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Jambudweepe जम्बूद्वीप

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वंदे मातरम #Bharat #Hindu

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कोई मर्द लाशों के ढेर में से किसी बच्चे की लाश निकालकर उसे फटी फटी आँखों से देख रहा था.. जब प्लेट फार्म पर जमा भीड़ को आभास हुआ कि हुआ क्या है तो उन्माद की लहर दौड़ गयी... स्टेशन मास्टर का सारा शरीर सुन्न पड़ गया था वह लाशों की कतारो के बीच गुजर रहा था... हर डिब्बे में यही द्रश्य था अंतिम डिब्बे तक पहुँचते पहुँचते उसे मतली होने लगी और जब वह ट्रेन से उतरा तो उसका सर चकरा रहा था उनकी नाक में मौत की बदबू बसी हुई थी और वह सोच रहे थे की रब ने यह सब कुछ होने कैसे दिया ? जिहादी कौम इतनी निर्दयी हो सकती है कोई सोच भी नहीँ सकता था....उन्होने पीछे मुड़कर एक बार फ़िर ट्रेन पर नज़र डाली... हत्यारों ने अपना परिचय देने के लिये अंतिम डिब्बे पर मोटे मोटे सफेद अक्षरों से लिखा था..... "यह गाँधी और नेहरू को हमारी ओर से आज़ादी का नज़राना है " ! हिन्दुओं और सिखों की लाखों लाशों पर बनी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर नेहरू ने इस देश पर शासन किया।।। --- 🇮🇳😢 इतिहास के उन दर्दनाक अध्यायों को याद करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उस त्रासदी को कभी न भूलें। 🩵 टेलीग्राम चैनल https://telegram.me/jambudweepe 💚 व्हाट्सएप चैनल https://whatsapp.com/channel/0029VaABPDO9Gv7QsuzvhR1H 💛 अराटाई चैनल https://aratt.ai/@lokeshkushwaha

