MPPSC MAINS ANSWER Writing ✍️ PRE + MAINS TEST SERIES
Open in Telegram
✍️ यह चैनल एमपीपीएससी की मुख्य परीक्षा की TEST SERIES+ MAINS ANSWER WRITING ✍️ +CASE STUDY की तैयारी करने के लिए टिप्स एवम modal Answer के लिए बनाया गया है @MPPSCTESTSERIES0 📞contact @MPEXAMGURUJIbot
Show moreThe country is not specifiedThe category is not specified
1 125
Subscribers
No data24 hours
No data7 days
No data30 days
Loading data
Similar Channels
No data
Any problems? Please refresh the page or contact our support manager.
Tags Cloud
No data
Any problems? Please refresh the page or contact our support manager.
Incoming and Outgoing Mentions
---
---
---
---
---
---
Attracting Subscribers
No data
Any problems? Please refresh the page or contact our support manager.
Channel Posts
Repost from MPPSC TEST SERIES 2023 + MAINS ANSWER WRITING MPPSC PRE 2022 TEST SERIES MPPSTTESTSERIES
MGICS 2019 Mains Test-01GS-1, Part - A 16-10-2022 Hind.pdf8.18 KB
| 2 | kitni post baddi hai forest mein. | 0 |
| 3 | 🙏👍 | 0 |
| 4 | [8/101] 🔝भारत और किस देश के बीच 'SKYROS' नामक एक अभ्यास आयोजित किया ?
🔝A practice called 'SKYROS' was organized between India and which country ? a) श्रीलंका /Sri Lanka b) ब्रिटेन /Britain c) फ्रांस /France d) रूस /Russia | 0 |
| 5 | औपनिवेशिक भारत में शिक्षा का विकास
अंग्रेज़ों से पूर्व भारतीय शिक्षा:
1830 के दशक में तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने बिहार तथा बंगाल की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के अध्ययन हेतु एक ईसाई प्रचारक और शिक्षाविद् विलियम एडम (William Adam) को नियुक्त किया। एडम ने तीन रिपोर्टें प्रस्तुत कीं जिसके निष्कर्ष निम्नलिखित थे:
ब्रिटिश अधीनता से पूर्व भारत की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित थी। आधुनिक विद्यालयों के विपरीत उस समय छोटी-छोटी पाठशालाएँ होती थीं जहाँ स्थानीय शिक्षक या गुरु द्वारा बच्चों को संस्कृत, व्याकरण, प्रायोगिक गणित, महाजनी खाता आदि के बारे में पढ़ाया जाता था।
ये पाठशालाएँ प्रायः किसी मंदिर, दुकान, किसी शिक्षक के घर, किसी वृक्ष के नीचे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चलती थीं। पाठशालाओं में कुल 10-20 विद्यार्थी ही होते थे और फसलों की कटाई के मौसम में पाठशालाएँ बंद रहती थीं ताकि बच्चे अपने घर के कामों में मदद कर सकें।
शिक्षक या गुरु की फीस निर्धारित नहीं थी। गरीब बच्चों से कम तथा आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों से अधिक फीस ली जाती थी। उस समय अलग-अलग कक्षाएँ नहीं चलती थीं बल्कि सभी छात्र एक ही जगह साथ-साथ बैठते थे और विभिन्न स्तर के विद्यार्थियों को शिक्षक अलग-अलग पढ़ाते थे।
प्राच्यवादी तथा पाश्चात्यवादी विवाद:
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में शिक्षा के प्रसार हेतु प्रारंभ में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई लेकिन भारत में बढ़ते साम्राज्य तथा राजनीतिक शक्ति के कारण उसे एक ऐसे वर्ग की आवश्यकता हुई जो कि प्रशासन और व्यापार के कार्यों में उसकी सहायता कर सके।
इसके लिये वर्ष 1813 में ब्रिटेन की संसद द्वारा पारित चार्टर अधिनियम में भारत में शिक्षा के विकास हेतु प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए के अनुदान का प्रावधान किया गया।
चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act, 1813) द्वारा निर्दिष्ट शिक्षा हेतु अनुदान के विषय पर कंपनी प्रशासन में मतभेद उत्पन्न हुआ कि भारत में शिक्षा का प्रारूप तथा माध्यम कैसा हो? इस मतभेद में दो पक्ष थे।
