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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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इन घने काले विशेष अंगो से निकलते स्वेद की सुगंध के आगे संसार के सारे द्रव्य और इत्र फिके प्रतीत होते है।
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सुनो,शास्त्र जिस भवसागर की बात करते है वह तो नहीं जानते पर शायद वो भंवर इससे गहरा तो नहीं जिसमें हर कोई डूब जाता है। (संदर्भ:-नाभि)
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,,तब दर्द गायब हो जायेगा,,
प्रश्न,,,,, मुझे सेक्स संबंधी कोई परेशानी नहीं है, लेकिन सहवास के बाद सिर दर्द हो जाता है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर,,,,,,, सहवास में चार चरण होते हैं।
एक,, ख्वाहिश,,,,जब सहवास करने की इच्छा मन में हो और साथ ही तरीके से फोरप्ले हो तो शरीर में खून का बहाव सिर से पैर तक तेज हो जाता है।
दो,,, प्राइवेट पार्ट में मजबूती,,,,जब इच्छा जग जाती है तो खून की मात्रा ज्यादा बढ़ने से प्राइवेट पार्ट में ज्यादा मजबूती आ जाती है।
तीन,,, प्रवेश,,, प्राइवेट पार्ट की मजबूती के बाद प्रवेश की बारी आती है।इस समय यह ख्याल रखना चाहिए कि महिला के प्राइवेट पार्ट में पर्याप्त गीलापन हुआ है कि नहीं। अगर सही तरीके से नहीं हुआ है तो उनकी पसंद की बातें करें।जो छुअन उन्हें पसंद हो,वह करें और पर्याप्त गीलापन के बाद ही प्रवेश करें।
चार,, क्लाइमेक्स,,,, इसे सहवास का आखिरी चरण माना जाता है। क्लाइमेक्स पर पहुंचते पहुंचते अक्सर दोनों पार्टनर की सांसें तेज हो जाती हैं। दिल की धड़कन बढ़ जाती है।बीपी दोगुना हो जाता है।खून की रफ्तार अपने चरम पर होती है। ऐसे में कई बार दिमाग में जब ज्यादा खून की मात्रा पहुंचती है,उस वक्त कभी कभी सिर दर्द हो जाता है। यह दर्द अमूमन सिर के अगले हिस्से में होता है। अगर यह दर्द ज्यादा महसूस हो तो सहवास से एक घंटे पहले एक पैरासिटामोल पांच सौ एमजी की गोली ले सकते हैं। अगर सहवास के पहले देसी वायग्रा की गोली लेते हैं तो वो भी सिर दर्द का कारण हो सकती है। अगर ऐसा है तो डाक्टर को बताएं। डाक्टर किसी दूसरे साल्ट की दवा बता देगा। इससे उत्तेजना वैसी ही रहेगी, पर सिर दर्द वाला साइड इफेक्ट निकल जायेगा।
,,वही अगर किसी को स्पोंन्डलाइटिस की बीमारी है। तो गर्दन के ज्यादा मूवमेंट की वजह से सिर के पीछे और गर्दन के ऊपरी हिस्से में दर्द होने की आशंका रहती है। ऐसे शख्स को फीमेल सुपीरियर पोजीशन,, फीमेल पार्टनर ऊपर,,को फोलो करना चाहिए।इस पोजीशन में पुरुष की गर्दन में मूवमेंट न के बराबर होती और दर्द से राहत मिल सकती है।
,, सेक्सोलॉजिस्ट के सौजन्य से मालूम हुआ और कह दिया और अंन्यथा ना लें।
,, अशोभनीय टिप्पणी और तर्क वितर्क से बचें।
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डिस्क्लेमर – मेरे आर्टिकल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता |
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महिला पुरुष और भ्रम,,
__
महिलाओं की सेक्सुअलिटी आदि को लेकर अक्सर इन पुरुषों को कई प्रकार की भ्रांतियां होती हैं |
जैसे, क्या औरतें भी…
1) सेक्स करना चाहती हैं?
2) Masturbate करती हैं?
3) अपने बॉयफ्रेंड या अपने पति के अलावा दूसरे पुरुषों
के प्रति आकर्षित होती हैं ?
