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आज का चाँद 19
माह 2 सफ़र
हिजरी 1446
(25/08/24)
*उर्स*
हज़रत सैयद अली हिजवेरी दाता गंजबख्श (पकिस्तान)
सैयद गुलामअली बापू (सावरकुण्डला)
सैयद रेहमअली छुमछुम शाह (उज्जैन)
*विसाल*
सैयद अहमद (कल्पी शरीफ)
*नॉट*
एक बार सूरए फातिहा, 3 बार कुल्हुवल्लाह, अव्वल व आखिर दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम عَلَيْهِ السَّلاَم ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र कर दीजिये।
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*वुज़ु और साइन्स* #02/15
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*_वुज़ु और हाइ ब्लड प्रेशर_*
एक हार्ट स्पेशालिस्ट का बड़े ऐतिमाद के साथ कहना है : हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ को वुज़ु करवाओ फिर उस का ब्लड प्रेशर चेक करो लाज़िमन कम होगा।
एक मुसलमान माहिरे नफ्सियात का कौल है : नफ्सियात अमराज़ का बेहतरीन इलाज वुज़ु है।
मग़रिबी माहिरीन नफ्सियात मरीज़ों को वुज़ु की तरह रोज़ाना कई बार बदन पर पानी लगवाते है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, शफा 60*
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*ज़मीन में चश्मे कैसे जारी हुए ?*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
एक रिवायत में है कि जब अल्लाह पाक ने हज़रते आदम عليه السلام को पैदा फरमाने का इरादा किया तो ज़मीन से फ़रमाया : मैं तुझ से एक मख़्लूक पैदा फ़रमाने लगा हूं तो जिस ने मेरी फ़रमां बरदारी की उसे मैं जन्नत में दाखिल करूंगा और जिस ने मेरी ना फ़रमानी की उसे मैं जहन्नम में डाल दूंगा तो ज़मीन ने अर्ज़ किया : ऐ मेरे रब ! क्या तू मुझ से ऐसी मलूक को पैदा फ़रमाएगा जो जहन्नम में जाएगी तो अल्लाह पाक ने इर्शाद फ़रमाया : हां, इस पर ज़मीन इस क़दर रोई कि चश्मे जारी हो गए और येह क़ियामत तक जारी रहेंगे।
*मय्यत को खुश्बू क्यूं लगाते हैं ?*
अल्लाह पाक की बारगाह में ज़मीन ने अर्ज़ की : या अल्लाह पाक ! मुझ से मिट्टी उठाने से मेरी मिट्टी कम हो गई है, अल्लाह पाक ने इर्शाद फ़रमाया : घबरा मत, (जब कोई इन्सान) तुझ में वापस आएगा तो पहले से ज़ियादा हसीन व खुश्बूदार होगा येही वजह है कि मुर्दे को इत्र व मुश्क से खुश्बूदार किया जाता है।
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*वुज़ु और साइन्स* #01/15
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*_वुज़ु की हिकमते सुनने के सबब कबूले इस्लाम_*
एक साहिब का बयान है : मेने मेल्जियम में यूनिवर्सिटी के एक गैर मुस्लिम स्टूडंट को इस्लाम की दा'वत दी। उसने सुवाल किया : वुज़ु में क्या क्या साइन्सि हिकमते है ? में ला जवाब हो गया।
उसको एक आलिम के पास ले गया लेकिन उनको भी इसकी मालूमात न थी। यहाँ तक की साइन्सि मालूमात रखने वाले एक शख्स ने उसको वुज़ु की काफी खुबिया बताई मगर गर्दन के मसह की हिक्मत बताने से वो भी क़ासिर रहा।
वो गैर मुस्लिम नौजवान चला गया। कुछ अरसे के बाद आया और कहने लगा : हमारे प्रोफेसर ने दौराने लेक्चर बताया : अगर गर्दन की पुशत और अतराफ़ पर रोज़ाना पानी के चन्द कतरे लगा दिये जाए तो रीढ़ की हड्डी और हराम मगज की खराबी से पैदा होने वाले अमराज़ से तहफ्फुज हो जाता है। ये सुन कर वुज़ु में गर्दन के मसह की हक़ीक़त मेरी समज में आ गई लिहाज़ा में मुसलमान होना चाहता हु और वो मुसलमान हो गया।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, शफा 58-59*
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आज का चाँद 14
माह 2 सफ़र
हिजरी 1446
(20/08/2024)
*विसाल*
हज़रत तनवीर अशरफ (किछौछा शरीफ)
*संदल*
