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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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मैं सब कुछ ढूंढ लेती हूं
रुमाल, घड़ी,
मोज़े, किताबें,
पिन, सुई..
खोई हुई बालियां….
इधर उधर रखी गई चाबियां..
सब कुछ ...
हर एक चीज़
जो घर में किसी को नहीं मिली
मैंने ढूंढ ली ।
पर मैं ढूंढ ही नहीं पा रहीं हूं
ख़ुद को ...
कि मैं मिल जाऊं किसी रोज़
अपने घर के किसी कोने में
और कहूं अपने आप से
देखो !! अब मिल गई हो तुम
अब खोना नहीं ।।
अनजान महिला
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दो शरीर संभोग करें तो "काम"
दो मन संभोग करें तो "प्रेम"
दो दिल संभोग करें तो "ध्यान"
दो आत्माएं संभोग करें तो "समाधि"
दो पति-पत्नी संभोग करें तो "कर्तव्य"
दो प्रेमी संभोग करें तो "सुकून"
दो अनजान संभोग करें तो "वासना"
दो पड़ौसी संभोग करें तो "मजबूरी"
🌹 😘 ❤️
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फोरप्ले में किस का महत्व: कामसूत्र के अनुसार लवमेकिंग का स्लो प्रोसेस
फोरप्ले के दौरान किस, यानी चुम्बन, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कामसूत्र में लवमेकिंग को एक स्लो प्रोसेस बताया गया है, जिसमें हड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय, धीरे-धीरे प्यार जताना आवश्यक है।
किस करने का अर्थ सिर्फ लिप लॉक नहीं है। फोरप्ले का उद्देश्य दोनों पार्टनर की उत्तेजना को चरम तक पहुंचाना है, ताकि आप दोनों सेक्शुअल ऐक्ट को इंजॉय कर सकें।
किस करने के लिए कुछ सुझाव:
- पार्टनर के होंठों पर किस करें।
- गर्दन, कान के पीछे, चेस्ट पर और अन्य संवेदनशील स्थानों पर किस करें।
- पार्टनर की सांसें तेज होने तक किस करते रहें।
- धीरे-धीरे और संवेदनशीलता से किस करें।
फोरप्ले में किस का महत्व इस प्रकार है:
- दोनों पार्टनर के बीच निकटता बढ़ाता है।
- उत्तेजना को बढ़ाता है।
- सेक्शुअल ऐक्ट के लिए तैयार करता है।
- प्यार और स्नेह को व्यक्त करता है।
कामसूत्र के अनुसार, लवमेकिंग एक कला है, जिसमें धीरे-धीरे और संवेदनशीलता से प्यार जताना आवश्यक है। फोरप्ले में किस एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दोनों पार्टनर के बीच निकटता और उत्तेजना बढ़ाता है।❤️
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.. कभी कभी पीठ पर पड़ी
नाखूनों की खरोचें
गर्दन में पड़े दांतों के निशान
हेय दृष्टि के नहीं बल्कि
प्रेम के भी सबूत होते हैं...!
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शादी से पहले हर लौंडा यही सोचता है कि रोज लूँगा... ऐसे लूँगा... वैसे लूंगा लेकिन जब शादी हो जाती है तब सच्चाई पता चलती है कि बोलना आसान है... और करना मुश्किल... आधे टाइम तो घरवाली काम कर के थक जाती है फिर अगर वो करवाने को राजी भी हो तो जितना मन आपका होता है उतना उसका नही होता...कभी रिश्तेदार आ जाते है...और सबसे बड़ी दिक्कत जब सर्दी में कर रहे हों तब बड़ा ध्यान रखना पड़ता है कि कही घरवालो को चप-चप की आवाज ना सुनाई दे तो कुल मिलाकर बात ये है कि शादी के बाद वैसा नही होता जैसा आप हस्तक्रिया के वक़्त सोचते है..!
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*प्रेम और संभोग*
प्रेम और संभोग एक दूसरे के पूरक है। दोनो एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। दोनो जरूरी है।
जिंदगी में ऐसा कोई जोड़ा नही है जो जंदगी भर प्रेम करे संभोग न करे। न ही ऐसा कोई है जो जिंदगी भर संभोग करे प्रेम न करे। केवल एक से ही जिंदगी भर नही जिया जा सकता है।
जैसे प्रेम गलत नही है। वैसे संभोग भी गलत नही है।
लोगो की सोचने का तरीका गलत है
प्रेम से ही संभोग है...