4) बिना प्रेम के सेक्स कर सकती हैं
5) पोर्न देखती हैं?
इन सब सवालों का सीधा जवाब है हाँ, चाहें तो इस उत्तर को आप सीधा सीधा स्वीकार कर सकते हैं | लेकिन इन सब सवालों के लम्बे जवाब भी हैं | हमने पिछली पोस्ट्स में देखा है, कि हर चीज़ की तरह, सेक्सुअलिटी पर भी कंडीशनिंग का कैसा असर पड़ता है|
चूँकि सामान्य तौर पर पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं पर रोक टोक, उनके प्रति कण्ट्रोल की, उनके अनुभवों को invalidate करने की प्रवृत्ति अधिक होती है, इसलिए उनकी सेक्सुअलिटी पर भी कंडीशनिंग का असर ज़्यादा पड़ता है | ऐसे में उन्हें ले कर मिथक भी ज़्यादा बनते हैं|
अब ऊपर लिखे प्रश्नों के उत्तर इस सन्दर्भ में देखते हैं | अगर मनुष्य के लिए सेक्स नैसर्गिक है तो ऐसा सवाल ही क्यों कि क्या महिलाओं की सेक्स करने की इच्छा होती है? ज़ाहिर सी बात है कि महिला मनुष्य है, इसलिए सेक्स के प्रति इच्छा होना उसके लिए भी स्वाभाविक ही है | अब यदि सेक्स के लिए महिला की इच्छा स्वाभाविक है, तो ज़ाहिराना तौर पर आत्म संतुष्टि भी सामान्य है | इसका मतलब हाँ, महिलाएं masturbate भी करती हैं |
महिलाओं का पुरुषों के प्रति (या queer महिलाओं का अन्य महिलाओं प्रति ) आकर्षण लुक्स, इंटेलिजेंस, प्रेम, उनकी सेक्स अपील, आदि पर वैसे ही निर्भर करता है, जैसे पुरुषों का महिलाओं के प्रति | इसी तरह polyamory (एक से अधिक साथियों के प्रति आकर्षण ) महिलाओं में भी उतना ही सामान्य है, जितना पुरुषों में | पुरुषों की ही तरह महिलाओं को भी ethics या polyamory में ईमानदारी कैसे बरती जाये, सीखना पड़ता है, सीखना चाहिए |
Polyamory के सन्दर्भ में स्त्री और पुरुष में बस एक ही मुख्य फ़र्क है, वो ये कि बाकि सभी चीज़ों की तरह, मर्यादा, सीमाएं, वफ़ादारी, चरित्र, सही गलत आदि का पिटारा स्त्री के सर पर ज़्यादा लादा जाता है और पुरुष के सर पर कम | आम तौर पर, ‘मर्द तो मुंह मारते ही हैं,’ ये कह कर मर्दों की प्रवृत्ति का सामान्यीकरण स्त्रियों की अपेक्षा अधिक होता है | लेकिन, क्योंकि ये पोस्ट पितृसत्ता पर नहीं है, न ही polyamory पर, इसलिए प्रश्न पर वापस लौटते हुए, हाँ महिलाएं अपने बॉयफ्रेंड या अपने पति के अलावा दूसरे पुरुषों (या / और महिलाओं) के प्रति भी आकर्षित होती हैं |
इसी तरह महिलाएं भी बिना प्रेम के सेक्स कर पाती हैं | क्या सभी महिलाएं ऐसा कर पाती हैं? नहीं, न तो सब महिलाएं, न ही सब पुरुष ऐसा कर पाते हैं | सबकी अपनी अपनी यौनिक या सेक्सुअल preferences या इच्छाएं होती हैं | इसी तरह कुछ लोग पूछते हैं, पर फिर वो औरत (जिसने अन्य पुरुषों के साथ सेक्स किया हो ) मेरे साथ सेक्स क्यों नहीं करतीं?