😢 15 अगस्त 1947… एक तरफ आज़ादी का जश्न था, दूसरी तरफ लाखों परिवारों के लिए मातम! 🇮🇳 क्या आज़ादी की उस कीमत को हम सच में याद रखते हैं? 💔 वे ट्रेनें… जिनमें मुसाफिर नहीं, लाशें आती थीं। 😢 वो परिवार… जो रातों-रात अपने घर, जमीन और अपनों से बेदखल हो गए। लाखों ऐसी बहने जो सोने चाँदी के बरतनों में खाना खाती थी जिनके कोमल पैर कभी जमीं पर नहीं पड़े थे उन्हें 7 दिनों तक नंगा करके पाकिस्तान में घुमाया गया जहाँ भीड़ एक बार शुरू होती तो एक एक लड़की से 12 से 15 लोग रेप करते और 7 वे दिन सिर्फ़ 3 लड़कियां ज़िंदा बची उन्ही को काट के पकाकर उस भीड़ ने खाया तुम्हारे पूर्वजों को आजादी का ये नजराना मिला था और तुम इसे आजादी कहते हो । किसी घर में कोई मर जाता है तो उस दिन का त्योहार नहीं मनाया जाता जिस दिन लाखों लोग मर गए और लाखों के घर छिन गए उस दिन आप मनाओ आजादी का जश्न । अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना" पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)😢 अमृतसर का लाल इंटो वाला रेलवे स्टेशन अच्छा खासा शरणार्थियों कैम्प बना हुआ था । पंजाब के पाकिस्तानी हिस्से से भागकर आये हुए हज़ारों हिन्दुओ-सिखों को यहाँ से दूसरे ठिकानों पर भेजा जाता था ! वे धर्मशालाओं में टिकट की खिड़की के पास, प्लेट फार्मों पर भीड़ लगाये अपने खोये हुए मित्रों और रिश्तेदारों को हर आने वाली गाड़ी मै खोजते थे... 15 अगस्त 1947 को तीसरे पहर के बाद स्टेशन मास्टर छैनी सिंह अपनी नीली टोपी और हाथ में सधी हुई लाल झंडी का सारा रौब दिखाते हुए पागलों की तरह रोती-बिलखती भीड़ को चीरकर आगे बढे... थोड़ी ही देर में 10 डाउन, पंजाब मेल के पहुँचने पर जो द्रश्य सामने आने वाला था,उसके लिये वे पूरी तरह तैयार थे.... मर्द और औरतें थर्ड क्लास के धूल से भरे पीले रंग के डिब्बों की और झपट पडेंगे और बौखलाए हुए उस भीड़ में किसी ऐसे बच्चे को खोजेंगे, जिसे भागने की जल्दी में पीछे छोड़ आये थे ! चिल्ला चिल्ला कर लोगों के नाम पुकारेंगे और व्यथा और उन्माद से विहल होकर भीड़ में एक दूसरे को ढकेलकर-रौंदकर आगे बढ़ जाने का प्रयास करेंगे ! आँखो में आँसू भरे हुए एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक भाग भाग कर अपने किसी खोये हुए रिश्तेदार का नाम पुकारेंगे! अपने गाँव के किसी आदमी को खोजेंगे कि शायद कोई समाचार लाया हो ! आवश्यक सामग्री के ढेर पर बैठा कोई माँ बाप से बिछडा हुआ कोई बच्चा रो रह होगा, इस भगदड़ के दौरान पैदा होने वाले किसी बच्चे को उसकी माँ इस भीड़-भाड़ के बीच अपना ढूध पिलाने की कोशिश कर रही होगी.... स्टेशन मास्टर ने प्लेट फार्म एक सिरे पर खड़े होकर लाल झंडी दिखा ट्रेन रुकवाई .... जैसे ही वह फौलादी दैत्याकार गाड़ी रुकी, छैनी सिंह ने एक विचित्र द्रश्य देखा..चार हथियार बंद सिपाही, उदास चेहरे वाले इंजन ड्राइवर के पास अपनी बंदूकें सम्भाले खड़े थे !! जब भाप की सीटी और ब्रेको के रगड़ने की कर्कश आवाज बंद हुई तो स्टेशन मास्टर को लगा की कोई बहुत बड़ी गड़बड़ है... प्लेट फार्म पर खचाखच भरी भीड़ को मानो साँप सुंघ गया हो..उनकी आँखो के सामने जो द्रश्य था उसे देखकर वह सन्नाटे में आ गये थे ! स्टेशन मास्टर छेनी सिंह आठ डिब्बों की लाहौर से आई उस गाड़ी को आँखे फाड़े घूर रहे थे! हर डिब्बे की सारी खिड़कियां खुली हुई थी, लेकिन उनमें से किसी के पास कोई चेहरा झाँकता हुआ दिखाई नहीँ दे रहा था, एक भी दरवाजा नहीँ खुला.. एक भी आदमी नीचे नहीँ उतरा,उस गाड़ी में इंसान नहीँ भूत आये थे.. स्टेशन मास्टर ने आगे बढ़कर एक झटके के साथ पहले डिब्बे के द्वार खोला और अंदर गये.. एक सेकिंड में उनकी समझ में आ गया कि उस रात न.10 डाउन पंजाब मेल से एक भी शरणार्थी क्यों नही उतरा था.. वह भूतों की नहीँ बल्कि लाशों की गाड़ी थी.. उनके सामने डिब्बे के फर्श पर इंसानी कटे-फटे जिस्मों का ढेर लगा हुआ था.. किसी का गला कटा हुआ था.किसी की खोपडी चकनाचूर थी ! किसी की आते बाहर निकल आई थी... डिब्बों के आने जाने वाले रास्ते मे कटे हुए हाथ-टांगे और धड़ इधर उधर बिखरे पड़े थे.. इंसानों के उस भयानक ढेर के बीच से छैनी सिंह को अचानक किसी की घुटी.घुटी आवाज सुनाई दी ! यह सोचकर की उनमें से शायद कोई जिन्दा बच गया हो उन्होने जोर से आवाज़ लगाई.. "अमृतसर आ गया है यहाँ सब हिंदू और सिख है. पुलिस मौजूद है, डरो नहीँ".. उनके ये शब्द सुनकर कुछ मुरदे हिलने डुलने लगे.. इसके बाद छैनी सिंह ने जो द्रश्य देखा वह उनके दिमाग पर एक भयानक स्वप्न की तरह हमेशा के लिये अंकित हो गया ... एक स्त्री ने अपने पास पड़ा हुआ अपने पति का 'कटा सर' उठाया और उसे अपने सीने से दबोच कर चीखें मारकर रोने लगी... उन्होंने बच्चों को अपनी मरी हुई माओ के सीने से चिपट्कर रोते बिलखते देखा..

