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परमात्मा ने अब तक सभी मानव को एक तरह ही निर्माण किया है
जो बुद्ध ने पाया
जो राम ने किया , जो कृष्णा ने किया
जो सब आप भी कर सकते हो
बस आपका चेतना कितना विकसित हुआ यानि आप कितना त्याग व समर्पित हुये है
परमात्मा कहता है हम हर जगह व्याप्त है
संगीत में भक्ति में किताब में प्राकृतिक में किसी भी वस्तु में जीव में , हर जगह मैं हु।
मीरा भक्ति करके परमात्मा को पा लिया
संत रविदास प्रेम व करुणा से परमात्मा को पा लिये
कबीरदास गीतों से परमात्मा को पा लिया
परमहंस योगानंद माँ के रूप में परमात्मा को पा लिये
स्वामी विवेकानंद ज्ञान से परमात्मा को पा गए
मतलब
आप जिस किसी माध्यम में डूब जायेंगे सब भूल जायेंगे बस बस वही माध्यम ही शेष रहता है , बस वो माध्यम और आप शेष कुछ भी नहीं रहता
मतलब
उस माध्यम के द्वारा परमात्मा और आप ही शेष बचता है और कुछ भी नहीं है
बस इस दुनियाँ का कोई भी चीज वस्तु जीव किसी भी माध्यम के द्वारा परमात्मा को पा सकते है परमात्मा हर जगह हर किसी में व्याप्त है
मोह क्या होता है ?
एक पिता अपने बच्चे को एक ऐसा पोषाक भेट करते है जिसमें हर मानव कि सारी ख्वाहिश पूरी हो जाती है पर तुरंत दूसरी ख्वाहिश उत्पन्न हो जाता है
और उस पिता का बच्चा इस पोषाक से इतना घुल मिल गया इतना आकर्षण मोह उस पोषाक से हो गया कि अब वो इस पोषाक से वो खुद को अलग करने कि सोच से डर जाता है भय आ जाता है
वो बच्चा इस पोषाक के मोह भंग हो तो वो अपने आपको पहचाने।
और पिता भी कई बार अपने बच्चे कि पोषाक लेकर दूसरी पोषाक देता है तीसरी देता है अनगिनत पोषाक बदल बदल कर देता है जिससे अपने बच्चे का इस पोषक के प्रति आकर्षण मोह भंग हो जाये।
पर बच्चा इस पोषाक से ऊपर कुछ सोच ही नहीं पाता है।
इस घटना में पिता परमात्मा है , पोषाक हमारा शरीर है और वो बच्चा हम पृथ्वी वासी है.........
