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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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अगर जिस्म के साथ सेहत और ज़िन्दगी खुशहाल रखनी है तो
सुबह सुबह योग एवम संभोग से
शुरुआत कीजिए।
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पति का सेक्स में कम हो रही है रुचि तो क्या करें ???
शादीशुदा जिंदगी में सेक्स अहम रोल प्ले करता है। यह सिर्फ एक फिजिकल रिलेशन न होकर इमोशनल बॉन्ड को भी बढ़ाता है। हालांकि, कई कपल्स सेक्स लाइफ में शादी के कुछ दिन बाद चार्म गायब हो जाता है। कई बार पति सेक्स में रुचि नहीं लेते हैं ऐसे में वाइफ के लिए खासा परेशानी खड़ी हो सकती है।
*मिरर के सामने अनड्रेस होना:-*
पति बेड पर हो और आप नहाकर आएं तो कपड़े मिरर के सामने पहनें। इस दौरान उन्हें यह एहसास न होने दें कि आप ऐसा जानबूझकर कर रही हैं। बाथिंग रोब हटाकर कपड़े पहनने के दौरान आपका रिफ्लेक्शन मिरर में दिखेगा जो पति के नोटिस में जरूर आएगा और वह खुद को रोक नहीं पाएंगे।
*सेक्सटिंग:-*
सेक्सटिंग सिर्फ डेट करने वालों के लिए नहीं हैं। पति-पत्नी भी इस तरीके को अपनाते हुए अपनी सेक्स लाइफ को स्पाइस अप कर सकते हैं। पति के घर लौटने का टाइम हो तो उन्हें सेक्सी सा मेसेज भेजें। उनके साथ सेक्सटिंग करने से वह एक्साइटिड फील करेंगे। चाहे तो आप घर पर रोमांटिक डिनर भी प्लान कर सकती हैं और इसके बाद आप हॉट सेक्स इंजॉय करने के लिए तैयार हो जाएं।
*सेक्सी लॉन्जरी:-*
सेक्सी लॉन्जरी पहनें और धीरे-धीरे पति के सामने अनड्रेस हों। उनके सामने बॉडी पर लोशन लगाएं जो उन्हें टीज करेगा।
*इरॉटिक सॉन्ग:-*
सॉन्ग्स मूड को सेट करने के लिए शानदार होते हैं। सेक्सी नाइट के लिए भी म्यूजिक काम आ सकता है। इरॉटिक सॉन्ग्स प्ले करें। लेकिन ध्यान रहे कि आवाज धीमी रहे ताकि यह टीज करने का काम करे, न की शोर मचाने का।
*इनिशीऐट करें:-*
पति के फर्स्ट स्टेप का इंतजार न करें। हॉट नाइट स्पेंड करने का मन है तो खुद इनिशीऐट करें। टचिंग और किसिंग के साथ उन्हें अराउज करें और सेक्सी नाइट इंजॉय करें।
*कुल मिलाकर अपनी सेक्स लाइफ में नयापन लाने की कोशिश करें, नए-नए तरीके से छेड़छाड़ करें और एक्साइटमेंट को बनाए रखें तभी एक बोरिंग सेक्स लाइफ से छुटकारा मिलेगा।
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आमतौर पर महिलाएं बिस्तर पर अपने पार्टनर से अपनी बातें करने में हिचकिचाती हैं और अपने आपको पुरुष के हवाले कर देती हैं। लेकिन, हमेशा ऐसा करना आपकी सेक्स लाइफ को बोरिंग बना सकता है। यह सोचना कि सेक्स के दौरान सिर्फ पुरुषों का ही काम होता है कि वह महिलाओं को खुश करें, बिल्कुल गलत है। अपने पार्टनर को खुश करने की जिम्मेदारी महिलाओं की भी उतनी ही होती है जितनी कि पुरुषों की। वैसे भी महिलाओं में प्राकृतिक रूप से ऐसे गुण होते हैं, जिनके जरिए वह अपने पार्टनर को खुश कर सकती हैं। लेकिन, अगर आप इसमें कुछ नई चीजें ऐड कर लें तो मजा दोगुना हो जाएगा और आपका पार्टनर भी आपसे काफी खुश रहेगा।
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प्रेम और सेक्स
जब तक पुरुष के लिंग में तनाव है ,तब तक वो प्रेम नही दे सकता ।
अगर किसी स्त्री के पास पुरुष जाता भी है और ये कहता है कि मैं तेरे करीब इस कारण हु की मैं प्यार करता हूँ ,तो ये धोखा है ।गलत है ।
सेक्स शरीर की जरूरत है ,तो ये गलत नही है ।पर सेक्स को प्यार कहने की भूल से बचें।
ईमानदार होकर रहे ।अगर सेक्स करना है तो सामने वाले को साफ शब्दों में कहे ।और साथी से पहले ,खुद को स्पष्ठ कर ले कि मैं प्यार में हु या वासना में !