संजय आज़ाद पिछले 2-3 सालों से लगातार अपनी बेटी से सनातन धर्म के देवी-देवताओं के लिए अपमानजनक पोस्ट करवाता आ रहा है, लेकिन संजय व नीशू पर कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई । अब नीशू आज़ाद बोल रही है कि ये ट्वीट AI से बने हैं जबकि ये ट्वीट इसी ने किए हैं और अभी भी इसकी ID पर दिख रहे हैं। ये दोनों बाप-बेटी आखिर क्यों केवल सनातन धर्म पर ही आघात कर रहे हैं । अब किसी ने इनका इलाज कर दिया तो मैं देख रहा था कि हमारे #ऋषिकेश में कुछ लोग, उस इलाज करने वाले का ही विरोध करने लगे हैं।

महिलाओं को घरों तक सीमित रखने की बात कही जा रही है तो क्या यह महिलाओं की आजादी और समानता के खिलाफ नहीं है और जिसके बाद बवाल मच गया। पत्रकार को लेकर कट्टरपंथियों ने बहस शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नाराजगी दिखाई गई। आलोचना हुई और कार्यवाही की मांग भी उठी। सवाल पूछने वाली पत्रकार पर ऐसा दबाव बना कि आखिरकार टीवी चैनल और उस पत्रकार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। इतना ही नहीं चैनल ने उसके वीडियो को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डिलीट कर दिया। राहुल गांधी जी तो देश भर में घूमकर स्मैश पैट्रिआर्की की बात करते हैं और उनके ही शासित राज्य में एक महिला पत्रकार को महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाना भारी पड़ गया। कि एक पुरुष मौलाना के समर्थक पुरुषों की कट्टरपंथी भीड़ के सामने अपनी जबान सरेंडर करके माफी मांगनी पड़ गई। यही सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर किसी मौलाना जिसका नाम एपी अबू बकर हो, वह कोई जहालत भरी बात करे तो उसके बयान पर सवाल उठाने के बाद पत्रकार को ही सफाई देनी पड़े। माफी मांगनी पड़े और चैनल को वीडियो तक हटाने पड़े तो क्या यह प्रेस फ्रीडम है? क्या यह बेसिक फ्रीडम है जो हमें संविधान देता है? क्या यह पितृसत्ता नहीं है? इसी जगह कोई हिंदू इस तरह की बात बोल भी देता। किसी प्रसिद्ध संत की बात तो छोड़िए देश से लेकर दुनिया में आलोचनाएं हो रही होती और उसके बहाने सनातन और हिंदू परंपराओं को न सिर्फ कटघरे में खड़ा किया गया होता बल्कि धर्म का मजाक भी बनाया जाता। और अगर कोई सवाल उठाता तो सब कुछ सेक्युलरिज्म, लिबरलिज्म, प्रोग्रेसिव और फ्रीडम ऑफ स्पीच के ब्रैकेट में बांधकर डिफेंस भी कर लिया जाता। बंगाल की ही बात ले लीजिए। बंगाल में एक टीवी चैनल ने सीधे हिंदुओं को भगवाधारी गुंडा कह दिया। हिंदू विरोध कर रहे हैं। सड़कों पर उतर कर विरोध कर रहे हैं और फिर भी चैनल ने माफी तो छोड़िए हिंदुओं के प्रोटेस्ट को रिकॉग्नाइज तक नहीं किया। और केरल में पत्रकार ने कुछ भी नहीं कहा था। सिंपल सा जो बेसिक ह्यूमन नेचर सोचता है कि आप कैसे महिलाओं को घर में कैद करने का फरमान दे सकते हैं। इतनी ही बात कही गई थी। उस पर पूरा बवाल कर दिया गया। अगर वाजिब सवाल पूछने की कीमत इस तरह से चुकानी पड़ेगी और आजादी इस बात पर निर्भर करेगी कि सवाल किससे पूछा जा रहा है। कहीं वह कोई मुस्लिम मौलाना तो नहीं तो फिर केरलम को खुद से पूछना होगा। क्या यह वही प्रोग्रेसिव केरलम है जिसकी तस्वीर दुनिया को दिखाई जाती है और सबसे बड़ा सवाल क्या दो अलग-अलग पैमानों से चलने वाली फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को सचमुच आजादी कहा जा सकता है?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साल 2009 में एक पुस्तक समीक्षा के दौरान महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना हिंदू धर्म के त्रिमूर्ति यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की थी। उनके इस बयान के पीछे का तर्क यह था कि महात्मा गांधी ने आधुनिक भारतीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन का निर्माण किया, इसलिए वे सृष्टा के रूप में ब्रह्मा हैं। जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद लोकतांत्रिक और संस्थागत ढांचे को संभाला और देश को आगे बढ़ाया, जिसके कारण वे पालक के रूप में विष्णु हैं। मोहम्मद अली जिन्ना के द्वि-राष्ट्र सिद्धांत और अड़ियल रवैये के कारण 1947 में अखंड भारत का विभाजन हुआ, जिसने पुराने भारत के भूगोल को नष्ट कर दिया, इसलिए उन्हें संहारकर्ता के रूप में महेश यानी शिव कहा गया। इस टिप्पणी के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में काफी बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई थी और कहा था कि देश का विभाजन करने वाले जिन्ना की तुलना भगवान शिव से करना पूरी तरह अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। बढ़ते विवाद को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने भी खुद को इस बयान से पूरी तरह अलग कर लिया था और इसे जयराम रमेश की निजी टिप्पणी करार दिया था। 🩵 टेलीग्राम चैनल https://telegram.me/jambudweepe 💚 व्हाट्सएप चैनल https://whatsapp.com/channel/0029VaABPDO9Gv7QsuzvhR1H 💛 अराटाई चैनल https://aratt.ai/@lokeshkushwaha

