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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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गर्मी में शरीर की सफाई सही से करें वरना जीभ से फोरप्ले करने में चाटने पर पूरा शरीर लगता है योनि रस की तरह नमकीन जैसा !
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कर्नाटक की लड़कियों की योनि से पानी ज्यादा मात्रा में निकलता है। यह स्त्रियां आलिंगन. चुंबन और स्तनों को दबवाने के साथ ही योनि में उंगलियों से घर्षण करने से उत्तेजित होती है। संभोगक्रिया के समय यह स्त्रियां जल्दी संतुष्ट हो जाती हैं।
लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं।
♥️♥️♥️♥️♥️♥️
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सिकुड़ना और फैलना) कामोत्तेजना के समय खुद ही होने लगता है और स्त्री आसानी से उसके सिकुड़ने और फैलने की गति को नियंत्रित नहीं कर सकती है। इस प्रकार की योनि से पुरुष को जो यौन सुख मिलता है उसको बताया नहीं जा सकता है। स्त्री के इस अंग को उंगली से धीरे-धीरे सहलाने से या जीभ के द्वारा चाटने से स्त्री बहुत ज्यादा उत्तेजित होकर सिसकियां भरने लगती है। ऐसी स्थिति पैदा होने पर अगर पुरुष अपने लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराके घर्षण शुरू कर दें तो कुछ ही समय में स्त्री स्खलित होकर संतुष्ट हो जाती है। स्त्री जब बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाती है तब उसके भगोष्ठ फूलकर गुलाबी रंग के हो जाते हैं।
किसी भी स्त्री को उत्तेजित करने में लगभग 15 से 30 मिनट का समय लग जाता है लेकिन पति में अगर सब्र या कामकला की कमी हो तो वह पत्नी को उत्तेजित किये बिना ही एकतरफा संभोगक्रिया में लग जाता है और तुरंत ही स्खलित होकर एक तरफ हो जाता है। इस सब में उसे इस बात की कोई चिंता नहीं रह जाती कि जिस पत्नी ने उसे अलौकिक आनंद प्रदान किया है उसे खुद भी पूरी तरह संतुष्टि मिली है या नहीं।
कई स्त्रियां होती हैं जो संभोगक्रिया के समय चुंबन से ऩफरत करती हैं और पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गाड़ने से या दांतों से काटने से भी बुरा मानती हैं। ब्रह्मलोक और अवंती की स्त्रियां भी इन्हें पसंद नहीं करती लेकिन संभोगक्रिया के अलग-अलग आसनों में ज्यादा रुचि लेती हैं। इनको युक्तसंगम या बैठकर संभोग करने में आनंद मिलता है। यह 4 प्रकार से किया जाता है- जानूपू्र्वक, हरिविक्रम, द्वितल और अवलंबित।
आमीर प्रदेश और मालवा की स्त्रियों को मजबूत आलिंगन, चुंबन और पीड़ाक जैसी संभोगक्रिया सबसे प्रिय होती है। इन्हें पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना नापसंद होता है। संभोगक्रिया में इन्हें जितना ज्यादा दर्द होता है उतनी ही अधिक इनकी यौन उत्तेजना बढ़ती है।
ईरावती, सिंधु, शतद्रु, चंद्रभागा, विपात और वितस्ता नदियों के पास रहने वाली स्त्रियों के शरीर की उत्तेजना बढ़ाने वाले अंगों पर पुरुष द्वारा सहलाने से काम उत्तेजना तेज होती है।
गुर्जरी स्त्रियों के सिर के बाल घने, दुबला-पतला शरीर, स्तन भरे हुए और आंखे नशीली होती हैं। यह स्त्रियां सरल संभोग करना पसंद करती हैं।
