en
Feedback
ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)

ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)

Open in Telegram

ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल, यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके | इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है| #hastag

Show more
2 464
Subscribers
No data24 hours
+47 days
+2030 days
Posts Archive
वासना से बचने के लिए निरंतर कोशिश करती रहनी पड़ती है । और फसने के लिए वासना के बारे में एक विचार ही पर्याप्त है।

जब कामुकता जग रही हो तो.. मन को समझाना चाहिए कि-शरीर में है क्या ? दो आडी हड़ियाँ और दो रवडी हड्डियाँ, मांस, मल-मूत्र, रक्त और ऊपर से चमड़े का कवर...

वीर्य सम्पूर्ण शरीर में उसी तरह व्याप्त रहता है जैसे गन्ने में रस जिससे पूरा शरीर हृष्ट पुष्ट और सुडौल बनता है और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं.... भूलकर भी उस खुशी से न खेलो। जिसके पीछे हों गम की कतारें।।

हे महान देश के वासी ! बुढ़ापा, कमजोरी व लाचारी आ घेरे, उसके पहले अपनी िदव्यता को, अपनी महानता को, महान पद को पा लो।

Repost from Hindi Memes
💪🏻💪🏻💪🏻 JOIN- @MapArchive

अब भी मौका है स्त्री को गंदी दृष्टि से देखना बंद कर और अपने भविष्य की चिंता कर , क्योंकि समय बीतने के  बाद आप ही अपने आप को बोलेंगे कि वीर्यनाश से जिंदगी बर्बाद कर दी अगर उस वक्त मैं वीर्यरक्षण कर लेता तो , आज मुझे इतना दुःख नहीं सहना करना पड़ता।

जिस स्त्री का आकर्षण या वासना की चाहता आपको अपने वश में कर लेती है उसकी वास्तविकता को जान लो एक बार , जब त्वचा के दो इंच नीचे का दृश्य देखेगो तो यकीनन आप भयभीत हो जाओगे, इस शरीर के चाहत में आप अपना अमूल्य वीर्यनाश कर रहे हैं।

प्राणों से मोह होना नाभि के नीचे आसक्ति होना और धन के प्रति आसक्ति होना ये तीन चीज़ों का जिसने अंत कर दिया वो देश धर्म के लिए कुछ भी कर गुजरेगा।

जिस के शरीर में सुरक्षित वीर्य रहता है तब उस को आरोग्य,बुद्धि,बल,पराक्रम बढ़ के बहुत सुख की प्राप्ति होती है। - महर्षि दयानन्द सरस्वती

आपका युद्ध वासना से है,जो ब्रम्हचारी होते है वो डटकर इसका सामना करते है और जीतते है,और जो व्यभिचारी होते है वो इस वासना का गुलाम हो जाते है।