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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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कुछ पुरुषों का प्रेम..
स्त्री के स्तन पर नही फिसलता,
बल्कि वो उलझते हैं उसकी जुल्फों में...
अटक जाते हैं दुपट्टे के घुँघुरुओ में
और ठहर जाते हैं उनके माथे पर...!!
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*आपका असली जीवन साथी कौन है?*
*माँ*
*पिता*
*पत्नी*
*बेटा*
*पति*
*बेटी*
*दोस्त...????*
_*बिल्कुल नहीं*_
*आपका असली जीवन साथी तो आपका शरीर है ...*
एक बार जब आपका शरीर जवाब देना बंद कर देता है तो कोई भी आपके साथ नहीं है।
आप और आपका शरीर ही जन्म से लेकर मृत्यु तक एक साथ रहते हैं।
*जितना अधिक आप इसकी परवाह करेंगे, उतना ही ये आपका साथ निभाएगा।*
*आप क्या खाते हो,*
*फ़िट होने के लिए आप क्या करते हैं,*
*आप तनाव से कैसे निपटते हैं*
*आप कितना आराम करते हैं*
*आपका शरीर वैसा ही जवाब देगा।*
*याद रखें कि आपका शरीर एकमात्र स्थायी पता है जहां आप रहते हैं।*
*आपका शरीर आपकी संपत्ति है, जो कोई और साझा नही कर सकता।*
*आपका शरीर आपकी ज़िम्मेदारी है।*
*इसलिये, तुम ही हो इसके असली जीवनसाथी।*
*हमेशा के लिए फिट रहो अपना ख्याल रखो, पैसा आता है और चला जाता है रिश्तेदार और दोस्त भी स्थायी नहीं हैं।*
*याद रखिये, कोई भी आपके अलावा आपके शरीर की मदद नहीं कर सकता है।*
*अतः आप नित्य करें:-*
*प्राणायाम* - फेफड़ों के लिए
*ध्यान* - मन के लिए
*योग-आसन* - शरीर के लिए
*चलना* - दिल के लिए
*अच्छा भोजन* - आंतों के लिए
*अच्छे विचार* - आत्मा के लिए
*अच्छे कर्म* - दुनिया के लिए
*इसलिए स्वस्थ रहो, फिट रहो और प्रसन्न रहो।*
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प्रिय पुरनकी !
वस्त्र भार बन
तन से निकल जाता है
निवस्त्र यौवन
कामेन्द्रियाँ विचलित कर जाता है
चुचको का गहरा काला घेरा
अधरों को ललचाता है
हो व्याकुल प्रेमी
बच्चा बन जाता है
स्तन पीता
चूचुकों को चुभलाता है
लिंग देख
योनी प्यारी
इठलाता है
अकड़-अकड़ के
योनी को रिझाता है
पा निमंत्रण
योनी मुस्कराती है
रह-रह के अपना
मधु बहाती है
उफ्फ्फ्फ
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होटो मे प्यास, आँखों मे इजाजत है
जिव्हा मे मदिरा, तन मे हरारत है
बदन मे तनाव, यौवन मे कसावट है
उरोजो मे उठान, योनी मे तरावट है
बारिश की बुँदे, जिस्मों को भिगावत है
भीगा वस्त्र, सुंदर रूप को दिखावत है
आँखों का तीर, गोरी को निहारत है
हाथों का जाल, स्तनों को छिपावत है
प्रेमी का हाथ, कूल्हों को सहलावत है
यौवन कलश, सीने मे छुपावत है।
उफ्फ
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स्त्री की ये बड़ी बड़ी आंखे,
उन पर पतला काजल और
गौर वर्ण देह पर लम्बें लम्बें
केशों की लटें...
इस सौन्दर्य मायाजाल से
देवता नहीं बचे मैं तो
फिर भी मनुष्य हूँ।
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प्रिय पुरनकी !
