हिन्दू पंचांग 2024-Hindu Panchang 2024 - Today tithi - hindi calendar - Drik Panchang- Vedic Panchang
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हरी ओम 🙏 हिन्दू पंचांग एक दिन पहले प्राप्त करे व्रत - तिथि - एकादशी - शास्त्र वचन - खाने के नियम . . Today Hindu tithi 2022
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24 अगस्त 2024 हिंदु पंचांग
22 अगस्त 2024 हिंदू पंचांग
22 Augest Panchnag
https://youtube.com/shorts/I5XQVUNYBX0?feature=shared
Watch "यमराज कब आते हैं ? । Shri Sureshanandji Tips" on YouTube
🌞~ 27 दिसम्बर 2023 आज का हिन्दू पंचांग ~🌞
https://youtube.com/shorts/HXVkD3BwxtI?si=AQnLAv3FZ2BwckIl
⛅दिनांक - 27 दिसम्बर 2023
⛅दिन - बुधवार
⛅विक्रम संवत् - 2080
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - शिशिर
⛅मास - पौष
⛅पक्ष - कृष्ण
⛅तिथि - प्रतिपदा 28 दिसम्बर प्रातः 06:46 तक तत्पश्चात द्वितीया
⛅नक्षत्र - आर्द्रा रात्रि 11:29 तक तत्पश्चात पुनर्वसु
⛅योग - ब्रह्म 28 दिसम्बर प्रातः 02:41 तक तत्पश्चात इन्द्र
⛅राहु काल - दोपहर 12:41 से 02:01 तक
⛅सूर्योदय - 07:19
⛅सूर्यास्त - 06:02
⛅दिशा शूल - उत्तर
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:32 से 06:26 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 से 01:07 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - जोरमेला (पंजाब)
⛅विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला
🌞~ 12 अक्टूबर 2023 आज का हिन्दू पंचांग ~🌞
https://youtube.com/shorts/JSY7TjanzCU?feature=shared
⛅दिनांक - 12 अक्टूबर 2023
⛅दिन - गुरुवार
⛅विक्रम संवत् - 2080
⛅शक संवत् - 1945
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - शरद
⛅मास - आश्विन
⛅पक्ष - कृष्ण
⛅तिथि - त्रयोदशी रात्रि 07:53 तक तत्पश्चात चतुर्दशी
⛅नक्षत्र - मघा सुबह 08:45 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
⛅योग - शुक्ल सुबह 09:30 तक तत्पश्चात ब्रह्म
⛅राहु काल - दोपहर 01:54 से 03:22 तक
⛅सूर्योदय - 06:35
⛅सूर्यास्त - 06:17
⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:57 से 05:46 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:02 से 12:51 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - त्रयोदशी का श्राद्ध, मासिक शिवरात्रि
⛅विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌹मासिक शिवरात्रि : 12 अक्टूबर 2023
🌹जिस तिथि का जो स्वामी हो उस तिथि में उसकी आराधना-उपासना करना अतिशय उत्तम होता है । चतुर्दशी के स्वामी भगवान शिव है । अतः उनकी रात्रि में किया जानेवाला यह व्रत ‘शिवरात्रि' कहलाता है । प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रात्रि में गुरु से प्राप्त हुए मंत्र का जप करें । गुरुप्रदत्त मंत्र न हो तो पंचाक्षर (नमः शिवाय) मंत्र के जप से भगवान शिव को संतुष्ट करें ।
🌹कर्ज मुक्ति हेतु -
🌹हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते-करते ये 17 मंत्र बोलें ! जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोलें ! इससे कर्जे से मुक्ति मिलेगी...
