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ग़ज़ल
“बिछड़ना — एक तीर्थ”
बिछड़ के भी वो मेरे पास ही था,
राधा की तरह, एहसास ही था।
न वो बोलता, न मैं कुछ कह पाया,
राम की तरह बस त्याग ही था।
सवालों में उलझा रहा हर जवाब,
विरह का कहीं इतिहास ही था।
मैं जलता रहा, वो चमकता रहा,
हमारा मिलन परिहास ही था।
कहा उसने — “तू मेरा था कभी”,
और मेरे लिए वो विश्वास ही था।
पैरों से नहीं, रूह से जुदा था,
मोहब्बत नहीं, सन्यास ही था।
जिसे छोड़ आया, उसे पाया कहाँ?
हर मिलन से गहरा ह्रास ही था।
अब मुशायरे की वो भीड़ चुप है,
क्योंकि ग़ज़ल मेरे पास ही था...
— भैरव
╭•┄┅════❁*🌹🌹❁════┅┄•╮
💕#"""🫧🕊 ⃝♥️🥀
❝ वादा है आपकी मोहब्बत__सदा खास रहेगी
यादों की झलक__दिल के पास रहेगी,
नहीं भुलाएंगे__आपको और आपके इश्क को
जब तक इस दिल में__आखरी सांस रहेगी.! ❜❜
┉┅━✿꧁❤꧂✿━┅
╰•┄┅════❁🌹🌹 *❁════┅┄•╯
💐 GOOD MORNING 💐
🍁""""""""""""""""""""""""""""""""🍁
🍁"""""""""""""""""""""""""""""""
🦋----゚वृंदा゚.:。
✦▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬✦
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🌹 सुप्रभात 🌹
══════❥❥══════
दिल की यादो मे सवारूँ तुझे
तू दिखे तो आँखो मे उतारू तुझे
तेरे नाम को लबो पर ऐसे सजाऊ
सो जाऊ तो ख्वाबो मे पुकारू तुझे🩷
❤️❣ सुप्रभात ❣❤️
राधा की पुकार
(लेखक: भैरव)
तेरी बाँसुरी की सदा सुनते हैं हम,
तेरी राहों में चुपचाप चलते हैं हम।
तू भीड़ में खो जाता है, कृष्णा मेरे,
पर आज भी तन्हाई में पलते हैं हम
#भैरव
BY KUMAR VISHWAS:
Jindagi se lada hun tumahre bina,
hashiye par pada hun tumhare bina,
Tum gayi chhod kar, jis jagah mod par,
main wahi par khada hun tumhare bina.
Kitni shohrat main khela hun tumhare bina,
Kitne tufaan zela hun tumhare bina,
Bheed main toh ghira hun magar sach kahu,
hun main bilkul akela tumhare bina.
Har gazal main dikha hun tumhare bina,
Geet main bhi likha hun tumhare bina,
Log kehte hai mehnga hun sabse magar,
kitna sashta bika hun tumhare bina.
Maine Jeevan gavaya tumhare bina,
Tumne kaise bitaaya tumhare bina,
Main mukkamal kisi ko mila hi nahi,
Mujko duniya ne paaya tumhare bina
Ki Vish piya hu bhi kaise tumhare bina,
Dil siyunga bhi kaise tumhare bina,
Doli chadhte hue yeh bhi socha nahi,
main jiyunga bhi kaise tumhare bina.
Tumko hi gun gunaya tumhare bina,
Tumko jag ko sunaya tumhare bina,
Tum toh ji bhi liye gair ke sang magar,
Main toh mar bhi na paya tumhare bina.
Gum akele hi pala hai tumhare bina,
Khud pe daala hai tala tumhare bina,
Ek ladki jo tum se mili tak nahi,
Mujko ussne Shambhala hai tumhare bina.