जयंत चौधरी को चवन्नी बोलकर अखिलेश ने जाटों और किसानों को बुरी तरह नाराज कर दिया पश्चिमी यूपी में भारी नाराजगी

जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित के पास कोई डिग्री नहीं थी। विजयलक्ष्मी पंडित कभी कॉलेज या यूनिवर्सिटी नहीं गई। अब सवाल यह उठता है कि विजयलक्ष्मी पंडित के भाई जवाहरलाल नेहरू तो मनुस्मृति से प्रेरित नहीं थे, विजयलक्ष्मी पंडित के पिताजी मोतीलाल नेहरू तो मनुस्मृति से प्रेरित नहीं थे, तो फिर उन्हें पढ़ने के लिए क्यों नहीं भेजा। उन्हें घर में ही क्यों पढ़ाया गया , जिससे वह कभी डिग्री नहीं प्राप्त कर सकीं। अगर सहमत हो तो सब्सक्राइब और लाइक जरूर करें। साथ में अपने मित्रों को शेयर भी कीजिए। https://youtube.com/shorts/RR8TyprAgAw?si=UqNlRmsTIy7UN79W

का जाप करें और अंत में अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखें। --- 🌿 जन्माष्टमी पर सबसे पुण्यकारी 7 काम ① श्रीकृष्ण का नाम-जप ② तुलसी अर्पित करना ③ माखन-मिश्री का भोग ④ गीता का पाठ ⑤ गाय को चारा खिलाना ⑥ जरूरतमंद को भोजन/दान ⑦ मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और आरती और सबसे महत्वपूर्ण—भक्ति और श्रद्धा रखें; पूजा में सामग्री से ज्यादा भावना का महत्व माना जाता है। टेलीग्राम चैनल (ज्योतिष) https://telegram.me/jyotishh व्हाट्सएप चैनल (ज्योतिष) https://whatsapp.com/channel/0029Va5odayGufJ1CRjXQ22a अराटाई चैनल (ज्योतिष) https://aratt.ai/@jyotishh