पहली बात, उस औरत ने किसके साथ, कितनों के साथ सेक्स किया, ये आपका मुद्दा क्यों है ? दूसरी बात, एक या एक से ज़्यादा के साथ सेक्स करने, और किसी के भी साथ सेक्स कर लेना, दो अलग अलग बातें हैं | तीसरी बात, एक से अधिक लोगों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखना , और असलियत में वो यौन सम्बन्ध बनाना अलग अलग बातें हैं | चौथी सबसे ज़रूरी बात – Consent और agency |
हर व्यक्ति को अपनी सहमति, और अपनी स्वायत्तता पर अधिकार है | यदि उसकी अपनी इच्छा नहीं है आपके साथ सेक्स करने की, तो बात ख़तम | अगर एक औरत एक पुरुष से सेक्स करने की इच्छा ज़ाहिर करे, और पुरुष मना कर दे, तो भी बात ख़तम,
कंसेंट का मतलब बहुत सरल है – अगर बिना किसी manipulation, धमकी, झूठ, फरेब, के, चिकित्सकीय रूप से अविक्षिप्त ( Medically sane – sorry for the lack of a better phrase here ) दो वैधानिक रूप से वयस्क व्यक्ति एक दुसरे के साथ यौन सम्बन्ध बनाना चाहते हैं, तो उनकी सहमति कंसेंट कहलाती है |
तो जो लोग पूछते हैं कि फलां महिला मेरे साथ सेक्स क्यों नहीं करती, ये समझ लें, कि कोई भी महिला अपने साथी का अपनी इच्छा से चुनाव करने की उतनी ही हक़दार है, जितना कोई भी पुरुष, और आपके ऐसे सवाल आपको डेस्परेट ज़्यादा साबित करते हैं, बजाय समझदार और आकर्षक के |
और अब आखिरी सवाल का उत्तर – हाँ महिलाएं भी पोर्न देखती हैं | शहरी महिलाओं के पास इंटरनेट, लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन और प्राइवेसी होने की संभावनाएं अधिक होती हैं | कमाऊ आत्मनिर्भर महिलाओं के पास ये सुविधाएं होने की संभावना और भी अधिक होती है | लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि और महिलाएं,औरतें लड़कियां इन सब मसाइल पर सोचती या बात नहीं करतीं | सच ये है कि अगर आप एक महिला को मनुष्य समझने लगेंगे और अजूबा नहीं, तो आप जानेंगे कि महिलाओं के लिए भी ये सब करना सामान्य बात है |
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#मैस्टरबेशन,,,, ध्यान रहे लत ना लगे, बाकी सब ठीक है।
प्रश्न एक,,,,, महीने में दो बार मैस्टरबेशन करता हूं। ये ठीक है कोई परेशानी तो नहीं। उत्तर,, बहुत खूब नियंत्रण,, शुभकामनाएं और बधाइयां, इसके लिए। अगर फ्वीकैंसी बढ़ाने की आवश्यकता पड़े तो निश्चित रूप से बढ़ा लें।
प्रश्न दो,,, पोर्न देख कर मैस्टरबेशन हर दिन करता हूं मैस्टरबेशन के बाद ज्यादा नींद आती है। उत्तर,,दिन में एक बार से अधिक मैस्टरबेशन बिल्कुल भी नहीं करें।यह नुकसान दायक हो सकता है।
,,, सबसे जरूरी,,, पोर्न और मैस्टरबेशन की लत ना लगे।
,,, मैथुन,, सहवास,, और हस्त मैथुन,,, मैस्टरबेशन में ज्यादा फर्क नहीं। दोनों की भाषा अलग पर व्याकरण एक।
,,, सहवास में जो क्रिया पुरुष महिला के प्राइवेट पार्ट में करता, मैस्टरबेशन में पुरुष अपनी मुट्ठी से करता।
,,, ये सच है सहवास या मैस्टरबेशन के बाद नींद अच्छी आती,वजह सेरोटोनिन है। जब क्लाइमेक्स पर पहुंचता है तो ज्यादा सेरोटोनिन यानी हैप्पी हार्मोन निकलता।यह मेलोटोनिन हार्मोन्स को भी ज्यादा निकलने मदद करता तब ज्यादा नींद आती।
,, महिलायें भी उंगलियों से,या टोय इत्यादि से मैस्टरबेशन करती हैं क्लाइमेक्स पर पहुंचने के लिए। यहां भी ये क्रिया सहवास जैसी है।