ओरत फूल की तरह कोमल होती है ।और फूल को रगड़कर ,नोचकर ,उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर भीतर घिसकर ,प्यार नही किया जाता । स्त्री का शरीर और उसकी योनि की नसें ,बेहद संवेदनशील होती है ।बहुत ज्यादा बारीक होती है ।
आज जो महिलाए ,अपनी डॉक्टर के पास जा रही है ,उसका एक कारण ये भी है कि उनके शारीरिक सम्बन्धो में हिंसा है ।वासना के वेग के चलते ,न तो पुरुष को होश रहता और न स्त्री इतनी हिम्मत कर पाती की पुरुष को( न) कह सके ।
और फिर बच्चादानी में हजारो बीमारी लग जाती है ।महावारी में भयानक दर्द ,ocd ,pocd और पता नही क्या क्या ,सहन करना पड़ता है ।
पुरुष एक्टिव है स्वभाव से और स्त्री पैसिव !
इसलिए यहां पुरुष को समझना चाहिए कि पल भर की वासना के लिए किसी स्त्री का शरीर खराब न करें ।वैसे भी अगर सेक्स को भी धर्य और तरीके से किया जाए ,और एक ठहराव हो भीतर तो उसके परिणाम दोनों व्यक्तियों के लिए सुखद होते है ।और सन्तुष्टि भी मिलती है ।
लेकिन जोश में आकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले पुरुष ,कभी भी सन्तुष्टि को उपलब्ध नही होते ।
जो व्यक्ति विवाहित है ,उन्होंने अनुभव किया होगा कि सालो तक सेक्स करने पर भी उनके भीतर सेव इच्छा ज्यों की तँयो है ।
इसका कारण यही है कि उन्हें गहराई ही नही जानी कभी इस चीज की ।
45 मिनेट से पहले तो स्त्री का शरीर खुलता ही नही की वो तुम्हे अपनी बाहों में भरे ,या तुम्हे अनुमति दे कि तुम उसके भीतर प्रवेश करो ।
इसलिए फोरप्ले का इतना महत्व है ।और ठीक उसी तरह आफ्टरप्ले भी अर्थ रखता है कि तुम्हारी वजह से मैं जीवन ऊर्जा का आनंद ले पाया।
केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले ,बलात्कारी है ।अपने ही साथी का बल पूर्वक हरण करना ,बलात्कार ही होता है ।
आज जो 70 फीसदी महिला ऑर्गेज़्म से अनजान है ,उसका कारण सेक्स की अज्ञानता है ।इस बात को अहंकार पर चोट न समझे ,ब्लिक अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें ।अपनी महिला मित्र के पैर छुए ,उससे अनुमति ले ,उसके प्रति श्रद्धा भाव रखे ,और इस बात का ध्यान रखे कि उसे दर्द न दे ।आनंद दे ।
भले तुम दस मिनट ,आधे घण्टे का सेक्स कर लो ,पर ओरत अछूती ही रह जाती है तुम्हारे स्पर्श से ,और तुम भी अधूरे ही लौटकर आते है । बहुत धीरे धीरे शरीर तैयार होता है ,बहुत धीरे धीरे वो द्वार खुलते है ,जब तुम्हे अनुमति मिले।
और ये सब समझने के लिए भीतर स्थिरता चाहिए ।और बिना मैडिटेशन के ये सम्भव नही ।
बिना मैडिटेशन जीवन उथला ही रहता है ।अगर गहराई चाहिए जीवन मे ,तो ध्यान बहुत जरूरी है ।
होश ,ठहराव ,स्थिरता ,धीरज ,प्रेम ,श्रद्धा
ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन मे उतरेंगे ।
किताबे पढ़ने या ज्ञान सुनने से कुछ नही होगा ।
बाकी फिर कभी ।
#Story
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चोरी की हुई पोस्ट...
महिला एक संभोग के बाद तुरंत दूसरे के लिए तैयार हो सकती है, इसी आधार पर दुनिया के वेश्याघर चलते हैं। जबकि नर के लिए दो संभोगों के बीच एक अंतराल होता ही होता है। पहली बार के बाद वह झटके से मादा से अलग हो जाएगा और सोना चाहेगा—यह उसकी प्रकृति है। 😴
मगर मादा की प्रकृति बिल्कुल अलग होती है। वह संभोग के तुरंत बाद नर के मुँह से ऐसे शब्द सुनना चाहती है, जो उसे गुदगुदा दें, उसे संतुष्ट करें। 💖 वह यह नहीं समझती कि नर प्रेम के तुरंत बाद फिर से प्रेम नहीं कर सकता। वो युद्ध के बाद प्रेम की लालसा रखता है। नर की मूल प्रवृत्ति शिकारी की तरह होती है। 🏹
सभ्य समाज में उसकी इस प्रवृत्ति को ज़रूर सुंदर लिबास में ढक दिया जाता है, पर इसका अस्तित्व बना रहता है। दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक, हिटलर, रोज़ाना सैकड़ों लोगों को मरवाने के बाद अपनी प्रेमिका की गोद में सिर रखकर प्रेमगीत लिखता था। उसके आँसू उन लम्हों की याद में बहते थे जो उसने अपनी प्रेमिका से जुदाई में बिताए थे। 😢
