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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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लिंग को कड़क करने के लिए व्यायाम
* यह व्यायाम उन लोगों के लिए बहुत प्रभावी साबित हो सकता है जो इस बात से चिंतित हैं कि उनके लिंग को मोटा कैसे किया जाए । इसके साथ, यह लिंग के वक्रता और ढीलेपन को दूर करने में सहायक हो सकता है।
* इसे शुरू करने से, पहल आराम करती है और थोड़ा गर्म होती है।
* अब अपने लिंग के अग्र भाग को पीछे की ओर खींचे और दूसरे हाथ से लिंग के उभरे हुए सिरे को पीछे से पकड़ें। इसे बहुत कसकर न पकड़ें, क्योंकि इससे रक्त परिसंचरण में दर्द और रुकावट हो सकती है।
* इसके बाद अपने लिंग को आगे की ओर फैलाएं और सुनिश्चित करें कि लिंग के निचले हिस्से में दर्द न हो। अब अपने लिंग को अपने पेट की ओर खींचें और इसे 15 से 30 सेकंड तक रोकें।
* इसके बाद 5 सेकंड का आराम करें। इसके बाद इसी तरह से 15 से 30 सेकंड तक लिंग को घुटनों, दाईं ओर और बाईं ओर फैलाएं।
एक बार में इस अभ्यास को 10 बार दोहराएं। अपने लिंग को ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं और आगे-पीछे दो-दो बार करें।
इस व्यायाम को हर दिन एक बार करें।1-
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🌿🌺🌿स्त्रियाँ🌿🌺🌿
स्त्रियों की बातें मज़ाक का विषय हो सकती हैं पर
उनकी चुप्पी, उनका मौन उनके दुःख का ही चिह्न है..
लेकिन आज हम उनकी चुप्पी नहीं
उनके रूठने की बात करेंगे।
वो तो गुस्से में भी हो कर रूठ जाती हैं पर
खाली बर्तनों से आवाज़ कर बातें करती रहतीं हैं,
जब तक वो हमसे प्रेम करतीं हैं बातें करती रहेंगी,
चुप हुईं तो समझें हम उनका प्रेम खो चुके हैं...
लेकिन स्त्रियाँ यदि रूठ जाएँ तो
ये परेशान होने की बात नहीं अलबत्ता
ये तो उत्सव का समय है, जी हाँ प्रणय उत्सव का।
स्त्रियों का रूठना दरअसल उनका प्रणय निवेदन ही है,
जब वो प्रिय का सानिध्य चाहतीं हैं तो रूठ जाती हैं।
प्रेम 'ज्ञान' का नहीं 'भावना' का विषय है।
और बस यहीं वो बिन्दु है जहाँ अक्सर चूक हो जाती है।
स्त्रियाँ बात सीधे ढँग से कभी नहीं कहतीं,
क्योंकि भावनाएँ जितनी ही वक्र में ही होंगी
उनकी अभिव्यक्ति उतनी ही गहरी।
हाँ तो मैं कह रही था कि
स्त्रियाँ जब नाराज हों तो वो प्रेम में डूबना चाहतीं हैं,
किन्तु हम उन गुजर चुकी बातों पर बहस शुरू कर देते हैं,
हम बार बार खुद को जस्टिफाई करना चाहते हैं।
जो स्त्रियों के हृदय पर लगी चोट पर प्रहार ही है।
अब कोई प्रणय निवेदन ले कर आया हो और
हम उसे ज्ञान देंगे बुरा तो लगेगा ही।
भावना में ज्ञान किसे अच्छा लगता है।
फिर स्त्री को ज्ञान की जरूरत ही नहीं है
वो तो खुद को प्रियतम के बाहुपाश में छोड़ देना चाहती है।
प्रिय को चाहिए कि वो उसे थाम ले,
केवल ध्यान से सुनें उसे और तब तक सम्भाले रखें,
जब तक उसके मन पर रखी बात पिघल कर
आँखों से बह न जाए।
न रोकें उसके आँसू अपितु
अपने रुमाल से पोछ डालें उसके मन की मैल।
स्त्रियाँ रूठती नहीं वो तो प्रणय निवेदन करती है..
🌿🌺🌿प्रेम नमन🌿🌺🌿
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आज के जमाने में बस अपने ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम पर फॉलोअर को ही अपना असली दोस्त समझा चाहता हे
यहां हम से जिया नही जा रहा की वो हमसे नाराज हे और आज भी बात नही कर रहे उनके हिसाब से हम जो सोचे उनके बारे में वो सही
और वो वहा बस अपने फॉलोअर्स के लाइक रिट्विट में खुश हे
हम में कोई रुचि नहीं 😢
जिए या ना जिए 😢
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वासना दुश्मन नहीं है।
वासना प्रभु का दान है।
इससे शुरू करें।
इसे स्वीकार करें।
इसको अहोभाव से,
आनन्द भाव से करें।
और इसको कितना सुन्दर बना सकते हैं,
बनायें।
इससे लड़ें नहीं इसको सजायें।
इसे श्रृंगार दें।
इसे सुन्दर बनायें।
इसको और सम्वेदनशील बनायें।
अभी हमें स्त्री सुन्दर दिखायी पड़ती है,
अपनी वासना को इतना बनायें कि
स्त्री के सौन्दर्य में हमें एक दिन
परमात्मा का सौन्दर्य दिखायी पड़ जाये।
अगर चाँद-तारों में दिखता है तो
स्त्री में भी दिखायी पड़ेगा।
पड़ना ही चाहिए।
अगर चाँद-तारों में है
तो स्त्री में क्यों न होगा ???