,, ज्यादा तर महिलाएं क्लाइमेक्स पर मैस्टरबेशन से नहीं पहुंचना चाहती, पर मजबूरी में वो करती। वो अपने पुरूष पार्टनर से सहवास कर क्लाइमेक्स पर ही पहुंचना चाहती, इसके लिए पार्टनर का फोरप्ले के साथ सहवास जरूरी।
,,,अगर सहवास से फल बांछित नहीं, तो उन्हें मैस्टरबेशन से संतुष्ट होना ही चाहिए।
नोट,,,,लत का मतलब है कि, उसके बिना काम नहीं चलना।जब पोर्न की लत लगती तो उसकी सेक्स की प्यास हमेशा अधूरी रहती। पोर्न देखना और मैस्टरबेशन करना,, ज्यादा तादाद में मजबूरी हो जाती।
,,, दूसरी बात,आप हैं आपका प्राइवेट पार्ट हैं,आपकी मुठ्ठी या उंगलियां हैं तो जब चाहो, जितनी बार चाहो, ये सोच मैस्टरबेशन के लिए लत का रुप लेती और हर वक्त हुड़क उठती रहती जो नुकसान पहुंचाती है
,,,हर बात की अति बुरी। वैसे ही मैस्टरबेशन और सहवास की भी। ज्यादा करने से पुरूष में कमजोरी और महिलाओं में ज्यादा दिन पीरियड की। वरना संयमित जीवन जीने वाले हमेशा सुखी।
,,, सेक्सोलॉजिस्ट के सौजन्य से,, जो मालूम हुआ कह दिया और अंन्यथा ना लें।
,, अशोभनीय टिप्पणी और तर्क वितर्क से बचें।
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यो नी पर बाल मत रखिए इससे चाटने पर जो थूक और रज यो नी से निकलता है उससे इन्फेक्शन का खतरा है स्त्री को। साथ ही बाल टूटता है जिससे चाटने में पुरुष और स्त्री का ध्यान चरम पर नही जाएगा।
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9- #कृपिणी स्त्रियों के लक्षण-
ऐसी स्त्रियां कमजोर शरीर वाली, सांवली त्वचा वाली, कंजूस और निर्लज्ज होती हैं। अपनी गलत हरकतों के कारण से परिवार, समाज में बदनाम होती है। इन्हें अपनी संतान और पति से कोई मोह नहीं रहता। इस कारण इनका घर-परिवार कई बार टूट भी जाता है। प्रत्येक पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करने की चेष्टा करती है और धन पाने के लिए किसी भी पुरुष के साथ हो लेती हैं। इनके दिमाग में अपराध का कीड़ा भी पनपता रहता है। भोग-विलास पाने के लिए ये अपराध की राह पकड़ लेती हैं।
10- #स्वर्गिणी स्त्रियों के लक्षण-
ऐसी स्त्री धर्मपरायण होती है। धार्मिक कार्यों में सम्मिलित होना इन्हें प्रिये होता है। इनका परिवार व्यवस्थित रूप से चलता रहता है। न किसी वस्तु की अधिक लालसा होती है और न कुछ अधिक पाने का प्रयास करती हैं। जितना होता है उसी में खुश रहती हैं। इनका अपनी संतान से विशेष लगाव होता है। धन संचय करने का गुण इनमें होता है। इस प्रकार की स्त्रियां समाज के किसी बड़े पद पर भी देखी जाती हैं। रूप-रंग सामान्य किंतु आकर्षक होता है। परोपकार करने में सबसे आगे रहती हैं।
11- #बहुवंशिनी स्त्रियों के लक्षण-
इन स्त्रियों का रंग गेहुआ होता है और पूरी तरह से गृहस्थ धर्म को निभाने वाली होती हैं। ये कभी झूठ नहीं बोलती और मन की साफ होती है। पति और परिवार इनके लिए सबसे उपर होते हैं। समाज में सम्मानित होती हैं तथा उच्च पदों पर आसीन होती है। हां, इनका स्वभाव थोड़ा गर्म होता है, लेकिन जल्दी ही मान भी जाती है। दूसरों की बुराई करने वाले और दूसरों पर दोषारोपण करने वालों से ये दूर रहना पसंद करती हैं। ये अनेक प्रकार की संपत्तियों की मालकिन होती है। प्रेम का गुण इनमे विशेष होता है।
