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ब्रह्मचर्य जीवन पुस्तकें

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यौन ऊर्जा रूपांतरण के लिए ये सारे आसन अतिआवश्यक है । इन आसनो के बाद प्राणायाम फिर ध्यान करें

#प्रतिज्ञा #pratigya #pledge
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#सूर्य #धूप #sun
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भीष्मपितामह -- "तीनों लोक के साम्राज्य का त्याग करना, स्वर्ग का अधिकार छोड़ देना, इससे भी कोई उत्तम वस्तु हो, उसको भी छोड़ दे
भीष्मपितामह -- "तीनों लोक के साम्राज्य का त्याग करना, स्वर्ग का अधिकार छोड़ देना, इससे भी कोई उत्तम वस्तु हो, उसको भी छोड़ देना परन्तु ब्रह्मचर्य को भंग न करना।"

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इसे तब पढ़ें जब आपके अंदर का राक्षस आपकी महीनों, शायद वर्षों की सच्ची मेहनत से अर्जित सारी प्रगति, परिणाम, पुरस्कार छीन लेना चाहता हो। यदि आप राक्षस को ऐसा करने की अनुमति देते हैं तो ये सब कुछ सेकंड में नष्ट हो सकता है (केवल यदि आप अनुमति देते हैं) ●यदि कोई भी गतिविधि जैसे पीएमओ, धूम्रपान या कोई भी पदार्थ आपकी लत है। फिर उससे ऐसे निपटें जैसे शेर अपने शिकार से निपटता है। उस पर पूरी इच्छाशक्ति से हमला करें। अपनी लत को पहचानें, फिर कल्पना करें कि जैसे शेर अपने शिकार के शरीर को फाड़ देता है। उस पर कोई दया न करें। सबसे अच्छी आत्मरक्षा आक्रमण है. अपने दुश्मन पर हमला करो. दुश्मन की सबसे अच्छी चाल आपको यह विश्वास दिलाना है कि वह आपका दुश्मन नहीं है। कभी भी अपने सबसे बड़े दुश्मन की इस चाल में न पड़ें जो आपके शरीर से पल भर में ही आपके जीवन का बीज निचोड़ लेगी। अपने दोनों हाथों को अत्यधिक कस लें, अपनी आँखें बंद कर लें और अपने हाथों में अपार ऊर्जा को महसूस करें। ●कभी भी कोई ऐसी गतिविधि न करें जिसे आपको दुनिया से छिपाना पड़े। एक ईमानदार जीवन जीएं। कोई दोहरी जिंदगी नहीं। कोई गंदा रहस्य नहीं। ●यदि आप किसी कार्य को करने के बाद दूसरों के सामने प्रकट नहीं कर सकते तो जहर के समान उस कार्य से दूर रहें। ●विषयों में लिप्त रहना राजा को दास बना देता है और विषयों से परहेज़ असली खज़ानों की ओर ले जाता है। ●अगर आप किसी चीज़ के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, तो मेहनत का दर्द तो तुरंत दूर हो जाता है, लेकिन उस काम का इनाम बना रहता है। ●यदि आप विषयों में लिप्त रहते हैं, तो विषय जल्दी ही गायब हो जाता है लेकिन शर्म बना रहता है, अपराधबोध बना रहता है, स्वयं से घृणा बनी रहती है, कमजोरी बनी रहती है, लाचारी बनी रहती है । @b_jivan

ओशो योग निद्रा.m4a9.16 MB

ब्रह्मचर्य_८_योगासन_विधिसहित.pdf2.17 KB

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ये सारी पुस्तकें पढ़िएब्रह्मचर्य ही जीवन है ब्रह्मचर्य की शक्ति रामप्रसाद बिस्मिल आत्मकथा स्वास्थ्य और व्यायाम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन और काम विकार

अपने को शुद्ध पवित्र आत्मा समझ परमात्मा के ज्योतिस्वरूप में मन को एकाग्र करें

ब्रह्मचर्य में सहायक योगासन : 1.सिद्धासन 2.शीर्षासन 3.सर्वांगासन 4.मत्स्यासन 5.पदांगगुष्ठआसन 6.पश्चिममोदातआसन 7.ब्रह्मचर्यआसन 8.पद्मासन