✨ हमारा प्यारा इस्लाम ✨
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अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह मसलके आला हज़रत सलामत रहे 🥰 👉 मोमिन पर नमाज़ 5 वक़्त का फर्ज़ है प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैँ इल्म हासिल करना हर मुसलमान आक़ील बालिग़ मर्द व औरत पर फर्ज़ है। इब्ने माजा 224
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*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹*
*💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚*
*ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है और इससे भी खूबसूरत वोह लोग हैं जो इसकी खूबसूरती में अपने हिस्से के रंग भरते हैं, आप भी लोगों के लिए बिना किसी मतलब के आसानीयां पैदा करने की कोशिश करें.!*
प्यारे नबी ﷺ ने फ़रमाया___ जो किसी मुसलमान से दुनियां की तकलीफ़ो में से एक तकलीफ़ दूर कर दे अल्लाह उसकी क़यामत के दिन की तकलीफ़ों में से एक तकलीफ़ दूर फ़रमाएगा, जो किसी तंगदस्त (परेशाने हाल) पर दुनियां में आसानी करे अल्लाह दुनियां व आख़िरत में उस पर आसानी फ़रमाएगा, जो दुनियां में किसी मुसलमान की पर्दा पोशी फ़रमाएगा अल्लाह उसकी दुनियां व आख़िरत में पर्दा पोशी फ़रमाएगा और अल्लाह बन्दे की मदद में रहता है जब तक बन्दा अपने भाई की मदद में रहता है।
फ़ैज़ाने मेराज, सफह न. 71
✍️ मुस्तफ़वी
Share 📮⚠️ आ़लिमाओं को बदनाम करने वाली औ़रतें ⚠️
लड़कियों को 'आ़लिमा' बनाने के बहाने आज़ाद छोड़ा गया और इन्हें फ़ोन लेकर दिया गया, लेकिन तरबियत पर ध्यान नहीं दिया, जिसका जो नतीजा निकला, वो सबके सामने है, के आज जिन्होंने इनसे शादी की, वो पछता रहे हैं और रो रहे हैं.
अगर सच पूछें, तो मैं ख़ुद भी नाम निहाद आ़लिमाओं से शादी के नाम से कांप जाता हूं. (मआ़ज़ अल्लाह) इसलिए नहीं के ये आ़लिमा हैं, बल्कि इसलिए के इनमें अक्सर आ़लिमाओं को बदनाम करने वाली हैं, मगर वाक़िफ़ बुनियादी मसाइल से भी नहीं।
फिर इस पर त़ुर्रा ये के मदरसे जाने के बहाने इन्हें ख़ूब आवारगी का मौक़अ़् मिला, जिससे इन्होंने पूरे दीनी त़ब्क़े की इमेज़ को गंदा कर दिया।
इसीलिए तो ख़लीफ़ए आ'ला ह़ज़रत मुह़म्मद अ़ब्दुल अ़लीम मेरठी अ़लैहिर्रह़मा ने फ़रमाया था:
आज और लोगों को ख़बर हो, या न हो, मगर हम जानते हैं, वाक़िआ़त हमारे सामने हैं के लड़कियों के मदरसों में क्या हो रहा है, हमें ये मा'लूम है के घर की चार दीवारी में बंद होकर, कोठरियों में छुप-छुपकर, किस त़रह़ नस्ले इंसानी का ख़ून बहाया जा रहा है.