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इस जाति की लड़कियों का स्वभाव बदलता रहता है। इनमें भोग-विलास की इच्छा अधिक होती है। ये हंसमुख स्वभाव की होती हैं और भोजन अधिक करती हैं। इनका शरीर थोड़ा मोटा होता है। ये प्राय: आलसी होती हैं।
इनके गाल, नाक, कान और व मस्तक का रंग गोरा होता है। इन्हें क्रोध अधिक आता है। कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत क्रूर हो जाता है। इनके पैरों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। इनकी संतानों में लड़के अधिक होते हैं। ये बिना रोग के ही रोगी बनी रहती हैं। इनका पति सुंदर और गुणवान होता है।
अपने झगड़ालू स्वभाव के कारण ये परिवार को क्लेश पहुंचाती हैं। इनके पति इनसे दु:खी होते हैं। धार्मिक कार्यों के प्रति इनकी आस्था नहीं होती। इन्हें स्वादिष्ट भोजन पसंद होता है। इनकी आयु 73 वर्ष के लगभग होती है। विवाह के 4, 8, 12 अथवा 16वे वर्ष में इनके पति का भाग्योदय होता है। इनके कई गर्भ खंडित हो जाते हैं। इन्हें अपने जीवन में अनेक कष्ट झेलने पड़ते हैं, किन्तु इसका कारण भी ये स्वयं ही होती हैं। इनके दुष्ट स्वभाव के कारण ही परिवार में भी इनकी पूछ-परख नहीं होती।
4- #शंखिनी स्त्रियों के लक्षण-
शंखिनी स्वभाव की स्त्रियां अन्य स्त्रियों से थोड़ी लंबी होती हैं। इनमें से कुछ तो बहुत मोटी और कुछ बहुत ही दुर्बल होती हैं। इनकी नाक मोटी, आंखें अस्थिर और आवाज गंभीर होती है। ये हमेशा अप्रसन्न ही दिखाई देती हैं और बिना कारण ही क्रोध करती रहती हैं।ये अपने पति से रूठी रहती हैं, पति की बात मानना इन्हें गुलामी की तरह लगता है। इनका मन सदैव भोग-विलास में डूबा रहता है। इनमें दया भाव भी नहीं होता। इसलिए ये परिवार में रहते हुए भी उनसे अलग ही रहती हैं। ऐसी स्त्रियां संसार में अधिक होती हैं।
ऐसी लड़कियां चुगली करने वाली यानी इधर की बात उधर करने वाली होती हैं। ये अधिक बोलती हैं। इसलिए लोग इनके सामने कम ही बोलते हैं। इनकी आयु लंबी होती हैं। इनके सामने ही दोनों कुल (पिता व पति) नष्ट हो जाते हैं। अंत समय में बहुत दु:ख भोगती हैं। ये उस समय मरने की बारंबार इच्छा करती हैं, लेकिन इनकी मृत्यु नहीं होती।
5- #पुंश्चली स्त्रियों के लक्षण-
पुंश्चली स्वभाव की लड़कियों के मस्तक का चमकीला बिंदु भी मलीन दिखाई देता है। इस स्वभाव वाली महिलाएं अपने परिवार के लिए दु:ख का कारण बनती हैं।
इनमें लज्जा नहीं होती और ये अपने हाव-भाव से कटाक्ष करने वाली होती हैं। इनके हाथ में नव रेखाएं होती हैं जो सिद्ध (पुण्य, पद्म), स्वस्तिक आदि उत्तम रेखाओं से रहित होती हैं। इनका मन अपने पति की अपेक्षा पर पुरुषों में अधिक लगता है। इसलिए कोई इनका मान-सम्मान नहीं करता। सभी इनकी अपेक्षा करते हैं।
पुंश्चली स्त्रियों में युवावस्था के लक्षण 12 वर्ष की आयु में ही दिखाई देने लगते हैं। इनकी आंखें बड़ी और हाथ-पैर छोटे होते हैं। स्वर तीखा होता है।
यदि ये किसी से सामान्य रूप से बात भी करती हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे ये विवाद कर रही हैं। इनकी भाग्य रेखा व पुण्य रेखा छिन्न-भिन्न रहती है। इनके हाथ में दो शंख रेखाएं व नाक पर तिल होता है।
6- #आतुरा स्त्रियों के लक्षण-