अशोक, जिसने कलिंग युद्ध में भयंकर मारकाट देखी, प्रेम के लिए तड़प उठा था। उसी तड़प ने उसे बौद्ध धर्म की ओर खींचा और आज अशोक और बौद्ध धर्म को अलग करना नामुमकिन है। नेपोलियन बोनापार्ट भी युद्ध के कवच को उतार कर अपनी प्रेयसी के प्यार में डूबता था। युद्ध के मैदान में जितना वह योद्धा होता, उतना ही प्रेम में समर्पित भी होता। 🛡️❤️
सामान्य पुरुष न तो इतनी गहराई से प्रेम कर सकता है और न ही इतनी घृणा से युद्ध। वह अक्सर संभोग को महज कुछ मिनटों का खेल समझता है, जिससे उसे वास्तविक संतुष्टि नहीं मिलती। 😕 इस असंतोष के चलते वह साथी बदलने की तरफ झुक सकता है। जहाँ सामाजिक बंधन कमजोर होते हैं, वहाँ यह बदलाव छह महीने के अंदर हो सकता है।
लेकिन बार-बार साथी बदलने से न तो परिस्थितियाँ बदलती हैं और न ही उसकी मानसिक स्थिति। नर तब तक प्रेम में सफल नहीं हो सकता जब तक वह अपनी जंगली प्रवृत्तियों को बाहर निकालने का रास्ता नहीं ढूंढता। यही वजह है कि मादा अक्सर सामाजिक रूप से सभ्य पुरुष की बजाय उद्दंड, बागी पुरुष की तरफ आकर्षित होती है। 😏 इसी कारण बिगड़े हुए लड़कों को अक्सर समर्पित प्रेमिकाएँ मिल जाती हैं, जबकि सभ्य दिखने वाले लड़के पीछे रह जाते हैं।
यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। हर इंसान की अपनी पसंद और प्रेम करने का अपना तरीका होता है। 🌸💖
कुल मिलाकर, बात यही है कि आपने पुरुष और महिला दोनों के संभोग से जुड़े पहलुओं को परिभाषित किया है, लेकिन हर व्यक्ति की अपनी विचारधारा और मूल्य होते हैं। ✨
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💞
ये तन, ये मन सब समर्पण के लिए हीं तो है, सब न्योछावर कर देने के लिए हीं तो है। और जवानी ढल जाने के बाद इसे कौन पूछेगा, इसकी रौनक़ भी फीकी हो जाएगी।
जो ताजगी, जो सम्मोहन, जो मदकता, जो आकर्षण अभी है, वो सब दिन तो नहीं रहेगी। इस जवानी में एक मन का मीत मिल जाये, जो खूब प्रेम करे, अंदर तक, तन को रोज रोमांचित करदे। फिर बुढ़ापा भी उसके साथ कामुक हो जाएगी।
ये जवानी बुढ़ापे की जमा पूंजी है, आज मीत जितनी लेगा, वो बुढ़ापे में देगा भी। बाबा कामपुरुष
अत: यदि मन का मीत मिले तो उसे अपना बना लीजिये। उसे जी भर प्यार दीजिये, इतनी को वो भी डूब जाये इश्क की दरिया में ।
सोचकर देखिये, सही रास्ते मिलेंगे, फिर दो अजनबी एक हो जाएंगे, सात जन्म नहीं, जन्म जन्म के लिए...
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प्यार में सेक्स करना जरूरी है??? ये एक ऐसा विषय है, जिस पर सभी लोगों की अलग अलग राय है। कुछ लोग सही मानते हैं तो कुछ लोग गलत।
आज इस विषय पर बात करूंगा, मगर उससे पहले सेक्स के अलग अलग भाव पर बात करूंगा।
सेक्स, हवस और वासना तीनों एक जैसे होने के बावजूद भी तीनों एक दूसरे से अलग हैं।
__वासना और हवस:- ये सेक्स का वो मानसिक विकृति है जो ना तो नर-नारी, पशु-पक्षी, छोटे-बड़े आदि में भेद नहीं करता। जब ये विकृति मन में सवार होती है तो वासना से ग्रसित इंसान किसी के साथ कुकृत्य कर देता है।
सामने वाले के इच्छा के विरूद्ध उसके साथ जोड़ जबरदस्ती कर सामने वाले का शारीरिक और मानसिक रूप से क्षति पहुंचाता है।
सीधे शब्दों में कहूं तो जिसके अंदर हवस और वासना पाई जाती है, वो जानवर होते हैं और उन्हें प्रेम से कोई लेना देना नहीं होता है।
वहीं सेक्स कि बात करूं तो ये दो लोगों की रजामंदी से किया जाने वाला वो सुख है, जिसे न पाने वाला अतृप्त रहता है। ये वो चीज है जिसके बिना संसार का कल्पना करना ही बेकार है।
अब सवाल है कि प्रेम में सेक्स जायज है या नहीं?