लाट प्रदेश की स्त्रियां बहुत उत्तेजक होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और नाजुक होते हैं। ऐसी स्त्रियों को लगातार चलने वाली संभोगक्रिया पसंद होती है। अपने पुरुष साथी से लिपटना इन्हें बहुत पसंद होता है। ये तेज कटिसंचालन करती हैं और काफी देर तक योनिमंथन करने से इन्हें आनंद मिलता है। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना भी पसंद करती हैं।
आंध्रप्रदेश की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं और इनके अंदर यौन उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है। यह स्त्रियां संभोग के लिए पुरुष को खुद ही उत्तेजित करती हैं और बड़वा आसन में संभोग करना पसंद करती हैं।
उत्कल और कलिंग प्रदेश की स्त्रियों को काम उत्तेजना के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं होता। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना पसंद करती हैं। उत्कल स्त्रियां बिल्कुल शर्म न करने वाली, हमेशा प्यार करने वाली और लंबे समय तक संभोग की इच्छा रखने वाली होती हैं।
बंगाल और गौड़ प्रदेशों की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं। इन्हें हर समय आलिंगन और चुंबन में रुचि होती है। ऐसी स्त्रियों की काम उत्तेजना को जगाने में बहुत देर लगती है लेकिन एक बार जब इनकी काम उत्तेजना जगती है तो ये अपने आपको पूरी तरह से पुरुष के हवाले कर देती हैं। इनके नितंब भारी होते हैं इसलिए इन्हें नितंबनी भी कहा जाता है।
कामरूप की स्त्रियां मीठी बोली वाली होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और आकर्षक होते हैं। पुरुष द्वारा सिर्फ इनका आलिंगन करने से ही इन्हें पूरी तरह संभोग संतुष्टि मिल जाती है। एकबार अगर यह स्त्रियां उत्तेजित हो जाती हैं तो उसके बाद यह पूरी तरह से संभोगक्रिया में डूबी रहती हैं।
आदिवासी स्त्रियां अपने शरीर के विकारों को दूसरों से छुपाती हैं लेकिन दूसरों में अगर कोई दोष इन्हें दिखाई देता है तो यह उन्हें ताना मारने से नहीं चूकती हैं। इन्हें संभोग की सभी क्रीड़ाएं पसंद होती हैं और यह सामान्य संभोग में ही यह संतुष्ट हो जाती हैं।
महाराष्ट्र की स्त्रियां 64 कलाओं की ज्ञाता होती हैं। संभोगक्रिया के समय वह किसी प्रकार का संकोच नहीं करती और अश्लील बातें बोलती हैं।
पटना की स्त्रियां भी अश्लील बातें करती हैं लेकिन सिर्फ घर के अंदर, बाहर नहीं।
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स्त्रियों की संभोग में रुचियां
*होंठ और जीभ-*
होंठ और जीभ बहुत ही कामोत्तेजक होते हैं।
पति जब अपनी पत्नी का चुंबन लेते समय उसके
नीचे वाले होंठ को अपने होंठों के बीच में लेकर चूसता है, उसकी जीभ को अपनी जीभ से रगड़ता है, मुंह में मुंह लेकर चूसता है तो स्त्री के होंठ कामोत्तेजना से गुलाबी हो जाते हैं और उसकी आंखों में भी नशा छाने लगता है। अक्सर पत्नी अपने पति के द्वारा होंठों को चूमने या चूसने से तुरंत ही कामोत्तेजित हो जाती है।
*स्तन-*
स्त्री के स्तन भी बहुत कामोत्तेजक होते हैं।
अक्सर पुरुष स्त्री के स्तनों को देखकर ही
उत्तेजित हो जाता है
लेकिन जब पुरुष भारी और आकर्षक स्तनों को धीरे-धीरे सहलाता और मसलता है, उसके स्तनों के निप्पलों को उंगलियों से धीरे-धीरे दबाता है तो स्त्री उसी समय कामोत्तेजित हो जाती है बेकाबू हो जाती है। अगर पुरुष स्तनों के निप्पलों में से एक को चूसते हुए दूसरे को सहलाता है तो स्त्री कामोत्तेजित होकर सिसकियां लेनी लगती हैं। लेकिन इस सबको अगर एक हद तक ही किया जाए तो ठीक है वरना पुरुष को अपने आपको संभालना मुश्किल हो जाता है और वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है। बहुत से पुरुष होते हैं जो स्त्री के स्तनों के साथ खेलते-खेलते ही स्खलित हो जाते हैं।
