『🖊️🖋️कलम-ए-इश्क🖋️🖊️』
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दिल के जज़्बात अल्फ़ाज़ बनकर कलम से निकलते है। ❤️Lᴏᴠᴇ Sʜᴀʏᴀʀɪ❤️ ☕Cʜᴀʏ Sʜᴀʏᴀʀɪ☕ 🖤Sᴀᴅ Sʜᴀʏᴀʀɪ🖤 💝Mᴏᴛɪᴠᴀᴛɪᴏɴᴀʟ Sʜᴀʏᴀʀɪ💝 💔Bʀᴀᴋᴇᴜᴘ Sʜᴀʏᴀʀɪ💔 Fᴏʀ Mᴏʀᴇ Jᴏɪɴ Oᴜʀ Cʜᴀɴɴᴇʟ ☞︎︎︎ @kalam_ae_ishk ☞︎︎︎ @collectionsofstatus ☞︎︎ @ingeniouswriters Owner☞︎︎︎ @m_rwriter
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बेचैन कर दे ये रात कैसी है,
मन का क्या है ये तो भटका ही रहता है।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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घर के ठीक एक शांत कोने में
लगी है मेरी मेज़।
मैं वहीं बैठी हूँ,
लेकिन मेरी काया भीतर तक थर-थर काँप रही है।
ऐसा लगता है... जैसे मेज़ के ठीक सामने,
अंधेरे में आकर खड़ा हो गया है मेरी मृत्यु का साया।
सामने उस परदे पर
अचानक फोन स्क्रॉल करते करते ...
तैर आया है सुर्ख लाल लहू का एक विदारक मंज़र।
उसे देखते ही मन एकदम से सुन्न हो जाता है,
जैसे भीतर कुछ टूटकर बिखर गया हो।
डर के मारे मैं अपनी आँखें कसकर मूंद लेती हूँ,
पास पड़े तकिए को छाती से भींच लेती हूँ।
पर यह डर भागता नहीं।
अब मुझे अपने ही घर के भीतर, अपनी ही जान का ख़तरा महसूस होने लगा है।
मैं समझ नहीं पा रही...
कि यह कोई भयावह दुःस्वप्न है, या यही आज का कड़वा सच है?
मेरी आवाज़ हलक में ही किसी नुकीली फाँस की तरह अटक गई है।
होंठों का निचला हिस्सा डर के मारे बुरी तरह बिलबिला रहा है,
और मेरा मन... मेरा मन उस ख़ूनी दृश्य की गलियों में भटक रहा है।
बचपन में अक्सर रेडियो पर एक गाना सुनती थी....
‘कितना बदल गया इंसान...’
तब वह सिर्फ़ एक गीत था।
पर आज, घर के इस कोने में बैठकर, बिना पलक झपकाए देखते हुए,
मुझे लग रहा है कि इंसान ही नहीं...
कितना बदल गया है मेरा देश!
जिन कोमल हाथों में इस वक़्त किताबें और फूल है,
उन मासूम बच्चों के सिर, हाथ और पैर लहूलुहान हैं।
मेरा हृदय इस विदारकता को अब और नहीं सह पा रहा।
मेरी आँखें डर के मारे पथरा गई हैं, वे अब पलक झपाना भी भूल चुकी हैं।
धड़कनें इतनी छोटी और तेज़ चल रही हैं,
जैसे मैं खुद इस वक़्त दम तोड़ने की कगार पर खड़ी हूँ।
जो आँखें कभी किसी का छोटा सा रोना भी नहीं देख पाती थीं,
वे आज देख रही हैं...
एक बेबस माँ को, रोते हुए बेटों को, और बिखरते पिताओं को।
भीतर एक कड़वा सवाल ज़हर की तरह फैल रहा है....
कि किसी की अनमोल जान से भी बढ़कर, कैसे हो सकता है कोई ऊँचा पद?
कोई कुर्सी इतनी भारी कैसे हो सकती है...
कि उसके लिए हमारे नायाब सितारे, सोनम वांगचुक की शांत आवाज़ को,
लाठियों और बर्बर विद्रोह के बूटों तले कुचल दिया जाए?
मैं फिर अपनी आँखें बंद कर लेती हूँ,
एक गहरे, अनजाने खौफ के साथ...
कि सत्ता की इस अंधी और बेरहम जंग में,
हम हमेशा के लिए खो न दें... अपने देश के किसी और मासूम सितारे को!
क्योंकि ,
सँवर रहा होगा घर
धुल रही चादरें, झाड़ी गई होगी ,
माँ रसोई में बना रही होंगी उनकी पसंद का स्वाद
कि कल ही तो लौटेंगे बच्चे
हॉस्टल से... परीक्षाएँ ख़त्म होने के बाद।
पर किसी को नहीं पता था
कि कमरों की दीवारों के पीछे,
रात-दिन जागकर, पन्नों से लड़ते-लड़ते
वे मासूम ख़ुद से हार चुके होंगे
क्या गुज़री होगी उस वक़्त उन पर?
जब घड़ियों की सुइयाँ टिक-टिक कर
उनके दिमाग पर हथौड़े चला रही थीं।
क्या मनःस्थिति रही होगी उन माता-पिता की
जिन्होंने आँखों के तारे भेजे थे दूर
एक उजले भविष्य के नाम पर?
कितना भयावह रहा होगा वह अंतिम दृश्य...