🦚*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026* 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन जन्माष्टमी व्रत रखा जाएगा और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में किया जाएगा। 📅 2026 की मुख्य तिथियां जन्माष्टमी: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 अष्टमी तिथि प्रारंभ: 3 सितंबर शाम लगभग 4:55 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 4 सितंबर दोपहर लगभग 2:43 बजे रोहिणी नक्षत्र: 3 सितंबर दोपहर लगभग 2:59 बजे से 4 सितंबर दोपहर लगभग 1:34 बजे तक निशीथ पूजा: 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर रात 12:43 बजे तक कई परंपराओं में व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है; पारण की विधि/समय के अनुसार अंतर हो सकता है। *जन्माष्टमी पर 15 साल बाद बनेगा अष्टमी-रोहिणी का संयोग* इस दिन अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद होने वाला बताया जा रहा है। *धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भी इसी संयोग में हुआ था।* --- 🪷 जन्माष्टमी की पूजा कैसे करें? 1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान की सफाई करें और श्रीकृष्ण की बाल-स्वरूप प्रतिमा या लड्डू गोपाल को स्थापित करें। 2. व्रत का संकल्प पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल हाथ में लेकर संकल्प करें: “ॐ विष्णवे नमः। अद्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये। श्रीकृष्णप्रीत्यर्थं मम सर्वपापक्षयपूर्वकं सर्वसौभाग्य-आरोग्य-धन-धान्य-पुत्र-पौत्रादि समृद्ध्यर्थं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतं करिष्ये।” फिर जल छोड़ दें। 3. दिनभर भगवान का स्मरण “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। संभव हो तो दिनभर सात्त्विक रहें और कृष्ण जन्म की कथा, भागवत या श्रीकृष्ण के भजन सुनें। 4. रात में जन्मोत्सव की तैयारी पूजा के लिए रखें: बाल कृष्ण/लड्डू गोपाल की प्रतिमा पंचामृत ,दूध,दही,घी,शहद गंगाजल/शुद्ध जल,तुलसी दल,माखन-मिश्री,फल,पंजीरी,चंदन,रोली/अक्षत,पीले वस्त्र,फूल,धूप-दीप,नैवेद्य --- 🕉️ मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा निशीथ काल में सबसे पहले भगवान का पंचामृत अभिषेक करें। अभिषेक करते समय: “ॐ कृष्णाय नमः।” फिर दूध, दही, घी, शहद और अंत में शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं। चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी अर्पित करें। विशेष मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।” कम से कम 108 बार जाप करना बहुत अच्छा माना जाता है। फिर माखन-मिश्री, फल, पंजीरी आदि का भोग लगाएं। --- 🪔 जन्मोत्सव के समय क्या करें? रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएं। घंटी और शंख बजाएं। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” बोलते हुए जन्मोत्सव करें। फिर आरती करें। इसके बाद श्रीकृष्ण की आरती करके प्रसाद वितरित करें। --- 🍚 व्रत में क्या खाएं? यदि निर्जल व्रत संभव न हो तो फलाहार किया जा सकता है। फलाहार में सामान्यतः: फल,दूध,दही,मखाना,सिंघाड़े का आटा,साबूदाना,आलू,शकरकंद मूंगफली सेंधा नमक लिया जाता है। अनाज और सामान्य नमक से बचना चाहिए। --- ❌ जन्माष्टमी पर क्या नहीं करना चाहिए? 1. मांसाहार न करें। 2. शराब/नशे से बचें। 3. अनावश्यक क्रोध और विवाद न करें। 4. किसी का अपमान न करें। 5. झूठ और छल से बचें। 6. भगवान को भोग लगाए बिना भोजन न करें। 7. तुलसी दल को बिना आवश्यकता न तोड़ें। 8. व्रत में अनाज न लें। 9. देर रात तक मनोरंजन में समय न गंवाएं—समय मिले तो कृष्ण नाम, भजन और कथा करें। 10. केवल दिखावे के लिए कठिन निर्जल व्रत न करें; अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें। --- 🌟 12 राशियों के लिए जन्माष्टमी के विशेष उपाय मेष - श्रीकृष्ण को लाल/गुलाबी पुष्प अर्पित करें और 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जप करें। वृषभ - माखन-मिश्री का भोग लगाएं और गाय को हरा चारा खिलाएं। मिथुन - भगवान को तुलसी दल अर्पित करें और ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का जाप करें। कर्क - दूध से भगवान का अभिषेक करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। सिंह - पीले पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित करें तथा गीता का पाठ करें। कन्या - तुलसी की पूजा करें और भगवान को धनिया/पंजीरी का भोग लगाएं। तुला - सुगंधित पुष्प अर्पित करें और राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करें। वृश्चिक - भगवान को मिश्री का भोग लगाकर “हरे कृष्ण” महामंत्र का जाप करें। धनु - पीली मिठाई या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और विष्णु सहस्रनाम/गीता पाठ करें। मकर - गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराएं और कृष्ण मंदिर में दीपक जलाएं। कुंभ - कृष्ण नाम का सामूहिक जाप करें और मंदिर में फल/प्रसाद चढ़ाएं। मीन - भगवान का पंचामृत अभिषेक करके पीले फूल और तुलसी अर्पित करें। ⭐ सभी राशियों के लिए सबसे सरल उपाय जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के सामने 11 या 108 बार: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