अगर प्रेम हवस और वासना का केंद्र बिंदु है तो वो प्रेम ही नहीं है, क्योंकि सामने वाला इंसान प्रेम नहीं बल्कि अपनी इच्छाएं पूरी करना चाहता है और जैसे उसकी इच्छाएं पूर्ण हुई वो आपका अहित कर सकता है। लड़के लड़कियों का सेक्स वीडियो वायरल होना इसमें से ही एक है।
जहां तक सेक्स कि बात करूं तो प्रेम में सेक्स उतना ही आवश्यक है, जितना आपके नंगे शरीर पर एक कपड़े का होना।
वो कपड़ा आपके शरीर को परिपूर्णता देता है।
प्यार के शुरुआत का पहला बिंदु आकर्षण होता है, जो इंसान की व्यक्त्तिव, उसके अच्छे आचरण आदी से शुरू होती है और जैसे जैसे समय बीतता जाता है प्यार की गहराई उतनी ही बढ़ती जाती है। साइंस कहता है कि जब तक हम फिजिकली रिलेशन में नहीं रहते तब तक हम अपने प्रेमी या प्रेमिका के प्रति लापरवाह होते हैं, क्योंकि हम सिर्फ उससे मेंटली रूप से जुड़े होते हैं... मगर हम जैसे फिजिकली रूप से जुड़ते हैं हम अपने प्रेमी/प्रेमिका की छोटी छोटी चीजों के बारे में सोचने लग जाते हैं। उसके प्रति वफादारी की प्रतिशत बढ़ जाती है।
सेक्स में प्यार की भागीदारी हो या नहीं हो, मगर प्यार की मजबूती में सेक्स अहम भूमिका निभाता है।
जिस तरह से एंगेजमेंट कि अंगूठी सीधा दिल तक टच करती है, सेक्स भी उसी प्रकार प्यार के भावनाओं को टच करता है।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो बिना काम के प्रेम का कोई महत्व ही नहीं है। अगर बिना काम के प्रेम होता तो कामदेव नहीं होते।
देवताओं में कामदेव का अपना अलग महत्व है और बिना कामदेव के प्रेम को अनुभव कर पाना नामुमकिन है।
प्रेम और काम का सामंजस्य और महत्ता खजुराहो की मंदिर बतलाती है, इसलिए प्रेम में सेक्स गलत नहीं है अगर इसका दुरुपयोग ना किया गया हो।🙋♂
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संभोग से होने वाली कसरत एक औरत के शरीर को पूर्ण करती हैं सही उम्र में यदि संभोग ना हो तो एक औरत का शरीर उभर नहीं पता
क्यों की रति क्रिया के समय जब एक महिला संतुष्टि की प्राप्ति करती है तब उसके शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन बनते हैं जो मासिक धर्म की समस्या चेहरे को चमक
उदर समस्या का भी भी समाधान करते हैंकॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही मेरी उम्र 23 साल की थी, और पापा और चाचा मेरे लिए रिश्ता देखने लगे थे। कई लड़के घर देखने आते थे, लेकिन किसी को सही नहीं समझा जाता था। कारण यह था कि सबको सरकारी नौकरी चाहिए थी। मेरी मां इस चिंता में टोटके करती रहती थीं ताकि मेरी शादी जल्दी हो जाए। एक दिन मैंने मां से कहा, "मां, इन टोटकों से क्या होगा? जहाँ शादी होनी होगी, वहाँ हो जाएगी।"
मां ने डांटते हुए कहा, "तुम चुप रहो, शादी और ब्याह दोनों अपने समय पर हों तो ही अच्छा होता है।" उनकी बात सुनकर मैं चुपचाप हट गई। मुझे लगता था कि मेरी राय का कोई महत्व नहीं था।
करीब छह महीने बाद, एक रिश्ता आया। वह लड़का सरकारी नौकरी में था और उसकी उम्र 37 साल थी, मुझसे 14 साल बड़ा। पापा और चाचा ने सरकारी नौकरी देखकर तुरंत हां कर दी, और मां ने भी सहमति दे दी। मुझसे यह तक नहीं पूछा गया कि मुझे लड़का पसंद है या नहीं।
फिर, लड़के के घरवाले हमारे घर आए और उन्होंने मुझे देखा। उन्होंने मुझे पसंद कर लिया। जब मैंने उस लड़के को देखा, तो वह उम्र में मुझसे काफी बड़ा लगा, लेकिन मैं यह सवाल करने की हिम्मत नहीं कर पाई कि इतना उम्र का अंतर क्यों है। जब हमें कमरे में अकेला छोड़ा गया, तो मेरे मन में हिम्मत ही नहीं हुई कि कुछ पूछ सकूं।
शाम को जब सब चले गए, तो मैंने बहुत धीमी आवाज़ में अपनी मां से कहा, "मां, वो मुझसे काफी बड़े हैं।" मां ने डांटते हुए कहा, "इतना अंतर चलता है।" उनकी बात मानकर मैंने यह रिश्ता स्वीकार कर लिया। पापा और मां की मर्जी को मैंने अपना आशीर्वाद मान लिया और हमारी शादी हो गई।
शादी की पहली रात हमारे बीच कुछ भी नहीं हुआ। मैंने सोचा कि शायद वह तनाव में हैं। धीरे-धीरे दो हफ्ते बीत गए, और मैंने उनसे पूछा, "क्या मैं आपको पसंद नहीं हूं? आप मेरे करीब क्यों नहीं आना चाहते?" उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा, "ऐसी बात नहीं है।" फिर एक दिन मैंने खुद ही उनके करीब जाने की कोशिश की और जो एक पत्नी का हक होता है, उसे पाने की कोशिश की।
हमारी कोशिश के दौरान अचानक उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि वह शर्मिंदा होकर कमरे से बाहर चले गए। मैंने उन्हें पूरा समय दिया और एक हफ्ते बाद उनसे पूछा कि क्या उन्होंने डॉक्टर से सलाह ली है। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से इलाज चल रहा है, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा। मेरा दिल बैठ गया।