*नाभि-*
स्त्री के नाभि वाले भाग को अगर हल्के-हल्के से सहलाया या गुदगुदाया जाए तो स्त्री की कामोत्तेजना बढ़ने लगती है। अगर पुरुष स्त्री की नाभि को अपनी जीभ से चूमता या सहलाता है तो स्त्री में कामोत्तेजना चरम पर पहुंचने लगती है। लेकिन स्त्री का नाभि वाला भाग उसके होंठों, जीभ और स्तनों से कम ही उत्तेजक होता है।
*नितंब-*
बहुत सी स्त्रियों के नितंब काफी आकर्षक और कामोत्तेजक होते हैं। बाहर के देशों में उन स्त्रियों को बहुत सुंदर और मादक माना जाता है जिसका सीना और नितंब एक ही साइज के होते हैं जैसे अगर किसी स्त्री का सीना 34 है तो उसके नितंबों के उभारों का नाप भी 34 ही होना चाहिए। सौंदर्य प्रतियोगिताओं में अक्सर वही स्त्री जीतती है जिसके सीने, कमर और नितंब का नाप 34-24-36 होता है। उभरे हुए नितंब पुरुष के लिए स्तनों के समान ही कामोत्तेजक होते हैं। नितंबों को सहलाने और मसलने से पुरुष की नस-नस में कामोत्तेजना पैदा होने लगती है और स्त्री भी कामोत्तेजित होकर पति से लिपटने लगती है।
*जांघ-*
स्त्री के जांघों के भीतरी भाग को धीरे-धीरे सहलाने से भी स्त्री कामोत्तेजित हो जाती है। इन अंगों का मादक स्पर्श पुरुष को भी कामोत्तेजित कर देता है। अक्सर स्त्रियां इन अंगों को सहलाए जाने से प्रसन्न और गदगद हो जाती हैं और संभोगक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं।
*भगनासा-*
स्त्री के शरीर का सबसे कामोत्तेजक अंग उसका
भगनासा होता है।
यह छोटे भगोष्ठों के बीच उस स्थान पर स्थित होता है
जहां से छोटे भगोष्ठों का उभार शुरू होता है।
इसके थोड़ा सा नीचे मूत्रद्वार होता है
जिससे स्त्री मूत्र त्याग करती है।
भगनासा छोटे दाने के आकार में उभरी हुई होती है
लेकिन असल में ये बहुत ज्यादा बारीक कामोत्तेजक तंत्रिकाओं का समूह होती है।
यह लिंग का ही बहुत छोटा प्रतिरूप होता है।
इसमें भी मुंड होता है जो साधारण रूप में मुंडचर्म से ढका रहता है लेकिन उत्तेजित होने पर मुंड अनावृत होकर तन जाता है। इसका आकार भी सामान्य से दुगना हो जाता है। पुरुष जब इस भगनासा को हल्के से सहलाता है या कलात्मक ढंग से छेड़ता है तो स्त्री के शरीर में काम उत्तेजना बहुत ही तेज हो जाती है।
अगर यह क्रिया हद से बाहर हो जाती है तो तेज काम उत्तेजना के कारण पुरुष और स्त्री दोनों ही स्खलित हो जाते हैं
और संभोगक्रिया के असली आनंद से वंचित रह जाते हैं। इसलिए पुरुष को इस मामले में बहुत ही सावधान रहने की जरूरत होती है।
थोड़ी सी सावधानी बरतने से ही पुरुष स्त्री को इतना उत्तेजित कर देता है कि स्त्री की योनि में पुरुष के लिंग के प्रवेश करने तथा हल्के से घर्षण से ही स्त्री तेज स्खलन को महसूस करके बहुत ज्यादा आनंद और गुदगुदी से कुछ पलों के लिए आनंद के सागर में खो जाती है।
*योनि-*
भगनासा के अलावा स्त्रियों का योनि मार्ग भी काफी संवेदनशील कामोत्तेजक अंग होता है।
