BodhisattvaPCS (BPCS)
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मैक्सिमम बच्चें बिहार स्पेशल पढ़ते वक्त करते हैं, ये ग़लतियाँ #bpsc #72ndbpsc
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पिगूवियन टैक्स
एक सरकारी शुल्क है, जो उन बाजार गतिविधियों पर लगाया जाता है जिनसे नकारात्मक बाह्यताएँ उत्पन्न होती हैं—यानी वे लागतें जो समाज या उन तीसरे पक्षों पर थोपी जाती हैं जो मूल लेन-देन का हिस्सा नहीं होते। ब्रिटिश अर्थशास्त्री आर्थर सी. पिगू के नाम पर रखा गया यह टैक्स, जिम्मेदार पक्ष से उनके कार्यों की वास्तविक सामाजिक लागत वसूलने का मुख्य उद्देश्य है।
यह काम किस प्रकार करता है-
लागतों को आंतरिक बनाना: इसमें वस्तु या सेवा की निजी कीमत में छिपी हुई सामाजिक लागत (जैसे प्रदूषण से होने वाला नुकसान) को सीधे जोड़ दिया जाता है।
नुकसान को कम करना: इससे कीमत बढ़ जाती है, जिससे हानिकारक वस्तु का उपभोग या उत्पादन एक स्वस्थ और अधिक कुशल स्तर तक कम हो जाता है।
बाजार सुधार: यह उन बाजार विफलताओं को ठीक करता है जहां मुक्त विनिमय बाहरी नुकसान की अनदेखी करता है।
सामान्य उदाहरण
कार्बन टैक्स: ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए जीवाश्म ईंधन जलाने पर लगाया जाने वाला शुल्क।
पाप कर(Sin Taxes): सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए तंबाकू और शराब पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क।
प्लास्टिक बैग शुल्क: कचरा और गंदगी को कम करने के लिए दुकानों पर लगाए जाने वाले छोटे शुल्क।