*वनवास के दौरान माता सीता जी को प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था। *कुदरत से प्रार्थना की "हे वन देवता ! आसपास जहाँ कहीं पानी हो, वहाँ जाने का मार्ग कृपा कर सुझाईये। *तभी वहाँ एक मयूर (मोर) ने आकर श्रीरामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है, चलिए मैं आपका मार्ग पथ-प्रदर्शक बनता हूँ, किंतु मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। *श्रीरामजी ने पूछा ~ वह क्यों ? *तब मयूर ने उत्तर दिया कि ~ मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप चलते हुए आएंगे, इसलिए मार्ग में मैं अपना एक-एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा, *उसके सहारे आप‌ जलाशय तक पहुँच ही जाओगे।* *यहां पर एक बात स्पष्ट कर दूं कि मयूर के पंख, एक विशेष समय एवं एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं, अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाती है और वही हुआ।* *अंत में जब मयूर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है, तब उसने मन में ही कहा कि वह कितना भाग्यशाली है, कि जो जगत की प्यास बुझाते हैं, ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ।* *'मेरा जीवन धन्य हो गया, अब मेरी कोई भी इच्छा शेष नहीं रही।'* *तभी भगवान श्रीराम ने मयूर से कहा कि मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर, अपने जीवन का त्यागकर मुझ पर जो ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंगा ....* *"तुम्हारे पंख अपने सिर पर धारण करके।"* *तत्पश्चात अगले जन्म में "श्री कृष्ण अवतार"- में उन्होंने अपने माथे(मुकुट) पर मयूर पंख को धारण कर वचन अनुसार उस मयूर का ऋण उतारा था।* *"तात्पर्य यही है कि"* अगर *भगवान को ऋण उतारने के लिए पुनः जन्म लेना पड़ता है, तो हम तो मानव हैं, न जाने हम कितने ही "ऋणानुबंध" से बंधे हैं। उसे उतारने के लिए हमें तो कई जन्म भी कम पड़ जाएंगे।* *"अर्थात" जो भी भला हम कर सकते हैं, इसी जन्म में हमें कर लेना चाहिये..! 🩵 टेलीग्राम चैनल (धार्मिक) https://t.me/DharmikGyan09 💚 व्हाट्सएप चैनल (धार्मिक) https://whatsapp.com/channel/0029VbBEdo3JuyA6v9lD1g1F