📙 [बहारे शबाब, सफ़ह़ा नंबर 76-77, नाशिर: जमइ़य्यते इशाअ़ते अहले सुन्नत]
मैंने अब तक इस टॉपिक पर न लिखना ही बेहतर समझा था, मगर मजबूरन लिखना पड़ा, के इनकी वजह से उन आ़लिमाओं और परहेज़गार लड़कियों की इमेज़ ख़राब हो रही है, जो ह़क़ीक़ी इ़ल्म और ख़ौफ़े ख़ुदा रखने वाली हैं।
जिनको आ़लिमा से शादी करने का शौक़ है उनके लिए बराए हमदर्दी मशवरा है के आ़लिमा से शादी ज़रूर करें के ये बहुत अच्छी बात है, मगर देख लें के जिससे आप शादी कर रहे हैं, वो आ़लिमा है भी, या नहीं, कहीं बा'द में रोते फिरो।
इससे कोई हरगिज़ ये समझने की कोशिश न करे के हम आ़लिमाओं के ख़िलाफ़ लिख रहे हैं, या वो ऐसी हैं, बल्कि हम उनके ख़िलाफ़ लिख रहे हैं, जिन पर कहीं से कहीं तक आ़लिमा की ता'रीफ़ सादिक़ नहीं आती, और नाम के लिए सनद लेकर आ़लिमाओं को बदनाम करने का काम कर रही हैं।
अल्लाह (ﷻ) हमारे ह़ाल पर रह़म फ़रमाए।
______
मुह़म्मद ज़ैद रज़ा क़ादिरी
04/06/2025
*आओ अपना मुहाश्बा करें___*
> ह़या (शर्म) और ईमान ?
अल्लाह के रसूल अलैहिस्सलाम फरमाते हैँ___ ह़या ईमान का हिस्सा है ।
कंज़ुल उम्माल, ह़दीस न. 53
अल्लाह करीम क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है के___ इंसान इंसानों से तो ह़या करता है लेकिन अल्लाह से नहीं, जबकि अल्लाह दिल के इरादे और हर काम को जानता है।
सूरह 4, आयत 108
ह़ज़रते सय्यिदुना अबू बक्र सिद्दीक़ रदिअल्लाहु तआ़ला अ़न्हु ने लोगों को खुतबा देते हुवे इरशाद फ़रमाया___ ऐ मुसलमानो ! अल्लाह से ह़या करो, उस जात की क़सम ! जिस के कब्जए कुदरत में मेरी जान है जब मैं खुली फ़ज़ा में क़ज़ाए हाजत के लिये जाता हूं तो अल्लाह से ह़या की वजह से अपने ऊपर कपड़ा डाल लेता हूं।
रह़मत भरी हिक़ायत, 27
नबी ए रह़मत ﷺ ने फ़रमाया___ जब कोई जन्नती शख्स फ़ौत हो जाता है, तो _अल्लाह ह़या फ़रमाता है_ कि उन लोगो को अ़ज़ाब दे जो उस का जनाज़ा ले कर चले और जो इसके पीछे चले और जिन्होंने इसकी नमाज़े जनाज़ा अदा की।
नमाज़ के अह़काम, 270
अल्लाह अ़ज़्ज व जल्ल इरशाद फ़रमाता है___ ऐ इब्ने आदम ! तेरा दीन उस वक्त तक दुरुस्त नहीं हो सकता जब तक तेरी ज़बान सीधी न हो और तेरी जुबान तब तक सीधी नहीं हो सकती जब तक तू अपने रब से ह़या न करे।
नसीहतों के मदनी फूल व वसीलए अहादीसे रसूल, 30
इमाम जलालुद्दीन सुयूती अ़लैहिर्रहमा लिखते हैं कि___ गाने बाजे से अपने आप को बचाओ क्योंकि ये ह़या को कम करते हैं, शह़वत को बढ़ाते हैं और गै़रत को बरबाद करते हैं और ये शराब के बराबर है, इस में नशे की सी तासीर है।
गाना बजाना बंद करो तुम मुसलमान हो, 02
✍️ मुस्तफ़वी
Share 📮शायर कहता है के.....
शाखें रहीं तो फ़ुल और पत्ते भी आएंगे, ये दिन बुरे हैँ तो अच्छे भी आएंगे ।
अल्लाह करीम कुरआन में इरशाद फ़रमाता है के बेशक परेशानी के बाद राहत है (बेशक तंगी के बाद कुशादगी है)।
सूरह न. 94, आयत न.6
✍️ मुस्तफ़वी
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*💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚*
ये शान ओ शौकत ए आ़लम सदा किसी की नहीं, चिराग़ सबके बुझेंगे ये हवा किसी की नहीं.!