संभोग से ही प्रेम है...
इसलिए जमकर प्यार करें और जमकर संभोग।
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सेक्स में शर्मीलेपन को कैसे दूर करें?
❣️"मधुर और विनम्र" मोड को बंद कर दें, सिवाय इसके कि जब यह किसी भूमिका निभाने का हिस्सा हो।
वासना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. अंतरंगता की इच्छा करना सामान्य बात है। और आप दोनों भूमिकाओं को जोड़ सकते हैं: एक तो आप मधुर और दयालु हैं, दूसरे आप या आप दुस्साहसी और घमंडी हैं। वैसे, एक लोकप्रिय प्रथा....
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यौन संबंध के बाद पुरुषों में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव
यौन संबंध मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण और स्वाभाविक हिस्सा है। यह केवल शारीरिक अनुभव नहीं है, बल्कि इसके साथ मानसिक और भावनात्मक बदलाव भी होते हैं। विशेषकर पुरुषों के लिए, यह अनुभव उनके शरीर और मन पर कई प्रभाव डाल सकता है। इस लेख में, हम उन बदलावों को विस्तार से समझेंगे जो पुरुषों में यौन संबंध के बाद देखे जा सकते हैं।
शारीरिक बदलाव
1. थकावट और ऊर्जा की कमी
यौन क्रिया के दौरान शरीर में बहुत सी ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कुछ पुरुषों को थकावट का अनुभव हो सकता है। यह सामान्य है और शरीर को आराम देने से ऊर्जा पुनः प्राप्त होती है।
2. हार्मोनल परिवर्तन
यौन संबंध के बाद पुरुषों के शरीर में ऑक्सिटोसिन, डोपामाइन और प्रोलेक्टिन जैसे हार्मोनों का स्तर बढ़ता है। यह हार्मोन मानसिक संतोष और आराम की भावना को बढ़ावा देते हैं।
3. त्वचा पर निखार
यौन क्रिया के दौरान रक्त संचार बढ़ने से त्वचा अधिक चमकदार और स्वस्थ दिखाई देती है।
मानसिक और भावनात्मक बदलाव
1. मानसिक शांति और संतोष
संभोग के बाद अधिकांश पुरुष मानसिक रूप से शांत और तनावमुक्त महसूस करते हैं। यह ऑक्सिटोसिन हार्मोन के कारण होता है, जिसे "लव हार्मोन" भी कहा जाता है।
2. नजदीकी का एहसास
यौन संबंध के बाद अपने साथी के प्रति लगाव और नजदीकी की भावना बढ़ जाती है। यह एक सकारात्मक अनुभव है जो संबंधों को मजबूत करता है।
3. अपराधबोध या पछतावा (कुछ मामलों में)
अगर संबंध भावनात्मक जुड़ाव के बिना हुआ हो या व्यक्ति नैतिक दुविधा में हो, तो यौन क्रिया के बाद अपराधबोध या पछतावे का अनुभव भी हो सकता है।
यौन संबंध के प्रभाव को कैसे समझें और संभालें?
खुद को समझें: यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है। अपने शरीर और भावनाओं को समय दें।
संबंधों में संवाद बढ़ाएं: अपने साथी के साथ खुलकर बातचीत करें। यह किसी भी संदेह या उलझन को सुलझाने में मदद करेगा।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: व्यायाम, अच्छा आहार, और पर्याप्त नींद यौन अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष
यौन संबंध का अनुभव शरीर और मन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। इसे समझना और स्वस्थ दृष्टिकोण से स्वीकार करना आपके संबंधों और जीवन में सकारात्मकता लाएगा। अपने अनुभवों को खुले मन से अपनाएं और जीवन के इस स्वाभाविक पहलू का आनंद लें।
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इस लेख का उद्देश्य वयस्कों को यौन स्वास्थ्य और इससे जुड़े बदलावों को समझने में मदद करना है। आपकी हर प्रतिक्रिया और अनुभव महत्वपूर्ण है।
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योनि बनाम महिलाएं!