एक स्त्री के लिए शारीरिक सुख एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, और जब वह सुख न मिले तो न केवल स्त्री का मन असंतुष्ट रहता है, बल्कि वह मां भी नहीं बन सकती। धीरे-धीरे हमारे बीच की दूरी बढ़ने लगी। जब मैं डॉक्टर के पास गई, तो उन्होंने बताया कि मेरे पति की नसें उनकी उम्र की वजह से कमजोर हो गई हैं और काम के प्रेशर की वजह से उनकी काम इच्छा खत्म हो चुकी है। इस उम्र में ऐसी समस्याएं जल्दी ठीक भी नहीं होतीं।
मेरी उम्र 24 साल थी, जहाँ मेरा शरीर शारीरिक सुख की मांग कर रहा था। दूसरी तरफ, मेरे 38 साल के पति थे, जिनकी काम इच्छा खत्म हो चुकी थी। यह मेरे लिए जीते जी मरने जैसा था। मेरे पति मुझे शारीरिक सुख नहीं दे सकते थे, लेकिन वह अच्छे इंसान हैं, और मैं उनसे प्रेम करती हूं, वह भी मुझसे। लेकिन सरकारी नौकरी की चाहत ने मेरी जिंदगी को बर्बाद कर दिया।
अब मुझे लगता है कि अगर मैंने अपने हमउम्र लड़के से शादी की होती, भले ही वह कम पैसे कमाता, लेकिन वह मुझे खुश रखता। आज मेरे पास सभी सुख-सुविधाएं हैं, लेकिन इन सबके बावजूद मेरी जिंदगी में एक बड़ी कमी है। अब ये सुविधाएं भी फीकी लगने लगी हैं।
मैं हर लड़की के माता-पिता से कहना चाहूंगी कि सरकारी नौकरी की तलाश में अपनी बेटी की जिंदगी से खिलवाड़ मत करें। जीवन में खुश रहने के लिए सिर्फ पैसे ही सबकुछ नहीं होते। एक समय था जब 50 साल के आदमी में भी 25 साल के लड़के जैसी ताकत होती थी, लेकिन आज लोग 30 की उम्र में ही बूढ़े हो रहे हैं।
जीवन एक बार मिलता है, इसे अच्छे से जिएं। सही समय पर, सही उम्र के लड़के के साथ शादी करें।💋 💋
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स्त्री सुहागन होती है परंतु संतुष्ट नहीं होती !
पुरुष अपना वीर्य नाली में बहा रहे हैं,
जिस कारण स्त्रियों का भरण पोषण पूर्ण रूप से नहीं होता क्योंकि भरण पोषण में केवल अन्न ही नहीं आता,
एक सुखपूर्वक संतुष्ट संभोग भी आता है !
जिससे स्त्री के सौंदर्य और
स्वभाव में चरम निखार आता है
🔥🫦❤️
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सेक्स हर कोई करना चहता है चाहे वह महिला हो या पुरुष।
कामुक बातें हर किसी को पसन्द हैं
हर कोई कामवासना में लिप्त है।
और होगा भी क्यों नहीं यह प्रकृति ने दिया है और स्वाभाविक प्रक्रिया है।
सहमति से सेक्स कोई गलत नहीं है और मैं सेक्स को आम क्रियाओं की तरह ही मानती हूं।
जो जीवन को, रूह कोआनंदित कर दे वह विषय खराब कैसे हो सकता है।
और फिर जिस विषय पर महर्षि वात्स्यान जैसे महान दार्शनिक ने कामसूत्र पुस्तक लिखी हो और विस्तार पूर्वक वर्णन किया हो बह विषय चर्चा के योग्य क्यों नहीं हो सकता वह विषय खराब कैसे हो सकता है
सेक्स को अच्छे से किया जाए तो फिर सेक्स सबसे ज्यादा आनंदित करने बाली क्रिया है।
लेकिन कुछ लोगऊपर से दिखावा ऐसा करेंगे जैसे सारे संस्कार सिर्फ इन्हीं में कूट कूट कर भर दिए हों।
जब कोई सेक्स की बातें करेगा तो बहुत ही संस्कार वान बनेंगे जैसे ये सेक्स करते ही न हों और यदि सच कहूं तो ऐसे ढोंगी लोग ही कामवासना में सबसे ज्यादा लिप्त हैं यही वो लोग हैं जो अकेले में हर रोज पोर्न वीडियो देखते हैं लेकिन सबके सामने बड़े ही मर्यादित बनेंगे।
सेक्स एक क्रिया है महान दार्शनिक रजनीश ओशो जी ने कहा है कि जिस प्रकार नहाना धोना,खाना पीना, सोना जागना, एक क्रिया ठीक वैसे ही सेक्स भी एक क्रिया ही है हालाकि ये सिर्फ महिला और पुरुष द्वारा एकांत में करने वाली क्रिया है।
लेकिन सेक्स से संबंधित जरूरी जानकारी पर खुलकर बात करने में कोई बुराई नहीं है।
❤️
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मैं देती रही रात भर प्यार उनको
वो लेते रहे रात भर मजा हुस्न का
हल्की बारिश थी सुहाना था मौसम
साथ देती रही मैं भी हर थाप का
तन पे चोली कसी पल भर में खुली
महंगा लहंगा भी था फर्श पर पड़ा
उनके जज्बात तो थे आसमान पर
उनका हथियार तो था एकदम खड़ा
मैं मजबूर होकर बस खड़ी रह गयी
दर्द सहने के सिवाय न कुछ था बचा
एक झटके ने सब कुछ था बदल ही दिया
बस आंखों में आँसू छलकता रहा
वो आगोश में भरकर जज्बाती हुए
फिर सहने के सिवाय अब कुछ न रहा
सिसकती सिसकती कब मदहोश हो गई
उनके आगोश में मैं भी अब खो गई
अचानक से एक सैलाब सा आ गया
जोर धक्कों का अब और बढ़ने लगा
हाथ छाती पर दोनों थे कसने लगे
और जज्बात का सैलाब बढ़ने लगा
अचानक सा एक ऐसा लावा फूटा
दो जवानी आपस मे थी खो गयी
दोनो के जज्बात एक संग ऐसे मिले
एक पल में पानी पानी हो गई
आंखों में नशा था ऐसा चढ़ा
उनके सीने में मैं भी थी खो गई....
