ब्रह्मचर्य जीवन पुस्तकें
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This is not a mutton but a child, they may be an animal but they also has innocence like our child.
Repost from Brahmacharya111
Blog #107
विषय-भोग से चित्त की मलीनता
जिन-जिन लोगो ने पवित्रता अर्थात् चित्त की शुद्धि को छोडा, उनकी स्थिति खराब होने लगी। विजय उस मनुष्य की कभी नही हो सकती, जिसका हृदय शुद्ध नही । पृथ्वीराज जब रणक्षेत्र को चला, जिसमे सैकडों वर्ष के लिए
हिन्दुओ की गुलामी शुरू हो गई, लिखा है कि चलते समय वह अपनी
कमर महार। नी से कसवा कर आया था ।
नेपोलियन जैसा युद्धवीर जब अपनी उन्नति के शिखर से गिरा, अडडडधम । लिखा है कि जाने से पहले ही वह अपना खून आप कर चुका था । खून क्या लाल ही होता है? नही, नही, सफेद भी होता है। अर्थात् उस रणक्षेत्र" से पहली शाम को वह एक चाह में अपने को पहले ही गिरा चुका था ।
कुमार अंभिमन्यु जैसा चन्द्रमा के समान मुन्दर, सूयं के समान तेजस्वी, अद्वितीय नवयुवक जब उस कुरुक्षेत्र की रणभूमि मे अर्पण हुआ, और उस युद्ध में काम आया, कि जहाँ से भारत के क्षत्री शूर- वीरों का बीज उड़ गया, तो युद्ध से पहले वासना का शिकार होकर आया था ।
Repost from वैदिक पुस्तकालय™
पुस्तक का नाम ➦विषैला वामपंथ
लेखक का नाम ➛डाँ०राजीव मिश्रा
पुस्तक की भाषा ➛हिन्दी, संस्कृत
पुस्तक में पृष्ठ ➛200 HD
Pdf size ➛19.7MB
अच्छी गुणवत्ता में
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Ꭻᴏɪɴ➛ @Vaidicpustakalay
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Bastar The Naxal Story (2024) 720p HDRip [Telugu + Hindi] - x264 ESub.Mkv
Good quality 1080p👍👍👍
कम्युनिस्टों और नक्सलियों द्वारा किए गए नुकसान और आतंकवाद के बारे में जानने के लिए फिल्म अवश्य देखें
Must watch movie to know about damage and terrorism caused by communists and naxals
ध्यान करने में सबसे बड़ी बाधा है “विरोध”
और ध्यान का सबसे सरल अर्थ है “स्वीकारिता” ।
जब हम इस बात का विरोध कर रहे होते है कि हमे ये विचार क्यों आ रहा है तब हम भुल जाते है कि विरोध करते समय भी हम उसी विचार से चिपके हुए है ।
इसलिए हमें बस साक्षी बन के आते जाते विचारो को देखना है फिर अपने आप हम विचारशून्य की अवस्था प्राप्त कर लेंगे ।
आप इस चैनल से जुडें हुए है तो मुझे पता है कि आप हमेशा ये ध्यान रखते होंगे कि आप कोई जंक फूड नही खा रहे हो । अच्छी बात है ।
लेकिन आप अपने दिमाग मे जो निरंतर जंक फूड डाल रहे हो उसका क्या ?
न्यूज़ में 99 प्रतिशत नकारात्मक चीज़े आती है । क्योंकि ऐसे न्यूज़ देने से ही उन्हें कमाई होती है ।
99 प्रतिशत फिल्मे , सीरियल आदि भी कचरा होता है ।
इसलिए 4 साधारण मित्र साथ में बैठते है तो उनके 99 प्रतिशत बातें भी कचरा होता है ।
गुरुओं ने कहा है कम बोलो लेकिन कम सुन्ना और कम देखना भी उतना ही आवश्यक है ।
@b_jivan
एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौवा रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था, लेकिन एक बार उसने जंगल में किसी हंस को देख लिया और उसे देखते ही सोचने लगा कि ये प्राणी कितना सुन्दर है, ऐसा प्राणी तो मैंने पहले कभी नहीं देखा! इतना साफ और सफेद। यह तो इस जंगल में औरों से बहुत सफेद और सुंदर है, इसलिए यह तो बहुत खुश रहता होगा।
कोवा हंस के पास गया और पूछा, भाई तुम इतने सुंदर हो, इसलिए तुम बहुत खुश होगे?
इस पर हंस ने जवाब दिया, हां मैं पहले बहुत खुश रहता था, जब तक मैंने तोते को नहीं देखा था। उसे देखने के बाद से लगता है कि तोता धरती का सबसे सुंदर प्राणी है। हम दोनों के शरीर का तो एक ही रंग है लेकिन तोते के शरीर पर दो-दो रंग है, उसके गले में लाल रंग का घेरा और वो सूर्ख हरे रंग का था, सच में वो बेहद खूबसूरत था।
अब कौवे ने सोचा कि हंस तो तोते को सबसे सुंदर बता रहा है, तो फिर उसे देखना होगा।
कौवा तोते के पास गया और पूछा, भाई तुम दो-दो रंग पाकर बड़े खुश होगे?