योनि के मुख्य द्वार पर छोटे भगोष्ठ स्थित होते हैं जो बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। छोटे भगोष्ठों से सलंग्न योनि छल्ला होता है जो भगनासा की तरह ही सूक्ष्म तंत्रिकाओं से घिरा होता है। यह अंग स्वैच्छिक पेशियों से जुड़ा रहता है और स्त्री अपनी इच्छा के अनुसार इसमें संकोच उत्पन्न कर सकती है। संभोगक्रिया के समय जब लिंग तेजी से घर्षण करता है तो उस समय योनि मुख के कलात्मक ढंग से फैलने और सिकुड़ने से पुरुष बहुत ज्यादा आनंद महसूस करता है। उत्तेजना उसे और मदहोश कर देती है और लिंग लिंग के द्वारा योनि में घर्षण और तेज होता जाता है। बहुत सी कामुक स्त्रियों में योनि मुख का आंकुचन (योनि मुख का अपने आप
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गर्मी में निः वस्त्र सोया करो इससे खुजली नही होगी और खड़ा भी सही से होगा बिना दवाब के । ऐसे बिना कपड़े सोने से शरीर को फायदे हैं।
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❤ पुरुष का प्रेम समुंदर सा होता है। गहरा, अथाह पर वेगपूर्ण लहर के समान उतावला।
हर बार तट तक आता है, स्त्री को खींचने, स्त्री शांत है मंथन करती है, पहले ख़ुद को बचाती है इस प्रेम के वेग से, झट से साथ मे नहीं बहती। पर जब देखती है लहर को उसी वेग से बार बार आते तो समर्पित हो जाती है समुंदर में गहराई तक, डूबने का भी ख़्याल नहीं करती, साथ में बहने लगती है।
समुंदर अब शांत है, उछाल कम है, स्त्री उसके पास है। पर स्त्री मचल उठती है इतना प्रेम देख प्रतिदान के लिए, वो उड़कर बादल बन जाती है, अपना प्रेम दिखाने को तत्पर हो वो बरसने लगती है, पहले हल्की हल्की, समुंदर को अच्छा लगता है वो भी बहने लगता है, कभी कभी वेग से उछलता है प्रेम पाकर, फिर शांत हो जाता है।
पर स्त्री बरसती रहती है लगातार झूमकर दो दिन, तीन दिन, बहुत दिन तक। मगर अब पुरुष से इतना प्रेम समेटना मुश्किल होने लगता है। उसे सब देखना है, आते जाते जहाज, उगता डूबता सूरज, तट पर लोग। मगर स्त्री प्रेम के उन्माद में बरस रही है, अंदर तक घुलने को व्याकुल, जब समुंदर से संभलता नहीं तो वो रुकने कहता, किसी और देश जाने कहता। पर प्रेम में समर्पित स्त्री को रोकना असंभव है, जब देखती है कि समंदर अब नहीं चाहता तो वो दर्द के आवेग में बरसती है पास बुलाने को, स्त्री के आँसू ख़तरनाक होते हैं, बाढ़ आने लगती, पुल टूटने लगते, पानी घरों में जाने लगता, सब तहस नहस होने लगता। फिर धीरे धीरे बादल ख़त्म होने लगते हैं, आँसू सूख जाते हैं, सूखा, अकाल आ जाता है, स्त्री पत्थर हो जाती है।
पर स्त्री का स्वभाव समर्पण है, वो फिर किसी समुंदर किनारे खड़ी कर दी जाती है, एक नई लहर आवेग में आती है, स्त्री बचती है पर फिर बह जाती है समर्पित होने के लिए अंदर तक।
जिन पुरुषों के अंदर की स्त्री जीवित है उनको भी समर्पित.......😍
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अब ऑर्गेज्म से संबंधित कुछ बातें महिलाओं के लिए ....
हो सकता है कुछ लोगों को मेरी यह पोस्ट अश्लील लगे इसलिए उनसे पहले ही क्षमा मांग रहा हूं 🙏
यह सही है कि बिस्तर पर मेल ( मर्द ) एक्टिव पार्टनर होता है और फीमेल ( औरत ) पैसिव पार्टनर होती है ...मतलब सारी परफॉर्मेंस मर्द को करनी होती है लेकिन यह सोचकर आप छुईमुई बनकर मत रहें , जनाब यह इक्कीसवीं सदी है और अब मर्दों को बिस्तर पर गूंगी गुड़िया नहीं बल्कि बेब चाहिए जो उनके साथ बराबरी से फॉरप्ले करे क्योंकि फॉरप्ले ही सेक्स का मुख्य पार्ट है इसलिए इसमें अपने पार्टनर को सपोर्ट करें ...
