ब्रह्मचर्य जीवन पुस्तकें
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Repost from Brahmacharya™ (ब्रह्मचर्य) Celibacy
🔰 ब्रह्मचर्य-पालन के महत्वपूर्ण नियम 🔰
ऋषियों का कथन है कि ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगेः
1. ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है। इसलिए मन को नियंत्रण में रखो और अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो।
2. आँख और कान मन के मुख्यमंत्री हैं। इसलिए गंदे चित्र व भद्दे दृश्य देखने तथा अभद्र बातें सुनने से सावधानी पूर्वक बचो।
3. मन को सदैव कुछ-न-कुछ चाहिए। अवकाश में मन प्रायः मलिन हो जाता है। अतः शुभ कर्म करने में तत्पर रहो व खुद को इस शरीर को चलाने वाली शक्ति आत्मा समझ ,परमपिता परमात्मा की मधुर याद में लगे रहो, काम विकार पास भी नही भटकेगा।
4. 'जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन।' - यह कहावत एकदम सत्य है। गरम मसाले, चटनियाँ,प्याज ,लहसुन , अधिक गरम भोजन तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन बिल्कुल न करो।
5. भोजन हल्का व चिकना स्निग्ध हो। रात का खाना सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले खाओ।
6. दूध भी एक प्रकार का भोजन है। भोजन और दूध के बीच में तीन घंटे का अंतर होना चाहिए।
7. वेश का प्रभाव तन तथा मन दोनों पर पड़ता है। इसलिए सादे, साफ और सूती वस्त्र पहनो। खादी के वस्त्र पहनो तो और भी अच्छा है। सिंथेटिक वस्त्र मत पहनो। खादी, सूती, ऊनी वस्त्रों से जीवनीशक्ति की रक्षा होती है व सिंथेटिक आदि अन्य प्रकार के वस्त्रों से उनका ह्रास होता है।
8. सीधे, रीढ़ के सहारे तो कभी न सोओ, हमेशा करवट लेकर ही सोओ। यदि चारपाई पर सोते हो तो वह सख्त होनी चाहिए।
9. प्रातः जल्दी उठो। प्रभात में कदापि न सोओ। वीर्यपात प्रायः रात के अंतिम प्रहर में होता है।
10. पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, भाँग आदि सभी मादक (नशीली) चीजें धातु क्षीण करती हैं। इनसे दूर रहो।
11. लसीली (चिपचिपी) चीजें जैसे – भिंडी, लसौड़े आदि खानी चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में ब्राह्मी बूटी का सेवन लाभदायक है। भीगे हुए बेदाने और मिश्री के शरबत के साथ इसबगोल लेना हितकारी है।
12. कटिस्नान करना चाहिए। ठंडे पानी से भरे पीपे में शरीर का बीच का भाग पेटसहित डालकर तौलिये से पेट को रगड़ना एक आजमायी हुई चिकित्सा है। इस प्रकार 15-20 मिनट बैठना चाहिए। आवश्यकतानुसार सप्ताह में एक-दो बार ऐसा करो।
13. प्रतिदिन रात को सोने से ठंडा पानी पेट पर डालना बहुत लाभदायक है।
14. बदहज्मी व कब्ज से अपने को बचाओ।
15. सेंट, लवेंडर, परफ्यूम आदि से दूर रहो। इन्द्रियों को भड़काने वाली किताबें न पढ़ो, न ही ऐसी फिल्में और नाटक देखो।
16. विवाहित हो तो भी अलग बिछौने पर सोओ।
17. हर रोज प्रातः और सायं व्यायाम, आसन और प्राणायाम करने का नियम रखो।
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ध्यान का अर्थ है - अपने पर ध्यान, दूसरे पर नहीं। मन का अर्थ है - दूसरे पर ध्यान ।।
तुम्हारे पास 'ध्यान' हो तो कोई गाली तुम्हे छूती नहीं ! ना अपमान, ना सम्मान, ना यश, ना अपयश, कुछ भी नहीं छूता
जीवन मे उन्नति और स्थिरता चाहिए तो नियमो के अनुसार चलना पड़ेगा । प्रकृति के हर चीज़ एक नियम से बंधी है तभी प्रकृति का अस्तित्व है । जिस दिन नियम जैसे गुरुत्वकर्षण का नियम आदि टूट गया तो उसी दिन प्रलय आ जायेगी ।
हमारा इस शरीर का भी नियम है कि बिना ऑक्सीजन के कुछ ही सेकंड में ये शरीर नही रहेगा और भी कई सारे नियम है ।
सड़क पर चलने के लिए बाये होकर चलने का नियम है ।
नियम अगर अच्छा हो तो सबका भला ही होता है ।
उसी प्रकार हमे भी अपना जीवन नियम के अनुसार जीना चाहिए ।
कौन से नियम ?