इस तरह की स्त्रियां हमेशा हड़बड़ी में ही रहती हैं। प्रत्येक कार्य को शीध्र से शीघ्र पूरा करने का इनमें जुनून होता है। इसी करण से कई बार इनके काम बिगड़ भी जाते हैं। ये होती तो साधारण रूप-रंग वाली हैं लेकिन पति से बहुत प्रेम करती हैं। यदि इनके मन की कोई बात पूरी न हो तो पति से लड़ाई भी कर लेती हैं। इन्हें नए-नए मित्र बनाने का स्वाभाव होता है। इनके अधिकतम मित्र स्त्री ही होते हैं। ये धन संचय करने में कमजोर होती है। अपने मित्रों पर अधिक खर्च कर बैठती हैं।
7- #डाकिनी स्त्रियों के लक्षण-
इस प्रकार की स्त्रियां मीठी-मीठी बातें करके अपना काम निकालना खूब अच्छी तरह जानती है। लोगों को धोखा देना इनकी प्रकृति में होता है। ये उपर से प्रत्येक व्यक्ति से बहुत निकटता और अपनापन दिखाती हैं लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें धन ऐंठने की योजना बनाती रहती हैं। यहां तक कि पति को भी धोखा देने में संकोच नहीं करती। इनमे धन की विशेष लालसा होती है और धन पाने के लिए ये अपराध तक कर बैठती हैं। देखने में सुंदर, वाणी में मधुरता इनका सबसे बड़ा गुण होता है।
8- #प्रेमिणी स्त्रियों के लक्षण-
प्रेमिणी श्रेणी की स्त्रियां अत्यंत सुंदर, गौर वर्ण, चंचल नेत्र, गुलाबी पतले होंठ, सुराही जैसी गर्दन और लंबे केश की मालकिन होती हैं। इनकी सुंदरता के दीवाने सैकड़ों होते हैं। जो कोई भी एक बार इन्हें देख ले वह भूल नहीं पाती। जितना आकर्षक इनका रूप होता है, उनका सौम्य इनका स्वभाव भी होता है। इनका आचरण शुद्ध होता है। परोपकार और प्रेम की भावना इनमें प्रबल होती है। ये अपने परिवार और पति-बच्चों के लिए समर्पित होती हैं। इन्हें भोग-विलास के समस्त साधन प्राप्त होते हैं। स्वर्ण तो इन्हें विशेष प्रिय होता है।
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स्त्रियां कितने प्रकार की होती है
और उनके स्वभाव कैसे होते हे ?
हिंदू धर्म में स्त्री को देवी का रूप माना गया है, ये माना जाता है कि जिस घर में स्त्री की इज्जत होती है और उसे सुखी रखा जाता है उस घर में माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है वहीं जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता और उसे पीड़ा पहुंचाई जाती है ऐसे घर से माता लक्ष्मी दूरियां बना लेती हैं। जिस घर से माता लक्ष्मी दूर हो जाती हैं उस घर के सदस्यों को आर्थिक परेशानियों का तो सामना करना ही पड़ता है इसके साथ ही उसे अन्य प्रकार की पीडाएं भी सहनी पड़ती हैं।
किसी भी मनुष्य के शरीर की बनावट उसकी चाल,ढाल और आवाज से उसका चरित्र, और इसका उसका भाग्य भी बताया जा सकता है।
यही नहीं इस शास्त्र में स्त्री-पुरुष के विभिन्न प्रकार भी बताए गए हैं, किन्तु फिर भी इन ग्रंथों में स्त्रियों के लक्षणों का उल्लेख अधिक विस्तृत मिलता है। हो सकता हे इसी कारण, स्त्रियों के विषय में ये कहा जाता है कि उन्हें समझना बहुत कठिन होता है। और हमारे ऋषियों ने इस विषय में उल्लेख अधिक विस्तृत रूप से किया है।
आज हम आपको ज्योतिष में बताए गए लड़कियों के विभिन्न प्रकार और सधवा (सुहागन), विधवा लड़कियों के लक्षणों के विषय में बताते हैं।
समुद्र शास्त्र के अनुसार महिलाएं :-
1- चित्रिणी, 2- पद्मिनी, 3- हस्तिनी, 4- शंखिनी,5- पुंश्चली,6- आतुर,7- डाकिनी,8- प्रेमिणी,9- क्रपिणी,10- स्वर्गिणि,व 11- बहुवंशिनी आदि प्रकार की होती हैं।
