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MV CLASSES

MV CLASSES

Open in Telegram

📈 Analytical overview of Telegram channel MV CLASSES

Channel MV CLASSES (@mvseriescl10) is an active participant. Currently, the community unites 22 327 subscribers, ranking 8 987 in the Education category and 18 261 in the India region.

📊 Audience metrics and dynamics

Since its creation on невідомо, the project has demonstrated rapid growth, gathering an audience of 22 327 subscribers.

According to the latest data from 20 October, 2026, the channel demonstrates stable activity. Although there has been a change in the number of participants by -176 over the last 30 days and by -5 over the last 24 hours, overall reach remains high.

  • Verification status: Not verified
  • Engagement rate (ER): The average audience engagement rate is 14.63%. Within the first 24 hours after publication, content typically collects 4.93% reactions from the total number of subscribers.
  • Post reach: On average, each post receives 3 264 views. Within the first day, a publication typically gains 1 099 views.
  • Reactions and interaction: The audience actively supports content: the average number of reactions per post is 45.
  • Thematic interests: Content is focused on key topics such as hogi, bstc, qsn, जाएगा.

📝 Description and content policy

Channel description not provided.

Thanks to the high frequency of updates (latest data received on 21 October, 2026), the channel maintains relevance and a high level of publication reach. Analytics show that the audience actively interacts with content, making it an important point of influence in the Education category.

22 327
Subscribers
-524 hours
-777 days
-17630 days
Posts Archive
Current GK 2026 (Part-01).pdf232.87 MB

राजस्थान : मुख्यमंत्री :- • प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री: पंडित हीरालाल शास्त्री 26 जनवरी 1950 को राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री बने। वे 'प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र' और वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक थे। • अन्य मनोनीत मुख्यमंत्री: शास्त्री जी के बाद सी.एस. वेंकटाचारी (एकमात्र IAS अधिकारी जो सीएम बने) और जय नारायण व्यास को मनोनीत किया गया था। • प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री: मार्च 1952 में प्रथम आम चुनावों के बाद टीका राम पालीवाल । • मनोनीत व निर्वाचित दोनों: जय नारायण व्यास राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो मनोनीत भी रहे और बाद में उपचुनाव जीतकर निर्वाचित मुख्यमंत्री भी बने। • आधुनिक राजस्थान के निर्माता: मोहन लाल सुखाड़िया के नाम राजस्थान में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। वे 1954 से 1971 तक कुल 17 वर्ष (4 बार) मुख्यमंत्री रहे। उनके काल में ही 1959 में नागौर से पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। • पद पर रहते हुए निधन: बरकतुल्लाह खान (1971-1973) राजस्थान के एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री रहे हैं। भारत-पाक युद्ध (1971) के समय वे ही मुख्यमंत्री थे। • प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री: भैरों सिंह शेखावत 1977 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। वे 3 बार मुख्यमंत्री रहे और बाद में भारत के 11वें उपराष्ट्रपति भी बने। • सबसे छोटा कार्यकाल: कांग्रेस के हीरा लाल देवपुरा मात्र 18 दिन (23 फरवरी 1985 से 10 मार्च 1985) के लिए मुख्यमंत्री बने थे। वे बाद में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। • प्रथम अनुसूचित जाति (SC) मुख्यमंत्री: जगन्नाथ पहाड़िया (1980-81)। उनके कार्यकाल में राजस्थान में पूरी तरह शराबबंदी लागू की गई थी। • प्रथम महिला मुख्यमंत्री: वसुंधरा राजे सिंधिया (2003-2008) - BJP • तीन बार मुख्यमंत्री रहने वाले नेता: राजस्थान में भैरों सिंह शेखावत, हरिदेव जोशी और अशोक गहलोत ने 3-3 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। वर्तमान : • पदस्थ मुख्यमंत्री: श्री भजनलाल शर्मा राजस्थान के 14वें व्यक्ति (क्रमानुसार 26वें) के रूप में वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 15 दिसंबर 2023 को जयपुर के अल्बर्ट हॉल के सामने इस पद की गोपनीयता की शपथ ली थी। • उपमुख्यमंत्री व्यवस्था: वर्तमान 16वीं विधानसभा के तहत राज्य में दो उपमुख्यमंत्री कार्यरत हैं—दीया कुमारी (जो राज्य की वित्त मंत्री भी हैं) और डॉ. प्रेम चंद बैरवा। राजस्थान में राष्ट्रपति शासन का इतिहास :- राजस्थान में मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान अलग-अलग राजनैतिक परिस्थितियों में कुल 4 बार अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का प्रयोग किया गया है: 1. प्रथम बार (1967): अस्पष्ट बहुमत के कारण मोहन लाल सुखाड़िया के समय लगा। यह सबसे छोटी अवधि का राष्ट्रपति शासन था। 2. द्वितीय बार (1977): केंद्र में जनता पार्टी सरकार आने पर हरिदेव जोशी के समय लगाया गया। 3. तृतीय बार (1980): केंद्र में कांग्रेस सरकार की वापसी पर भैरों सिंह शेखावत की सरकार को भंग करके लगाया गया। 4. चौथी बार (1992-1993): बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उपजे हालातों में भैरों सिंह शेखावत के समय लगा। यह सबसे लंबी अवधि का राष्ट्रपति शासन था। संवैधानिक प्रावधान एवं शक्तियाँ (Constitutional Provisions) • वास्तविक कार्यकारी (De Facto Executive): राज्य का राज्यपाल केवल संवैधानिक या नाममात्र का प्रमुख (De Jure) होता है, जबकि राज्य की वास्तविक कार्यपालिका शक्तियां मुख्यमंत्री के हाथों में केंद्रित होती हैं। • अनुच्छेद 163: राज्यपाल को सलाह और सहायता देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा। • अनुच्छेद 164 (नियुक्ति): मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। राज्यपाल सामान्यतः विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को ही आमंत्रित करता है। यदि किसी को स्पष्ट बहुमत न हो, तो राज्यपाल स्वविवेक का प्रयोग कर सकता है। • मंत्रिपरिषद का आकार (91वां संशोधन, 2003): इस संशोधन के तहत तय किया गया कि किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सीटों के 15% से अधिक और 12 से कम नहीं हो सकती। • अनुच्छेद 167 (कर्तव्य): यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से जुड़ी मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को सौंपे। मुख्यमंत्री : प्रशासनिक :- • नीति आयोग में प्रतिनिधित्व: मुख्यमंत्री राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) और नीति आयोग की शासी परिषद में राजस्थान राज्य का प्रतिनिधित्व करता है। • राज्य आयोजना बोर्ड का अध्यक्ष: मुख्यमंत्री राज्य आयोजना बोर्ड (State Planning Board) का पदेन अध्यक्ष होता है। • अंतर-राज्यीय परिषद: वह प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) का सदस्य होता है।