इस पुस्तक में सारे नियम वर्णित है । अवश्य पढ़ें और सारे नियमो के अनुसार चले । इस पुस्तक को आम पुस्तक न समझे । अगर इनमें वर्णित बातों को गंभीरता से पालन किया जाए तो किसी का भी जीवन बदल सकता है । नियम याद रहे इसके लिए इस पुस्तक को निरन्त पढ़े ।
वीर्यरक्षा के लाभ:
गहरी आवाज
साफ त्वचा
चेहरे पर चमक
काले घेरे नहीं
मुहांसे नहीं
चुंबकीय आभा
कमजोरी नहीं
बढ़ी हुई सहनशक्ति
बढ़ी हुई ऊर्जा का स्तर
बढ़ी हुई मांसपेशियों का द्रव्यमान
बढ़ा हुआ आत्मविश्वास
कम चिंता
पाचन में सुधार
मानसिक स्पष्टता
स्मार्ट मस्तिष्क
मजबूत हड्डियां
मजबूत जोड़
सिरदर्द नहीं
बेहतर नींद
गहरा ध्यान
गहरी सांस
अब कोई शर्म नहीं
गर्व महसूस हो रहा है
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“जो पुरुष बलवान नही वो पुरुष नही”
जो निम्नलिखित तरीके से जीवन जीयेगा । उसके जीवन मे सदैव उन्नति होगी । वो हमेशा खुश रहेगा । वो पुरुष निरोगी, बलवान और ब्रह्मचारी बनेगा
1.सुबह 4 बजे के बाद किसी भी हाल में नही सोएं।
2.उठते ही थोड़ा पानी पीएं ताकि रात भर में मुह के अंदर बनी लार पेट में चला जाये जो पाचन शक्ति बढ़ाती है । ठंड के मौसम में गुनगुना पानी पीयें ।
3.फिर शौच के बाद सुबह लगभग साढ़े चार से 6 बजे तक घर के छत पर या किसी खुला स्थान पर निम्नलिखित 3 चीज़े हर दिन करें, बन्द कमरे में न करें :
20 मिनट प्राणायाम
20 मिनट ध्यान
20 मिनट योग
तीनो कार्य के समय 30-30 मिनट तक ले जाए
4.सुबह 6 बजे किसी मैदान में धूप के नीचे रनिंग करें या सड़क पर वाकिंग करें । धूप शरीर पर लगना चाहिए । धूप से डिप्रेशन कम होता है ।
5.सुबह 7 बजे तक हर हाल में घर वापस आ जाएं । हफ्ते में 2-3 बार मालिश करें फिर स्नान करें फिर यज्ञ द्वारा ईश्वर उपासना करें और भोजन करके 8 बजे से अपना काम या पढ़ाई करें ।
आपको लग रहा होगा कि सुबह के 4 घण्टे बर्बाद करने से अच्छा है पढ़ाई कर लूं लेकिन सच्चाई ये है कि 99 प्रतिशत लोग ये 4 घण्टे सोने में बर्बाद करते है । ज्यादातर लोग 7 बजे उठते है और भोजन वगेरा करने के बाद 9 बजे से ही अपने काम में लग पाते है । इसलिए ये 4 घण्टे बर्बाद नही हो रहे बल्कि आपके कार्यक्षमता को बढ़ा रहे । प्राणायाम योग रनिंग द्वारा आप और बलवान बनेंगे । ध्यान से आपके जीवन में स्पष्टता आएगी । जीवन में एकाग्रता आएगी । ध्यान करने पर आप जीवन में जो काम करने को सोचेंगे वो सरलता से आपसे हो जाएगी ।
फिर संध्याकाल में 1 घण्टा व्यायाम में लगाएं । व्यायाम के बाद फिर मन्त्र उच्चारण के साथ यज्ञ करें । 6 बजे के करीब भोजन कर लें । 9 बजे सोने जाएँ ।