मुझे उतनी दूर मत ब्याहना
जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर
घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हें
मत ब्याहना उस देश में
जहाँ आदमी से ज़्यादा
ईश्वर बसते हों
जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँ
वहाँ मत कर आना मेरा लगन
वहाँ तो क़तई नहीं
जहाँ की सड़कों पर
मन से भी ज़्यादा तेज़ दौड़ती हों मोटरगाड़ियाँ
ऊँचे-ऊँचे मकान और
बड़ी-बड़ी दुकानें
उस घर से मत जोड़ना मेरा रिश्ता
जिस में बड़ा-सा खुला आँगन न हो
मुर्ग़े की बाँग पर होती नहीं हो जहाँ सुबह
और शाम पिछवाड़े से जहाँ
पहाड़ी पर डूबता सूरज न दिखे
मत चुनना ऐसा वर
जो पोचई और हड़िया में डूबा रहता हो अक्सर
काहिल-निकम्मा हो
माहिर हो मेले से लड़कियाँ उड़ा ले जाने में
ऐसा वर मत चुनना मेरी ख़ातिर
कोई थारी-लोटा तो नहीं
कि बाद में जब चाहूँगी बदल लूँगी
अच्छा-ख़राब होने पर
जो बात-बात में
बात करे लाठी-डंडा की
निकाले तीर-धनुष, कुल्हाड़ी
जब चाहे चला जाए बंगाल, असम या कश्मीर
ऐसा वर नहीं चाहिए हमें
और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ
जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाए
फ़सलें नहीं उगाईं जिन हाथों ने
जिन हाथों ने दिया नहीं कभी किसी का साथ
किसी का बोझ नहीं उठाया
और तो और!
जो हाथ लिखना नहीं जानता हो ‘ह’ से हाथ
उसके हाथ मत देना कभी मेरा हाथ!
ब्याहना हो तो वहाँ ब्याहना
जहाँ सुबह जाकर
शाम तक लौट सको पैदल
मैं जो कभी दुख में रोऊँ इस घाट
तो उस घाट नदी में स्नान करते तुम
सुनकर आ सको मेरा करुण विलाप
महुआ की लट और
खजूर का गुड़ बनाकर भेज सकूँ संदेश तुम्हारी ख़ातिर
उधर से आते-जाते किसी के हाथ
भेज सकूँ कद्दू-कोहड़ा, खेखसा, बरबट्टी
समय-समय पर गोगो के लिए भी
मेला-हाट-बाज़ार आते-जाते
मिल सके कोई अपना जो
बता सके घर-गाँव का हाल-चाल
चितकबरी गैया के बियाने की ख़बर
दे सके जो कोई उधर से गुज़रते
ऐसी जगह मुझे ब्याहना!
उस देश में ब्याहना
जहाँ ईश्वर कम आदमी ज़्यादा रहते हों
बकरी और शेर
एक घाट पानी पीते हों जहाँ
वहीं ब्याहना मुझे!
उसी के संग ब्याहना जो
कबूतर के जोड़े और पंडुक पक्षी की तरह
रहे हरदम हाथ
घर-बाहर खेतों में काम करने से लेकर
रात सुख-दुख बाँटने तक
चुनना वर ऐसा
जो बजाता हो बाँसुरी सुरीली
और ढोल-माँदल बजाने में हो पारंगत
वसंत के दिनों में ला सके जो रोज़
मेरे जूड़े के ख़ातिर पलाश के फूल
जिससे खाया नहीं जाए
मेरे भूखे रहने पर
उसी से ब्याहना मुझे!
ईश्वर ने जब मेरे जीवन की खूबसूरत किताब लिखी तो जानते हो उसमें सबसे खूबसूरत पन्ना कौन सा लिखा...???
वो पन्ना जिसमें तुम संग प्रेम का बंधन बंधा ...तुम संग खूबसूरत एहसास का धागा जुड़ा...तुम संग मन का जुड़ाव , लगाव हुआ...तुम संग सफर तय करने का रास्ता चुना❤️🥀
हिंदी इंग्लिश उर्दू संस्कृत मलयालम मारवाड़ी गुजराती अलग अलग देश अलग शहर अलग लोग सबके पहनावा भी अलग सबकी शक्ले अलग सबका ब्यावहार अलग सबका व्यापार अलग कोई काला है कोई गोरा है कोई मोटा कोई छोटा हैं सबके धर्म अलग सबकी संस्कृति अलग दुनिया में सब अलग है मगर एक चीज़ सबकी एक जैसी है....?
