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Teri Meri Khani... Doston Ki Jubani....!! 🖤 💙 💜 💛 Join this channel

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गुनाहों के हिसाब तमाम रखने लगा हूँ, अब अपने काम से काम रखने लगा हूँ,, किसी की गलतियाँ नहीं गिनता अब, खुद पर ही सारे इल्ज़ाम रखने लगा हूँ..!!
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सबसे ज़्यादा दुख तो रक्षाबंधन के दिन होता है... जब चारों तरफ भाई-बहन का प्यार दिखाई देता है, और दिल में बस एक ही ख्याल आता है... काश मेरी भी अपनी कोई बहन होती... जिससे मैं राखी बंधवाता, उसे तंग करता और उसकी रक्षा करने का वादा करता... कुछ रिश्ते नसीब में नहीं होते, बस उनकी कमी हमेशा दिल में रहती है...
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आजादी का रंग - लाल
याद रख लेना तुम भी और याद रखेगी ये सारी युवा 20 जुलाई की वो सारी बातें जाने कैसे कटी होगी युवा पीढ़ी से वो राते बद्दुआ है तो बद्दुआ ही सही, पर तुम भी बुड्ढे होगे, तुम्हें भी जरूरत पड़ेगी किसी अच्छे डॉक्टर की हमारा ईश्वर करें, तुम्हें कोई फर्जी ही डॉक्टर मिले और सुनो, ना करना तुम उम्मीद की सरकार बेटियों को बचाएगी कल की तारीख़ याद रहेगी, जब बेटियों के कपड़े फाड़कर उन्हें देश के सामने नोच खाई थी 21 बच्चों की जान तो ले ली तूने और चोट पूरे युवा के दिलों पर लगी लाठी तुमने उन पर उठाई और चोट सारे घर बैठे विद्यार्थियों को भी चुभी है तू क्या जानेगा सरकार के चनगो से NEET निकल पाना क्या होता हैं तेरे इन घोटालों से कई रात तक वो ना सफल बच्चा कितना रोता हैं तेरी इस डरपोकी कायरता ने हमें दिखा दिया दिखला दिया, कि आगे भी रेप होगे और आगे भी पेपर लीक होगे बच्चा मरेगा, सरकार जीतेगी, ये सब कुछ हमें बता दिया हमने नहीं देखी थी आजादी की वो लड़ाई 1947 वाली जो आंखों से देखा वर्दी में सारे अंग्रेज खड़े थे सीना ताने सारे बलात्कारी नेता स्टेज़ पे खड़े थे इस लड़ाई में बच्चों को दूर भगाना था और इंसाफ की लड़ाई में उन्हें हराना था आजादी की लड़ाई, उसमें सारे घट घोटालों पर जीत पाना था ... याद रखेगी ये सारी युवा कल की वो रात ... नहीं जलेगी अब 15 अगस्त को स्वतंत्रता की वो आग नाज था हमें जिस महान भारत पर आज तूने वो हमारा नाज मार दिया है क्या करेगा आज का युवा भारतीय खाना खाकर, वस्त्र पहनकर जब तूने आजाद भारत का रंग लाल दिखा दिया
कल्पना निधि