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क्या सभी महिलाओं की योनि एक जैसी होती है,,,,
,,,,,
, नहीं, सभी महिलाओं की योनि एक जैसी नहीं होती है,
योनि का आकार, आकृति और रंग अलग होता है।
1... आकार,,,, योनि का आकार महिला से महिला में
भिन्न होता है। आमतौर से यह 7 से 10 सेंटीमीटर लंबी
और 4 से 6 सेंटीमीटर चौड़ी होती है।
2... आकृति,,, योनि की आकृति भी अलग होती है, कुछ
महिलाओं में यह अधिक गहरी और संकरी होती है, जबकि
अन्य में अधिक चौड़ी और छोटी होती है।
3... रंग,,,, योनि का रंग भी महिला से महिला में अलग होता है,
यह गुलाबी, बैंगनी, भूरे रंग की भी हो सकती हैं।
4... स्थिति,,,, योनि की स्थिति भी महिला से महिला में भिन्न
होती है।यह अधिक आगे और पीछे भी हो सकती है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि योनि आकार, आकृति
और रंग पूरी तरह से सामान्य होता है। और यह किसी भी
तरह से महिला के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता।
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लेकिन, ऐसा नहीं है कि ओरल सेक्स सिर्फ पॉर्न इंडस्ट्री की ही देन है। बल्कि अनेक रूपों में यह आपको कामसूत्र में भी देखने और पढ़ने को मिलता है। इसका मतलब यह है कि, ओरल सेक्स कोई नयी गतिविधि नहीं है। बल्कि पौराणिक काल से ही इसे संभोग का एक हिस्सा माना गया है।❤️🔥💋
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#ओरल_सेक्स ●●●●
ओरल सेक्स से महिला पार्टनर की योनि (Vagina) अधिक गीली हो जाती है, जिससे कि वह बिना दर्द और चुभन के सेक्स पूर्ण आनन्द लेती/लेता है।
#क्या है ओरल सेक्स और इसे किन-किन तरीकों से करके आप पार्टनर को चरमसुख तक पहुंचा सकते हैं.....?
आइए आगे जानते हैं........
सेक्स को लेकर अमूमन लोगों में यही धारणा रहती है कि यह सिर्फ इंटरकोर्स तक ही सीमित है। जबकि संपूर्ण सेक्स का मजा फोरप्ले (Forplay) के बिना संभव नहीं है। चूंकि फीमेल पार्टनर को उत्तेजित होने में काफी समय लगता है और बहुत बार जल्दबाजी में मेल पार्टनर स्खलित हो जाए तो सेक्स का आनंद अधूरा रह जाता है या यूं कहें कि फीमेल पार्टनर असंतुष्ट रह जाती है। इसलिए सेक्स और ऑर्गेज्म (चरमसुख) के लिए दोनों का उत्तेजित होना बेहद जरूरी है। और उत्तेजना के लिए जरूरी है- फोरप्ले। इस एक्ट में मेल और फीमेल पार्टनर एक-दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स को हाथों, पैरों और जीभ से सहलाकर, रगड़कर, छूकर और चूमकर उत्तेजित करते हैं। ओरल सेक्स (Oral Sex) भी इसी फोरप्ले का हिस्सा है।
#क्या है ओरल सेक्स और इसे किन-किन तरीकों से करके आप पार्टनर को चरमसुख तक पहुंचा सकते हैं....? आइए आगे जानते हैं...