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मर्दों को भी सत्रह तरह के टेंशन होते हैं और हो सकता है कभी वो बिस्तर पर डाउन रहे तो आप एक्टिव हो जाएं ....कभी उनकी पीठ पर नाखून से कोई प्यारा सा शब्द लिख दें , कभी अपने दांतों से उनके कान को हल्का सा काट लें या कभी उनके गालों को चूम लें ...फिर देखिए मर्दों में कितना जोश आ जायेगा ...
सेक्स रोटी के बाद इंसान की सबसे बड़ी ज़रूरत है और मर्द या औरत दोनों का इसपर बराबर का हक़ है लेकिन अगर कभी मर्द फेल हो जाए तो उसको कभी दुत्कारा ना जाये इससे वो हतोत्साहित हो सकता है और हो सकता है कि उसका कॉन्फिडेंस ही खत्म हो जाए इसलिए अगर आप भी सेक्स को पूरी तरह से इंजॉय करना चाहती हैं तो अपने पति का साथ दीजिए ना कि उनको हतोत्साहित कीजिए और इसके बाद भी कोई प्रॉब्लम है तो डॉक्टर्स , मनोचिकित्सक तो हैं ही ...उनसे कंसल्ट कीजिए ...यक़ीन मानिए , आपको गलत रास्ता चुनने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ...
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एक औरत कितनी प्यासी और कामवासनाओं से भरी है। एक औरत अपने मन के अश्लील और कामुक विचार को सिर्फ बिस्तर पर किसी मर्द की बाहों में लिपट कर आपने अदाओं से व्यक्त करती है। जो मर्द उसकी इन अदाओ को समझ जाता है सिर्फ वही मर्द चरमसुख पाने का हकदार होता है..💋💋
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दवा सिर्फ दवा की बोतलों और गोलियों में नहीं होती ।
व्यायाम दवा है ।
सुबह की सैर दवा है ।
उपवास दवा है ।
प्राकृतिक चिकित्सा दवा है ।
परिवार के साथ भोजन करना दवा है ।
हँसी और हास्य भी दवा है ।
गहरी नींद भी एक दवा है ।
एक दोस्त का साथ मिल जाना दवा है ।
हमेशा खुश रहना ही दवा है ।
सकारात्मकता ही दवा है ।
नियमित योग करना ही दवा है ।
कुछ मामलों में मौन और एकान्त दवा है । और
एक अच्छा दोस्त एक अचूक दवा की दुकान है ।
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अब ऑर्गेज्म से संबंधित कुछ बातें महिलाओं के लिए ....
हो सकता है कुछ लोगों को मेरी यह पोस्ट अश्लील लगे इसलिए उनसे पहले ही क्षमा मांग रहा हूं 🙏
यह सही है कि बिस्तर पर मेल ( मर्द ) एक्टिव पार्टनर होता है और फीमेल ( औरत ) पैसिव पार्टनर होती है ...मतलब सारी परफॉर्मेंस मर्द को करनी होती है लेकिन यह सोचकर आप छुईमुई बनकर मत रहें , जनाब यह इक्कीसवीं सदी है और अब मर्दों को बिस्तर पर गूंगी गुड़िया नहीं बल्कि बेब चाहिए जो उनके साथ बराबरी से फॉरप्ले करे क्योंकि फॉरप्ले ही सेक्स का मुख्य पार्ट है इसलिए इसमें अपने पार्टनर को सपोर्ट करें ...
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मर्दों को भी सत्रह तरह के टेंशन होते हैं और हो सकता है कभी वो बिस्तर पर डाउन रहे तो आप एक्टिव हो जाएं ....कभी उनकी पीठ पर नाखून से कोई प्यारा सा शब्द लिख दें , कभी अपने दांतों से उनके कान को हल्का सा काट लें या कभी उनके गालों को चूम लें ...फिर देखिए मर्दों में कितना जोश आ जायेगा ...