ग्यारह शहीद, हज़रत गंजशहीद बाबा (पाटण)
जहीरुद्दीन उर्फ़ छोटेसाबपीर (पेटलाद)
सैयद मोह्युद्दीन अशरफ उर्फ़ अच्छेमियां (कटक)
हज़रत यासीन डंडेवाले बावा (धुलिया)
हज़रत दादा सैयद (गोब्लेज)
हज़रत लघापीर (मेटोडा, राजकोट)
*नॉट*
एक बार सूरए फातिहा, 3 बार कुल्हुवल्लाह, अव्वल व आखिर दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम عَلَيْهِ السَّلاَم ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र कर दीजिये।
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*हज़रते आदम عليه السلام को आदम क्यूं कहते हैं ?*
हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास ने इर्शाद फ़रमाया : बेशक अल्लाह पाक ने आदम को जुमुआ के दिन अस्र के बाद पैदा फ़रमाया और आप को अदीमुल अर्द यानी ज़ाहिरी ज़मीन की एक मुठ्ठी मिट्टी से पैदा फ़रमाया इस लिये आप को आदम कहते हैं। और आप की औलाद को आदमी या'नी आदम वाला कहते हैं।
*हज़रते आदम عليه السلام की कुन्यत*
प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो ! हज़रते आदम عليه السلام चूंकि तमाम इन्सानों के वालिद हैं इस लिये आप की एक कुन्यत अबुल बशर या'नी तमाम इन्सानों के वालिद है, आपकी एक कुन्यत अबू मुहम्मद भी है और जन्नत में भी येह कुन्यत आप की होगी जैसा हदीसे पाक में है कि जन्नत में किसी की कुन्यत नहीं होगी सिवाए हज़रते आदम के, और आप की इज्जतो ताज़ीम के लिये जन्नत में कुन्यत अबू मुहम्मद होगी।
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*बे वुज़ू क़ुरआने मजीद को कही से भी नहीं छू सकते*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
बे वुज़ू आयत को छूना तो खुद ही हराम है अगर्चे आयत किसी और किताब में लिखी हो, मगर क़ुरआने मजीद के सादा हाशिया बल्कि पुठ्ठे बल्कि चिली (यानि जो कपड़ा या चमड़ा गत्ते के साथ चिपका या सिला हो उस) का भी छूना हराम है.
हा जुज़दान में हो तो जुज़दान को हाथ लगा सकते है।
बे वुज़ू अपने सीने से भी मुसहफ शरीफ को मस नहीं कर सकता। बे वुज़ू की गरदन पर लंबी चादर का एक कपड़ा पड़ा हुवा है और वो उसके दूसरे कोने को हाथ पर रख कर मुसहफ शरीफ छूना चाहे और अगर चादर इतनी लंबी है की उस शख्स के उठने बैठने से दूसरे गोशे (यानि कोने) तक हरकत न पहोचेगी तो जाइज़ है वरना नहीं।
*✍🏽फतावा राज़वीय्या मुखर्रजा, 4/724-725*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 37*
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आज का चाँद 13
माह 2 सफ़र
हिजरी 1446
(19/08/2024)
*विसाल*
हज़रत इमाम नसई अबू अब्दुर्रहमान बिन शौऐब
*उर्स*
सैयद सालारशाह बावा (गोब्लेज)
हज़रत फैज़ुशहीद (महमूदाबाद)
हज़रत अब्दुल क़ादिर शाह (सूरत)
*संदल*
दादा कयामुद्दीन चिश्ती (एकलबारा, पादरा)
*नॉट*
एक बार सूरए फातिहा, 3 बार कुल्हुवल्लाह, अव्वल व आखिर दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम عَلَيْهِ السَّلاَم ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र कर दीजिये।
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*हज़रते आदम عليه السلام की पैदाइश*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो ! अल्लाह पाक ने हज़रते आदम को बिग़ैर मां बाप के मिट्टी से पैदा फ़रमाया है, आप की पैदाइश का वाक़िआ कुछ यूं है कि अल्लाह पाक ने हज़रते जिब्राईल عليه السلام को हुक्म इर्शाद फ़रमाया कि ज़मीन से एक मुठ्ठी मिट्टी उठा कर लाओ। हज़रते जिब्राईल ने ज़मीन से मिट्टी उठानी चाही तो ज़मीन ने इस का सबब पूछा। आप ने सारा वाकिआ बयान किया, इस पर ज़मीन कहने लगी : मैं खुदा की पनाह चाहती हूं इस बात से कि मुझ से कुछ कम किया जाए या मेरी कोई चीज़ खराब की जाए, हज़रते जिब्रील मिट्टी लिये