1- सधवा स्त्रियों के लक्षण-
सधवा स्त्रियों के दोनों हाथ कमल के समान सुंदर होते हैं। उंगलियां सीधी होती हैं। हाथ की रेखाएं सुक्ष्म, लेकिन साफ होती हैं। हथेली चिकनी और गोलाकार होती है। इनके हाथ में पद्म, कानन, जयंती तथा स्वस्तिक रेखा स्पष्ट दिखाई देती हैं। भाग्य रेखा भी बिना कटी होती है। हथेली का मध्यभाग थोड़ा ऊंचा होता है। संपूर्ण शरीर का रंग एक समान दिखाई देता है। भौंहे मिली नहीं होती। दांत एक-दूसरे से चिपके होते हैं।
विधवा स्त्रियों के लक्षण-
समुद्र शास्त्र के अनुसार विधवा लक्षण वाली स्त्रियों के बाएं हाथ में तीन या छ: रेखाएं होती हैं। भाग्य रेखा छिन्न-भिन्न या दंड रेखा से युक्त होती है।
ऐसी महिलाओं के बाल रूखे से रंग के, कान मोटे और मुंह लंबा होता है।इनका कंठ मोटा व बाहर की ओर निकला होता है। इनकी आवाज कर्कश होती है, इनके नाखून चपटे होते हैं।
#चित्रिणी स्त्रियों के लक्षण-
चित्रिणी स्त्रियां पतिव्रता, स्वजनों पर स्नेह करने वाली होती हैं। ये हर कार्य बड़ी ही शीघ्रता से करती हैं। इनमें भोग की इच्छा कम होती है। श्रृंगार आदि में इनका मन अधिक लगता है। इनसे अधिक परिश्रम वाला काम नहीं हो पाता, परंतु ये बुद्धिमान और विदुषी होती हैं।
गाना-बजाना,ग्रहसज्जा और चित्रकला इन्हें विशेष प्रिय होता है। ये तीर्थ, व्रत और साधु-संतों की सेवा करने वाली होती हैं। ये दिखने में बहुत ही सुंदर होती हैं।
इनका मस्तक गोलाकार, अंग कोमल और आंखें चंचल होती हैं। इनका स्वर कोयल के समान होता है। बाल काले होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। यदि इनका जन्म गरीब परिवार में भी हो तो ये अपने भविष्य में पटरानी के समान सुख भोगती हैं।
अधिक संतान होने पर भी इनकी लगभग तीन संतान ही जीवित रहती हैं, उनमें से एक को राजयोग होता है। इस जाति की लड़कियों की आयु लगभग 48 वर्ष होती है।
2- #पद्मिनी स्त्रियों के लक्षण-
समुद्र शास्त्र के अनुसार पद्मिनी स्त्रियां सुशील, धर्म में विश्वास रखने वाली, माता-पिता की सेवा करने वाली व अति सुंदर होती हैं। इनके शरीर से कमल के समान सुगंध आती है। यह लंबे कद व कोमल बालों वाली होती हैं। इसकी बोली मधुर होती है। पहली नजर में ही ये सभी को आकर्षित कर लेती हैं। इनकी आंखें सामान्य से थोड़ी बड़ी होती हैं। ये अपने पति के प्रति समर्पित रहती हैं।
इनके नाक, कान और हाथ की उंगलियां छोटी होती हैं। इसकी गर्दन शंख के समान रहती है व इनके मुख पर सदा प्रसन्नता दिखाई देती है।पद्मिनी स्त्रियां प्रत्येक बड़े पुरुष को पिता के समान, अपनी उम्र के पुरुषों को भाई तथा छोटों को पुत्र के समान समझती हैं।ये देवता, गंधर्व, मनुष्य सबका मन मोह लेने में सक्षम होती हैं। यह सौभाग्यवती, अल्प संतान वाली, पतिव्रताओं में श्रेष्ठ, योग्य संतान उत्तपन्न करने वाली तथा आश्रितों का पालन करने वाली होती हैं। इन्हें लाल वस्त्र अधिक प्रिय होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। जिनसे इनका विवाह होता है, वह पुरुष भी भाग्यशाली होता है।
3- #हस्तिनी स्त्रियों के लक्षण-
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पुरुष की कामवासना को पूरा करने में
हर स्त्री सक्ष्म है !