🌹❤️🌹
अज्ञात
2 477
जिसके साथ खून का सम्बन्ध नहीं है फिर भी प्रिय लगे वह हो तुम..
जिसके साथ दुनियां भर की बातें करके भी थकान ना लगे वह हो तुम...
जिसके साथ छोटी सी बात पर भी खुल कर हंस लेती हूँ वह हो तुम...
जिसके कंधे पर माथा रख कर रो सकती हूँ वह हो तुम...
जिसके साथ ठंडी चाय भी एक दम गरम लगे वह हो तुम...
जिसके साथ खिचड़ी भी खाने में दावत जैसी लगे वह हो तुम...
जिसको आधी रात को भी उठा कर दिल की बात कर सकती हूँ वह हो तुम...
जिसके साथ बिताए गए पलों को याद करने भर से चेहरे पर मेरे मुस्कान आ जाती वह हो तुम...
जिसके साथ कोई भूमिका बनाए बिना खुल कर बात करती हूँ वह हो तुम...
एक अरसे के बाद भी जिसको मिलते ही दिल झूम उठे वह हो तुम..
दूर रहते हुए भी जिसके साथ दिल के तार जुड़े हो वह हो तुम...
जिसने मेरी बेजान जिंदगी में भी जान डाल दी वह हो तुम...
संक्षेप में तुम वो हो जो हर मुसीबत में हर तरह से मेरे साथ खड़े रहे...
वो हो तुम....🌹 ❤️
अज्ञात
2 477
स्त्रीत्व को छूना भी एक कला है।
तुम नंगे हो जाओ, कपडे उतारने की बात नहीं कह रहा हूँ; मन के आवरणों को हटाने की बात कह रहा हूँ। लेकिन जब भी ऐसी कोई बात होती है तो तुम्हारे ख्यालो में स्त्री ही आती है! क्योकि ये बात जानकर तुम हैरान होगे कि तुम्हारी पत्नी भी स्त्री ही है!
तुम रोज उसे बिस्तर पर साथ पाते हो पर फिर भी उसे समझने की, जानने की चाह कभी नही की! अभी तुम्हे स्त्रीत्व तक पहुँचने में देर है; स्त्री को समझने का, उसके तन को जानने का दम चाहिए। अदभुत साहस चाहिए, प्रेम की अनुभूति चाहिए। परम की आकांक्षा चाहिए।
जबकि लोग उसके उभारो की ऊँचाई देखकर गिर जाते हैं। उसकी गहराइयो में ऐसे डूबते हैं कि मरकर के वापस आते हैं। इसलिए जब भी तुम्हें स्त्री के नजदीक जाने का अवसर मिले तो चूकना मत! जरुरी नहीं कि हर बार तुम सेक्स में हो जाओ, कुछ समय ऐसा भी गुजारना; जहाँ तुम शरीर के पार देखने की कोशिश करना; शायद तुम उसके दिल की धडकन सुन सको, शायद तुम उसके स्त्रीत्व को छू सको, और जिस पल तुमने उसके स्त्रीत्व को छू लिया!
तब अचानक से वासना तिरोहित होगी, और प्रेम का आगमन होगा, तुम एक परमसुख की अनुभूति करोगे, एक ऐसा आनंद जो तुम्हे जन्मों जन्मों तक गुदगुदाता रहेगा, तुम मुस्करा उठोगे, खिल जाओगे, और यही खिलावट तुम्हे जीवन के परम सत्ता की अनुभूति देगी, जीवन के परमआनंद से तुम्हारा मिलन होगा।
~ओशो
स्त्री काया नही ... ह्रदय हैं
जो छू सको तो स्त्रीत्व छूना
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पुरुषों को अपनी पार्टनर को इग्नोर बिल्कुल नहीं करना चाहिए …
क्योंकि जैसे ही तुम उसे इग्नोर करोगे कोई ना कोई तुमसे ज्यादा केयर प्यार अटेंशन देकर उसे फुर से उड़ा ले जायेगा …
और लड़कियों को भी अपने पार्टनर की इज्जत करनी चाहिए …
लड़ाई झगड़े तो तुम अपने माँ बाप भाई बहनों से भी करती हो ….
