『🖊️🖋️कलम-ए-इश्क🖋️🖊️』
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दिल के जज़्बात अल्फ़ाज़ बनकर कलम से निकलते है। ❤️Lᴏᴠᴇ Sʜᴀʏᴀʀɪ❤️ ☕Cʜᴀʏ Sʜᴀʏᴀʀɪ☕ 🖤Sᴀᴅ Sʜᴀʏᴀʀɪ🖤 💝Mᴏᴛɪᴠᴀᴛɪᴏɴᴀʟ Sʜᴀʏᴀʀɪ💝 💔Bʀᴀᴋᴇᴜᴘ Sʜᴀʏᴀʀɪ💔 Fᴏʀ Mᴏʀᴇ Jᴏɪɴ Oᴜʀ Cʜᴀɴɴᴇʟ ☞︎︎︎ @kalam_ae_ishk ☞︎︎︎ @collectionsofstatus ☞︎︎ @ingeniouswriters Owner☞︎︎︎ @m_rwriter
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•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
फूलों सी मेरी बहना
कलियों सी उसकी मुस्कान
भगवान से यही दुआ
पूरे हों तुम्हारे सारे अरमान
ना कोई अधूरी ख्वाहिश हो
पूरी सारी हो जाएं
मेरी सारी खुशियां भी
उस पगलू को मिल जाएं....!!
Happy birthday meri pagluuu ANKITA😘🥰🥰❤️❤️❤️
🖊️☕𝒦𝒶𝓁𝒶𝓂-𝒜𝑒-𝐼𝓈𝒽𝓀 ☕🖊️
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गार्डिशों के हैं मारे हुए न
दुश्मनों के सताये हुए हैं
जितने भी ज़ख्म हैं मेरे दिल पर
दोस्तों के लगाए हुए हैं 🌻✨
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सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते
हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते
का'बे में मुसलमान को कह देते हैं काफ़िर
बुत-ख़ाने में काफ़िर को भी काफ़िर नहीं कहते
रिंदों को डरा सकते हैं क्या हज़रत-ए-वाइ'ज़
जो कहते हैं अल्लाह से डर कर नहीं कहते
का'बे ही में हर सज्दे को कहते हैं इबादत
मय-ख़ाने में हर जाम को साग़र नहिं कहते
हर बार नए शौक़ से है अर्ज़-ए-तमन्ना
सौ बार भी हम कह के मुकर्रर नहीं कहते
मय-ख़ाने के अंदर भी वो कहते नहीं मय-ख़्वार
जो बात कि मय-ख़ाने के बाहर नहीं कहते
क्या अहल-ए-जहाँ तुझ को सितमगर नहीं कहते
कहते तो हैं लेकिन तिरे मुँह पर नहीं कहते
कहते हैं मोहब्बत फ़क़त उस हाल को 'बिस्मिल'
जिस हाल को हम उन से भी अक्सर नहीं कहते
Bismil saeedi
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कोई तो बेवफ़ा होता है
या तो हीर
या तो रांझा
नहीं तो फ़िर क़िस्मत...
तीनों की वफ़ादारी ज़रूरी है
मुक़म्मल इश्क़ के लिए...!!
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क्यूँ होते हो बेहिसाब, कुछ तो एहतियात रखो,
नफरत हो कि मुहोब्बत कुछ तो हिसाब रखो...
नींद आँखों से चली जाती है अक्सर बेहद हो कर,
ख्वाब इतने भी ना अपनी आँखों मे बेशुमार रखो...
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उससे इश्क करके मैंने,कोई खता नहीं की,
इसीलिए बिछड़ते वक्त मैंने उसे विदा नहीं दी...
यह मेरी मोहब्बत ही है,मेरे हमदर्द के लिए,
कि उसकी दी निशानी मैंने,खुद से जुदा नहीं की...