(दर्द) दर्द सबका एक जैसा आशु सबके एक जैसे रोना बिलखना तड़पना इंतेज़ार करना सब एक जैसे होता है
और लोग कहते है कि सबका दर्द अलग अलग है तुम हमारे दर्द किया जानों....!
भाई सा तानने शायद ना मालूम
की सबका दर्द अलग अलग होता तो कोई किसी की लिखी किताब शायरी कहानी पढ़के उदास ना होता और ना किसी के दर्द को महसूस कर रहा होता सब अपने अपने दर्द में मशरूफ रहते...!
याद रखिएगा जनाब दर्द सबका एक जैसा होता है बस कहानियां बदल जाती है...!
#Mohd_Husain ✍
Repost from सूखती 🌼स्याही*༺♥️༻
Bhairav से वफ़ा की उम्मीद नहीं
(लेखक: भैरव)
हर लफ़्ज़ में उल्फ़त की तासीर नहीं,
हर दिल में भैरव की तस्वीर नहीं।
क़िस्मत में लिखी थी जुदाई की शाम,
इस दर्द की कोई भी ताबीर नहीं।
वो ख़्वाब जो आँखों में पलते रहे,
उन ख़्वाबों में अब कोई ताबीर नहीं।
वफ़ाओं की राहों में काँटे बिछे,
भैरव से वफ़ा की उम्मीद नहीं।
जिस्मों की सौगात थी इश्क़ की बात,
रूहानी मोहब्बत की तश्दीद नहीं।
अब ज़िक्र भी कम है दुआओं में उसका,
अब दिल में भी कोई तमहीद नहीं।
#भैरव
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़
सारी दुनिया उस का चर्बा(नकल) उस का चेहरा एक तरफ़
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं
उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
जिस शय(चीज) पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
उस की खुशियाँ सब से अव्वल(उपर) सस्ता महँगा एक तरफ़
सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर-शराबा है
सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़...
ज़ख्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से
चारा-साज़ी(दवाइया) एक तरफ उस का छूना एक तरफ़
उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
चांदी सोना एक तरफ है, उसका होना एक तरफ
एक तरफ हैं आखें उसकी, जादू टोना एक तरफ
कोई साजिश है इन आंखो की, हमला दिल पर करने की
मेरी भी तो हसरत थी ये कब से तुझपे मरने की
आहट है घबराहट है, तुझे मिलने की चाहत है
शहद है बातो में तेरी, इस दुनिया में कड़वाहट है
सन्नाटा दिल की गलियों में, प्यार का मंजर आ जाए
पी जाऊ में पल भर में तू बन के समंदर आजाए
सैलाब सा बनके आए तू मैं सिमट के तुझमें रह जाऊ
तू वन में चंदन वृक्ष सा में तुझपे लिपट के रहजऊ
ये तारो की किस्मत , उसकी आंखों से चमक लेते है
उसकी आंखों का नशा एक तरफ, और हर प्याल है एक तरफ
उसकी धड़कन को सुन ने पर हां पत्थर दिल ये धड़का है
उसकी धड़कन का संगीत और हर सरगम है एक तरफ
उसके बिना ये जीवन अब अधूरा सा लगता है
उसके साथ हर सफर चाइए, सारी मंजिले एक तरफ
तारीफे जितनी करदू बयान ना हुस्न वो हो पाए
बाल खुले कानों में बाली, सारे नजारे एक तरफ
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़
सारी दुनिया उस का चर्बा(नकल) उस का चेहरा एक तरफ़
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं
उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
उस की खुशियाँ सब से अव्वल(उपर) सस्ता महँगा एक तरफ़
सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़
चारा-साज़ी(दवाइया) एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
एक तरफ हैं आखें उसकी, जादू टोना एक तरफ