तो उनको तो नहीं छोड़ देती …
फिर अपने प्रेमी को छोड़ कर किसी और के पास कैसे चली जाती हो ….
कभी अपने माँ -बाप भाई -बहन की जगह जब तुम दुसरो को नहीं दे सकती ….
तो अपने प्रेमी या पति की जगह किसी और को कैसे दे देती हो……!!
❤️ 💙 💜
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औरत की योनि और स्तन उनके शरीर का ऐसा भाग है जिसके लिए मर्द कुछ भी करने को तैयार होते हैं यहां तक कि जो काम उन्होंने जिंदगी में कभी नहीं किया वो काम इसकी चाहत में कर गुजरते हैं
समझ में नहीं आता की ये प्रेम अपनी पत्नी के लिए है या उनके शरीर के लिए, ये लगाव उनसे है या उनके निजी अंगो से
यदि कोई स्त्री किसी पुरुष को अपने निजी अंगो तक पहुंचने दे रही है तो बेशक वो पुरुष उसके जीवन में कुछ खास जगह रखता है
घर में विवाह की बात होती तो मेरे मन में भी ख्याल आता की अब तो वो सब मिलेगा जो हर लड़के को चाहिए होता है,
खैर घर वालो ने शादी के लिए लड़की ढूंढना शुरू कर दिया, और कुछ ही महीने में प्रीति से शादी फिक्स हो गई,
शुरुवाती आकर्षण जिस्मानी होता है, दिखने ने सुंदर सुडौल शरीर, हो सकता हो आप को ये लग रहा हो कैसा लड़का है, लेकिन यकीन मानिए 90% लड़के शादी से पहले ये सब देखते हैं
मन में कई सवाल थे, लेकिन उन सब पर एक सवाल भारी था ये योनि और स्तन दिखने में चुने में कैसे होते होंगे
शादी हो गई, सब अच्छा चल रहा था, प्रीति से प्रेम हो गया था, लेकिन ये समझ नही आता की ये प्रेम प्रीति से है या उसके शरीर से
क्यों की किसी रात यदि प्रीति कुछ करने से मना करती तो मेरा मन खिन्न हो जाता और कई दिन हमारी बात ही नही होती
पर जब हमारे बीच समागम होता तो ना जाने कैसी पल भर में सब ठीक हो जाता,
कुछ समय बाद मेरी पत्नी पेट से होती है, डॉक्टर का इलाज शुरू करवाया, अब मन में एक बेचैनी भी थी की कैसे नए मेहमान की जिमेदारी ली जाए
अभी दिमाग में ये सब चल रहा था, तभी डॉक्टर ने बताया की प्रीति की नॉर्मल डिलीवरी नही हो सकती है ऑपरेशन करना होगा
ऑपरेशन को लेके दिमाग में अलग डर था, तभी कुछ लोगो ने सलाह दी की किसी और डॉक्टर को दिखाओ
2 3 डॉक्टर को दिखाने के बाद ये बात सामने आई की थोड़ी दिक्कत होगी, लेकिन नॉर्मल डिलेवरी करना ज्यादा अच्छा है,
9 मार्च को मैने प्रीति को भर्ती किया, कुछ ही समय बाकी था, बच्चे की डिलीवरी में, लेकिन तभी दर्द की वजह से प्रीति की पल्स गिरने लगी, और वो होश खोने लगी
डॉक्टर जानते थे की अगर ऐसी स्थिति में कुछ गडबड हुआ था तो बच्चा बाहर नही आपाएगा,
तुरंत डॉक्टर अपनी अटेंडेंट को बाहर भेजती हैं
और मुझे अंदर बुलाती हैं
मुझे पूरी बात समझाई गई और बोला गया की अपनी पत्नी को बुलाओ और उसे मोटिवेट करूं
मैने ऐसे ही किया, मेरे सामने मेरी पत्नी नग्न अवस्था में पड़ी हुई थी, उसकी योनि खुली हुई थी जिसे मैं देख सता था l,
मुझे दिखाई दे रहा था की बच्चे का सिर बाहर दिख रहा है
ये वही जगह थी जहां जिसकी चाहत मुझे हर रात होती थी
बच्चा बाहर आया तुरंत उसके सीने के कपड़े को हटाया गया और उसके स्तन दिख रहे थे और उसी स्तन पर बच्चे को लेता कर साफ कपड़े से ढक दिया गया
ये दोनो शरीर का वही अंग था जिसके लिए पुरुष सब कुछ करने को तैयार होता है उसे पाने की चाहत रखता है
जन्म भी उसी स्थान से होता है और जन्म के तुरंत बाद उसी छाती से गर्मी दी जाती है
लेकिन उस रात के बाद मेरी सोच मेरी पत्नी को लेके बदल गई, एक औरत इतने कष्ट और दर्द सिर्फ इस लिए सहती है की मेरा वंश आगे बढ़ सके
उस दिन मुझे ये समझ आया की मुझे उसके शरीर से नहीं बल्कि उससे प्रेम है
और उससे ज्यादा मेरी आंखों में मेरी मां की इज्जत बढ़ गई, और मुझे ये एहसास हुआ की इस दुनिया में मुझे लाने के लिए मेरी मां ने कितने कष्ट सहे हैं