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ग़ज़ल -
कुछ कहूँ तुम्हे या ना कहूँ समझ नहीं आता मुझे
मग़र मैं बस जानता हूँ इतना कि हाँ तुम्हें चाहता हूँ
बड़ा बेचैन हूँ कुछ दिनों से तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ
तन्हाइयों को छोड़कर मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ
जाने क्यों मुझे खिंचती है अपनी और ये तेरी जुल्फें
मैं हमेशा इन ज़ुल्फ़ों की खुशबू में जीना चाहता हूँ
जादु भरी तुम्हारी ये दोंनो आँखे क्या कमाल करती हैं
मैं इन जादुई निगाहों के बारे में लिखना चाहता हूँ
तुम्हारी मुस्कान का कायल हूँ मैं कुछ यूँ अनीर
मैं तुम्हारी इस मुस्कुराहट को पाना चाहता हूँ
तुम्हारी आँखों से नीचे देखने का मन नहीं करता
ग़र देखूँ तो तुम्हें हमेशा मुस्कुराते देखना चाहता हूँ
जानता हूँ तुम भी शौकीन हो लिखने की मेरी तरह
तुम्हें लिख लिया मैंने बहुत अब तुम्हे गाना चाहता हूँ
और मैं तमाम रात जागकर बस यही सोचता रहा
मैं अग़र तुम्हे पा नहीं सकता तो क्या चाहता हूँ ।
By Atul baliyan
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Repost from #𝔪_𝔯𝔴𝔯𝔦𝔱𝔢𝔯
बेचैन कर दे ये रात कैसी है,
मन का क्या है ये तो भटका ही रहता है।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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घर के ठीक एक शांत कोने में
लगी है मेरी मेज़।
मैं वहीं बैठी हूँ,
लेकिन मेरी काया भीतर तक थर-थर काँप रही है।
ऐसा लगता है... जैसे मेज़ के ठीक सामने,
अंधेरे में आकर खड़ा हो गया है मेरी मृत्यु का साया।
सामने उस परदे पर
अचानक फोन स्क्रॉल करते करते ...
तैर आया है सुर्ख लाल लहू का एक विदारक मंज़र।
उसे देखते ही मन एकदम से सुन्न हो जाता है,
जैसे भीतर कुछ टूटकर बिखर गया हो।
डर के मारे मैं अपनी आँखें कसकर मूंद लेती हूँ,
पास पड़े तकिए को छाती से भींच लेती हूँ।
पर यह डर भागता नहीं।
अब मुझे अपने ही घर के भीतर, अपनी ही जान का ख़तरा महसूस होने लगा है।
मैं समझ नहीं पा रही...
कि यह कोई भयावह दुःस्वप्न है, या यही आज का कड़वा सच है?
मेरी आवाज़ हलक में ही किसी नुकीली फाँस की तरह अटक गई है।
होंठों का निचला हिस्सा डर के मारे बुरी तरह बिलबिला रहा है,
और मेरा मन... मेरा मन उस ख़ूनी दृश्य की गलियों में भटक रहा है।
बचपन में अक्सर रेडियो पर एक गाना सुनती थी....
‘कितना बदल गया इंसान...’
तब वह सिर्फ़ एक गीत था।
पर आज, घर के इस कोने में बैठकर, बिना पलक झपकाए देखते हुए,
मुझे लग रहा है कि इंसान ही नहीं...
कितना बदल गया है मेरा देश!
जिन कोमल हाथों में इस वक़्त किताबें और फूल है,
उन मासूम बच्चों के सिर, हाथ और पैर लहूलुहान हैं।
मेरा हृदय इस विदारकता को अब और नहीं सह पा रहा।
मेरी आँखें डर के मारे पथरा गई हैं, वे अब पलक झपाना भी भूल चुकी हैं।
धड़कनें इतनी छोटी और तेज़ चल रही हैं,
जैसे मैं खुद इस वक़्त दम तोड़ने की कगार पर खड़ी हूँ।
जो आँखें कभी किसी का छोटा सा रोना भी नहीं देख पाती थीं,
वे आज देख रही हैं...