प्रेम मतलब कृष्णा मतलब प्रेम
(लेखक: भैरव)
हर धड़कन में राधा का नाम आया,
हर पल में बस कान्हा का प्रेम समाया।
जिसने देखा मुरली की मीठी तान,
उसके मन ने प्रेम का रंग लगाया।
कृष्ण बिना यह जीवन सूना सा था,
राधा बिना प्रेम भी अधूरा नज़र आया।
भक्ति हो या चाहत का प्यारा सुरूर,
हर राह ने कान्हा का दर दिखलाया।
भैरव कहे, प्रेम की मूरत वही,
जिसने राधा-कृष्णा सा प्यार पाया।
#भैरव
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❝ .*न_तमन्ना_है_चाँद_की*
*न_फ़लक_की_जुस्तजू_रखते_हैं*
*मिल_जाए_बस_तेरी_एक_झलक*
*दिल_मे_यही_आरज़ू_रखते_हैं।।* ❜❜
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🌹 शुभ संध्या 🌹
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उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब
जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे रूठे हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब
मुझसे बिछड़ कर वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब
-राहत इंदौरी
4. “राधा का मंदिर”
ना घंटा, ना दीप, ना कोई श्लोक,
बस मौन खड़ा है राधा का लोक।
जहाँ कृष्ण ने वादा नहीं निभाया,
पर राधा ने आज भी मन में उसे देव बनाया।
वो मंदिर नहीं — उसका दिल है,
जिसमें एक ही देवता बसता है — प्रेम का नाम कृष्ण है।
#भैरव
हर एक लम्हा तेरे दिल में
उतर जाने की ख्वाहिश है....!!
मेरी इस ज़िंदगी को तेरे इश्क़ में
संवर जाने की ख्वाहिश हैं...!!
कोई वादा नही फिर भी
इंतज़ार है तेरा
दूर होने पर भी एतबार है तेरा..!!
ना जाने क्यू करते हो तुम
बेरुखी हमसे..!!
क्या कोई हमसे भी ज्यादा
तलबगार है तेरा...!
🎸♥️
❤️❣ शुभ संध्या ❣❤️
जितना बदल सकते थे, बदल लिया ख़ुद को,...
अब जिसको शिक़ायत हो, वो अपना रास्ता बदल लें..!
❦𝓜𝓲𝓼𝓼⋆𝘴ꪮꪀꪖᵂᵃʳⁿⁱⁿᵍ❣︎
ग़ज़लतेरे सीने से लगकर आज यूँ रोये हम, जैसे बरसों से दबे दर्द को खोये हम। तेरी बाहों की पनाहों में सुकूँ पाया है, टूटे ख्वाबों की किरचियों को भी जोड़े हम। लब खामोश थे, मगर दिल सब कुछ कह गया, तेरी धड़कनों की जुबां से ही बोले हम। जख़्म जब भी उभरते हैं तेरी यादों से, तेरी चाहत की दवा बन के संजोये हम। तन्हाइयों की उन अधूरी सी रातों में, तेरे ख्वाबों के उजालों में ही सोये हम। 🥀🖤 कान्हा
तेरी बातों की रवानी में सुकून पाया है, तेरी खामोश हँसी ने भी हमें बहलाया है। तेरी यादों के चराग़ों से रौशनी मांगी है, तेरे लहजे ने अंधेरों को भी रंग लाया है। कभी तिश्नगी थी, कभी रूह की नमी सी थी, तेरे जाने के सफ़र ने भी सब्र सिखाया है। वो अधूरी सी दुआएँ भी मुकम्मल निकलीं, तेरी ख़ुशबू ने हर वीरान दिल महकाया है। कमी थी फिर भी मोहब्बत में कमी ना थी, तेरी चुप्पी ने भी इश्क़ को नाम पाया है। खुद से जूझते रहे तेरी तलाश में उम्रभर, तेरी हर याद ने जीने का सबब बनाया है। वो जो खिड़की थी तेरी, अब भी खुली रहती है, हर सुबह उसकी किरणों ने मुझे अपनाया है। 🥀🖤 कान्हा ✍️
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता
मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता..
🍂🍂
बिछड़कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा
मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हे अच्छा लगेगा
❤️❤️