#ओरल सेक्स का मतलब
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ओरल यानी 'मुंह-जबान' और सेक्स मतलब 'सहवास।' अर्थात मुंह-जीभ आदि से किया गया सेक्स। यह काफी आनंददायक होता है।
#महिलाओं को ओरल सेक्स करना पसंद ( कमेंट कर के जरूर बताएं । )
सेक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि सेक्स के पहले तमाम महिलाओं को ओरल सेक्स करना काफी पसंद होता है, लेकिन भारतीय समाज में शर्म-झिझक के चलते वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाती हैं। इससे उनके अतरंगी अरमान ठंडे बने रहते हैं। असंतुष्टि की यही वजह कई घरों में मनमुटाव और झगड़ों का कारण भी बनती है।
#ओरल सेक्स की बेहतर पोजीशन्स
जर्नल ऑफ सेक्स एंड मैरिटिकल थेरेपी की एक रिसर्च में बताया गया कि सत्तर फीसदी महिलाओं को ओरल सेक्स काफी अधिक पसंद होता है। जबकि 30 फीसदी को इसे करना अच्छा नहीं लगता। अगर आप भी अपने पार्टनर को ओरल सेक्स से चरमसुख तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले ओरल सेक्स की इन चार बेहतर पोजीशन्स को स्टेप बाई स्टेप जानना होगा।
#हिप्प-नितम्ब ( बट ) के नीचे ऊंची ( तकिया ) चीज लगाएं
फोरप्ले के दौरान पूरी तरह निर्वस्त्र होने पर आपकी कोशिश होनी चाहिए पार्टनर के प्राइवेट पार्ट तक आपका मुंह आसानी से पहुंच जाए। इसके लिए बेड पर या जमीन पर बिछे बिस्तर पर आपको तकिया का इस्तेमाल करना चाहिए। पार्टनर के नितम्बों यानी बट के नीचे तकिया रख दें और जब उसकी योनि ऊपर की ओर हो जाए तो अपनी जीभ से क्लिटोरिस को सहलाएं, इसके बाद खुद समझ जाएंगे इस पोजीशन का महत्व ।
#मुद्रा_69_की
ओरल सेक्स करने के लिए 69 की पोजीशन भी सबसे बेस्ट रहती है। इसमें मेल और फीमेल पार्टनर का मुंह एक-दूसरे के प्राइवेट पार्ट पर ही होता है। इस पोजीशन से दोनों के आनंद में पंख लग जाते हैं। खास बात यह है कि 69 की मुद्रा कोई आज की पोजीशन नहीं है, इसे तो सदियों पहले भी लोग आजमाते रहे हैं।
#बेड_और_जमीन_पर
इस पोजिशन में महिला को बेड, सोफा या कुर्सी पर होना चाहिए और पुरुष को जमीन पर। सिर्फ इस बात का ध्यान रखा जाए कि ऊंचाई इतनी हो कि पुरुष साथी की जीभ महिला योनि तक पहुंच सके। इस पोजिशन की खास बात यह है कि ओरल सेक्स करते हुए पुरुष साथी के कंधों पर महिला अपने पैरों से जोर डालती है और इसी जोर में जैसे-जैसे ताकत बढ़ती जाती है, उसी से समझ आने लगता कि दोनों को कितना आनंद मिल रहा है......।
युवाओं के साथ-साथ मैच्योर महिला पुरुषों में भी बढ़ रही है इसकी पसंद........
किसी भी सेक्शुअलिटी का कोई भी व्यक्ति कई प्रकार से सेक्स कर सकता है। जैसे- ओरल सेक्स, वजायनल सेक्स etc । यह पूरी तरह से दोनों पार्टनर की पसंद-नापसंद और शारीरिक क्षमताओं पर निर्भर करता है । दरअसल जैसा कि इसके नाम से ही साफ होता है, यह एक ओरल एक्टिविटी है। ओरल से मतलब है कि, इसमें आपके मुंह, जीभ, होंठ आदि का उपयोग किया जाता है। यह जानने के बाद हमारी समझ यह बात अच्छी तरह आने लगती है कि, ओरल सेक्स का मतलब एक पार्टनर का अपने मुंह, जीभ, होंठ आदि का उपयोग करके दूसरे पार्टनर के जननांगों, गुदा या संवेदनशील शारीरिक हिस्सों को उत्तेजित करना होता है। इसका अभ्यास मर्द और औरत दोनों ही समान रूप से कर सकते हैं। इसमें ओरल एक्टिविटी के साथ पार्टनर के पेनिस, वजायना के साथ प्ले किया जाता है । ओरल सेक्स को अगर पॉर्न इंडस्ट्री की देन कहा जाए, तो काफी हद गलत नहीं होगा। इसके प्रचार-प्रसार में इसका संपूर्ण योगदान है। लेकिन, इसका सबसे ज्यादा फायदा समलैंगिक कपल्स को लेस्बियन सेक्स और गे सेक्स में हुआ। उन्हें शारीरिक आनंद के लिए एक नए आयाम को एक्सप्लोर करने का मौका मिला। देखते ही देखते यह विषमलैंगिक कपल्स के बीच भी लोकप्रिय होने लगा।
