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अल्लामा इक़बाल रह०

अल्लामा इक़बाल रह०

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यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम अपने गुस्से पे भरोसा नहीं कर पाए हम आ बदन को ही तेरे हाथ लगा कर देखें आग पत्थर से तो पैदा नहीं कर पाए हम शक्ल दुनिया की बदलना तो बहुत दूर की बात एक कमरे को भी कमरा नहीं कर पाए हम जिसमे हर बात कही जाती है आसानी से ऐसे हालात ही पैदा नहीं कर पाए हम कोई सिक्का नही चादर पे तो हैरत क्या है इक तमाशा कभी पूरा नहीं कर पाए हम वो भी उन चंद मरीज़ों में है शामिल शारिक मुस्कुराकर जिन्हें अच्छा नहीं कर पाए हम Shariq kaifi

सोच कर तेरी महफ़िल में चला आया हू फ़राज़ तेरी सोहबत में रहूँगा तो संवर जाऊंगा ❤️

साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले हम को जाना है कहीं शाम से पहले पहले नौ-गिरफ़्तार-ए-वफ़ा सई-ए-रिहाई है अबस हम भी उलझे थे बहुत दाम से पहले पहले ख़ुश हो ऐ दिल कि मोहब्बत तो निभा दी तू ने लोग उजड़ जाते हैं अंजाम से पहले पहले अब तिरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं कितनी रग़बत थी तिरे नाम से पहले पहले सामने उम्र पड़ी है शब-ए-तन्हाई की वो मुझे छोड़ गया शाम से पहले पहले कितना अच्छा था कि हम भी जिया करते थे ग़ैर-मारूफ़ से गुमनाम से पहले पहले अहमद फ़राज़ #जाम #शाम #गिरफ्तार #दिल #मोहब्बत #अंजाम #ज़िक्र #नाम #गजल #शायरी #mushaironkidunia

तुझे है मश्क़-ए-सितम का मलाल वैसे ही हमारी जान थी जाँ पर वबाल वैसे ही चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही हम आ गए हैं तह-ए-दाम तो नसीब अपना वगरना उस ने तो फेंका था जाल वैसे ही मैं रोकना ही नहीं चाहता था वार उस का गिरी नहीं मिरे हाथों से ढाल वैसे ही ज़माना हम से भला दुश्मनी तो क्या रखता सो कर गया है हमें पाएमाल वैसे ही मुझे भी शौक़ न था दास्ताँ सुनाने का 'फ़राज़' उस ने भी पूछा था हाल वैसे ही अहमद फ़राज़ #मलाल #बेवफाई #जिक्र #खयाल #नसीब #जाल #ज़माना #फ़राज़ #mushaironkidunia

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा बे-वक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुम ने मिरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा यारों की मोहब्बत का यक़ीं कर लिया मैं ने फूलों में छुपाया हुआ ख़ंजर नहीं देखा महबूब का घर हो कि बुज़ुर्गों की ज़मीनें जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा ख़त ऐसा लिखा है कि नगीने से जड़े हैं वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला मैं मोम हूँ उस ने मुझे छू कर नहीं देखा बशीर बद्र #खत #कश्ती #मोहब्बत #खंजर #मंजिल #घर #mushaironkidunia

आँखों से कू-ए-यार का मंज़र नहीं गया हालाँकि दस बरस से मैं उस घर नहीं गया उस ने मज़ाक़ में कहा मैं रूठ जाऊँगी लेकिन मेरे वजूद से ये डर नहीं गया साँसें उधार ले के गुज़ारी है ज़िंदगी हैरान वो भी थी कि मैं क्यों मर नहीं गया शाम-ए-विदाअ लाख तसल्ली के बावजूद आँखों से उस की दुख का समुंदर नहीं गया उस घर की सीढ़ियों ने सदाएँ तो दीं मगर मैं ख़्वाब में रहा कभी ऊपर नहीं गया बच्चों के साथ आज उसे देखा तो दुख हुआ उन में से कोई एक भी माँ पर नहीं गया पैरों में नक़्श एक ही दहलीज़ थी 'हसन' उस के सिवा मैं और किसी दर नहीं गया हसन अब्बास रज़ा #इश्क #प्यार #मोहब्बत #शेर #शायरी #गजल #mushaironkidunia