🌹1) ॐ शिवाय नमः
🌹2) ॐ सर्वात्मने नमः
🌹3) ॐ त्रिनेत्राय नमः
🌹4) ॐ हराय नमः
🌹5) ॐ इन्द्रमुखाय नमः
🌹6) ॐ श्रीकंठाय नमः
🌹7) ॐ सद्योजाताय नमः
🌹8) ॐ वामदेवाय नमः
🌹9) ॐ अघोरहृदयाय नम:
🌹10) ॐ तत्पुरुषाय नमः
🌹11) ॐ ईशानाय नमः
🌹12) ॐ अनंतधर्माय नमः
🌹13) ॐ ज्ञानभूताय नमः
🌹14) ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः
🌹15) ॐ प्रधानाय नमः
🌹16) ॐ व्योमात्मने नमः
🌹17) ॐ व्यूक्तकेशात्मरूपाय नम:
🔹श्राद्ध में प्रशस्त ब्राह्मण🔹
🔸श्राद्ध में जिस किसीको भोजन कराने की विधि नहीं है । शील, शौच एवं प्रज्ञा से युक्त सदाचारी तथा सन्ध्या- वन्दन एवं गायत्री मन्त्र का जप करनेवाले श्रोत्रिय ब्राह्मण को श्राद्ध में निमन्त्रण देना चाहिये । तप, धर्म, दया, दान, सत्य, ज्ञान, वेदज्ञान, कारुण्य, विद्या, विनय तथा अस्तेय (अचौर्य) आदि गुणों से युक्त ब्राह्मण इसका अधिकारी है ।
🔹प्रशस्त आसन🔹
🔸रेशमी, नेपाली कम्बल, ऊन, काष्ठ, तृण, पर्ण, कुश आदि के आसन श्रेष्ठ हैं । काष्ठासनों में भी शमी काश्मरी, शल्ल, कदम्ब, जामुन, आम, मौलसिरी एवं वरुणके आसन श्रेष्ठ हैं । इनमें भी लोहे की कील नहीं होनी चाहिये ।
🔸श्राद्ध में भोजन के समय मौन आवश्यक🔸
🔹श्राद्ध में भोजन के समय मौन रहना चाहिये । माँगने या प्रतिषेध करने का संकेत हाथ से ही करना चाहिये । भोजन करते समय ब्राह्मण से अन्न कैसा है, यह नहीं पूछना चाहिये तथा भोजन कर्ता को भी श्राद्धान्न की प्रशंसा या निन्दा नहीं करनी चाहिये ।
🔸पिण्ड की अष्टांगता🔸
🔹अन्न, तिल, जल, दूध, घी, मधु, धूप और दीप-ये पिण्डके आठ अंग हैं ।
🔹श्राद्ध में पात्र🔹
🔸सोने, चाँदी, काँसे और ताँबेके पात्र पूर्व पूर्व उत्तमोत्तम हैं । इनके अभाव में पलाश आदि अन्य वृक्ष के पत्तल से काम लेना चाहिये, पर केले के पत्ते में श्राद्ध भोजन सर्वथा निषिद्ध है । साथ ही श्राद्ध में पितरों के भोजन के लिये मिट्टी-के पात्रका भी निषेध है ।
🔸श्राद्ध में पाद-प्रक्षालन-विधि🔸
🔹श्राद्ध में ब्राह्मणों को बैठाकर पैर धोना चाहिये । खड़े होकर पैर धोने पर पितर निराश होकर चले जाते हैं । पत्नी को दाहिनी ओर खड़ा करना चाहिये । उसे बाँयें रहकर जल नहीं गिराना चाहिये । अन्यथा वह श्राद्ध आसुरी हो जाता है और पितरों को प्राप्त नहीं होता ।
🌞~ 07 अक्टूबर 2023 आज का हिन्दू पंचांग ~🌞
https://youtube.com/shorts/QSqxmVGHpjY?si=iB0KhnJamJjBdZX6
⛅दिनांक - 07 अक्टूबर 2023
⛅दिन - शनिवार
⛅विक्रम संवत् - 2080
⛅शक संवत् - 1945
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - शरद
⛅मास - आश्विन
⛅पक्ष - कृष्ण
⛅तिथि - अष्टमी सुबह 08:08 तक तत्पश्चात नवमी
⛅नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 11:57 तक तत्पश्चात पुष्य
⛅योग - शिव 07 अक्टूबर प्रातः 06:03 तक तत्पश्चात सिद्ध
⛅राहु काल - सुबह 09:30 से 10:59 तक
⛅सूर्योदय - 06:33
⛅सूर्यास्त - 06:22
⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:56 से 05:44 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 से 12:52 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - अविधवा नवमी, नवमी का श्राद्ध, सौभाग्यवती का श्राद्ध
⛅विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🔹श्राद्ध में भोजन कराने का विधान🔹
🔸भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर, भोजनकर्त्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए । पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्त्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुरवाणी से कहना चाहिए किः 'हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें ।'