वस्त्र भार बन
तन से निकल जाता है
निवस्त्र यौवन
कामेन्द्रियाँ विचलित कर जाता है
चुचको का गहरा काला घेरा
अधरों को ललचाता है
हो व्याकुल प्रेमी
बच्चा बन जाता है
स्तन पीता
चूचुकों को चुभलाता है
लिंग देख
योनी प्यारी
इठलाता है
अकड़-अकड़ के
योनी को रिझाता है
पा निमंत्रण
योनी मुस्कराती है
रह-रह के अपना
मधु बहाती है
उफ्फ्फ्फ
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काया के माया रुपी वस्त्र को हटाना
आत्मा का आत्मा से मिलन
एकीकृत होकर
काया को विस्मृत करने की प्रक्रिया
और अपनी दृष्टि का विलास, विस्तार ही तो
वास्तविक सम्भोग से समाधि तक की अवस्था है
मगर आम जन तो
अर्थ का अनर्थ करता है
बस स्त्री और पुरुष
या प्रकृति और पुरुष की दृष्टि से ही
सम्भोग और समाधि को देखता है
जबकि दृष्टि के बदलते
बदलती सृष्टि ही
सम्भोग से समाधि की अवस्था है।
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प्रियत्मा तुम्हे देख
रंगीन होते जा रहे हैं
मेरे ख्यालात सारे
लगता है तुम्हारी
हुस्न से फाल्गुन
दस्तक दे रहा है।
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#प्रेम_क्या_है ?
महज एक रिश्ता
स्त्री और पुरूष का
या सिर्फ़ आकर्षण!!!
नहीं,
प्रेम समर्पण है
सच्चा प्रेम केवल
स्त्री के देह से प्रेम
नहीं करता!!!
वो प्रेम करता है
स्त्री के मनोभाव से
उसके एहसासों से
निरंतर चलते उसके
ज़ज़्बातों से!!!
तुम्हारा थोड़ा सा समर्पण
स्त्री को पिघला देता है
और वो हो जाती है तुम्हारी
बिना बोले बिना कुछ समझे!!!
स्त्री के प्रेम की तृप्ति
यूँही शांत नहीं होती
आसान नहीं होता स्त्री के
प्रेम स्वरूप को समझना!!!
स्त्री के प्रेम की
तृप्ति होती है
तुम्हारे दिये मान
और सम्मान से
तुम्हारे उस आलिंगन से
जिसमें स्त्री स्वयं को
सुरक्षित महसूस करती है!!!
तुम्हारे धन और वैभव से
बहुत दूर होती है वो
तुम्हारी ख़ुशी में ही हमेशा
अपनी ख़ुशी ढूंढ लेती है वो!!!
छोड़ आती है वो
अपनी पूरी दुनियाँ
और ख़ुद में बसा लेती
है वो तुमको!!!
एक भरोसा
एक एहसास
दिल से जो समझें
बस जो ज़ज़्बात!!!
मेरी मूक अभिव्यक्ति
और तुम्हारा मुझे
गहराई से समझना
बिना स्पर्श के तुम्हारा
मुझसे प्रेम कर जाना
वो प्रेम ही सच्चा प्रेम है!!!
मरकर भी तुम में
ज़िंदा रहूँगी मैं
एहसास है ये मुझे
हम दोनों ने है
एक दूसरे के रूह को
स्पर्श किया!!!
स्त्री सिर्फ़ और सिर्फ़
उसी की होती है
जो स्त्री के ह्रदय को संपूर्ण समझता हो वो ख़ास पुरूष
जिस पुरुष ने स्त्री को संपूर्ण सन्मान दे कर स्त्रीत्व को पूर्ण किया हो !!!
सच,
प्रेम वो है जिसे
हम सिर्फ़ महसूस
करतें हैं!!!
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प्रियत्मा क्या है सम्भोग और समाधि ?