भोजन सात्विक और शाकाहारी हो ,बलवर्धक हो जैसे चना , मूंग , दाल, बादाम , मेवे , फल इतियादी भरपूर मात्रा में हो । मिर्च मसाले , मिठाई से परहेज करें । सुबह अधिक भोजन करें ।
आयुर्वेद के सारे नियमों का पालन करें ।
सड़क पर भूखे पशुओं का ध्यान रखें । सामाजिक कल्याण के लिए भी कार्य करें ।
ऐसे दरिंदे हमारे बीच ही रह रहे है । लड़कियां जो 20 वर्ष के होने के बाद भी 5 साल की बच्ची के तरह व्यवहार करती है । दुनिया मे क्या हो रहा है जानने का प्रयास नही करती । उन्हें लगता है ये सारा दुनिया फिल्मो के तरह ही रंगीन है जहाँ लोग नाच गा रहे है । बॉयफ्रेंड गर्लफ्रैंड बनाना पार्टी करना , शॉप्पिंग , शादी , इंस्टाग्राम बस इतना ही दुनिया लगता है उन्हें ।
लेकिन हर रौशनी के पीछे अंधेरा छुपा होता है । लड़का हो या लड़की , सबको उस अंधेरे का भी ज्ञान होना चाहिए नही तो जब उस अंधेरे से कभी सामना हुआ तो ये फ़िल्म नही है । यहाँ कोई हीरो बचाने नही आता । इसलिए किसी भी परिस्थिति के लिए तैयारी कर के रखो । सही समाचार के लिए ओपिंडिया के वेबसाइट-https://hindi.opindia.com/
देखो तब पता चलेगा दुनिया मे हर रोज क्या हो रहा है ।
लोगो को पहचानना सीखो । किसी अनजान से रिश्ता बढ़ाने के पहले उसकी अच्छे से पहचान कर लो । उसके घरवालों के बारे में पता करो ।
आत्म रक्षा के लिए घर मे हर किवाड़ के पीछे लाठी रखो । और भी शस्त्र रखो ।
स्वास्थ सही रखो ।
उत्सव मनाते हुए जीवन जियो लेकिन आपदा के लिए तैयार भी रहो प्रभु श्री राम के तरह ।
जय श्री राम
Repost from ब्रह्मचर्य जीवन
ब्रह्मचर्य में सहायक योगासन :
1.सिद्धासन
2.शीर्षासन
3.सर्वांगासन
4.मत्स्यासन
5.पदांगगुष्ठआसन
6.पश्चिममोदातआसन
7.ब्रह्मचर्यआसन
8.पद्मासन
हस्तमैथून /वीर्यनाश /ब्रह्मचर्य खंडन करने के बुरे प्रभाव :
● हमारे ऊर्जा को छिन करती है ।
● आंखों की चारो ओर काली रेखाएं आ जाना ।
● धसी हुई आंखें होना।
● खून की कमी के कारण चेहरा पिला पढ़ जाना ।
● यादाश्त में कमी होना ।
● आंखों की रोशनी कम हो जाना ।
● पेसाब के साथ वीर्य का निकलना ।
● जननांग का टेढ़ा , छोटा और शिथिल होना ।
● उसपर नस का उभर जाना ।
● अंडकोष में दर्द रहना ।
● पीठ , कमर और जोड़ो में दर्द रहना ।
● हृदय की ढरकन तेज़ चलना ।
● मन का अस्थिर और चंचल रहना ।
● विचार शक्ति में कमी ।
● बुरे और कमुख विचार आना ।
● पुरुषों में यौन नपुंसकता और स्त्रियों में बांझपन का होना ।
नोट : ऊपर बताये गए सभी समस्या का समाधान के लिए कोई दवाखाना जाना मूर्खता होगी । इसका एक ही सरल समाधान है और वो है ब्रह्मचर्य ।