एक पक्ष प्राच्यवादियों (Orientalist) का था जो मानते थे कि भारत में पारंपरिक शिक्षा व ज्ञान को प्रोत्साहन देना चाहिये एवं शिक्षा का माध्यम स्थानीय भाषाएँ होनी चाहिये, जबकि दूसरा पक्ष पाश्चात्यवादियों (Anglicist) का था जो मानता था कि शिक्षा व्यावहारिक तथा उपयोगी होनी चाहिये और शिक्षा का माध्यम इंग्लिश होना चाहिये।
प्राच्यवादियों में विलियम जोन्स, जेम्स प्रिंसेप, चार्ल्स विल्किंस, एचएच विल्सन आदि शामिल थे, जबकि पाश्चात्यवादी शिक्षा के समर्थन में टीबी मैकाले, जेम्स मिल, चार्ल्स ग्रांट, विलियम विल्बरफोर्स आदि शामिल थे।
जेम्स मिल उपयोगितावादी विचारक था तथा उसका मानना था कि अंग्रेज़ों को भारतीय जनता को खुश करने या उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर शिक्षा नहीं देनी चाहिये बल्कि शिक्षा के माध्यम से उन्हें उपयोगी तथा व्यावहारिक ज्ञान देना चाहिये जिसमें पश्चिमी विज्ञान, तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा शामिल हो।
टीबी मैकाले प्राच्य शिक्षा का घोर विरोधी था और प्राच्य शिक्षा के बारे में उसका कथन था कि “एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय का केवल एक शेल्फ ही भारत और अरब के समूचे साहित्य के बराबर है।”
हालाँकि इस विवाद के बावजूद पाश्चात्यवादी शिक्षा के समर्थकों की बात भारत परिषद ने स्वीकार की तथा अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम, 1835 (English Education Act, 1835) पारित किया। इसके बाद भारत में अंग्रेज़ी को शिक्षा के माध्यम हेतु औपचारिक तौर पर स्वीकार किया गया।
मैकाले का स्मरण-पत्र (Macaulay’s Minute):
लॉर्ड मैकाले वर्ष 1834 में भारत आया तथा उसे गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद के विधि सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया था। उसकी नियुक्ति सार्वजनिक शिक्षा समिति के अध्यक्ष पद पर कर दी गई जिसका कार्य प्राच्यवादी तथा पाश्चात्यवादी विवाद पर मध्यस्थता करना था।
वर्ष 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अपना प्रसिद्ध स्मरण-पत्र (Minute) गवर्नर जनरल की परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जिसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने स्वीकार करते हुए अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम, 1835 पारित किया।
मैकाले के स्मरण-पत्र के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे:
इसके तहत पाश्चात्य शिक्षा का समर्थन करते हुए यह प्रावधान किया गया कि सरकार के सीमित संसाधनों का प्रयोग पश्चिमी विज्ञान तथा साहित्य के अंग्रेज़ी में अध्यापन हेतु किया जाए।
सरकार स्कूल तथा कॉलेज स्तर पर शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी करे तथा इसके विकास के लिये कई प्राथमिक विद्यालयों के स्थान पर कुछ स्कूल तथा कॉलेज खोले जाएँ। | 0 |
| 6 | SMJ TEST NO. 17 WITH ANSWER.pdf | 0 |
| 7 | No text... | 0 |
| 8 | MPPSC MAINS TEST 2019.pdfJOIN NOW 👇👇
@MP_PSC_NOTES
@MP_PSC_QUIZ
@MPEXAMGURUJI
🎯🎯🎯👆👆🎯🎯 | 0 |
| 9 | Ok | 0 |
| 10 | Lucas [6834064928] is sending a spam message.
Action: Banned 🚷 until 10/11/2023 09:58. | 0 |
| 11 | https://youtu.be/RTl_O-jZAGE | 0 |
| 12 | /newquiz@QuizBot | 0 |
| 13 | Hi M., Welcome to MPPSC MAINS ANSWER Writing ✍️ PRE + MAINS TEST SERIES group
🗓 Today : Sunday 30 July 2023
⏰ Hour : 06:14
This message will be deleted after 3 minutes | 0 |
| 14 | अपनी उपयोगिता के आधार पर हमारा ग्रुप जॉइन करें JOIN NOW 👇👇
@MP_PSC_NOTES
@MP_PSC_QUIZ
@MPPSCTESTSERIES0
@MPPSCANSWERWRITING0
For All MP govt EXAM PREPRATION @MPEXAMGURUJI
🎯🎯🎯👆👆🎯🎯 | 0 |
| 15 | Okay | 0 |
| 16 | TEST 04 #MGICS.pdf | 0 |
| 17 | Ye sv | 0 |
| 18 | प्राइवेट चैनल की लिंक 👉 NOW 👇👇
@MP_PSC_NOTES
@MP_PSC_QUIZ
@MPEXAMGURUJI
🎯🎯🎯👆👆🎯🎯 | 0 |
| 19 | MPPSC MAINS SOLVED @ MEENA.pdfJOIN NOW 👇👇
@MP_PSC_NOTES
@MP_PSC_QUIZ
@MPEXAMGURUJI
🎯🎯🎯👆👆🎯🎯 | 0 |