फिर क्रोध तथा उतावलेपन को छोड़कर उन्हें भक्ति पूर्वक भोजन परोसते रहना चाहिए ।
🔸ब्राह्मणों को भी दत्तचित्त और मौन होकर प्रसन्न मुख से सुखपूर्वक भोजन करना चाहिए ।
🔸"लहसुन, गाजर, प्याज, करम्भ (दही मिला हुआ आटा या अन्य भोज्य पदार्थ) आदि वस्तुएँ जो रस और गन्ध से निन्द्य हैं, श्राद्धकर्म में निषिद्ध हैं ।"
(वायु पुराणः 78.12)
🔸"ब्राह्मण को चाहिए कि वह भोजन के समय कदापि आँसू न गिराये, क्रोध न करे, झूठ न बोले, पैर से अन्न के न छुए और उसे परोसते हुए न हिलाये । आँसू गिराने से श्राद्धान्न भूतों को, क्रोध करने से शत्रुओं को, झूठ बोलने से कुत्तों को, पैर छुआने से राक्षसों को और उछालने से पापियों को प्राप्त होता है।" (मनुस्मृतिः 3.229.230)
🔸"जब तक अन्न गरम रहता है और ब्राह्मण मौन होकर भोजन करते हैं, भोज्य पदार्थों के गुण नहीं बतलाते तब तक पितर भोजन करते हैं । सिर में पगड़ी बाँधकर या दक्षिण की ओर मुँह करके या खड़ाऊँ पहनकर जो भोजन किया जाता है उसे राक्षस खा जाते हैं ।" (मनुस्मृतिः 3.237.238)
🔸"भोजन करते हुए ब्राह्मणों पर चाण्डाल, सूअर, मुर्गा, कुत्ता, रजस्वला स्त्री और नपुंसक की दृष्टि नहीं पड़नी चाहिए । होम, दान, ब्राह्मण-भोजन, देवकर्म और पितृकर्म को यदि ये देख लें तो वह कर्म निष्फल हो जाता है ।
🔸सूअर के सूँघने से, मुर्गी के पंख की हवा लगने से, कुत्ते के देखने से और शूद्र के छूने से श्राद्धान्न निष्फल हो जाता है । लँगड़ा, काना, श्राद्धकर्ता का सेवक, हीनांग, अधिकांग इन सबको श्राद्ध-स्थल से हटा दें ।" (मनुस्मृतिः 3.241.242)
🔸"श्राद्ध से बची हुई भोजनादि वस्तुएँ स्त्री को तथा जो अनुचर न हों ऐसे शूद्र को नहीं देनी चाहिए । जो अज्ञानवश इन्हें दे देता है, उसका दिया हुआ श्राद्ध पितरों को नहीं प्राप्त होता । इसलिए श्राद्धकर्म में जूठे बचे हुए अन्नादि पदार्थ किसी को नहीं देना चाहिए ।"
🔹विद्यार्थियों की समस्याएँ एवं उनका समाधान - भाग (१)
🔹स्मरणशक्ति की कमी, बौद्धिक मंदता, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता का अभाव अनिद्रा, मानसिक अवसाद (depression), आँखों की रोशनी कम होना, छोटी उम्र में चश्मा लगना, मोटापा, मधुमेह (diabetes), यकृत (liver) के रोग आदि तकलीफें वर्तमान में विद्यार्थियों में आम समस्या बनती जा रही हैं । महँगी महँगी दवाइयों और शरीर वर्षों-वर्षों के उपचार के बावजूद समस्याएँ निर्मूल नहीं होतीं । इनसे छुटकारा पाना है तो इनके कारणों को समझना होगा तभी इनका समाधान हो सकता है ।
🔹क्यों हो रहा है स्वास्थ्य, स्मृति व बौद्धिक क्षमता का ह्रास ?
🔹देर रात तक जागना, मोबाइल का अति उपयोग, इंटरनेट के व्यसन का रोग (internet addiction disorder), सूर्योदय के बाद तक सोते रहना, दिन में सोना, खेल-कूद व कसरत का अभाव जैसी अहितकर आदतें आज विद्यार्थियों की दिनचर्या में प्रायः देखने को मिलती हैं ।
🔹फास्ट फूड, मसालेदार व तली हुई चीजों, बेकरी के पदार्थों, मिठाइयों, नमकीन, चाय, कॉफी, चॉकलेट्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि स्वास्थ्य घातक पदार्थों के सेवन की आदत ने विद्यार्थियों को बुरी तरह जकड़ लिया है ।
🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞
https://youtube.com/shorts/Nu-OITJmD-k?feature=shared
⛅दिनांक - 04 अक्टूबर 2023
⛅दिन - बुधवार
⛅विक्रम संवत् - 2080
⛅शक संवत् - 1945
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - शरद
⛅मास - आश्विन
⛅पक्ष - कृष्ण
⛅तिथि - षष्ठी 05 अक्टूबर प्रातः 05:41 तक तत्पश्चात सप्तमी
⛅नक्षत्र - रोहिणी शाम 06:29 तक तत्पश्चात मृगशिरा
⛅योग - व्यतिपात सुबह 06:43 से 05 अक्टूबर प्रातः 05:43 तक