ब्रह्मचर्य / वीर्य संरक्षण के लाभ :
शारीरिक लाभ :
१. शारीरिक स्वास्थ्य सदैव अच्छा बना रहता है।
२. शरीर तेजोमय व आरोग्य बन जाता है।
३. शारीरिक बल की प्राप्ति होती है।
४. शरीर दीर्घायु को प्राप्त करता है।
५. मुख मण्डल पर अलौकिक आभा होती है।
६. उत्तम व संस्कारित सन्तान प्राप्त होती है।
७. समस्त इन्द्रिय समुह स्वस्थ्य एवं संयम में रहता है।
८. शरीर के त्यागने पर सद्गति मिलती है।
९. सहन शक्ति, उत्साह व साहस में वृद्धि होती है।
१०. गिलहरियों के समान शरीर में फुर्ती रहती है ।
बौद्विक लाभ :
१. ब्रह्मचर्य सदाचार (सज्जनों का आचरण) का आधार है।
२. ब्रह्मचर्य से समस्त दोषों का नाश होता है।
३. यह हमारी श्रेष्ठता एवं सम्पूर्ण उन्नति का साधन है।
४. वेद-अध्ययन एवं ईश्वर चिन्तन में मन लगता है।
५. जीवन के उत्थान एवं सफलता में सहायक है।
६. बौद्विक बल की प्राप्ति होती है।
७. स्मरण शक्ति तेज व स्थायी बनी रहती है।
८. मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की दिशा में प्रर्याप्त उन्नति करता हुआ सद्गति को प्राप्त करता है।
आत्मिक/ अध्यात्मिक लाभ :
●ब्रह्मचर्य ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने की आधारशिला है।
●मानसिक शक्तियों के विकास में सहायक है।
●आत्मिक बल बना रहता है। आत्मिक शक्तियाँ विकसित होती हैं।
●जीवन आनन्दमय बन जाता है।
●ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना में मन व हृदय लग जाता है।
●धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष स्वयं सिद्ध होने लगते हैं।
●आत्म ज्ञान एवं परमानन्द की प्राप्ति होती है।
समाजिक लाभ :
●समाज में पाप, विशेषकर वासना सम्बन्धी, कम होते हैं।
●समाज में आर्थिक उन्नति (सभी वर्गों में) एक समान होने की प्रवृति बनती जाती है।
●यम-नियम पालन की प्रेरणा मिलती है।
●गरीब-अमीर में आर्थिक असमानता कम होती जाती है।
●आज के सभी क्षेत्रों में प्रर्याप्त उन्नति होने की प्रकिया को बढ़ावा मिलता है।
●सभी जीवों के प्रति प्रेम बढ़ता जाता है।
●सभी प्राणियों के मानव अधिकारों की रक्षा होती है।
इस दिव्य ऊर्जा के संरक्षण से दृड़ इच्छा शक्ति , तेज़ बुद्धि , अच्छा व्यवहार और आध्यात्मिक उत्थान की प्राप्ति होती है ।युवाओं से मेरी अपील है की वे महत्वपूर्ण तरल प्रदार्थ-वीर्य के मूल्य को समझे ।वीर्य के प्रत्येक बून्द को संरक्षित करने के लिए आपको अपने स्तर भर भरपूर प्रयास करनी चाहिए ।और आपको इस काम ऊर्जा को रूपांतरित करने के बारे में सोचना चाहिए ।
#ब्रह्मचर्य_जीवन