स्त्री और पुरुष तो
इस जगत की श्रेष्ठतम अभिव्यक्तियाँ हैं।
अगर फूलों में है — गूँगे फूलों में —
तो बोलते हुए मनुष्यों में न होगा ???
अगर पत्थर-पहाड़ों में है —
जड़ पत्थर — पहाड़ों में —
तो चैतन्य मनुष्य में न होगा...
सम्वेदनशील बनायें।
वासना से भागे नहीं।
वासना से डरें नहीं।
वासना को निखारें, शद्ध करें।
यही मेरी पूरी प्रक्रिया है
जो मैं यहाँ आपलोगों को दे रहा हूँ।
वासना को शद्ध करें, निखारें।
वासना को प्रार्थनापूर्ण करें।
वासना को ध्यान बनायें।
और धीरे-धीरे हम चमत्कृत हो जायेंगे कि
वासना ही हमें वहाँ ले आयी,
जहाँ हम जाना चाहते थे।
वासना से लड़ कर और नहीं जा सकते थे।
मैं कह रहा हूँ :
प्रेम हममें कम है,
हमारी वासना बड़ी अधूरी है, अपँग है।
हमारी वासना को पङ्ख नहीं है।
पङ्ख दें !
अपनी वासना को उड़ना सिखायें !
हमारी वासना जमीन पर सरक रही है।
मैं कहता हूँ :
वासना को आकाश में उड़ना सिखायें।
परमात्मा अगर वासना के द्वारा सँसार में उतरा है,
तो हम वासना की ही सीढ़ी पर चढ़ कर
परमात्मा तक पहुँचेंगे।
क्योंकि जिस सीढ़ी से उतरा जाता है
उसी से चढ़ा जाता है।
फिर आप सभी को दोहरा कर हूँ।
पुराने शास्त्र कहते हैं :
परमात्मा में वासना जगी कि मैं अनेक होऊँ।
अकेला-अकेला थक गया होगा।
हम भीड़ से थक गये हैं,
वह अकेला-अकेला थक गया था।
वह उतरा जगत में।
हम भीड़ से थक गये हैं।
अब हम वापिस एकान्त पाना चाहते हैं।
मोक्ष पाना चाहते हैं।
कैवल्य पाना चाहते हैं।
ध्यान-समाधि पाना चाहते हैं।
चढ़ें उसी सीढ़ी से, जिससे परमात्मा उतरा।
इसलिए मैं कहता हूँ :
सम्भोग और समाधि एक ही सीढ़ी के दो हिस्से हैं ;
दिशा का भेद है, और कोई भेद नहीं है।
परमात्मा उतरा है समाधि से सम्भोग की तरफ,
तो सँसार बना है, नहीं तो सँसार नहीं बन सकता था।
हम चलें सम्भोग से समाधि की तरफ,
तो हम सँसार से मुक़्त हो जायेंगे।
उसी सीढ़ी से चलना होगा,
और कोई सीढ़ी नहीं है।
...🙏🏿 ...🙏🏿 ...
का सोवै दिन रैन--
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#___स्त्री🙏
स्त्री को जिसने जैसा चाहा
वैसा परिभाषित किया...
कभी चाँद कहा,
कभी मृगनयनी
कभी चंचल कहा
कभी मंदाकिनी...
कभी कह दिया
फूलों सा नाज़ुक
कभी कह दिया
क्यों इतनी हो भावुक?
कभी कहा गया
देवी का स्वरूप
कभी कहा गया
ममता का रूप
पर सिर्फ़ कह देना,
होने का प्रमाण नहीं होता
क्योंकि उसी स्त्री को कह दिया
किसी ने मुसीबत की जड़
हक़ की आवाज़ जो निकली मुख से
तो कह दिया बदतमीज़ और अक्खड़
फूलों सी नाज़ुक कहकर
जब चाहा उसको दिया मसल...
उसने जब अपने मन की करनी चाही
तो कह दिया कि ये तो
हाथों से गयी है निकल
ख़ुद बनना चाहा
हर बार उसका मालिक
उसको कह दिया
पैसों के पीछे भागने वाली..
पर जब काबिल होकर वो
उठाने लगी मर्द के भी खर्चे
तो कह दिया कि बड़ा है गुरूर!
और इसी गुरूर को तोड़ने की ख़ातिर
कभी किया बलात्कार,
कभी दिया तेजाब डाल..
