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JRF Academy With इदरीस मंसूरी (रिसर्च स्कॉलर MCBU छतरपुर)

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धौलावीरा
धौलावीरा गुजरात में मानसर एवं मानहर नदियों के मध्य अवस्थित है, जिसकी खोज 1967-68 में जगपति जोशी के द्वारा की गई थी।
धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है, जिसकी बस्ती तीन भागों में विभाजित थी।
धौलावीरा से चट्टान काटकर बनाए गए तालाब के प्रमाण प्राप्त हुए हैं, जिनकी संख्या 16 हैं।
धौलावीरा से सूचना पट्ट के साक्ष्य मिलते हैं, जिसमें 10 अक्षर अंकित हैं।
धौलावीरा से एक विशाल स्टेडियम के प्रमाण मिला है।

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🎯 सबसे जरूरी 10 तथ्य 1. मेगस्थनीज → चंद्रगुप्त मौर्य → Indica 2. डाइमेकस → बिंदुसार 3. नीआर्कस → सिंधु से फारस की खाड़ी का समुद्री मार्ग 4. फाह्यान → चंद्रगुप्त द्वितीय → गुप्तकाल 5. ह्वेनसांग → हर्षवर्धन → नालंदा 6. इत्सिंग → नालंदा → बौद्ध मठ एवं विनय 7. प्लिनी → Natural History → भारत-रोम व्यापार 8. टॉलेमी → Geographia → भारतीय भूगोल 9. Periplus → पश्चिमी तट → समुद्री व्यापार 10. स्ट्रैबो → Geographica → पूर्ववर्ती यूनानी स्रोतों का उपयोग https://t.me/asdfghiriiillll

मोहनजोदड़ो
मोहनजोदड़ो से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य-
अर्थ – मुर्दों का टीला
उपनाम - सिंधु घाटी सभ्यता का बगीचा या रेगिस्तान का बगीचा।
मोहनजोदडो से प्राप्त मुहर पर स्वास्तिक का अंकन सूर्य देवता का प्रतीक चिह्न है। मोहनजोदड़ो स्थित विशाल स्नानागार की खोज जॉन मार्शल ने की। ध्यान रहे अन्नगार इसकी विशाल इमारत है। यहां से सेलखड़ी की पशुपति की मुहर मिली है । मार्शल महोदय ने पशुपतिनाथ को आदि-शिव की संज्ञा दी है, जिस पर बाघ, हाथी, गेडे, भैसे और 2 हिरण के बच्चों कोखेलते हुए दिखाया गया है। कुषाण शासक कनिष्क ने दुर्ग टीले के ऊपर एक स्तूप का निर्माण करवाया था, इसे स्तूप का टीला भी कहते हैं। यहां से प्रमुख कांसे की बनी हुई नृत्यरत नारी की प्रतिमा HR स्तर से मिली है।
ध्यान रहे कि कपास का प्रथम प्रमाण मेहरगढ़ से मिला, जबकि सूती वस्त्र के प्रथम साक्ष्य मोहनजोदड़ो से मिले हैं।
मोहनजोदड़ो से कब्र के कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं।
के यू आर केनेडी के अनुसार मोहनजोदड़ो के शवों से मलेरिया के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