बार-तर अज़-अंदेशा-ए-सूद-ओ-जियान है ज़िन्दगी है कभी जान और कभी तसलीम-ए-जान है ज़िन्दगी तू इस से पैमाना-ए-इमरोज-ओ-फरदा से ना नाप जावदां, पेहम दावां, हर दम जवाँ है ज़िन्दगी अपनी दुनिया आप पैदा कर अगर ज़िंदों में है सर-ए-आदम है, ज़मीर-ए-कुन-फ़िकान है ज़िन्दगी ज़िंदगानी की हकीकत कोह-कान के दिल से पूछ जू-ए-शेर-ओ-तीशा-ओ- संग-ए-गिरां है ज़िन्दगी बंदगी में घट के रह जाती है इक जू-ए-कम अब और आजादी में बेहर-ए-बे करण है ज़िन्दगी आशकारा है ये अपनी कुव्वत-ए-तस्खीर से गर-चे इक मिट्टी के पैकर में निहान है ज़िन्दगी क़ुल्ज़ुम-ए-हस्ती से उबरा है तू मानिंद-ए-हुबाब इस जियान-खाने में तेरा इम्तेहां है ज़िन्दगी Allama Iqbal

आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें ज़िंदगी बीत गई और वही यादें-यादें जिस तरह आज ही बिछड़े हों बिछड़ने वाले जैसे इक उम्र के दुःख याद दिला दें यादें काश मुमकिन हो कि इक काग़ज़ी कश्ती की तरह ख़ुदफ़रामोशी के दरिया में बहा दें यादें वो भी रुत आए कि ऐ ज़ूद-फ़रामोश मेरे फूल पत्ते तेरी यादों में बिछा दें यादें जैसे चाहत भी कोई जुर्म हो और जुर्म भी वो जिसकी पादाश में ताउम्र सज़ा दें यादें भूल जाना भी तो इक तरह की नेअमत है ‘फ़राज़’ वरना इंसान को पागल न बना दें यादें अहमद फ़राज़ #यादें #फ़राज़ #शायरी #गजल #शेर #mushaironkidunia

और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए ~जौन एलिया

आदत ही बना ली है तुमने तो "मुनीर" अपनी जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना

"मस्त रखो ज़िक्र-ओ-फिक्र ओ सुबहगाही में इससे पुख्तातर कर दो मजाज-ऐ-खानकाही में...! ~अल्लामा इकबाल रह० 🖤

मोहब्बत के सफ़र में कोई भी रस्ता नहीं देता ज़मीं वाक़िफ़ नहीं बनती फ़लक साया नहीं देता ख़ुशी और दुख के मौसम सब के अपने अपने होते हैं किसी को अपने हिस्से का कोई लम्हा नहीं देता न जाने कौन होते हैं जो बाज़ू थाम लेते हैं मुसीबत में सहारा कोई भी अपना नहीं देता उदासी जिस के दिल में हो उसी की नींद उड़ती है किसी को अपनी आँखों से कोई सपना नहीं देता उठाना ख़ुद ही पड़ता है थका टूटा बदन 'फ़ख़री' कि जब तक साँस चलती है कोई कंधा नहीं देता ज़ाहिद फ़ख़री #मोहब्बत #सफ़र #रास्ता #दिल #खुशी #उदासी #नींद #शायरी #mushaironkidunia

ये बद-नसीबी नहीं है तो और फिर क्या है सफ़र अकेले किया हम-सफ़र के होते हुए - हसीब सोज़

टूटी है मेरी नींद मगर तुमको इससे क्या बजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे क्या तुम मौज-मौज मिस्ल-ए-सबा घूमते फिरो कट जाएँ मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या औरों के हाथ थामो उन्हें रास्ता दिखाओ मैं भूल जाऊँ अपना ही घर, तुमको इससे क्या अब्र-ए-गुरेज़-पा को बरसने से क्या गरज़ सीपी में बन न पाए गुहर तुमको इससे क्या तुमने तो थक के दश्त में ख़ेमे लगा दिए तन्हा कटे किसी का सफ़र, तुमको इससे क्या परवीन शाकिर

हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे तिरी बाँकी चितवन ने चुन चुन के मारे नुकीले सजीले जवाँ कैसे कैसे न गुल हैं न ग़ुंचे न बूटे न पत्ते हुए बाग़ नज़्र-ए-ख़िज़ाँ कैसे कैसे सितारों की देखो बहार आँख उठा कर खिलाता है फूल आसमाँ कैसे कैसे कड़े उन के तेवर जो मक़्तल में देखे लिए नाज़ ने इम्तिहाँ कैसे कैसे यहाँ दर्द से हाथ सीने पे रखा वहाँ उन को गुज़रे गुमाँ कैसे कैसे वो सूरत न आँखों में अब है न दिल में मकीं से हैं ख़ाली मकाँ कैसे कैसे तिरे जाँ-निसारों के तेवर वही हैं गले पर हैं ख़ंजर रवाँ कैसे कैसे जहाँ नाम आता है उन का ज़बाँ पर तो लेती है बोसे ज़बाँ कैसे कैसे हर इक दिल पे हैं दाग़ नाकामियों के निशाँ दे गया बे-निशाँ कैसे कैसे बहार आ के क़ुदरत की गुलशन में देखो खिलाता है गुल बाग़बाँ कैसे कैसे उठाए हैं मज्नूँ ने लैला की ख़ातिर शुतुर-ग़मज़ा-ए-सार-बाँ कैसे कैसे ख़ुश-इक़बाल क्या सर-ज़मीन-ए-सुख़न है मिले हैं उसे बाग़बाँ कैसे कैसे जवानी का सदक़ा ज़रा आँख उठाओ तड़पते हैं देखो जवाँ कैसे कैसे शब-ए-वस्ल हल होंगे क्या क्या मुअ'म्मे अ'याँ होंगे राज़-ए-निहाँ कैसे कैसे ख़िज़ाँ लूट ही ले गई बाग़ सारा तड़पते रहे बाग़बाँ कैसे कैसे बना कर दिखाए मिरे दर्द-ए-दिल ने तह-ए-आसमाँ आसमाँ कैसे कैसे 'अमीर' अब मदीने को तू भी रवाँ हो चले जाते हैं कारवाँ कैसे कैसे अमीर मीनाई #इश्क #मोहब्बत #गजल #प्यार #शायरी #शेर #mushaironkidunia

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं क़बीले वालों के दिल जोड़िए मिरे सरदार सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं बुरा न मान अगर यार कुछ बुरा कह दे दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं छलक छलक पड़ीं आँखों की गागरें अक्सर सँभल सँभल के ये पनहारियाँ नहीं चलतीं जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं कैफ़ भोपाली #शायरी #शेर #गजल #सियासत #दिल #खेल #इश्क #मोहब्बत #mushaironkidunia

कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे जान बाक़ी है मगर साँस रुकी हो जैसे हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है मुझ से कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे राह चलते हुए अक्सर ये गुमाँ होता है वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़र ज़िंदगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे फ़ैज़ अनवर #दिल #फरियाद #बात #उम्र #लम्हे #सदियां #शायरी #गजल #mushaironkidunia

उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी #उम्र #शब #गम #नींद #दर्द #घर #खुदा #mushaironkidunia

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है तवायफ़ की तरह अपने ग़लत कामों के चेहरे पर हुकूमत मंदिरों-मस्जिद का पर्दा डाल देती है हुकूमत मुँह-भराई के हुनर से ख़ूब वाक़िफ़ है ये हर कुत्ते के आगे शाही टुकड़ा डाल देती है कहाँ की हिजरतें कैसा सफ़र कैसा जुदा होना किसी की चाह पैरों में दुपट्टा डाल देती है ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती-जुलती है कहीं भी शाख़े-गुल देखे तो झूला डाल देती है भटकती है हवस दिन-रात सोने की दुकानों में ग़रीबी कान छिदवाती है तिनका डाल देती है हसद की आग में जलती है सारी रात वह औरत मगर सौतन के आगे अपना जूठा डाल देती है मुनव्वर राना #मोहब्बत #सियासत #झगड़ा #दोस्ती #हुकूमत #मंदिर #मस्जिद #चिड़िया #दुपट्टा #सफर #बेटी #हवस #गरीबी #औरत #हसद #mushaironkidunia

न मोहब्बत न दोस्ती के लिए वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए दिल को अपने सज़ा न दे यूँ ही इस ज़माने की बेरुख़ी के लिए कल जवानी का हश्र क्या होगा सोच ले आज दो घड़ी के लिए हर कोई प्यार ढूंढता है यहाँ अपनी तन्हा सी ज़िन्दगी के लिए वक़्त के साथ साथ चलता रहे यही बेहतर है आदमी के लिए सुदर्शन फ़ाकिर #मोहब्बत #दोस्ती #वक्त #दिल #सजा #जमाना #जवानी #घड़ी #प्यार #जिंदगी #वक्त #आदमी #mushaironkidunia