मेरा मानना है जो लोग अपनी पत्नी को सिर्फ संभोग करने की चीज समझते हैं उन्हें एक बार प्रसव के दौरान अपनी पत्नी को जरूर देखना चाहिए
❤️
लिखित अज्ञात
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ये तन, ये मन सब समर्पण के लिए हीं तो है, सब न्योछावर कर देने के लिए हीं तो है। और जवानी ढल जाने के बाद इसे कौन पूछेगा, इसकी रौनक़ भी फीकी हो जाएगी।
जो ताजगी, जो सम्मोहन, जो मदकता, जो आकर्षण अभी है, वो सब दिन तो नहीं रहेगी। इस जवानी में एक मन का मीत मिल जाये, जो खूब प्रेम करे, अंदर तक, तन को रोज रोमांचित करदे। फिर बुढ़ापा भी उसके साथ कामुक हो जाएगी।
ये जवानी बुढ़ापे की जमा पूंजी है, आज मीत जितनी लेगा, वो बुढ़ापे में देगा भी।
अत: यदि मन का मीत मिले तो उसे अपना बना लीजिये। उसे जी भर प्यार दीजिये, इतनी को वो भी डूब जाये इश्क की दरिया में ।
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महिला ने खुद को आईने में देखा और अपने आदमी से पूछा: क्या तुम अब भी मुझसे प्यार करते हो? आदमी ने जवाब दिया: ओह हाँ!
महिला: लेकिन क्या मेरा शरीर वैसा नहीं है जैसा जब हम पहली बार मिले थे?
नहीं, मैंने ध्यान नहीं दिया, आदमी ने जवाब दिया।
उसने अपना हाथ अपने पेट पर रखा और कहा, देखो मेरा पेट बहुत बड़ा और भारी हो गया है, मेरे पैर अब चिकने नहीं रहे। वह आँखों में आँसू लिए उसके पास आई और पूछा, "तुम मुझसे इस तरह प्यार क्यों करते हो?"
उस आदमी ने जवाब दिया: देखो, जब मैं तुम्हारे शरीर को छूता हूँ, तो मुझे तुम्हारा प्यार महसूस होता है, मैं तुम्हारा दयालु हृदय देखता हूँ, मैं तुम्हारी सुंदर आकृति देखता हूँ, मुझे पता है कि यह एक आदर्श आकार है, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
तुम जिस तरह से दिखती हो, उससे नाराज़ मत हो, जिस तरह से मैं तुम्हें देखता हूँ, उसका आनंद लो और जिस तरह से मैं अभी भी तुम्हें महसूस करता हूँ।
मुझे तुम्हारी आत्मा की कामुकता और दयालुता से प्यार हो गया, न कि तुम्हारे शरीर की हलचल से, और आँसुओं के माध्यम से मैंने उसके चेहरे पर एक मुस्कान खींची, जो फिर से चमकती है।
जीवन और प्रेम में ऐसा ही होना चाहिए, क्योंकि आप अपनी आँखों से नहीं, बल्कि अपने दिल से प्यार करते हैं।
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महिला ने खुद को आईने में देखा और अपने आदमी से पूछा: क्या तुम अब भी मुझसे प्यार करते हो? आदमी ने जवाब दिया: ओह हाँ!
महिला: लेकिन क्या मेरा शरीर वैसा नहीं है जैसा जब हम पहली बार मिले थे?
नहीं, मैंने ध्यान नहीं दिया, आदमी ने जवाब दिया।
उसने अपना हाथ अपने पेट पर रखा और कहा, देखो मेरा पेट बहुत बड़ा और भारी हो गया है, मेरे पैर अब चिकने नहीं रहे। वह आँखों में आँसू लिए उसके पास आई और पूछा, "तुम मुझसे इस तरह प्यार क्यों करते हो?"
उस आदमी ने जवाब दिया: देखो, जब मैं तुम्हारे शरीर को छूता हूँ, तो मुझे तुम्हारा प्यार महसूस होता है, मैं तुम्हारा दयालु हृदय देखता हूँ, मैं तुम्हारी सुंदर आकृति देखता हूँ, मुझे पता है कि यह एक आदर्श आकार है, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
तुम जिस तरह से दिखती हो, उससे नाराज़ मत हो, जिस तरह से मैं तुम्हें देखता हूँ, उसका आनंद लो और जिस तरह से मैं अभी भी तुम्हें महसूस करता हूँ।
मुझे तुम्हारी आत्मा की कामुकता और दयालुता से प्यार हो गया, न कि तुम्हारे शरीर की हलचल से, और आँसुओं के माध्यम से मैंने उसके चेहरे पर एक मुस्कान खींची, जो फिर से चमकती है।
जीवन और प्रेम में ऐसा ही होना चाहिए, क्योंकि आप अपनी आँखों से नहीं, बल्कि अपने दिल से प्यार करते हैं।
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