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6. निम्नलिखित में से किस अवधारणा का संबंध जैन मोक्षमार्ग से प्रत्यक्ष है? A) त्रिरत्न B) अष्टांगिक मार्ग C) पंचशील D) पुरुषार्थ चतुष्टय उत्तर: A व्याख्या: जैन धर्म का त्रिरत्न है— सम्यक दर्शन + सम्यक ज्ञान + सम्यक चरित्र। इनके माध्यम से आत्मा कर्मबंधन से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होती है।7. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: जैन धर्म ने वैदिक कर्मकांड की आलोचना की। जैन धर्म ने आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किया। जैन धर्म ने कर्म और पुनर्जन्म की अवधारणा को अस्वीकार किया। सही उत्तर है: A) केवल 1 B) 1 और 2 C) 2 और 3 D) 1, 2 और 3 उत्तर: B व्याख्या: जैन धर्म आत्मा, कर्म और पुनर्जन्म को स्वीकार करता है। इसलिए तीसरा कथन गलत है। जैन चिंतन में मोक्ष का अर्थ आत्मा का कर्मबंधन से पूर्णतः मुक्त होना है।8. महावीर के समय के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा सबसे उपयुक्त है? A) केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विस्तार B) नगरीकरण और व्यापारिक गतिविधियों का विकास C) समुद्री साम्राज्यों का निर्माण D) सामंतवाद का पूर्ण विकास उत्तर: B व्याख्या: ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में गंगा घाटी में नगरीकरण, व्यापार, शिल्प और नए सामाजिक समूहों का विकास हुआ। इसी परिवेश में श्रमण परंपराओं—विशेषतः बौद्ध और जैन धर्म—को व्यापक समर्थन मिला।9. निम्न में से कौन-सा महावीर की शिक्षाओं और तत्कालीन ब्राह्मणीय व्यवस्था के बीच संबंध को सबसे बेहतर स्पष्ट करता है? A) महावीर ने सभी ब्राह्मणों का सामाजिक बहिष्कार किया। B) उन्होंने जन्माधारित श्रेष्ठता के बजाय आचरण और तप को धार्मिक मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना। C) उन्होंने वैदिक देवताओं की पूजा को अनिवार्य बनाया। D) उन्होंने राजसत्ता को धर्म का आधार बनाया। उत्तर: B व्याख्या: श्रमण परंपराओं ने धार्मिक श्रेष्ठता के लिए जन्म और वैदिक कर्मकांड की अनिवार्यता को चुनौती दी। जैन धर्म में तप, संयम और नैतिक आचरण को मुक्ति के लिए अत्यधिक महत्व मिला।10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन दिगंबर और श्वेतांबर परंपराओं के विभाजन के संदर्भ में सबसे उचित है? A) विभाजन महावीर के जीवनकाल में हुआ। B) विभाजन केवल राजनीतिक कारणों से हुआ। C) दोनों परंपराओं में मुनियों के आचरण और ग्रंथीय परंपरा को लेकर महत्वपूर्ण मतभेद विकसित हुए। D) दोनों में कोई doctrinal difference नहीं था। उत्तर: C व्याख्या: दिगंबर और श्वेतांबर परंपराओं में मुनियों के वस्त्र, स्त्रियों की मोक्ष-प्राप्ति, आगमों की प्रामाणिकता आदि विषयों पर मतभेद विकसित हुए। इन मतभेदों का विकास महावीर के बाद लंबे समय में हुआ। Link:- https://t.me/asdfghiriiillll

🔥 NET के लिए याद रखने योग्य Core Points महावीर → 24वें तीर्थंकर → ज्ञात्रिक कुल → कुंडग्राम → 30 वर्ष में गृहत्याग → 12 वर्ष तपस्या → कैवल्य ज्ञान → पाँच महाव्रत → पावापुरी में निर्वाण। दर्शन: जीव-अजीव → कर्म → बंध → संवर → निर्जरा → मोक्ष और अनेकांतवाद → स्याद्वाद → अहिंसा। https://t.me/asdfghiriiillll

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1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन 1: महावीर ने पार्श्वनाथ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पाँच महाव्रतों को व्यवस्थित रूप दिया। कथन 2: पार्श्वनाथ की परंपरा में ब्रह्मचर्य को अलग स्वतंत्र व्रत के रूप में स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया गया था। सही विकल्प चुनिए: A) दोनों कथन सही हैं और कथन 2, कथन 1 की सही व्याख्या करता है। B) दोनों कथन सही हैं, लेकिन कथन 2, कथन 1 की व्याख्या नहीं करता। C) कथन 1 सही है, कथन 2 गलत है। D) दोनों कथन गलत हैं। उत्तर: A व्याख्या: जैन परंपरा के अनुसार पार्श्वनाथ के चार व्रत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह—प्रमुख थे। महावीर ने ब्रह्मचर्य को स्वतंत्र पाँचवें महाव्रत के रूप में स्पष्ट किया। इसलिए यह परिवर्तन जैन श्रमण परंपरा के अधिक व्यवस्थित स्वरूप की ओर संकेत करता है।2. निम्न में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है? A) महावीर — ज्ञात्रिक B) पार्श्वनाथ — वाराणसी C) ऋषभदेव — प्रथम तीर्थंकर D) महावीर — पावापुरी उत्तर: A व्याख्या: यहाँ सावधानी आवश्यक है। महावीर का संबंध ज्ञात्रिक/नाय कुल से था, अतः A वास्तव में सही है। इसलिए प्रश्न में कोई गलत युग्म नहीं है। सही निष्कर्ष: दिए गए चारों युग्म सही हैं। NET में इस प्रकार के प्रश्न में विकल्पों की आंतरिक संगति जाँचना अत्यंत महत्वपूर्ण है।3. जैन दर्शन में अनेकांतवाद का मूल दार्शनिक आशय क्या है? A) केवल आत्मा ही वास्तविक है। B) सत्य को अनेक दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है। C) सभी धार्मिक मत समान रूप से असत्य हैं। D) कर्म का अस्तित्व नहीं है। उत्तर: B व्याख्या: अनेकांतवाद के अनुसार वस्तु या सत्य के अनेक पक्ष होते हैं। किसी एक सीमित दृष्टिकोण को पूर्ण सत्य मानना उचित नहीं है। इसी से संबंधित स्याद्वाद विभिन्न परिस्थितियों में किसी कथन की सापेक्ष वैधता को व्यक्त करता है।4. निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम महावीर के जीवन से संबंधित घटनाओं का सही कालानुक्रम प्रस्तुत करता है? गृहत्याग कैवल्य ज्ञान प्रथम उपदेश/धर्मप्रचार निर्वाण A) 1 → 2 → 3 → 4 B) 2 → 1 → 3 → 4 C) 1 → 3 → 2 → 4 D) 3 → 1 → 2 → 4 उत्तर: A व्याख्या: महावीर ने लगभग 30 वर्ष की आयु में गृहत्याग किया, लगभग 12 वर्षों की कठोर साधना के बाद कैवल्य प्राप्त किया और इसके बाद व्यापक धर्मप्रचार किया। अंततः पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया।5. निम्न में से कौन-सा कथन जैन कर्म सिद्धांत को बौद्ध कर्म सिद्धांत से सबसे स्पष्ट रूप से अलग करता है? A) कर्म केवल मानसिक प्रक्रिया है। B) कर्म का आत्मा पर वास्तविक बंधनकारी प्रभाव माना जाता है। C) कर्म का पुनर्जन्म से कोई संबंध नहीं है। D) कर्म केवल सामाजिक व्यवहार है। उत्तर: B व्याख्या: जैन दर्शन में कर्म को अत्यंत विशिष्ट अर्थ में सूक्ष्म भौतिक द्रव्य के रूप में समझा गया, जो आत्मा से बंधता है। तप, संयम और साधना द्वारा कर्मबंध को रोकना और पुराने कर्मों को क्षीण करना मोक्ष का मार्ग है। नेट मैं तर्कवाले और बड़े प्रश्न होते है छोटे questions भी पूछे जाते है जितनी ज़्यादा प्रैक्टिस होगी उतनी सफलता जल्द मिलेगी । Link:- https://t.me/asdfghiriiillll