जब जीव का परमात्मा से मिलन हो जाये
या जब अपनी खोज संपूर्ण हो जाए
जहाँ मैं का लोप हो जाए
जब आत्मरति से परमात्म रति की ओर मुड जाए
या कहिये की
जीव रुपी बीज को
उचित खाद पानी रुपी
परमात्म तत्व मिल जाए
और दोनों का मिलन हो जाए
वो ही सम्भोग है ।
वो ही मिलन है ।
और फिर उस मिलन से
जो सुगन्धित पुष्प खिले
और अपनी महक से
वातावरण को सुवासित कर जाए
या कहिये
जब सम्भोग अर्थात मिलन हो जाये
तब मैं और तू का ना भान रहे
एक अनिर्वचनीय सुख में तल्लीन हो जाए
आत्म तत्व को भी भूल जाए
बस आनंद के सागर में सराबोर हो जाए
वो ही तो समाधि की स्थिति है
जीव और ब्रह्म का सम्भोग से समाधि तक का
तात्विक अर्थ तो
यही है
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#ब्रह्मचर्य तो #प्रेम से फलित होता है, जब #हृदय परिपूर्ण प्रेम से भर जाता है तो ब्रह्मचर्य अपने आप फलित होता है।
ब्रह्मचर्य की शिक्षा मत दीजिए: प्रेम सिखाइए और फिर देखिए कि #जीवन में कैसा रूपांतरण होता है।
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सुर्ख लाल सिंदूर से भरी नारी की मांग,,,,,,,,,,
दुनिया का एकमात्र सुखद बंटवारा है,,,,,,,,,,,,,
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सही सेक्स करने के लिए योग जरूरी है तभी आपके शरीर सेक्स कर पाएंगे ।सेक्स भी योग है। हलासन जिनमे से 1 है।
हलासन करने की विधि :
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
अपने हाथों को शरीर से सटा लें। हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी।
सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं।
टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी। दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा।
टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें।
सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं।
पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे।
हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें। हथेली नीचे की तरफ रहेगी।
कमर जमीन के समानांतर रहेगी। इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें
सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं।
आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें।
टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं।
सेक्स पोजिशन में हलासन के फायदे -
हलासन में महिला पार्टनर को रखकर अगर सेक्स किया जाए तो, इससे डीप पेनिट्रेशन मिलता है। इससे उन्हें ज्यादा उत्तेजना मिलती है। इस पोजिशन में सेक्स करने से पार्टनर को जल्दी चरमसुख या ऑर्गेज्म की प्राप्ति होती है।
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जब आकर्षण और वासना एक क्षण में
एक साथ आते हैं जो हमारी सभी इंद्रियों को बाढ़ देता है
और हमें फंसाता है, उस व्यक्ति के साथ मिलकर जो हमें
मोहित करता है और हमें अविश्वसनीय
चीजें महसूस कराता है.
आओ प्रियत्मा!
मैं तुम्हें देख लूं,
मुझे तुम्हें जान लेने दो,
मुझे अपने पास रखने की ख्वाहिश है
और मेरे लिए तुम्हारे पास है
तुम रात की चांदनी बन
अपनी दुग्ध सी वदन पर
कुछ गाढ़ा मेरे वीर्य बून्द को अर्पित होने दो
प्रियत्मा !
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नग्न होना निर्वस्त्र होना नही होता
नग्न होना
निर्वस्त्र होना नहीं होता
नग्न होना कुछ और है
नग्न होना बेशर्म होना है
बेशर्मियों का समूह है नग्न होना
महावीर का निर्वस्त्र होना
नग्न होना नहीं
द्रोण का एकलव्य से अंगूठा मांग लेना नग्न होना है
द्रोपदी को निर्वस्त्र कर देना
द्रोपदी का नग्न हो जाना नहीं होता
दांव पर लगाई जिन्होंने पत्नी
जो बांधे रहे हाथ प्रतिज्ञाओं के अनुपालन में
जो जंघा पर हाथ मारते रहे बेशर्मी से
जो घिघियाये रहे लेकिन बचाने नहीं आ सके द्रोपदी
वे सब नग्न थे
जिन्होंने चरित्र के आक्षेप लगा कर निकाल दी औरतें घर से
जिन्होंने घर में कैद करके रखी औरतें
और खुद बैंकाक-पताया की उड़ाने भरते रहे
जो छोड़-छोड़ भागे औरतें
बड़े आदमी होने के लिए
वे सब नग्न थे
जिन्होंने अवाम को नहीं सुना उनके कष्ट में
जिन्हें सड़क पर गर्भ गिराती स्त्री नही दिखी
जिन्हें मर गए मजदूर
दफन होते किसान नही दिखे
वह राजा नग्न है
निर्वस्त्र होना नग्न होना नही होता
बेशर्मियों के समुच्चय जोड़कर जो
सुंदर वस्त्र पहन इठलाता है
वह भद्दा असुंदर नग्न होता है
जो नग्न होता है
वही नग्नता के लिए दुत्कारा जाता है
निर्वस्त्र होना नग्न होना नही होता
वस्त्रों आभूषणों से सजे लोग भी
नग्नता के लिए दुत्कारे जा सकते हैं
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खुली किताब थी तुम
पर अफ़सोस !!😢😢
अनपढ़ के हांथ में थी तुम...!!
नींबू जैसी हो गई है तेरी ज़िंदगी...
जिसे देखो निचोड़ के चला जाता है...
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