सेक्स रोटी के बाद इंसान की सबसे बड़ी ज़रूरत है और मर्द या औरत दोनों का इसपर बराबर का हक़ है लेकिन अगर कभी मर्द फेल हो जाए तो उसको कभी दुत्कारा ना जाये इससे वो हतोत्साहित हो सकता है और हो सकता है कि उसका कॉन्फिडेंस ही खत्म हो जाए इसलिए अगर आप भी सेक्स को पूरी तरह से इंजॉय करना चाहती हैं तो अपने पति का साथ दीजिए ना कि उनको हतोत्साहित कीजिए और इसके बाद भी कोई प्रॉब्लम है तो डॉक्टर्स , मनोचिकित्सक तो हैं ही ...उनसे कंसल्ट कीजिए ...यक़ीन मानिए , आपको गलत रास्ता चुनने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ...
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"सेक्स पवित्र है, क्योंकि यह सबसे गहरी चीज है जो दो व्यक्तियों के बीच हो सकती है। यह सबसे गहरी घटना है जो दो प्राणियों के बीच संभव है; यह सबसे गहरा मिलन है। हम शब्दों के माध्यम से बात कर सकते हैं; यह एक तरह का संचार है। वह सबसे सतही है - मौखिक - और यौन सबसे गहरा है, और अन्य सभी संचार कहीं बीच में हैं। इसलिए एक महान श्रद्धा विकसित करनी होगी।
यही तंत्र दृष्टि है: जीवन के प्रति श्रद्धा, जीवन में आने वाली हर चीज के प्रति श्रद्धा, विशेष रूप से सेक्स क्योंकि यह सेक्स है जिससे जीवन निकलता है। शरीर की प्रत्येक कोशिका एक यौन कोशिका है। हमारे आस-पास का पूरा उत्सव एक यौन उत्सव है। फूल कामुक हैं, पक्षी का गीत कामुक है और जो सुंदर है वह कामवासना है। लेकिन 'सेक्स' शब्द की बहुत निंदा हुई है। जिस क्षण तुम शब्द का प्रयोग करते हो, तुम्हारे भीतर कुछ विरोधी हो जाता है; शब्द ही लोड हो गया है। जब भी ऐसा होता है तो उसके प्रति बहुत पवित्र, आदरपूर्ण रवैया अपनाएं।
जिस स्त्री से तुम प्रेम करते हो, उसे देवी समझो; उसे अपने और भगवान के बीच एक माध्यम के रूप में सोचें। जब भी ऐसा हो तो उसमें ऐसे उतरो जैसे तुम ध्यान और प्रार्थना
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सब ही महिलाओं से विनती है की अपने प्रोफाइल पर खुद की फोटो ना लगाए इस से आप ही को नुकसान होगा
क्यू की मेरी बात तो किसी को मान ना नही हे
जाए तेल लेने
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#सेक्स_और_सम्भोग
सेक्स को देखने का हर किसी का
अपना अपना एक अलग नज़रिया है ।
पर पहले मैं आपको बता दूँ...
सेक्स है क्या ?