लेकिन किसी स्त्री के प्रेम की गहरायी को
भरने के लिए,
कोई विरला पुरुष ही सक्ष्म हो पाता है !!🌹🌹
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वासना उम्र नहीं देखती सरकार,
चेहरा बता देता है प्यास कितनी है।
वैसे बड़े उम्र की स्त्रियां अनुभव बहुत दे जाती है।
उनका शरीर चंचल और कामुक होता है।।
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क्या मुश्किल है...
बहुत मुश्किल है
स्त्री-पुरुष का मित्र होना।
मुश्किल है
जवाब देना,
लोगों के मन में उठते सवालों का,
चेहरों पे तैरती कुटिल मुस्कानों का
और दबी हुई जुबानों का।
मुश्किल है
एक साथ तस्वीर खिंचवाना,
उसे फ्रेम में मड़वाना और
फिर दीवार पर टँगाना।
मुश्किल है
एक तख़्त पर बैठ पाना
खुली सड़क पर दूर तक चल पाना
और खुलकर ठहाके लगाना।
मुश्किल है...
मुश्किल है.
वक़्त-बे-वक़्त बतियाना
बे-वजह मिल पाना
भीड़ में आवाज़ लगाना और
हाथ के इशारे से बुलाना।
मुश्किल है
अपनो को समझाना
सारे जहाँ से लड़ पाना
जमाने से टकराना
बेतुके बयानों को दबाना।
मुश्किल है..
कंधे का सहारा दे पाना
मुश्किल में आँसू पौंछ पाना
अकेलेपन को पाट पाना
जीवनभर साथ निभाना।
मुश्किल है
अनाम रिश्ते को निभाना
अपना दामन दाग से बचाना
अफवाहों को छुपाना और
उठते बवालों को दबाना।
क्या सच मे मुश्किल है...❓
हाँ बहुत मुश्किल है..
स्त्री-पुरुष का मित्र होना....!!!!❤🔥❤🔥
🌹🌹
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उसका रोम-रोम
डूबा होता है
प्रेम के अथाह समंदर में
जहाँ से कभी भी
वह उभरना नहीं चाहती।
शारीरिक आकर्षण
गठीला देह, कद, काठी
इन सबसे परे होता है
स्त्री का प्रेम भाव।
असल में स्त्री
सिर्फ़ पुरुष मन को देखती है
जहाँ आजीवन बसना चाहती है
उन आँखों को निहारती है
जिसमें दुनिया देखना चाहती है।
स्त्री कभी प्रेम के बदले
प्रेम को पाना नहीं चाहती
वह तो नि:स्वार्थ भाव से
प्रेम में समर्पित हो जाती है।
स्त्री का प्रेम क्षणिक नहीं होता
बिन देखे, बिन स्पर्श किये भी
वो आजीवन प्रेम कर सकती है।
सच तो यही है कि
स्त्री कभी प्रेम नहीं करती
वो प्रेम को जीती है !!!
❤️❤️
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ना जाने इस 'ज़िद' का नतिजा क्या होगा....
समझता दिल भी नहीं...
मैं भी नहीं...और तुम भी नहीं...।
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👄👄 अजीब तरीका है उस पगले के जबाव माँगने का होठों पर होंठ रख कर पुछता है, कुछ तो बोलो।
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से क्स से पहले आप अपनी महिला साथी के मन में धीरे धीरे उत्तेजना जगाएं। अक्सर पुरुष जल्दबाजी में से क्स करना शुरू कर देतें हैं। इस कारण महिला साथी को चरम सुख नही मिल पाता है।
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