❤️ Gulzar Sad Shayari ❤️
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आज शाम हमारे ज़हन नें फ़िर से... तमाशा शुरू किया... मजबूरन... मयख़ाने की ओर लौटना पड़ा हमें. . हिंदी की बेहतरीन शायरियों के लिए हमारे चैनल को Join करे। Contact @Vaibhav100
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ये बेशरम लोग समझा रहे हैं बेरंग दुनियां के फायदे,
अब इन्हें क्या कहें हमें तो कुछ समझ नहीं आता..!!
उन्हें पसंद तो आएगा ही नया रंग रूप हमारा,
हममें कुछ मर चुका है कुछ बाक़ी है जो मर रहा है..!!
जाइए अब ना आइएगा हमदर्दी जातलानें,
हमें मालूम है कुछ चाहिए होगा तो आए हैं..!!
पुराना तो सब अच्छा लगता ही है, आदत है आदमी की,
नए को बनाने और अपनाने में बड़ी मेहनत जो है..!!
आम आदमी से उम्मीद ही यही है कि आम ज़िन्दगी जिये,
ख़ास बनने की लड़ाई है अपनें अंदर भी बाहर भी...!!
नज़रिये की बात रही है ये,
कोई माफ़ कर दिया गया,
किसी को जिंदगी भर कोसा गया..!!
बेवज़ह क्यों मिली नज़र उनसे बिछड़ना ही था, ख़ैर,
ख़ुदा यूँ करे कि अब हमें पागल कर दे..!!
मैं नशें में खुद से डरता हूं,
मैं नशें में और प्यार करता हूं...
मुझे नशें में दिखाई तुम देती है
मैं नशा तुझे देखने के लिए करता हूं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मैंने निभाना था, निभाया, वो भी शिद्दत से,
उसने जाना था, गया, मेरी क़िस्मत लेकर..!!
तुम्हें तकलीफ़ है, होगी, हमें क्या,
ये कहने वाले, हम पहले नहीं थे,
ये आदत अब पड़ी है, नई नई है,
मुर्दा से हम अब हैं, पहले नहीं थे..!!