बिगैर वापस लौट आए और अर्ज़ की : ऐ मेरे रब ! ज़मीन ने तेरी पनाह मांगी तो मैं तेरे नामे पाक और तेरी इज्ज़त का अदब करते हुए वापस आ गया और उसे पनाह दे दी। फिर अल्लाह पाक ने हज़रते मीकाईल عليه السلام को भेजा तो उन्हों ने भी उसे पनाह दे दी और बारगाहे इलाही में वोही अर्ज़ की जो हज़रते जिब्रील ने की थी। फिर अल्लाह पाक ने हज़रते इसराफील عليه السلام को भेजा को तो वोह भी इसी तरह वापस आ गए, फिर हज़रते इज़राइल عليه السلام को भेजा, जब ज़मीन ने उन से पनाह मांगी तो इन्हों ने फ़रमाया : मैं इस बात से अल्लाह पाक की पनाह मांगता हूं कि उस के हुक्म पर अमल किये बिगैर वापस चला जाऊं। चुनान्चे उन्हों ने ज़मीन से मिट्टी ले ली तो अल्लाह पाक ने रूह क़ब्ज़ करने का काम भी इन्ही के ज़िम्मे लगाया कि तुम ने ही इस मिट्टी को ज़मीन से अलग किया है, तुम ही इसको मिलना और इन का नाम मलकुल मौत या'नी मौत का फ़िरिश्ता रखा गया।
✍️तफ़्सीरे नईमी, पारह : 1, अल बक़रह, तहतल आयह : 30,
*कितनी क़िस्म की मिट्टियां थीं*
अल्लाह पाक के प्यारे प्यारे आखिरी नबी ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह पाक ने आदम को एक मुठ्ठी से पैदा किया जो तमाम रूए ज़मीन से ली गई लिहाज़ा औलादे आदम ज़मीन के अन्दाज़े पर आई उन में सुर्ख सफेद और काले और दरमियाने और नरम व सख्त, पलीद व पाक है।
बाज़ हज़रात ने फरमाया की हज़रते आदम की मिट्टी में 60 किस्म के रंग शामिल थे वो तमाम आप की औलाद में पाए जाते है।
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*वुज़ूए अम्बियाए किराम और नींद मुबारक*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
अम्बिया अलैहिमुस्सलाम का वुज़ू सोने से नहीं जाता।
अम्बिया की आँखे सोती है दिल कभी नहीं सोता।
बाज़ वुज़ू तोड़ने वाली चीज़े अम्बिया के लिये यू वुज़ू टूटने का सबब नहीं, की इन का वुक़ूअ (यानि वाक़ेअ होना) ही उन से मुहाल (यानि ना मुम्किन) है जेसे जुनून (यानि पागल पन) या नमाज़ में कहकहा।
गशी (यानि बेहोशी) भी अम्बिया के जिस्मे ज़ाहिरे पर तारी हो सकती है, दिल मुबारक इस हालत में भी बेदार व खबरदार रहता है।
*✍🏽फतावा राज़वीय्या मुखर्रजा 4/740*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 29-30*
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*सब से पहले इन्सान और पहले रसूल*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो ! अल्लाह करीम ने ज़मीनो आस्मान बनाने से पहले फ़िरिश्तों को पैदा फ़रमाया फिर जिन्नात को आग के शो'ले से पैदा किया गया और इन के बाद इन्सान को पैदा किया गया। सब से पहले इन्सान अल्लाह पाक के प्यारे प्यारे नबी हज़रते आदम عليه السلام हैं और आप पहले रसूल भी हैं जो शरीअत ले कर अपनी औलाद की जानिब भेजे गए। हज़रते नूह عليه السلام अव्वलुर्रसुल इस वजह से कहा जाता है कि आप को कुफ़्रो शिर्क फैलने के बाद सब से पहले मख्लूक की हिदायत के लिये भेजे गए। (नुज्हतुल कारी, 5/52 मफ़्हूमन)
हज़रते आदम عليه السلام पहले ख़लीफ़तुल्लाह भी हैं जैसा कि पारह 1, सूरतुल बक़रह आयत नम्बर 30 में इर्शाद होता है : _और याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़िरिश्तों से फ़रमाया मैं ज़मीन में अपना नाइब बनाने वाला हूं।_
इस आयत की तफ़्सीर में है : खलीफा उसे कहते हैं जो अहकामात जारी करने और दीगर इख़्तियारात में अस्ल का नाइब होता है। अगर्चे तमाम अम्बिया अल्लाह पाक के खलीफा हैं लेकिन यहां ख़लीफ़ा से हज़रते आदम मुराद हैं और फ़िरिश्तों को हज़रते आदम की खिलाफत की ख़बर इस लिये दी गई कि वोह इन ख़लीफ़ा बनाए जाने की हिक्मत मालूम करें और उन पर खलीफा की अज़मतो शान ज़ाहिर हो कि उन को पैदाइश से पहले ही खलीफा का लक़ब अता कर दिया गया है और आस्मान वालों को उन की पैदाइश की खुश खबरी दी गई। (तफ़सीरे सिरातुल जिनान, पारह : 1, अल बक़रह, तहतल आयह : 30, 1/96)