इस पर तोते ने कहा, हां मैं तब तक खुश था जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था। मेरे पास तो दो ही रंग हैं लेकिन मोर के शरीर पर तो कई तरह के रंग हैं।
अब कौवे ने सोचा सबसे ज्यादा खुश कौन है, यह तो मैं पता करके ही रहूंगा। इसलिए अब मोर से मिलना ही पड़ेगा। कौए ने मोर को जंगल में ढूंढा लेकिन उसे पूरे जंगल में एक भी मोर नहीं मिला और मोर को ढूंढते-ढूंढते वह चिड़ियाघर में पहुंच गया, तो देखा मोर को देखने बहुत से लोग आए हुए हैं और उसके आसपास अच्छी खासी भीड़ है।
सब लोगों के जाने के बाद कौवे ने मोर से पूछा, भाई तुम दुनिया के सबसे सुंदर जीव हो और रंगबिरंगे हो, तुम्हारे साथ लोग फोटो खिंचवा रहे थे। तुम्हें तो बहुत अच्छा लगता होगा और तुम तो दुनिया के सबसे खुश जीव होगे?
इस पर मोर ने दुखी होते हुए कहा, भाई अगर सुंदर हूं तो भी क्या फर्क पड़ता है! मुझे लोग इस चिड़ियाघर में कैद करके रखते हैं, लेकिन तुम्हें तो कोई चिड़ियाघर में कैद करके नहीं रखता और तुम जहां चाहो अपनी मर्जी से घूम-फिर सकते हो। इसलिए दुनिया के सबसे संतुष्ट और खुश जीव तो तुम्हें होना चाहिए, क्योंकि तुम आज़ाद रहते हो। कौवा हैरान रह गया, क्योंकि उसके जीवन की अहमियत कोई दूसरा बता गया।
दोस्तों, ऐसा ही हम लोग भी करते हैं। हम अपनी खुशियों और गुणों की तुलना दूसरों से करते हैं, ऐसे लोगों से जिनका रहन-सहन का माहौल हमसे बिलकुल अलग होता है। हमारी जिंदगी में बहुत सारी ऐसी चीज़ें होती हैं, जो केवल हमारे पास हैं, लेकिन हम उसकी अहमियत समझकर खुश नहीं होते। लेकिन दूसरों की छोटी ख़ुशी भी हमें बड़ी लगती है, जबकि हम अपनी बड़ी खुशियों को इग्नोर कर देते हैं।
आयुर्वेद से करें आंखों का ख्याल
अपनी दृष्टि की सुरक्षा के दस सर्वोत्तम तरीके
सभी ज्ञानेन्द्रियों में आँख को उसके कार्य के कारण प्रधान महत्व दिया गया है। इन निम्नलिखित दस उपायों के माध्यम से आंखों को पर्यावरण प्रदूषण, एलर्जी, जल्दी दृष्टि हानि, धुंधली दृष्टि, आंखों का सूखापन, लालिमा, पानी आना से बचाया जा सकता है:-
1. त्रिफला कषाय ( त्रिफला का काढ़ा ) या त्रिफला चूर्ण ( त्रिफला चूर्ण) का शहद या घी के साथ प्रयोग आंखों के लिए फायदेमंद होता है।
2. पित्तज नेत्र रोगों में घी के साथ , वातज नेत्र रोगों में तिल के तेल के साथ और कफज नेत्र रोगों में शहद के साथ त्रिफला चूर्ण का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
3. प्रारम्भ से ही नियमित रूप से त्रिफला कषाय ( त्रिफला का काढ़ा ) से नेत्र प्रक्षालन करने से नेत्रों के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और नेत्र सुरक्षित रहते हैं।
4. रोजाना सुबह मुंह में पानी भरकर आंख धोने से आंखों के रोग नहीं होंगे।
5. खाना खाने के तुरंत बाद गीली हथेली से आंखों की मालिश करने से आंखों की रोशनी हानिकारक प्रभावों से बच जाती है।
6. किसी को न तो प्राकृतिक इच्छाओं को बलपूर्वक प्रेरित करना चाहिए और न ही उसे दबाना चाहिए (आंसुओं, उल्टी आदि को रोकना) क्योंकि इससे गंभीर नेत्र रोग हो सकते हैं।
7. शरीर पर गर्म पानी डालने से ताकत मिलती है, लेकिन वही ऊपर से डालने से बालों और आंखों की ताकत खत्म हो जाती है।
8. आंखों की सुरक्षा के लिए और आंखों से अतिरिक्त कफ को बाहर निकालने के लिए रोजाना अंजना लगाना, नस्य (नासिका के माध्यम से दवाओं का प्रवेश) का उपयोग करना अच्छा होता है क्योंकि आंखें आसानी से बीमारियों से पीड़ित हो सकती हैं।
9. नियमित रूप से त्रिफला , घी , जौ, गेहूं, शास्तिका शाली (पुराने चावल), सैधव लवण , द्राक्ष , दाड़िमा (अनार), शतावरी (शतावरी ऑफिसिनैलिस), हरे चने का प्रयोग, पदाभ्यंग (पैरों की तेल मालिश), का नियमित सेवन करना चाहिए। दृष्टि की सुरक्षा के लिए फुट वेयर का उपयोग और पाडा (पैर) पर औषधीय लेपा (पेस्ट) लगाना ।
अधिक भोजन करना, क्रोध करना, शोक करना, दिन में सोना, रात में जागना और वात दोष को खराब करने वाले भोजन करने से बचना चाहिए ।
डॉ. भव्या बीएम
(drbhanya25@gmail.com