¹अल्लाह सुब्ह़ानहु व तआ़ला इरशाद फ़रमाता है___ हर जानदार को मौत का मज़ा चख़्ना है। हम तुम्हें आज़माते हैं अच्छाई और बुराई से और हमारी ही तरफ़ तुम्हें लौट कर आना है ।
सुरतूल अम्बिया, आयत न. 35
²और अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल इरशाद फ़रमाता है___ जो चीज़ें ज़मीन पर है सब फना होने वाली है बाक़ी रहने वाली है अल्लाहﷻ की ज़ात अज़मत और बुजुर्गी वाला ।
सुरतूल रह़मान, आयत 26,27
✍️ मुस्तफ़वी
Share 📮हमारा मुआ़सरा कैसा है?
शराब को ड्रिंक, ज़िना को डेट,
रिश्वत को चाय पानी, सूद को इंट्रेस्ट, बेपर्दगी को फैशन
ऐसा है हमारा मुआ़सरा 😔
आइये जानें के इन बुरे फै़ल (काम) पर इस्लाम क्या हुक़्म देता है___
💚 बिस्मिल्लाह़िर्रमानिर्रह़ीम 💚
¹रसूल अल्लाह ﷺ इरशाद फ़रमाते हैं : ज़ानी (अय्यासी करने वाला) जब ज़िना (सेक्स,हरामकारी) करता है तो वोह मोमिन नहीं होता, चोर जब चोरी करता है तो वोह मोमिन नहीं होता और शराबी जब शराब पीता है तो वोह मोमिन नहीं होता !
सही मुस्लिम,किताबुल ईमान, स.490, हदीस न. 202
²रसूले पाक ﷺ इरशाद फरमाते हैं : कि मेरे ऱब ने अपनी इज़्ज़त की कसम खाई है कि जो कोई दुनियां में शराब का एक घूंट पियेगा मैं उसे जहन्नम में उतनी ही पीप (जहन्नमियों के जिस्म से निकलनें वाला (मवाद) पिलाऊंगा!
अहवाले बरज़ख़, 68
³रसूल अल्लाह ﷺ इरशाद फ़रमाते हैँ : सूद का एक दिरहम जान बूझ कर खाना छत्तीस मर्तबा जिना करने से भी ज़्यादा सख़्त और बड़ा गुनाह है।
जहन्नम के ख़तरात, सफाह 49
⁴अल्लाह करीम क़ुरआन में फरमाता है के तुम अपने घरों के अंदर रहो और बेपर्दा होकर बाहर ना निकलो जिस त़रह़ पहले ज़माने के दौरे जाहिलिय्यत में औ़रतें बे पर्दा बाहर निकल कर घूमती फिरती थीं और नमाज क़ायम रखो, ज़कात दो और अल्लाह (अज़्ज़ व जल्ल) और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैही व सल्लम) का हुक़्म मानों ।
सुरतूल अह़ज़ाब, आयत न 33
✍️ मुस्तफ़वी
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💚 الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم 💚
मसाईब पर सब्र और नेअ़मत पर शुक़्र करने की फ़जिलत
जो अल्लाह के नेक बन्दे होते हैं वोह मुसीबत, तंगी, आज़माइश में सब्र करते हैं नेअ़मतों पे शुक्र करते हैं..
फ़रमानें नबवी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम है (ह़दीस-ऐ-क़ुदशी है)_
जिस बंदे की मैं दो मह़बूब त़रीन आँखें ले लूं और वोह उस पर सब्र करे और सवाब की उम्मीद रखे तो मैं उसे जन्नत के सिवा और कोई बदला नहीं दूंगा ।
सुनन तिर्मिज़ी, हदीस न. 2401
_यानी अल्लाह करीम अपनें बन्दों के मसाइब पर सब्र करने वालों के लिये बेह़तरीन नेअ़मत जन्नत रखा है_
अल्लाह तआला क़ुरआने करीम में इरशाद फ़रमाता है___
तर्जुमा - अगर तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूंगा ! !