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*सोने से वुज़ू टूटने न टूटने का बयान* #02/02
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*_सोने के वो 10 अंदाज़ जिन से वुज़ू नहीं टूटता_*
★ इस तरह बैठना की दोनों सुरीन ज़मीन पर हो और दोनों पाऊ एक तरफ फैलाए हो (कुर्सी, रेल और बस की सिट पर बैठने का भी यही हुक्म है)
★ इस तरह बैठना के दोनों सुरीन ज़मीन पर हो और पिंडलियों को दोनों हाथो के हल्के में ले ले ख़्वाह हाथ ज़मीन वगैरा पर या सर घुटनो पर रख ले।
★ चार जानू यानि पालती (चोकड़ी) मार कर बैठे ख़्वाह ज़मीन या तख्त या चारपाई वग़ैरा पर हो।
★ दो जानू सीधा बैठा हो।
★ घोड़े या खच्चर वगैरा पर जिन रख कर सुवार हो।
★ नंगी पीठ पर सुवार हो मगर जानवर चढ़ाई पर चढ़ रहा हो या रास्ता हमवार हो।
★ तकये से टेक लगा कर इस तरह बैठा हो की सुरीन जमे हुए हो अगर्चे तकया हटाने से ये गिर पड़े।
★ खड़ा हो।
★ रुकूअ की हालत में हो।
★ सुन्नत के मुताबिक जिस तरह मर्द सज्दा करता है उस तरह सज्दा करके पेट रानो और बाज़ू पहलूओ से जुदा हो।
ये सूरते नमाज़ में वाक़ेअ हो या इलावा नमाज़, वुज़ू नहीं टूटेगा और नमाज़ भी फासिद् न होगी अगर्चे कसदन सोए, अलबत्ता जो रुक्न बिलकुल सोते हुए अदा किया उस का इआदा (दोबारा अदा करना) ज़रूरी है और जागते हुए शुरुअ किया फिर नींद आ गई तो जो हिस्सा जागते अदा किया वो अदा हो गया बाकि अदा करना होगा।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 28*
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आज का चाँद 10
माह 2 सफ़र
हिजरी 1446
(16 Aug, 2024)
*वफ़ात*
सैयदा बीबी सकीना رضی ﷲ تعالٰی عنها
*विसाल*
हज़रत वाहिदअली शाह (कराची)
हज़रत मीर सैयद अहमद (काल्पी)
हाजी मन्सूरशाह दुर्वेश (जुनी तरसाली, भालोद)
*उर्स*
हज़रत ख्वाजा अब्दुर्रहमान चिश्ती (ओलपाड, सूरत)
चिश्ती अम्मा साहेब (छोटा उदेपुर)
सय्यद मुन्शी मुहम्मद इब्राहिम कादरी (खाटू शरीफ) राजस्थान
*संदल*
हज़रत शहीद हाजी पीर (रूपाल, धोलका)
*नॉट*
एक बार सूरए फातिहा, 3 बार कुल्हुवल्लाह, अव्वल व आखिर दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम عَلَيْهِ السَّلاَم ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र कर दीजिये।
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*ज़ोहद का कमाल दरजा*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
माल के मुआमले में ज़ोहद का कमाल दरजा येह है कि बन्दे के नज़्दीक माल और पानी बराबर हों, ज़ाहिर है कि कसीर पानी का इन्सान के करीब होना उसे नुक्सान नहीं देता जैसा कि साहिले समुन्दर पर रहने वाला शख्स, और न ही पानी का कम होना ज़रर देता है जब कि ब क़दरे ज़रूरत पानी दस्त याब हो। पानी एक ऐसी चीज़ है जिस की इन्सान को ज़रूरत होती है, इन्सान का दिल न तो कसीर पानी से नफरत करता है और न ही राहे फ़िरार इख़्तियार करता है बल्कि वोह कहता है कि मैं इस से अपनी हाजत के मुताबिक़ पियूंगा, अल्लाह पाक के बन्दों को पिलाऊंगा और इस में बुख़्ल नहीं करूंगा। इन्सान के नज़दीक माल की हालत भी येही होनी चाहिये कि इस के होने न होने से इसे कोई फ़र्क़ न पड़े। जब बन्दे को अल्लाह पाक की मारिफ़त हासिल हो जाए और तवक्कुल की दौलत नसीब हो जाए तो फिर उसे इस बात पर कामिल यक़ीन हो जाता है कि वोह जब तक ज़िन्दा है उसे ब क़दरे ज़रूरत रोज़ी मिलती रहेगी जैसा कि पानी मिलता है।
*मुकम्मल...*
*✍️दुन्या की महब्बत, 18
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, गर होजाए यक़ीन के.....
