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गृहस्थ तंत्र/सिद्ध शाबरी विद्या

गृहस्थ तंत्र/सिद्ध शाबरी विद्या

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गृहस्थ तंत्र

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📈 Analytical overview of Telegram channel गृहस्थ तंत्र/सिद्ध शाबरी विद्या

Channel गृहस्थ तंत्र/सिद्ध शाबरी विद्या (@grihasthtantra) in the Hindi language segment is an active participant. Currently, the community unites 13 727 subscribers, ranking 6 309 in the Religion & Spirituality category and 29 032 in the India region.

📊 Audience metrics and dynamics

Since its creation on невідомо, the project has demonstrated rapid growth, gathering an audience of 13 727 subscribers.

According to the latest data from 08 September, 2026, the channel demonstrates stable activity. Although there has been a change in the number of participants by 264 over the last 30 days and by 8 over the last 24 hours, overall reach remains high.

  • Verification status: Not verified
  • Engagement rate (ER): The average audience engagement rate is 20.62%. Within the first 24 hours after publication, content typically collects 15.13% reactions from the total number of subscribers.
  • Post reach: On average, each post receives 2 829 views. Within the first day, a publication typically gains 2 076 views.
  • Reactions and interaction: The audience actively supports content: the average number of reactions per post is 446.
  • Thematic interests: Content is focused on key topics such as जयंती, श्री, भगवती, अनुष्ठान, माँ.

📝 Description and content policy

The author describes the resource as a platform for expressing subjective opinions:
गृहस्थ तंत्र

Thanks to the high frequency of updates (latest data received on 09 September, 2026), the channel maintains relevance and a high level of publication reach. Analytics show that the audience actively interacts with content, making it an important point of influence in the Religion & Spirituality category.

13 727
Subscribers
+824 hours
+1407 days
+26430 days
Posts Archive
मंगला आरती दर्शन

मां का ही राज चलता है❤️
मां का ही राज चलता है❤️

लाइव में जिस विडियो का चर्चा किये थे। रुद्राभिषेक देखने से भी उसका फल मिलेगा। यहां भाव प्रधान है।

धन्यवाद आपका ❤️😊
धन्यवाद आपका ❤️😊

महागुरु ❤️❤️❤️❤️
महागुरु ❤️❤️❤️❤️

चलो समाज में लोग समझ तो पा रहें की हमारा प्रयास सही दिशा में और स्थाई तंत्र को लेकर है ना की हाइप बनाकर बस अनुयाई बटोरना

❤️ ये किस लोक में बात हो रहा है गृहस्थ तंत्र का❤️❤️
❤️ ये किस लोक में बात हो रहा है गृहस्थ तंत्र का❤️❤️

आज रात लाइव 9:00 बजे से

भगवती महाविद्या तारा के अनुष्ठान में संपुट चण्डी पाठ होगा उसी में भुजा में बांधने वाला बाजूबंद अभिमंत्रित होगा। साधक साधिका उसे धारण करके ही नित्य पूजन किया कीजिएगा। तंत्रोक्त माला सभी के पास जप व धारण के लिए हो चुका होगा। मणिबंध रक्षा बंध भी होना चाहिए अब दो अनुष्ठान में दोनों हाथों का भुजबंध भी हो जायेगा। इसे इच्छा हो तो नित्य भी धारण रख सकते हैं या नित्य केवल पूजन काल में भी धारण कर सकते हैं। जब तीर्थ यात्रा पर जायें व वहां परिक्रमा पूजा स्नान अभिषेक करें तो माला, मणिबंध रधा बंध व भुजबंध अवश्य धारण रखें। हर शुभ कर्म को इसे धारण करके करें। गृहस्थ साधक साधिका शयन काल में जब साथ सो रहें हों तब उतार कर रख दें पुनः स्नान उपरांत धारण करें। शौच आदि के समय सब उतार कर शुद्ध स्थान पर रखना चाहिए व स्नान उपरांत धारण करना चाहिए। गले में धारण किया हुआ कवच सदैव धारण रख सकतें हैं उसे उतारने की आवश्यकता नहीं। अलग अलग कवच के लिए अलग अलग निर्देश व व्यवस्था है उस अनुसार उपयोग करें। नमश्चण्डिकायै 🙏❤️

भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को अघोर चतुर्दशी/ तारा चतुर्दशी तो अमावस्या को कौशिकी महा अमावस्या/ अघोर अमावस्या तांत्रिक महापर्व रहता है। यह काल अभिचारी लोगों के लिए बहुत ही विशेष रहता है अर्थात् इस समय काल में दुसरों पर कृत्या तंत्र मारण उच्चाटन विद्वेषण खुब होता है। इसलिए यह दो तीन दिन बहुत ही सुरक्षा से रहने के लिए है। जहां एक ओर आपकी साधना फलिभूत हो सकती है वहीं तगड़ा शत्रु आपके साधना को बांध सकता है आप उच्चाटित हो सकते हैं। अतः चतुर्दशी व अमावस्या को घर पर हवनात्मक अनुष्ठान अवश्य कीजियेगा। सर्वश्रेष्ठ है भगवती के सहस्रनाम से हवन या सपरिवार उच्चारण करते हुए जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी.. मंत्र से हवन। 9-10 सितंबर की महानिशा इन दोनों तिथियों का अद्भुत बेला प्रस्तुत हो रही है। मंत्र सिद्धि, योगिनी सिद्धी, मातृका शक्तियों की कृपा, लोक योगिनी कृपा, कुल देवी आदि से संबंधित सभी शक्तियों को प्रसन्न व अनुकुल करने हेतु अत्यंत दिव्य व महत्वपूर्ण काल है। इस महानिशा आप अवश्य ही घर पर संबंधित साधना अनुष्ठान हवन आदि करें। गृहस्थ तंत्र परिवार द्वारा इस दिव्य पर्वकाल हेतु दो प्रमुख अनुष्ठान होंगे जिनमें भगवती तारा का महाश्मशान पर हवन, मुख्य मंदिर में श्रृंगार, रामगया घाट पर श्रृंगार व तारा प्रत्यंगिरा विशेष तंत्रोक्त हवन आदि पूर्ण होगा। इस महारात्रि के महानिशा में साधओं के निमित्त श्री अभिषेक व प्रतिष्ठा कर सबको भेजा जायेगा। इस उग्रतारा की उग्र तंत्रोक्त रात्रि में देवी भक्तों साधकों सेवकों के लिये भुवनेश्वरी-तारा रक्षा बाजूबंद रुद्राक्ष बंधित कर समस्त शोधन प्रक्रिया सहित पूजन हवन मंत्र अभिषेक आदि के पश्चात भेजा जायेगा‌। इसे पुरुष दाहिने व स्त्री साधिका बायीं भुजा पर धारण कर आप सदैव कहीं भी विचरण कर सकतें हैं। शमशान व सुतक गृह में भी इनका कोई अशौच मान नहीं। वर्ष में एक बार धागा अवश्य बदल लें। नहीं भी बदलेंगे तो कोई समस्या नहीं। स्त्री भी इसे सदैव धारण करें। रजस्वला के समय उतार कर रख दें व निवृत्त होकर पुनः धारण कर लें। मासिक पश्चात् धागा बदलने की आवश्यकता नहीं। इसे ऊर्जित रखने हेतु नित्य इनको जल अथवा दुध से अभिषेक कर चंदन इत्र या अगरु से स्नान करवाकर हाथ में लेकर आप जिस भी देवी का कवच पाठ करतें हों उनका एक पाठ कर दीजिए व हाथ में भुजा पर पहन लिजिए। अगर उतारना ना चाहतें हों तो इत्र को कवच से अभिमंत्रित करके उस पर लगा दीजिए। अगर कामाख्या कवच करतें हों तो अति उत्तम। ऐसा नित्य करें तो उत्तम। भुजा पर बंध लगाने का साधना परंपरा में सदैव महत्व रहा है उसमें भी रक्षात्मक तंत्रोक्त रुद्राक्ष बंध हो तो अनेक पुण्यों की प्राप्ति हो । महीने में एक बार सेंधा नमक युक्त जल से धोकर गोदुग्ध से स्नान करवाकर सुगंधित कर अभिमंत्रित कर लिया करें। यह अगर टुट जाये तो पुनः गुंथवाकर ऐसे ही अभिमंत्रित करें साथ में तंत्रोक्त देवी सुक्तम् का पाठ कर लें। यह बंध परिवार से बाहर अन्य किसी को उपहार में ना दें। अगर श्रद्धा ना बने कभी और आप सालों पहन चुके हों तो देव नदियों में विसर्जित कर दें। क्योंकि जिस विधान से हम लोग इस पर इस बार धारण हेतु पाठ करने वालें हैं उससे सहस्र चंडी का पाठ फल मिलता है। अतः इसका बहुत सम्मान करें। चाहें तो किसी भी देवी विग्रह को धारण करवा कर पूजन भी कर सकतें हैं। भगवती की प्रसन्नता प्राप्त होगीं। प्रथम अनुष्ठान - अभिचार नाशक हवन। इसमें एक व्यक्ति के नाम से एक ही विवरण दीजियेगा। इसमें प्रसाद आदि नहीं जायेगी क्योंकि यह महाश्मशान का अनुष्ठान रहेगा। द्वितीय अनुष्ठान - भगवती का पूर्ण श्रृंगार, उग्रतारा प्रत्यंगिरा तंत्रोक्त हवन व सप्तशती पाठ आदि सहित जिसमें तंत्रोक्त बाजूबंध व प्रसाद अनुष्ठान उपरांत जायेगा। उपरोक्त अनुष्ठान हेतु https://www.grihasthpujansamagri.com पर पधारकर विवरण दे सकतें हैं। नमश्चण्डिकायै 🙏❤️