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जीवन में ऐसी स्त्री का होना आवश्यक है जिसे देखते, छूते ही l तन बदन में उत्तेजना भर जाए। 🔥🫦 चित्र में दिखाइ युवती का हाथ लगते ही यह युवा निराशा से ऊपर जाकर मस्तराम बन जाता है💞 आप भी निराश हो गए हो तो ऐसी उत्तेजित युवती के स्पर्श संसर्ग से जीवन में नई ऊर्जा का संचार कीजिए
ऊर्जा वृद्धि के लिए उत्तेजना उत्पन्न होना आवशयक है। दैहिक रूप से स्पर्श, चुंबन, सम्भोग से उत्तेजन पाया जा सकता है किन्तु उसकी एक सीमा है। इसके अतरिक्त उत्तेजक लेखन पढ़ के या फिर उत्तेजक चित्र/चलचित्र भी विकल्प है। यह भी उत्तेजना को एक सीमा तक हे बढ़ा सकते हैं। मानव मस्तिष्क, जिसकी कप्लना शक्ति की कोई निर्धारित सीमा नहीं है, उत्तेजना बढ़ने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। कल्पना के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपनी उत्तेजना को जितना चाहे उतने ऊँचे स्तर तक ले जा सकता है। यदि दो व्यक्ति आपस में अपनी उत्तेजक कल्पनाओं को साझा करे तो और भी अधिक उत्तेजना उत्पन्न की जा सकती है। अपनी कल्पना में व्यक्ति बिना किसी सीमा के, बंधन के या अवरोध के कुछ भी उत्तेजक सोच सकता है, जो की वास्तविक जीवन में विभिन्न बंधनों के कारण संभव ना हो। ❤️🔥👄
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महिलाओं के 4 प्रकार 🔞
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[ यह पोस्ट जज करने के लिए नहीं है, बल्कि यह जोड़े की मदद करने के लिए आई है, उनके साथी के साथ अंतरंग संबंध].
जब आपके पास एक पत्नी है और आप उसे यौन रूप से संतुष्ट करना चाहते हैं, तो पहला कदम यह जानना है कि वह किस तरह की महिला है...
यौन सुख के मामले में आमतौर पर 4 प्रकार की महिलाएं होती हैं:
1. क्लिटोरिडियन महिला:
इस तरह की महिलाएं लिंग के प्रवेश से संभोग तक नहीं पहुँच पाती हैं। वे केवल संभोग तक पहुंचते हैं जब आप धीरे से क्लिटोरिस को स्पर्श करते हैं। इस प्रकार, स्त्री रोग संबंधी स्थिति को अपनाना आवश्यक होगा ताकि एक ही समय में आदमी अपने हाथ से क्लिटोरिस को घुसे और उत्तेजित कर सके।
2. महिला जी बिंदु:
जी-स्पॉट एक बहुत ही निर्लज्ज क्षेत्र है जो योनी के ऊपरी भाग में स्थित है, प्रवेश द्वार से सिर्फ कुछ सेंटीमीटर दूर है। G-spot औरत को क्लिटोरिस से ज्यादा आनंद देता है। बाबा कामपुरुष
3. योनि महिला:
वे क्लिटोरिस उत्तेजना का सामना नहीं कर सकते हैं। लिंग के योनि की दीवार से संपर्क करने के कारण इनका सुख होता है। इस प्रकार, आदमी को सीधे प्रवेश करने से बचना चाहिए। उसे अपनी 🍆 को सभी दिशाओं (बाएं-दाएं, सामने-पीछे) में इशारा करना पड़ता है ताकि लिंग योनि की दीवारों को छू जाए। जब लिंग लंबे समय तक योनी के अंदर रहता है तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
इनको घुटना बहुत पसंद है, लिंग को योनि के सभी कोनों को छूने देने का सवाल है। इस तरह की महिलाओं को बड़ी 🥒 पसंद है और वास्तव में तंग तंग लिंग के अंदर सूंघना पसंद है।
4. महिला गहरी जगह:
वे आनंद प्राप्त करते हैं यदि लिंग सभी तरह से छूता है (सर्विक्स से 2 सेमी) । इसलिए एक मजबूत प्रवेश। इस तरह की महिलाओं को बहुत लंबा पसंद है 🥒.