कभी दहेज़ की आग में जला दिया
कभी कोख़ में ही क़त्ल किया!
और फिर एक दिन
बना दिया उसके नाम का
जो कि दर्शा सके
उसकी महानता...
और छुपा सके,
सारे घिनौने रूप
इस समाज के...
स्त्री को समझने से
कहीं ज़्यादा आसान है
उसके बारे में कुछ भी
लिख देना...
इसलिए ही कभी बुराईयाँ
लिखी गईं उसकी
तो कभी तारीफों के
क़सीदे पढ़े गये ।
#___मै #प्रेम #हूं..!!
♥️♥️♥️♥️♥️♥️
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नमस्कार
मैं दिलजीत आज फिर आपकी सेवा में हाजिर हूँ अपने एक लेख के साथ।
आप लोग मेरे लेख अत्यधिक पसंद कर रहे हैं और आपकी प्रशंशा पाकर मैं गदगद हूँ।
आशा है आप इसी तरह मेरे लेख पसन्द करेंगे और अपने सुझाव देते रहेंगे।
चलिए विषय पर आते हैं।
आज का विषय है:-
"पुरुषों का स्त्री के उरोजों को लेकर विशेष आकर्षण"
स्त्री के उरोज उसके यौवन व सौंदर्य का एक विशेष अंग है।स्त्री के स्तनों का आकार उसमे आत्मविश्वास व आकर्षण भरता है।
पुरुषों के मन मे स्त्री के स्तनों के प्रति आकर्षण बाल्यकाल से ही शुरू हो जाता है।जब मां बच्चे को स्तनपान कराती है तो उसके पोषण से बच्चे का विकास होता है। स्त्री के दुग्ध में इतना पोषण होता है कि वह शिशु का पालन 5 वर्ष तक कर सकता है।स्त्री के दुग्ध में हर प्रकार का पोषण होता है जो विकास के लिए आवश्यक है।
स्तनपान के दौरान ही पुरुषों के अवचेतन मन मे स्तनों को लेकर आकर्षण उतपन्न होने लगता है।
ये भाव तब दब जाता है जब शिशु बड़ा होने लगता है तथा 5 वर्ष के ऊपर की आयु प्राप्त करता है।
इस आयु में बालक या बालिका समान लिंग के प्रति आकर्षण व्यक्त करते हैं।
फिर जब किशोरावस्था आती है तो बालक के मन मे विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण उतपन्न होने लगता है।
इस अवस्था में जब उसे स्त्री के स्तन दिखते हैं तब वह अवचेतन रूप से उनसे अपनी भूख शांत करने के लिए कल्पना करने लगता है।
स्तनों का आकार पुरुषों के मन मे ये भाव उतपन्न करता है कि आकार के अनुसार ही उनमें दुग्ध होगा।
यही कारण है कि पुरुषों को बड़े उरोज़ अधिक पसन्द आते हैं तथा वो क्रिया के समय उन्हें चूसकर अपनी भूख शांत करने की कोशिश करते हैं।
उरोज़ो को चूसकर,दबाकर पुरुषों को लगता है कि कहीं न कहीं उनकी भूख शांत हो गई है।
ये रहा आज का लेख।
अपने विचारों को कमेंट व सन्देश के माध्यम से मुझतक पहुंचाये और अगले लेख के लिए सुझाव दें।
मैं इस तरह के लेख लाता रहूंगा।
।।धन्यवाद।।
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नमस्कार
आज काफी दिनों बाद कोई लेख लिखने की इच्छा हुई है।
आशा है आप सब पसन्द करेंगे।
स्त्री की प्रकृति है कोमलता
पुरुष की प्रकृति है कठोरता
स्त्री की देह परम् सुकोमल होकर भी पुरुष के पौरुष का भार सह लेती है किन्तु पुरुष का कठोर शरीर स्त्री के तनिक भी विरोध को बर्दाश्त नही कर पाता।
पुरुषों के लिए उनका अहंकार हर चीज से ज्यादा प्रिय है, एक स्त्री जीवन भर पुरुष के अहंकार को तृप्त करने में ही जीवन निकाल देती है।
बिस्तर पर पति को सम्भोग का सुख देते समय स्त्री को किन किन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है शायद ये समझ पाना पुरुषों के वश में नहीं है।
उनकी गालियां सुनना, धक्के खाना, हर धक्के पर बढ़ते दर्द को चुपचाप सहन करना और अपनी आहों से पुरुष को संतुष्ट करना स्त्री के जीवन का एक हिस्सा है।
जब पुरूष स्त्री को पीछे से आकर पकड़ता है और उसके कानों को धीरे से सहलाता है तब स्त्री उस मादक स्पर्श में खो जाती है।
हर अत्याचार को भूलकर वो पुरूष के अधीन स्वयम को कर देती है और फिर तैयार हो जाती है सब पुरानी बातें दोहराने को।
इस मिलन की शाम को आप सब रंगीन बनाएं,प्रेम बनाये रखें,और अपने साथी को चरमसुख अवश्य दे।
।। सुप्रभात ।।
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