भगवान दत्तात्रेय केवल अवधुत ही नहीं अपितु पुर्ण दिव्य गृहस्थ संपदा से युक्त स्वरुप भी हैं। प्रत्येक गृहस्थ निसंकोच होकर इनके
भगवान दत्तात्रेय केवल अवधुत ही नहीं अपितु पुर्ण दिव्य गृहस्थ संपदा से युक्त स्वरुप भी हैं। प्रत्येक गृहस्थ निसंकोच होकर इनके इस दिव्य संयुक्त स्वरुप का पूजन कर सकता है। भगवती अनघा लक्ष्मी व आठों पुत्र जो की आठ सिद्धियां हैं। नमश्चण्डिकायै 💛

इतना करने के लिए एक पौरुष भरा स्थिर हृदय व मस्तिष्क चाहिए। जो सुनकर समझ सके की विषय का स्तर कितना गहरा है तब वह ढृढचित्त से स
इतना करने के लिए एक पौरुष भरा स्थिर हृदय व मस्तिष्क चाहिए। जो सुनकर समझ सके की विषय का स्तर कितना गहरा है तब वह ढृढचित्त से स्वयं का सहयोग कर पायेगा। यहां तो लोगों को नीचा दिखाने, कमी निकालने, द्वेष करने और इन सबके लिए दुसरों के पास जाकर चुगली करके समय व्यर्थ करने से ही फुर्सत नहीं है , साधना अनुष्ठान क्या करेंगे ये लोग ! उपरोक्त अनुभव में पुरा परिवार सुनता था तो अवश्य आपस में मंथन होता होगा, रुप रेखा तैयार होती होगी तब शत्रु को धराशाई किया गया होगा। आप अपना समय जैसे विचारों को देंगे आप वैसे ही पुष्टि अथवा कुंठा को प्राप्त करेंगे । श्री विंध्यवासिनी सदा सहाय ❤️

निर्जन स्थान पर उपस्थित बरगद और पीपल के नीचे कभी भी कोई दीपक नहीं जलाना चाहिए ना परिक्रमा करना चाहिए। एक अदीक्षित व नये साधक
निर्जन स्थान पर उपस्थित बरगद और पीपल के नीचे कभी भी कोई दीपक नहीं जलाना चाहिए ना परिक्रमा करना चाहिए। एक अदीक्षित व नये साधक को तो कदापि नहीं। लगभग ऐसे जगहों पर लोग अपने घर के नकारात्मक ऊर्जाओं को बैठा देते हैं। ये वृक्ष कभी खाली नहीं मिलते। शहर हो या गांव। अगर आपका समय तगड़ा है तो आप शेर हो , स्त्री होकर गायत्री करो कुछ ना बिगड़ेगा, निर्जन स्थान में उपस्थित पीपल बरगद के नीचे लघुशंका कर आओ कुछ ना होगा। लेकिन जैसे ही पुण्य समाप्त होगा, दशा बदली , 6/8/12 की दशा लगी वैसे ही ये सब ब्याज समेत वसुलेंगे, तब कहां कहां का भूत आयेगा और कहां का देवता आप पूजते उतारते थक ना गये तो कहना। बड़े बड़े जमींदार मिट्टी में मिल गये ये सब गलती करके। लेकिन जब समय ठीक था तो गर्मी उफान पर था। अब वंश के लोग उन्हें गाली दे देकर दाने दाने के लिए तरस रहें।

आप से तुम की यात्रा बहुत महीन यानी सुक्ष्म होती है आज कल । यही कारण है की हम श्रोता और दर्शक ही मानते हैं शिष्य या अनुयाई नही
आप से तुम की यात्रा बहुत महीन यानी सुक्ष्म होती है आज कल । यही कारण है की हम श्रोता और दर्शक ही मानते हैं शिष्य या अनुयाई नहीं। हजारों काम की बात में से इन पुराने श्रोता को यही विषय मिला फ्रस्ट्रेशन निकालने को।

प्रभु गौरी केदारेश्वर 🙏❤️