सन् 1927 में संसद भवन की नई गोल इमारत का शिलान्यास ब्रिटिश हुकूमत के ढोंग की पूर्णाहुति थी। लोकतंत्र के नाम पर यह साम्राज्यवादी ताकतों का वो तांडव था जिसे मात देने के लिए तत्कालीन स्वतंत्रताकामी शक्तियाँ दोगुने उत्साह से सक्रिय हो उठी थीं। स्वतंत्रता आंदोलन का सहयात्री होता हुआ भी यह उपन्यास ख़ालिस ऐतिहासिक-राजनैतिक नैरेटिव नहीं है। यह ऐतिहासिक-सामाजिक-सांस्कृतिक धुरी पर घूमते समय-चक्र के उठते ग़ुबार में बनते- बिगड़ते रिश्तों की गल्प-गाथा है। दिल्ली के स्मारकों के इर्द-गिर्द बुनी इस दास्तान में प्राचीन स्मारक कहीं पड़ाव हैं, तो कहीं मंज़िल। यहाँ की मिली-जुली तहज़ीब को दिल्ली की 'हो-हो' बस में सवार होकर नहीं, अपने पात्रों के साथ गली- कूचों में पैदल चलकर बयाँ किया गया है। इस दास्तानगोई की ज़बान में दो तार की चाशनी है-- एक तार हिंदी का तो दूसरा उर्दू का है। ' हमआवाज़ दिल्लियाँ' का कथावृत्त एकाधिक सत्य-रूपों को साथ लेकर चलने वाला डिस्कोर्स है जिसमें मीरा कांत ने सत्ता, राजनीति और धर्म की चदरिया उधेड़कर समझने की राह अपनाई है। ग़ुलाम मुल्क में अँग्रेज़ों द्वारा धर्म की आड़ में की जाने वाली सत्ता की राजनीति के छल-छद्म पर सवालिया निशान लगाया है। https://t.me/saahitay_jagat
1 193
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+1
कांपता_हुआ_दरिया_उपन्यास_मोहन_राकेश.epub
1 108
17
कश्मीर के सौन्दर्य और प्रेम की रूमानी कहानियों से अलग दरिया में घर बनाकर रहनेवाले एक ग़रीब हाँजी परिवार, उसके सुख-दुःख, संवेदनाओं के टकराव और कठोर जीवन-संघर्ष पर आधारित मोहन राकेश का यह उपन्यास इस अर्थ में भी अलग है कि यह उनके शहरी मध्यवर्गीय रचना-जगत से काफ़ी अलग है। उपन्यास में मोहन राकेश ने स्वयं ‘पूर्वभूमि’ के तहत इसकी रचना-प्रक्रिया पर रौशनी डाली है, जिससे हमें पता चलता है कि वे स्वयं इस कहानी से भावनात्मक स्तर पर कितना जुड़े हुए थे। इसे पूरा करने के लिए वे महीनों-महीनों कश्मीर में रहे और हाँजी परिवार के साथ हाउसबोट में ही नहीं, बल्कि डूँगों में भी रहकर दरिया का सफ़र करते हुए दूर-दराज़ के इलाक़ों तक गए। लेकिन फिर भी यह उपन्यास अधूरा ही रहा। राकेश-साहित्य के शोधकर्ता और उनकी साहित्य-चेतना के मर्मज्ञ जयदेव तनेजा की पहल पर एक प्रयोग के तौर पर इसे मीरा कांत ने पूरा किया है जो स्वयं भी कश्मीरी पृष्ठभूमि से अच्छी तरह परिचित हैं, और इस कथा की ज़मीन को पकड़ने के लिए हफ़्तों श्रीनगर में रहकर, हाँजियों, उनके परिवारों और नई-पुरानी पीढ़ियों से मिलती रही हैं। इस अनूठे कथा-प्रयोग के तहत उपन्यास के पात्रों और कथा-सूत्र का अध्ययन करते हुए उन्हें आगे बढ़ाया गया है। जिस सूझ-बूझ, कल्पनाशीलता और कौशल के साथ उन्होंने इस उपन्यास को एक बहुअर्थगर्भी परिणति तक पहुँचाया है, वह दिलचस्प है। उम्मीद है कि इस प्रयोग के रूप में पाठक एक नया औपन्यासिक आस्वाद पाएँगे। निःसन्देह कश्मीर को, समझने में भी यह उपन्यास एक आधार उपलब्ध कराता है, जो आज एक नए मोड़ पर है? https://t.me/saahitay_jagat
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+1
वारेन_हेस्टिंग्स_का_साँड़_उदय_प्रकाश.epub
1 084
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+1
कांपता_हुआ_दरिया_उपन्यास_मोहन_राकेश.epub
1
20
615_पूर्वांचल_हॉस्टल_उपन्यास_राघवेंद्र_सिंह.epub
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