जब किताबों के अक्षरों ने
फाँस का रूप ले लिया।
जब डिग्रियों के कागज़ इतने भारी हो गए
कि जीवन की क़ीमत उनसे कम हो गई।
शिक्षा जीत गई, और साँसें हार गईं।
एक अजीब सा ख़ौफ़ तैर रहा है हवा में
कि कोई और कमरा सूना न हो,
कोई और माँ दरवाज़े पर खड़ी राह न तकती रह जाए।
सुनो बच्चों!
लौट आओ...
तुम्हारे नंबरों से बड़ी है तुम्हारी मुस्कान,
इस महँगी शिक्षा के बाज़ार में
अपनी जान को इतना सस्ता मत समझो।
#Savii
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हम से बयां हो न सकी,ये मासूम सी मुहब्बत,
तुम अगर समझ लेते, तो यार बहुत अच्छा था,
अभिनय में ही निकल गई,अब यार सारी जिंदगी,
उतार लेते जिंदगी में,किरदार बहुत अच्छा था...
पहली नजर में हो गए,हम तो यार तुम्हारे,
तुम भी मेरे होते तो,ये प्यार बहुत अच्छा था,
तुमने तो एक बार भी,मुड़ कर नहीं देखा,
दिल ने तुम्हे पुकारा,वो पुकार बहुत सच्चा था...
देखा एक अरसे बाद,तुम किसी के हो चुके थे,
एक ठोकर में बिखर गया,ये प्यार बहुत कच्चा था,
मेरे गीतों में तुम ही तुम हो,जिसको दुनियां गाती है,
अब तो कहने लगे है लोग,ये गीत बहुत अच्छा था...🖤
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उफ्फ ये बरसात, भीगती सड़क, सरसराती बयार, दौड़ता शहर, ठहरा सा मैं,,चाय की टपरी, टप-टप पानी का संगीत, हाथ में अदरक वाली कड़क चाय, गुमसुम आंखे, खामोश आवाज़, दिल में तुम्हारी यादें और उस पर बैकग्राउंड में बजता गाना......
जिंदा रहने के लिए तेरी कसम...
एक मुलाकात जरूरी है सनम....♥️
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ज़िक्र होगा इस कायनात में जब जब भी मेरा,
यकीनन तेरे गुनाहों की भी बात होगी साकी...
गर इश्क में अब भी आग व प्यास हो बाकी,
तो पा लेना अब तू मुझे अगले जनम में ही साकी...🖤
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उस ने कहा मुझे तेरी सूनी कलाइयाँ अच्छी नहीं लगती...चल तुझे मैं चूड़ियाँ दिलाता हूँ...!!
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दिल का दरवाज़ा बंद कर के देखो...
ज़िंदगी जीने में बेहद आसानी होगी...!!
मुफ़्त की सलाह...❣️
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वो घर का बड़ा बेटा जिम्मेदारियों से
घिरा बहुत है...🖇🥀
मैं उसकी अल्हड़-सी प्रेमिका,उस के
फ़ुर्सत के कुछ पल माँगती हूँ...!!🫂🫶🥀
#carbon_copy
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नशे से भी ज्यादा नशीली हैं,मेरे महबूब की आँखें....
ऐसा कोई ब्रांड नहीं जिस का नशा, मुझे न चढ़ा हो...!!🙈
#Carbon_copy
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तुम्हें सब normal लगेगा but होगा नहीं...
क्योंकि,कोई तुम्हें एक ही चीज़ के लिए समझाते-समझाते अंदर से टूट चुका होगा...!!
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कोई उसकी जान थी तो
कोई उसकी रानी...
बस मेरा ही क़िरदार उसकी कहानी में
भिखारिन का था...!!🥲😑
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कोई उसकी जान थी तो कोई उसकी रानी...
बस मेरा ही क़िरदार उसकी कहानी में भिखारिन का था...!!🥲😑
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तुम्हें पता हो कि,वो तुम्हारा नहीं...
और फ़िर...
भी उसे ही इश्क़ करते रहना...
बस इसे को अंधा प्यार कहते हैं...वत्स...!!🫢
और हम तुम 🫵 से अंधा प्यार करते हैं...🥹😂
#carbon_copy
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न तुम रह पाए, मेरे बिन,
न तेरे बिन गुज़ारा मेरा,
प्रेमी ह्रदय पे, जाने क्यों,
डाला, अहम ने डेरा...
बिन पानी, ज्यों न मीन बचे,
त्यों जीवन, तुम बिन लग रहा,
मिलन की आस, लगाऊं मैं,
संग तेरा चाहे, मन मेरा...♥️
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•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
तुम्हारे ख्यालों में जब से आने लगा हूं,
वजह बेवजह अब मुस्कराने लगा हूं,
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
🖊️☕𝒦𝒶𝓁𝒶𝓂-𝒜𝑒-𝐼𝓈𝒽𝓀 ☕🖊️
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•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
सुना है मैंने तुम अब शर्माने लगे हो,
मेरा नाम सुनते ही मुस्कराने लगे हो।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
🖊️☕𝒦𝒶𝓁𝒶𝓂-𝒜𝑒-𝐼𝓈𝒽𝓀 ☕🖊️
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बचपन कितना सच्चा होता है।
बड़ा से बड़ा इंसान भी अंदर से बच्चा होता है।
#Abhiwrites❣