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*सोने से वुज़ु टूटने न टूटने का बयान* #01/02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*_नींद से वुज़ू टूटने की दो शर्ते है_*
दोनों सुरीन अच्छि तरह जमे हुए न हो, ऐसी हालत पर सोया जो ग़ाफ़िल हो कर सोने में रुकावट न हो।
जब ये दोनों शर्ते जमा हो यानि सुरीन भी अच्छी तरह जमे हुए न हो नीज़ ऐसी हालत में सोया हो जो ग़ाफ़िल हो कर सोने में रुकावट न हो तो ऐसी नींद से वुज़ू टूट जाता है।
अगर एक शर्त पाइ जाए और दूसरी न पाई जाए तो वुज़ू नहीं टूटेगा।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 27-28*
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आज का चाँद 9
माह 2 सफ़र
हिजरी 1446
(15 Aug, 2024)
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*ज़ोहद से अफ़ज़ल हालत*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
ज़ोहद से भी अफ़्ज़ल हालत यह है कि बन्दे के नज़दीक माल का होना और न होना बराबर हो। माल मिलने पर न तो खुश हो और न ही तक्लीफ़ महसूस करे जब कि न मिलने पर भी येही हालत हो बल्कि इस की हालत ऐसी हो जाए जैसी उम्मुल मुअमिनीन हज़रते बीबी आइशा सिद्दीका तय्यबा ताहिरा की थी कि किसी ने आप की खिदमत में एक लाख दिरहम का अतिय्या नज़्र किया तो आप ने क़बूल फ़रमा लिया और उसी दिन तक्सीम फ़रमा दिया। खादिमा ने अर्ज़ की : आपने आज जो माल तक्सीम फ़रमाया अगर उस में से एक दिरहम का गोश्त खरीद लेतीं तो हम उस से रोजा इफ्तार करते। फ़रमाया : अगर तुम याद दिला देतीं तो मैं ऐसा ही करती।
जिस शख्स की कैफ़िय्यत ऐसी हो, अगर पूरी दुन्या भी उस के क़ब्ज़े में हो तो उसे कोई नुक्सान नहीं हो सकता क्यूं कि वोह माल को अपने क़ब्ज़े में नहीं बल्कि अल्लाह पाक के खजाने में समझता है और उस के नज़्दीक इस बात में कोई फर्क नहीं होता कि माल उस के क़ब्ज़े में है या किसी और के, ऐसी हालत वाले शख्स का नाम “मुस्तग्नी" रखना चाहिये क्यूंकि वोह माल के होने न होने दोनों से बे परवा है।
*✍️दुन्या की महब्बत, 17
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*वुज़ु में शक आने के 5 अहकाम*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
अगर दौराने वुज़ु किसी उज़्व के धोने में शक वाक़ेअ हो और अगर ये ज़िन्दगी का पहला वाक़ेअ है तो उसको धो लीजिये। और अगर अक्सर शक पड़ा करता है तो इसकी तरफ तवज्जोह न दीजिये। इसी तरह अगर बादे वुज़ु भी शक पड़े तो इसका कुछ ख़याल मत कीजिये।
आप बा वुज़ु थे अब शक आने लगा के पता नहीं वुज़ु है या नहीं, ऐसी सूरत में आप बा वुज़ु है, क्यू की सिर्फ शक से वुज़ु नहीं टूटता। वस्वसे की सूरत में एहतियातन वुज़ु करना एहतियात नहीं इत्तिबाए शैतान है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी-1, स. 311*
यक़ीनन आप उस वक़्त तक बा वुज़ु है जब तक वुज़ु टूटने का ऐसा यकीन न हो जाए के कसम खा सके।
कोई उज़्व धोने से रह गया है मगर ये याद नहीं के कौन सा उज़्व था तो बाया (उल्टा) पाउ धो लीजिये।
*✍🏽दुर्रे मुख्तार, जी-1, स. 13*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 27*
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