यह है कांग्रेस और राहुल गांधी का ‘जुआ मॉडल’। हिमाचल प्रदेश को कांग्रेस सरकार ने कर्ज के बोझ तले दबा दिया और अब राजस्व जुटाने के लिए 27 साल बाद फिर से लॉटरी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वही लॉटरी, जिसे भाजपा सरकार ने कभी बंद किया था। आखिर लॉटरी है क्या? सीधे शब्दों में कहें तो यह जुए का ही एक रूप है, जिसमें जल्दी पैसा कमाने के लालच में लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा सकते हैं और परिवार आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। करीब 27 साल पहले हिमाचल में लॉटरी बंद की गई थी, लेकिन अब कांग्रेस की सुक्खू सरकार इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में बढ़ रही है। सवाल यह है कि सरकार की आर्थिक बदहाली का समाधान अब जनता को जुए की तरफ ले जाना है? सरकार को राजस्व चाहिए तो लॉटरी शुरू कर दो, कोई कर्ज में डूबे, कोई अपनी कमाई गंवाए, किसी परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़े, इससे सरकार को क्या? जनता को रोजगार चाहिए, उद्योग चाहिए, निवेश चाहिए, पर्यटन और मजबूत अर्थव्यवस्था चाहिए। लेकिन अगर सरकार के पास पैसा जुटाने का रास्ता लॉटरी है, तो इसे विकास का मॉडल कैसे कहा जाए? जनता की जेब से पैसा निकालकर सरकारी खजाना भरने की यह कैसी नीति है? यही है कांग्रेस का ‘जुआ मॉडल’ सरकार की कमाई के लिए जनता की किस्मत दांव पर। हिमाचल की जनता को तय करना है कि उसे ऐसी सरकार चाहिए जो लोगों की कमाई बढ़ाने के अवसर पैदा करे या ऐसी सरकार जो राजस्व के लिए लोगों को लॉटरी के जाल में धकेले। 🩵 टेलीग्राम चैनल https://telegram.me/jambudweepe 💚 व्हाट्सएप चैनल https://whatsapp.com/channel/0029VaABPDO9Gv7QsuzvhR1H 💛 अराटाई चैनल https://aratt.ai/@lokeshkushwaha

यह मुंबई मेट्रो-3 का एयरपोर्ट टर्मिनस 1 स्टेशन है.. 😍 कांग्रेस 65 सालों में भी ऐसा नहीं कर पाई। मुख्यमंत्री Dev_Fadnavis जी ने इसे 12 सालों में कर दिखाया। एयरपोर्ट तक सीधी अंडरग्राउंड टनल.. मेट्रो से उतरने के बाद कहीं भी कैब लेने की ज़रूरत नहीं। चर्चगेट से सिर्फ़ 20 मिनट में एयरपोर्ट पहुँच जाते हैं।

कांग्रेस के सीनियर नेता पूर्व सांसद राशिद अल्वी:- नरेंद्र मोदी चंद्रमा के किसी बिंदु का नाम शिव शक्ति या तिरंगा कैसे रख सकते हैं ...? क्या नरेंद्र मोदी चंद्रमा के मालिक हैं ...? एंकर :- लेकिन जब कांग्रेस राज के दौरान चंद्रयान-1 जहां लैंड हुआ था उसका भी तो नाम आप लोगों ने जवाहर पॉइंट रखा था। राशिद अल्वी:- देखिए जवाहरलाल नेहरू से किसी के नाम की न शिवशक्ति की न तिरंगा की तुलना हो सकती है जवाहरलाल नेहरू शिव शक्ति और तिरंगा दोनों से महान है। ,,,सत्य सनातन

*☘️ जय श्री सीताराम ☘️*      { श्री रामचरितमानस } 🔸 *दोहा-:* करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात। कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात॥ भावार्थ-: तब मारीच ने उसकी पूजा करके आदरपूर्वक बात पूछी- हे तात! आपका मन किस कारण इतना अधिक व्यग्र है और आप अकेले आए हैं?॥24॥ 🔸 दसमुख सकल कथा तेहि आगें। कही सहित अभिमान अभागें॥ होहु कपट मृग तुम्ह छलकारी। जेहि बिधि हरि आनौं नृपनारी॥ भावार्थ-: भाग्यहीन रावण ने सारी कथा अभिमान सहित उसके सामने कही (और फिर कहा-) तुम छल करने वाले कपटमृग बनो, जिस उपाय से मैं उस राजवधू को हर लाऊँ॥1॥ 🔸 तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा। ते नररूप चराचर ईसा॥ तासों तात बयरु नहिं कीजै। मारें मरिअ जिआएँ जीजै॥ भावार्थ-; तब उसने (मारीच ने) कहा- हे दशशीश! सुनिए। वे मनुष्य रूप में चराचर के ईश्वर हैं। हे तात! उनसे वैर न कीजिए। उन्हीं के मारने से मरना और उनके जिलाने से जीना होता है (सबका जीवन-मरण उन्हीं के अधीन है)॥2॥ 🔸 मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा॥ सत जोजन आयउँ छन माहीं। तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं॥ भावार्थ-; यही राजकुमार मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए गए थे। उस समय श्री रघुनाथजी ने बिना फल का बाण मुझे मारा था, जिससे मैं क्षणभर में सौ योजन पर आ गिरा। उनसे वैर करने में भलाई नहीं है॥3॥ 🔸 भइ मम कीट भृंग की नाई। जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई॥ जौं नर तात तदपि अति सूरा। तिन्हहि बिरोधि न आइहि पूरा॥ भावार्थ-: मेरी दशा तो भृंगी के कीड़े की सी हो गई है। अब मैं जहाँ-तहाँ श्री राम-लक्ष्मण दोनों भाइयों को ही देखता हूँ। और हे तात! यदि वे मनुष्य हैं, तो भी बड़े शूरवीर हैं। उनसे विरोध करने में पूरा न पड़ेगा (सफलता नहीं मिलेगी)॥4॥ 🩵 टेलीग्राम चैनल (धार्मिक) https://t.me/DharmikGyan09 💚 व्हाट्सएप चैनल (धार्मिक) https://whatsapp.com/channel/0029VbBEdo3JuyA6v9lD1g1F 💛 अर्राटाई चैनल (धार्मिक) https://aratt.ai/@dharmikgyan