सूरतुल इब्राहिम, आयत न.07
✍️ मुस्तफ़वी
Share 📮पहले की औ़रतें और हमारा मुआ़सरा__
औ़रत पर खा़वन्द (शौहर) के बहुत से हुक़ूक़ हैं, इन में से दो बातें अह़म हैं, इन में से एक निग़हबानी (देख-भाल) और पर्दा है, दूसरा हाजत के इ़लावा दीगर चीज़ों का मुतालबा न करना और (औ़रत का) मर्द की ह़राम की कमाई से हासिल कर्दा रिज़्क़ से परहेज़, गुज़श्ता (गुज़रे) ज़माने में औ़रतों का येही किरदार था।
चुनान्चे, आदमी जब घर से बाहर निकलता तो उस की बीवी या बेटी उसे कहती कि ह़राम की कमाई से बचना क्यूंकि हम दुख़ दर्द और भूक बर्दाश्त कर सकते हैं मगर जहन्नम की आग बर्दाश्त नहीं कर सकते।
मुकाशफ़तुल कुलूब, 610, 611
फ़रमानें नबवीﷺ है के__ ऐ इब्ने आदम तू ऐसी दुनियाँ (माल ओ दौलत) का क्या करेगाजिसके ह़लाल का हिसाब देना पड़ेगा और ह़राम की सज़ा भुगतनी पड़ेगी 😢 अल्लाहु अक़बर
कन्ज़ूल उम्माल, 6325
✍️ मुस्तफ़वी
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मोबाइल का ग़लत इस्तेमाल 🚫
क़्यामत के दिन अगर कहा जाए लाओ इसकी मोबाइल ह़िस्ट्री खोली जाए तो क्या आप इसके लिए तैयार हैं ⁉️
जो कुछ देखा जो कुछ सुना जो कुछ अपलोड किया (डाउनलोड किया) जो राब्ता किया गैर महरम (ह़राम) रिस्ते बनाये फ़िर उनसे बात की चैटिंग की दोस्ती के नाम पर बे हयाई की अय्याशियां की (जिना की) 😔
¹अल्लाह ﷻ इरशाद फरमाता है
तर्जमा-ए-कंजुल ईमान___ बेशक़ हम मुर्दों को जिलाएंगे (जिन्दा करेंगे) और हम लिख रहे हैँ इन्होने जो आगे भेजा और जो निशानियां पीछे छोड़ गये और हर चीज़ हमनें गिन रखी है, एक बताने वाली किताब में !!
सुरतुल यासीन, सूरह न.36, आयत न. 12
²क़ुरआन हमें नसीहत करता है के___ छोड़ दो खुला और छुपा गुनाह, वह जो गुनाह कमाते हैं अ़न्क़रीब अपनी कमाई की सज़ा पाएंगे। सूरत 6, आयत 120
अपना जायज़ा जरूर लीजिए कि कहीं ये मोबाइल का इस्ते़माल मेरे लिए जहन्नम की आग तो नहीं तैयार कर रहा है ? लिहाजा़ आज ही तमाम पिछले गुनाहों से तौ़बा कर लें और मोबाइल का सही इस्तेमाल करें !