यदि आदमी शीर्ष पर है, तो वे एक मजबूत प्रवेश प्राप्त करने के लिए आदमी को मजबूत पकड़ते हैं।
हर घर में पुरुष को समझना चाहिए की उसकी पत्नी किस श्रेणी में है वरना घर की यौन विफलता की गारंटी है 💋🔥
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कुछ पुरुष होते हैं
जो अपने हृदय में बसी स्त्री के प्रति
अपने प्रेम को व्यक्त नही कर पाते,
पर वे प्रेम में उसके हर अंग, हर भाव पर एक किताब लिख सकते हैं,
कविताएं लिख सकते हैं, व्याख्या कर सकते हैं
उसकी हर एक अदाओं पर,
पर नही व्यक्त कर पाते तो उस स्त्री के प्रति
अपना अथाह प्रेम करते है.....
❤️❤️🔥💋
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पति के लिंग की सख्ती कम हो जाए और योनि का गीलापन बना रहे तो पराए मर्दों के प्रति आकर्षण हो ही जाता है।
अवैध रिश्ते तो हर दौर में, हर जाति में, हर धर्म में और हर देश में रहे हैं।
किसी को मालूम हो गया तो बदनामी नहीं मालूम तो पतिव्रता नारी होने का ढोंग रचती लाखों स्त्रिया घूम रही हैं।💋🔥
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स्त्री की अंगड़ाई बयान करती है की उसे पुरूष की जरुरत है, पुरूष के ऊपर चढ़ते ही उसकी सिसकियां बता देती है की स्त्री पुरूष के नीचे कितना आनंद ले रही है पुरूष जब अपना नंगा बदन उस के सुलगते बदन से रगड़ता है तो नारी मानो सातवे आसमान में जा चुकी होती है.
जब औरत ठोकते वक्त बेशर्म हो जाए और दिल खोलकर चिल्लाने लग जाए तब अपने आप को मर्द समझो वरना रात तो कोई भी गुजार सकता है
औरत अपना तन बदन सिर्फ असली मर्द को ही देना चाहती है जो उसको परमानंद दे
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प्रेम चाहने वाली स्त्री सारी शिकायतें करके, उन्हें अपने जूड़े में बाँध देती है, और छोड़ती है दो लटें
प्रेम और आलिंगन की
वो चाहती है, आप उँगलियों से सँवारें उनकी यह दो लटें, और सारे गिले-शिकवे
गजरे में फँसा कर दूर कर दें !!!
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स्तन महिलावाद की प्रतीक हैं और उनकी महिलाओं में आत्मविश्वास एवं स्वाभाविकता को प्रदर्शित करते हैं। यह महिलाओं को महसूस कराते हैं कि वे स्त्रीत्व की प्रतिष्ठा के धनी हैं और उनकी महिलावादी पहचान को सुदृढ़ करते हैं।
स्तनों की आकर्षकता और आकार महिलाओं की सेक्सुअल आकर्षण शक्ति को बढ़ाती है। यह महिलाओं को और अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाता है और उन्हें स्वाभाविक रूप से अपनी शक्ति और सुंदरता का अनुभव करने की क्षमता प्रदान करता है।
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स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...
ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...
अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी...
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी...
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी...
अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी ...
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है...
यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो संतुष्ट नहीं हो सकती...
ये उसका स्वभाव है...
वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही न हो, बन ही न सकता हो...
ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ, इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ...
कपड़े का गट्ठर लगा देती है...
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया, तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...
इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है औरत के अंदर ...
एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है
वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी...
रंग उतर जाएगा, चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी....बस यही खूबी स्त्री को विशिष्ट बनाती है....🥰
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