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सिर्फ हिंदी"उर्दू"शायरी

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"अनुशासन में बंधे कदम ही... अक्सर मंज़िल की सीमाएँ तोड़ते हैं...

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बेवजह खुश रहिए, वजह बहुत महंगी है...
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@Gulzared
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शायरी पसंद है और रोज़ चैनल पर पोस्ट करने में interested हो, तो मुझे बताना ❤️ @gulzared पर DM करना। @all
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यूँ तो हर रोज़ ढलती है शाम दुनिया के लिए, मगर हमारे दिल का सूरज तो कभी दोबारा निकला ही नहीं!!
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🍂🍂 सिलसिले तोड़ गया _वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे_ कि आते जाते शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था अपने हि
🍂🍂 सिलसिले तोड़ गया _वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे_ कि आते जाते शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था अपने हिस्से की _कोई शम्अ' जलाते जाते कितना आसाँ था__ तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी __जान से जाते जाते इस की वो जाने उसे पास-ए-वफ़ा था कि न था तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते अहमद फ़राज़ 🍂🍂
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कोई मंज़िल के क़रीब आ के भटक जाता है कोई मंज़िल पे पहुँचता है भटक जाने से ~ क़सरी कानपुरी
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🙏🌸 रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌸🙏 भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और स्नेह का यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियाँ लेकर आए। ईश्वर से प्रार्थना है कि भाई-बहन का यह अटूट रिश्ता हमेशा प्रेम और अपनत्व से भरा रहे। आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏 शुभ रक्षाबंधन! 🙏
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🙏 बहुत-बहुत शुक्रिया! ❤️ आप हमारे ग्रुप से जुड़े, इसके लिए दिल से धन्यवाद। यहाँ आपको चुनिंदा और बेहतरीन शायरियाँ पढ़ने को मिलेंगी। 🌹✨ अगर आपको कोई शायरी पसंद आए, तो अपना रिएक्शन ज़रूर दें ❤️👍 आपका छोटा-सा रिएक्शन हमारे एडमिन्स का हौसला बढ़ाता है और हमें आपके लिए और भी अच्छी शायरियाँ लाने की प्रेरणा देता है। 🥰 जुड़े रहिए, पढ़ते रहिए और अपनी पसंद की शायरियों पर प्यार बरसाते रहिए। ❤️🌹
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ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे हमसफ़र चाहिये हुजूम नहीं इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे लब कुशां हूं तो इस यकीन के साथ कत्ल होने का हौसला है मुझे दिल धडकता नहीं सुलगता है वो जो ख्वाहिश थी, आबला है मुझे कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़ क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे ~ Ahmad Faraz
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मैंने मेरा दिल खोलकर रख दिया , और वो मुझे सिर्फ अपने दिमाग का परिचय देते रहे।
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वो एक बात जो ज़िंदगी बन गयी है जो तुम भूल जाओ तो हम भूल जाएँ - शमशेर बहादुर सिंह
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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में जाने किस का ज़िक्र है इस अफ़्साने में दर्द मज़े लेता है जो दोहराने में दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है किस की आहट सुनता हूँ वीराने में हम इस मोड़ से उठ कर अगले मोड़ चले उन को शायद उम्र लगेगी आने में.... गुलज़ार साहब.....🎉🎂
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प्रेम में दिए गए पुष्प, सदैव ही रहें आकर्षक.. देवों को चढ़ाएं गए पुष्प, रहें अभिवंदनीय.. शवों पर रखें पुष्प, रहें कुछ भावुक... किंतु, कुचलें व रौंदें गये पुष्पों ने चुना मिट्टी में मिलकर भी अपनी सुगंध बिखेरना.. क्योंकि, प्रेम,श्रंगार, वेदना व आशिष से, सुंदर है सत्य के लिए संघर्षरत रहना ।।
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❣️🇮🇳❣️ जमी पर घर बनाया है जन्नत में रहते हैं हमारी खुशनसीबी है हम भारत में रहते हैं। Happy Independence day 🇮🇳
❣️🇮🇳❣️ जमी पर घर बनाया है जन्नत में रहते हैं हमारी खुशनसीबी है हम भारत में रहते हैं। Happy Independence day 🇮🇳
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🇮🇳 Happy Independence Day! 🇮🇳
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