ये जो चोटें बदनो पर आई है, जो ज़ख्म सीने पर लग गए तुम सबने देखा इस देश के नेताओं और रक्षकों के ज़मीर कैसे मर गए ये घाव तो भर जाएंगे पर ये आग कैसे बुझेगी ये जो बगावती युवा है, इन्हें जवाब दिए बिना सुलह कैसे होगी पर मैं ये कहना चाहूंगी कि अब रुकना मत अब लाठी डंडे खाने के बाद इन तानाशाहों के आगे झुकना मत ये भविष्य तुम्हारा है, बचाने की ज़िम्मेदारी तुम्हें ही लेनी होगी सरकार आएगी - जाएगी पर इस देश की कमान तुम्हें ही संभालनी होगी मत बनना तुम देश के उन लाखों सेलिब्रिटी के जैसे क्योंकि उनके बच्चे तो विदेश में पढ़ रहे वैसे अब वक़्त है सिल्लाे तुम अपने हाथों से बुध्दिल नेताओं के कफ़नो को देखा की नहीं पेपर लीक की वजह से कितने लोगों ने खोया है अपनों को अब तुम सबको अविचल ज्वाला अपने सीने में दहकानी होगी देश को सुधारने के लिए मेरे प्यारे युवाओं आवाज़ उठानी होगी चुप रहे तो ये तानाशाह बिल्कुल लोकतंत्र को मार देगा ये खून से रंगे तुम्हारे ख्वाबों को जीते जी मार देगा
Written By - प्रज्ञा दीक्षित
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सोचा था सरकार अपनी, संसद हमारा, देश हमारा और हम उनके बच्चे हैं ... चले थे चुपचप हाथों में किताबें या फुल लेकर, अपने भविष्य के लिए लड़ने और अपने अधिकार मांगने गए थे पर नादान थे भूल गए कि जिन्हें वे फूल देंगे, वो भगाएंगे उन्हें और करेंगे लाठियों से बौछार ... नहीं छोड़े उन्होंने बच्चे, ना महिला, ना पुरुष सबके साथ समानता का ही व्यवहार किया हा फेंके अश्रु गैस के गोले और भारत के संविधान का संहार किया ... वो रो रहे थे आख़िर गलती क्या की, हमने तो अपने अधिकार मांगें थे परन्तु सत्ता से सवाल पूछना विद्रोह है, इस बात पर क्यों नहीं जागे थे ... हा बस आज दिल भर गया, शामिल नहीं हुए तो क्या हुआ पर दर्द तो जम गया देखती रह गई तानाशाही, इनके कारनामों के पर्चा आंखे नम कर गया ... वो गुठन हुई आज कि, नफ़रत सी लगने लगी हवाओं से पता नहीं देश कब आजाद होगा, इन दहशत गर्त नेताओं से ... एक दिल में ठेस लग गई है, क्या हमने अपने नेता इसीलिए बनाए थे भविष्य संवारना चाहिए था, परन्तु बिगाड़ने का ठेका तो वही उठाए थे
Written By :- प्रज्ञा दीक्षित
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मैं महंगे जेवर तो पहनाने से रहा तुम्हें, पर जरूरी हो अगर तो तुम्हारे लिए पायल ले आऊंगा!! प्यार के नाम पर क्या कुछ नही होता यहाँ पर.... ऐसे मे तुमको जन्नत तो नही दिखा सकता, लेकिन अगर तुम कहोगी तो तुम्हे अपने साथ मंदिर ले जाऊँगा!!
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तुम्हारी गद्दी खातिर बेचारे सपने मारे गये, कुछ घरों के चिराग लाश कह कर पुकारे गए। तुम खरीद लेना अखबारों को और खबरों को, पर कै
तुम्हारी गद्दी खातिर बेचारे सपने मारे गये, कुछ घरों के चिराग लाश कह कर पुकारे गए। तुम खरीद लेना अखबारों को और खबरों को, पर कैसे खरीदोगे हम जैसे बेसब्रों को ?
#isupportsonamwangchuk
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हमारे मरने के बाद हम तुम्हें हर तारे में नजर आया करेंगे…!! मन करे तो तुम दुआ माँग लेना हम तुरंत टूट जाया करेंगे.....❤️‍🔥❤️‍🔥
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वही आंगन वही खिड़की वही दर याद आता है... अकेले जब भी होते हैं हमें घर याद आता है...!!
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हर दर्द सह लेता है अकेले वो हाल कहां किसी से बताता है, कितना मजबूत है वो शख्स जो बीमार होकर भी कमाने जाता है..!!🥺🤍 #LOVEYOUPAPA
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जो नहीं आता, उसका इंतज़ार क्यों ? किसी के लिए अपना ये हाल क्यों ? वैसे तो इस दुनिया में बहुत सी चीज़ें प्यारी हैं, पर जो नहीं मिला, उसी से इतना प्यार क्यों ?
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ख्वाब तो बहुत थे ज़िंदगी में मेरे, पर वक्त ने हर ख्वाब को बदल दिया… जिसे अपना समझा था दिल से मैंने, उसी ने मुझे सबसे अकेला कर दिया… अब हालात ऐसे हैं कि मुस्कुराते हैं हम, पर अंदर से हर रोज़ थोड़ा सा मर दिया… 💔
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अगर ये तय है की तुम और मैं नही मिलेंगे, तो फिर ये तय क्यों था.... हमारा टकराना, और मेरा वहीं ठहर जाना....!!♥️
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तुमने जवाब नहीं दिया, मैंने सवाल करना छोड़ दिया, तुम व्यस्त थे शायद, मैंने तुम्हे परेशान करना छोड दिया तुम्हारी दुनियाँ बहुत बड़ी हैं, मैंने खुद को छोटा मान लिया, तुम खुश रहो बस, मैंने अपना हिस्सा मांगना छोड़ दिया...।
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कुछ पन्ने हम जिंदगी के जला कर आए हैं, तुम्हे क्या खबर हम क्या गंवा कर आए हैं।
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जो मैं हूँ..,, 🙂 उसे कोई जानता नहीं.. 🔥 मेरी हर बात का मतलब..,, ❤️‍🩹 कोई याद रखता ही नहीं.. 🙌🏻 मिलते हैं मुस्कुराकर सबसे हम..,, ✨ दर्द की हँसी कोई पहचानता ही नहीं.. 🤌🏻 मुझे देखते हैं सब..,, 💔 पर कोई मानता ही नहीं.. 🥀 जिसे सब जानते हैं..,, 🙃 वो इंसान मैं हूँ ही नहीं.. 🔥✨
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https://t.me/meremhadev 🥀𝑾𝒆𝒍𝒄𝒐𝒎𝒆 𝑻𝒐 𝒄𝒉𝒂𝒏𝒏𝒆𝒍🥀 जिंदगी में तभी उजाला होगा ,, जब साथ में डमरू वाला होगा .!! हर हर महादेव 🔱🙏 Paid pramotion available ✨ ⭐ Owner 👉 @Sareef_i https://telega.io/c/meremhadev

सूरज को क्या पता चांद क्या होता हैं। जमी को क्या पता आसमा क्या होता हैं। जो जिंदगी भर भगवान के नाम पर भींख मांग कर खाए उसे क्या पता, भारतीय संविधान क्या होता हैं। !! खतरनाक जय भीम !!
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