रोपड़
पंजाब में सतलज सतलज नदी के तट पर स्थित है, जिसकी खोज 1950 में बी बी लाल ने की तथा इसका उत्खनन यज्ञदत शर्मा ने 1953 में किया। रोपड़ से मानव की कब्र के साथ कुत्ते दफ़नाए जाने के अवशेष मिले हैं।

नवपाषाण काल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
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कालीबंगा की 'अग्निवेदिकाएं' कालीबंगा का सिटाडेल उत्तरी और दक्षिणी भागों में बंटा हुआ है और दक्षिणी हिस्से में पुरातत्त्वविदों
कालीबंगा की 'अग्निवेदिकाएं' कालीबंगा का सिटाडेल उत्तरी और दक्षिणी भागों में बंटा हुआ है और दक्षिणी हिस्से में पुरातत्त्वविदों ने पाँच या इससे भी अधिक मिट्टी के ईंटों के बने पृथक-पृथक प्लेटफार्म को चिन्हित किया है। इतिहासकार के अनुसार ये यज्ञवंदियाँ या अग्निकुण्ड थीं। इन गड्‌ढ़ों से राख, चारकोल और आयताकार मिट्टी के टुकड़े तथा टेराकोटा केक पाए गए हैं। बी.बी. लाल का मानना है कि इन भवनों में अग्निकुण्ड से जुड़े कर्मकाण्डीय पुरोहितों का निवास स्थान था। अग्निकुण्डों या अग्निवेदिकाओं को प्राप्ति बनावली, लोथल, आमरी, नागेश्वर और बगाड़ तथा हरियाणा के राखीगढ़ी से हुई है, किन्तु केवल कालीबंगा और बनावली से प्राप्त अग्निवेदिकाओं सामुदायिक महत्त्व की प्रतीत होती हैं। #UCGNETHistory PYQ HISTORY ✍️ More Info.Join 🔜👉@UGC_NET_HISTORY_JRF  💐💐💐💐
Source- प्रोफेसर उपिंदर सिंह

सर्वप्रथम नवपाषाण काल शब्द दिया
जॉन लुब्बाक ने 1864 में प्री हिस्टोरिका इंडिया पुस्तक लिखी थी, जिसमें लुब्बाक ने सर्वप्रथम नवपाषाण काल शब्द दिए थे।

अशुंलियन संस्कृति/हैण्ड एक्स संस्कृति/मद्रास संस्कृति
अशुंलियन संस्कृति/हैण्ड एक्स संस्कृति/मद्रास संस्कृति के उपकरण 1864 में मद्रास के वदमदुरै तथा अतिलारपक्कम से प्रोफेसर किंग सागर ने प्राप्त किये थे।

रोबर्ट ब्रुसफुट भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व के जनक कहे जाने वाले रोबर्ट ब्रुसफुट ने 1863 में पल्लवरम (मद्रास) से सर्वप्रथम हस्त कुठार खोजा।

महावीर जैन ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए किस भाषा का प्रयोग किया?
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किस अंग्रेज यात्री ने अकबर के अधीन रत्न विशेषज्ञ की नौकरी प्राप्त की थी?
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