✍️ मुस्तफ़वी
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गूफ्तगू के दो ही शरायत हैं
तमीज़ से की जाए या फ़िर दलील से की जाए और दलील से की जाए फ़िर भी तमीज़ से की जाए ।
अल्लाह के प्यारे मह़बूब अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं___ जो शख़्स हमारे बड़ों की इज़्ज़त ना करे और (बड़ा अपनें से) छोटों पर शफ़क़्त (रहम) ना करे वोह हम में से नहीं। ¹
फ़रमानें नबवीﷺ है कि___ जो शख़्स नरमी (की शिफ़त) से मह़रूम रहा वोह (हर खै़र) भलाई से मह़रूम रहा । ²
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सुनन तिर्मीज़ी, ह़दीस न. 1919 ¹
सहीह मुस्लिम, ह़दीस न. 6598 ²
✍️ मुस्तफ़वी
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*हमारी बेटी ऐसी वैसी नहीं है*
*आज बेटी खुद बाजार से अपनी पसंद के कपड़े खरीद कर लाई है और बाप, माँ और भाई बहुत खुश हैं के लड़की समझदार हो गयी है*
*इस तरक़्क़ी से घर मे किसी को तकलीफ़ नही है लेकिन अगर कोई दीनी इ़ल्म रखने वाला मौलवी टाइप शख्स इस तरक़्क़ी को गलत कहने की जसारत कर बैठे तो, उसे फौरन जवाब दिया जाता है के हमारी बेटी ऐसी वैसी नही है अब उन्हें कौन समझाए के किसी की भी बेटी पैदाइशी ऐसी वैसी नहीं होती*
*आप को भले ही अपनी बेटी पर भरोसा हो लेकिन हम तो इतना ही जानते है के वो भी इंसान हैं*
*आप कुछ भी कहें लेकिन ये सच है के वो गुनाहों से मासूम नहीं है, आपकी नज़रो में आपकी बेटी का कोई दुश्मन नही है लेकिन एक खुला दुश्मन है जिसे शैता़न कहा जाता है*
*ये भी जान लीजिए के जितनी लड़कियां लड़कों के साथ भाग गयी जिनके साथ ज़बरदस्ती ज़िना किया गया और जिन्होंने खुदखुशी कर ली, वो सब लड़कियां भी पैदाइशी ऐसी वैसी नही थी बल्कि कईयो ने मिलकर कर उसे ऐसी वैसी बना डाला, हमने इशारे में में बहुत कुछ कहा है अगर आप समझ गए तो फिर ये भी समझ लीजिए के ये तरक्क़ी नही है*
*वैसे दीनी इ़ल्म रखने वाले मौलवी टाइप लोग अगर ज़्यादा बोले तो आप बिलकुल तवज्जोह ना दे, क्यों के आप उनसे बेहतर जानते है के तरक़्क़ी किसे कहेते है और आप की बेटी भी ऐसी वैसी तो है नही.!*
📕(बहारे तहरीर हिस्सा 6 सफा 15 16)
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#204
हिन्दी___
हुज़ूर नबीए पाक अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं
तुम मे से कोई अपनें दूसरे भाई की लकड़ी या छड़ी भी बगैर इज़ाज़त ना ले, ना ही मज़ाक मे और ना ही लेने के इरादे से और अगर किसी ने ले लिया हो, तो उस को वापस कर दे ।
सुनन तिर्मीज़ी, हदीस न. 2160
#Roman_Urdu___
Huzoor Nabi Paak Alaihissalam Farmate Hain
Tum Mein Se Koi Apne Dusre Bhai Ki Lakdi Ya Chhadi Bhi Bagair Izazat Na Le, Naa Hi Mazak Mein Aur Naa Hi Lene Ke Irade Se Aur Agar Kis Ne Le Liya Ho, To Usko Wapas Kar De.
Sunan Tirmizi, Hadees No. 2160
सल्लल्लाहु तआ़ला अ़ला मुह़म्मदﷺ
t.me/HamaraPyaraislam
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🚫 सूदखोरों की मज़म्मत 🚫
एक आ'लिम का हक़ है के बुराई देखे तो उसे रोके।
हदीस पाक में है के बुराई को देख कर ना रोकनें वाला गूंगा शैत़ान है ।
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चुग़ली की धार इतनी तेज़ होती है कि ख़ून के रिश्तों को भी काट कर रख देती है, इसलिए चुग़ली करने से बचिए, क्यूंकि क़ब्र में सबसे ज़्यादा अ़ज़ाब लाने वाले गुनाहों में से ये भी है।
अल्लाह के प्यारे रसूल ﷺ फ़रमाते हैं : झूठ चेहरे को सियाह (काला) करता है और चुगली अ़ज़ाबे क़ब्र का सबब बनती है।
शोअबुल ईमान : 483
✍️ मुस्तफ़वी
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