निम्नलिखित कथनों में से सही हैं? 1. वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस के जयनारायण व्यास जालौर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव पराजित हो गए थे। 2. हीरालाल देवपुरा का कार्यकाल राजस्थान के मुख्यमंत्रियों में अब तक का सबसे न्यूनतम (अल्पतम दिनों का) रहा है।
Anonymous voting

fix 9 : 30 abhi hogi aa jao sabhi

abhi wali class morning m hogi 10 : 30 am ok

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना :उद्देश्य : घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल को शून्य करना और अतिरिक्त बिजली से कमाई का अवसर देना है। मुफ्त बिजली: पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती है। बड़ी सब्सिडी: सरकार 1 kW क्षमता के लिए ₹30,000, 2 kW के लिए ₹60,000 और 3 kW या उससे अधिक के लिए अधिकतम ₹78,000 तक की वित्तीय सहायता (सब्सिडी) देती है। अतिरिक्त कमाई: यदि आपके घर में सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है, तो आप उसे बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) को बेचकर सालाना ₹15,000 से ₹18,000 तक की अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। सस्ता लोन: सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बैंकों से बहुत ही कम ब्याज दर (वर्तमान में लगभग 7%) पर बिना किसी गारंटी के आसान लोन की सुविधा उपलब्ध है। • 1 करोड़ घरों का लक्ष्य: योजना का मुख्य उद्देश्य मार्च 2027 तक देश के 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है. • 30 गीगावाट बिजली: 1 करोड़ छतों पर सोलर सिस्टम लगने से देश में लगभग 30 गीगावाट (GW) अतिरिक्त सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा • हर जिले में एक सौर गांव: इस योजना के तहत देश के प्रत्येक जिले में एक 'मॉडल सोलर विलेज' विकसित किया जा रहा है. • ₹1 करोड़ की सहायता: इस मॉडल विलेज को बनाने के लिए ₹800 करोड़ का फंड रखा गया है, जिसके तहत चुने गए हर एक गांव को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए ₹1 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता दी जाती है इन सोलर पैनलों के 25 साल के जीवनकाल में पर्यावरण से लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन कम होगा, जो लाखों पेड़ लगाने के बराबर है 60 लाख से ज्यादा घर कवर: देशभर में अब तक 60 लाख से अधिक परिवारों के घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे उनका बिजली बिल जीरो हो गया है। सब्सिडी वितरण: सरकार अब तक केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) के रूप में ₹28,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जारी कर चुकी है। यदि आप किराए के मकान या ऑफिस में रहते हैं, तो भी आप इस योजना का लाभ ले सकते हैं। शर्त बस यह है कि बिजली का कनेक्शन आपके नाम पर होना चाहिए और आपके पास मकान मालिक से छत पर सोलर पैनल लगाने का सहमति पत्र (NOC) होना आवश्यक है। योजना के तहत सब्सिडी का लाभ केवल तभी मिलता है जब आप सरकार की स्वीकृत सूची (ALMM) में शामिल कंपनियों के पैनल लगवाते हैं। पात्रता : • नागरिकता: आवेदक अनिवार्य रूप से भारत का स्थायी निवासी होना चाहिए। • छत का स्वामित्व: आवेदक के पास सोलर पैनल लगाने के लिए कंक्रीट या मजबूत पक्की छत और खुद का वैध बिजली कनेक्शन होना आवश्यक है। • आय सीमा: यह योजना मुख्य रूप से मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए है, इसलिए परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी या आयकर दाता नहीं होना चाहिए। • बिजली बिल: पिछले 6 महीनों में से कोई भी एक नवीनतम बिजली बिल (Consumer Number के साथ)। • पहचान पत्र: आधार कार्ड और राशन कार्ड। • निवास प्रमाण: निवास प्रमाण पत्र या बैंक पासबुक (जिसमें सब्सिडी की राशि आएगी)। • स्वामित्व प्रमाण: मकान के कागजात या छत के स्वामित्व का प्रमाण।