सेक्स हमारे जीवन में होने वालीं एक आम प्रक्रिया है ।
जैसे हम भूख लगने पर खाना खाते हैं ।
प्यास लगने पर पानी पीते हैं ।
वैसे ही सेक्स की इच्छा होने पर सेक्स भी करते हैं ।
मानें या ना मानें
हमारे जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है ।
जहाँ सेक्स करते रहने से हम
डिप्रेशन/तनाव/अवसाद से
काफी हद तक निज़ात पाते हैं
वहीं सेक्स ना करने से
हम अन्दर से कुण्ठित हो कर भर जाते हैं,
फ्रस्ट्रेटेड हो जाते हैं ।
अब सेक्स कैसे करें और कैसे नहीं
यह अपने-अपने नज़रिये पर निर्भर करता है ।
सेक्स एक चरम सुख है
जो सम्भोग से बहुत भिन्न है ।
सेक्स सिर्फ़ एक मात्र दैहिक सुख है ।
जबकि सम्भोग अध्यात्मिक सुख ।
सेक्स :-।
ख़ुद को ख़ुश करने के लिए
एक स्त्री या पुरुष के साथ भोग करने को
सेक्स कहते हैं ।
इस में व्यक्ति स्वार्थी रहता
उसे सिर्फ़ ख़ुद के सुख से मतलब रहता है ।
और
सम्भोग :-
सम्भोग = सम+भोग
यानि समान रूप से भोगना ।
ये वो प्रक्रिया है
जिस में दो लोग देह से ही नहीं
अपितु भावनाओं के स्तर पर
तन मन और आत्माओं के साथ जुड़ते हैं ।
“सम्भोग प्रेम की वो समाधि हैं
जहाँ प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे में
परस्पर लीन हो जाते हैं ।”
जिसके फलस्वरूप
इस लीन अवस्था से उत्पत्ति होती हैं
जीवन चक्र प्रजनन की ।
ब्रह्मा की बनायी इस सृष्टि के विस्तार के लिए
प्रजनन का होना अति आवश्यक है ।
और
“सम्भोग ही प्रजननता का मूल है ।”
प्रेमी द्वारा छूयी गयी छुअन किया गया चुम्बन
मानो आत्मा को आनन्द के सागर में डुबो देता है ।
सम्भोग ...भावनाओं के स्तर पर
जहाँ प्रेमी और प्रेमिका
आनन्द के सागर में डुबकी लगाते हैं
जिस में तन मन और आत्मा
आनन्द से तृप्त हो जाती हैं ।
एक दूसरे से भावनात्मक स्तर पर
सम्भोगरत होना
उनके प्रेम को निखारता है ।
“शब्दों में इस घटना या अवस्था को
लिख पाना सम्भव ही नहीं है ।” 🙏
ये वो एहसास हैं,
जो समुद्र की गहरायी से भी गहरा है,
जिसमें रोम-रोम समा जाता है....!! ✍️
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पुरूषों दो एक shot मे ही बिस्तर पर झड़ने से पहले स्त्री को भी अच्छे से झाड दिया करो वरना स्त्रियां उसी तरह से तुम्हारी झूठी मर्दानगी की छेद छलीडर्र करेगी जैसा
गुप्त रोग का विज्ञापन करता....???
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"सेक्स पवित्र है, क्योंकि यह सबसे गहरी चीज है जो दो व्यक्तियों के बीच हो सकती है। यह सबसे गहरी घटना है जो दो प्राणियों के बीच संभव है; यह सबसे गहरा मिलन है। हम शब्दों के माध्यम से बात कर सकते हैं; यह एक तरह का संचार है। वह सबसे सतही है - मौखिक - और यौन सबसे गहरा है, और अन्य सभी संचार कहीं बीच में हैं। इसलिए एक महान श्रद्धा विकसित करनी होगी।
यही तंत्र दृष्टि है: जीवन के प्रति श्रद्धा, जीवन में आने वाली हर चीज के प्रति श्रद्धा, विशेष रूप से सेक्स क्योंकि यह सेक्स है जिससे जीवन निकलता है। शरीर की प्रत्येक कोशिका एक यौन कोशिका है। हमारे आस-पास का पूरा उत्सव एक यौन उत्सव है। फूल कामुक हैं, पक्षी का गीत कामुक है और जो सुंदर है वह कामवासना है। लेकिन 'सेक्स' शब्द की बहुत निंदा हुई है। जिस क्षण तुम शब्द का प्रयोग करते हो, तुम्हारे भीतर कुछ विरोधी हो जाता है; शब्द ही लोड हो गया है। जब भी ऐसा होता है तो उसके प्रति बहुत पवित्र, आदरपूर्ण रवैया अपनाएं।
जिस स्त्री से तुम प्रेम करते हो, उसे देवी समझो; उसे अपने और भगवान के बीच एक माध्यम के रूप में सोचें। जब भी ऐसा हो तो उसमें ऐसे उतरो जैसे तुम ध्यान और प्रार्थना
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