*🌸 रक्षाबंधन पर्व 🌸 *28 अगस्त 2026, शुक्रवार, पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9:48 तक रहेगी/ अतः उदया तिथि सिद्धांत के अनुसार इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा/ *रक्षाबंधन पर सूण(शगुन) जिमाने का मुहूर्त-:* * प्रातः काल सूर्योदय से सुबह 9:48 तक का समय काफी उत्तम है/ वैसे तो रक्षाबंधन के दिन संपूर्ण दिन रक्षा सूत्र बांधा जा सकता है। लेकिन फिर भी रक्षाबंधन के दिन रक्षा सूत्र आप नीचे दिए हुए दिन के चौघडियों के अनुसार बांध सकते हैं-: *शुभ समय चौघड़िया-:* चर- अच्छा 05:57 से 07:33 तक/ लाभ- शुभ 07:33 से 09:09तक/ अमृत- शुभ 09:09 से 10:46तक/ शुभ- शुभ 12:24 से 13:58तक/ चर- अच्छा 17:11 से 18:47तक// टेलीग्राम चैनल (ज्योतिष) https://telegram.me/jyotishh व्हाट्सएप चैनल (ज्योतिष) https://whatsapp.com/channel/0029Va5odayGufJ1CRjXQ22a अराटाई चैनल (ज्योतिष) https://aratt.ai/@jyotishh

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🏵️🎗️ *रक्षाबंधन पर वैदिक रक्षा का महत्व* 👧🏻👧🏻 रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । *_यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रो में उसका बड़ा महत्व है* 🏵️🎗️ *वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि* 👇🏽👇🏽 🖐️ *इसके लिए 5 वस्तुओं की आवश्यकता होती है -* *🌿 दूर्वा (घास)* *⚪अक्षत (चावल)* 🟠 *केसर* 🟡 *चन्दन* 🟡 *पीली सरसों के दाने ।* ÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷ 🎗️🖐️ *इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें*, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी । •••••••••••••••••••••••••• 🪭🖐️ *इन पांच वस्तुओं का महत्त्व* 👇🏽 *🌿 दूर्वा* - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए । *⚪ अक्षत* - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे । 🟠 *केसर* - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो । 🟡 *चन्दन* - चन्दन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे । 🟡 *सरसों के दाने* - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें । •••••••••••••••••••••••••• 🙏🏻🖐️ *इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम गुरुदेव के श्री-चित्र पर अर्पित करें ।* फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे । 📖 *महाभारत में यह रक्षा सूत्र* माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई । 🙏🏻 *इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सुखी रहते हैं ।* -------------------------------------------- 🪭🎗️ *रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें* 👇🏽👇🏽 🪭🎗️ *येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः ।* *तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ।* टेलीग्राम चैनल (ज्योतिष) https://telegram.me/jyotishh व्हाट्सएप चैनल (ज्योतिष) https://whatsapp.com/channel/0029Va5odayGufJ1CRjXQ22a अराटाई चैनल (ज्योतिष) https://aratt.ai/@jyotishh