एक बेबस माँ को, रोते हुए बेटों को, और बिखरते पिताओं को।
भीतर एक कड़वा सवाल ज़हर की तरह फैल रहा है....
कि किसी की अनमोल जान से भी बढ़कर, कैसे हो सकता है कोई ऊँचा पद?
कोई कुर्सी इतनी भारी कैसे हो सकती है...
कि उसके लिए हमारे नायाब सितारे, सोनम वांगचुक की शांत आवाज़ को,
लाठियों और बर्बर विद्रोह के बूटों तले कुचल दिया जाए?
मैं फिर अपनी आँखें बंद कर लेती हूँ,
एक गहरे, अनजाने खौफ के साथ...
कि सत्ता की इस अंधी और बेरहम जंग में,
हम हमेशा के लिए खो न दें... अपने देश के किसी और मासूम सितारे को!
क्योंकि ,
सँवर रहा होगा घर
धुल रही चादरें, झाड़ी गई होगी ,
माँ रसोई में बना रही होंगी उनकी पसंद का स्वाद
कि कल ही तो लौटेंगे बच्चे
हॉस्टल से... परीक्षाएँ ख़त्म होने के बाद।
पर किसी को नहीं पता था
कि कमरों की दीवारों के पीछे,
रात-दिन जागकर, पन्नों से लड़ते-लड़ते
वे मासूम ख़ुद से हार चुके होंगे
क्या गुज़री होगी उस वक़्त उन पर?
जब घड़ियों की सुइयाँ टिक-टिक कर
उनके दिमाग पर हथौड़े चला रही थीं।
क्या मनःस्थिति रही होगी उन माता-पिता की
जिन्होंने आँखों के तारे भेजे थे दूर
एक उजले भविष्य के नाम पर?
कितना भयावह रहा होगा वह अंतिम दृश्य...
जब किताबों के अक्षरों ने
फाँस का रूप ले लिया।
जब डिग्रियों के कागज़ इतने भारी हो गए
कि जीवन की क़ीमत उनसे कम हो गई।
शिक्षा जीत गई, और साँसें हार गईं।
एक अजीब सा ख़ौफ़ तैर रहा है हवा में
कि कोई और कमरा सूना न हो,
कोई और माँ दरवाज़े पर खड़ी राह न तकती रह जाए।
सुनो बच्चों!
लौट आओ...
तुम्हारे नंबरों से बड़ी है तुम्हारी मुस्कान,
इस महँगी शिक्षा के बाज़ार में
अपनी जान को इतना सस्ता मत समझो।
#Savii
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हम से बयां हो न सकी,ये मासूम सी मुहब्बत,
तुम अगर समझ लेते, तो यार बहुत अच्छा था,
अभिनय में ही निकल गई,अब यार सारी जिंदगी,
उतार लेते जिंदगी में,किरदार बहुत अच्छा था...
पहली नजर में हो गए,हम तो यार तुम्हारे,
तुम भी मेरे होते तो,ये प्यार बहुत अच्छा था,
तुमने तो एक बार भी,मुड़ कर नहीं देखा,
दिल ने तुम्हे पुकारा,वो पुकार बहुत सच्चा था...
देखा एक अरसे बाद,तुम किसी के हो चुके थे,
एक ठोकर में बिखर गया,ये प्यार बहुत कच्चा था,
मेरे गीतों में तुम ही तुम हो,जिसको दुनियां गाती है,
अब तो कहने लगे है लोग,ये गीत बहुत अच्छा था...🖤
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उफ्फ ये बरसात, भीगती सड़क, सरसराती बयार, दौड़ता शहर, ठहरा सा मैं,,चाय की टपरी, टप-टप पानी का संगीत, हाथ में अदरक वाली कड़क चाय, गुमसुम आंखे, खामोश आवाज़, दिल में तुम्हारी यादें और उस पर बैकग्राउंड में बजता गाना......
जिंदा रहने के लिए तेरी कसम...
एक मुलाकात जरूरी है सनम....♥️