⛅राहु काल - दोपहर 12:28 से 01:57 तक
⛅सूर्योदय - 06:32
⛅सूर्यास्त - 06:25
⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:55 से 05:44 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:05 से 12:53 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - षष्ठी का श्राद्ध, व्यतिपात योग
⛅विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🔹व्यतिपात योग🔹
🔸समय अवधि : 04 अक्टूबर सुबह 06:43 से 05 अक्टूबर प्रातः 05:46 तक
🔸व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । - वराह पुराण
🔹बुद्धिमान, धनवान, धर्मात्मा व दीर्घजीवी संतान हेतु🔹
🔸मनु महाराज कहते हैं कि किसी स्त्री को दीर्घजीवी, यशस्वी, बुद्धिमान, धनवान, संतानवान ( पुत्र-पौत्रादि संतानों से युक्त होनेवाला), सात्त्विक तथा धर्मात्मा पुत्र चाहिए तो श्राद्ध करे और श्राद्ध में पिंडदान के समय बीच का ( पितामह संबंधी) पिंड उठाकर उस स्त्री को खाने को दे दिया । ‘आधत्त पितरो गर्भ कुमारं पुष्करस्त्रजम ।’ (पितरो ! आप लोग मेरे गर्भ में कमलों की माला से अलंकृत एक सुंदर कुमार की स्थापना करें ।) इस मंत्र को प्रार्थना करते हुए स्त्री पिंड को ग्रहण करे श्रद्धा-भक्तिपूर्वक यह विधि करने से उपरोक्त गुणोंवाला बच्चा होगा ।
(इस प्रयोग हेतु पिंड बनाने के लिए चावल को पकाते समय उसमें दूध और मिश्री भी डाल दें । पानी एवं दूध की मात्रा उतनी ही रखें जिससे उस चावल का पिंड बनाया जा सके । पिंडदान – विधि के समय पिंड को साफ़-सुथरा रखें । उत्तम संतानप्राप्ति के इच्छुक दम्पति आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक दिव्य शिशु संस्कार अवश्य पढ़ें ।)
ऋषि प्रसाद – अगस्त २०१९ से
🔹पित्त-प्रकोप के कारण, लक्षण और निवारण🔹
🔸मसालेदार, चटपटे भोजन का अधिक सेवन, सरसों के तेल का अधिक उपयोग, अधिक मेहनत में या मानसिक तनाव, समय पर न खाने-पीने- सोने से, गुस्सा करने से एवं शरद ऋतु में वातावरण के प्रभाव से पित्त बढ़ता है ।
🔸पित्त की समस्या से अपच, अम्लपित्त (hyperacidity) उलटी, भूख न लगना आदि पेट के रोग होते हैं तथा सिरदर्द, पीलिया, बवासीर, बार-बार पेशाब में संक्रमण होना, आँखों एवं हाथ-पैरों की जलन आदि तकलीफें होती हैं, साथ ही पुरुषों में स्वप्नदोष व महिलाओं में प्रदररोग जैसी समस्याएँ भी देखी जाती हैं ।
🔹पित्त का रामबाण इलाज🔹
🔸जीवनशैली सुधारना पित्त का रामबाण इलाज है । सरल व साधारण नियमों के पालन से पित्तदोष से बचा जा सकता हैं ।
🔸(१) शयनं पित्तनाशाय... पित्तनाश हेतु समय पर सो जायें, रात में जागरण न करें । रात्रि ९ से ३ बजे की नींद अच्छी मानी गयी है ।
🔸(२) मुलतानी मिट्टी लगाकर ठंडे पानी से स्नान करना एवं तैरना, नदी किनारे एवं प्राकृतिक वातावरण में भ्रमण करना, मन को शांत एवं प्रसन्न रखना ये सरल दिखनेवाले प्रयोग पित्त शमन में बहुत लाभदायी हैं ।
🔸(३) भोजन हलका व सुपाच्य हो । भोजन में सीजनल फल व सब्जियों का उपयोग हो, खट्टी चीजें न खायें । पत्तेदार हरी सब्जियाँ, लौकी, कद्दू, गिल्की, परवल, गोभी जैसी रसदार सब्जियाँ, मूँग, अरहर की दाल, पुराना चावल, ककड़ी, खीरे का सलाद आदि का सेवन करें । पित्त को शांत करने में गाय का दूध, मक्खन और घी लाभकारी होते हैं । इन्हें भोजन में उपयोग में ला सकते हैं ।
🔸(४) दिन में प्यास के अनुरूप उचित मात्रा •में पानी पियें । इससे भोजन अच्छी तरह पचता है और अम्लपित्त आदि से बचाव होता है । (भोजन से पहले पानी न पियें । भोजन के बीच में तथा भोजन के डेढ़-दो घंटे बाद पानी पीना हितकर होता है ।)
🔸(५) ज्यादा धूप में न घूमें । धूप में जाते समय सिर पर टोपी आदि अवश्य पहनें ।
🔸(६) कड़वे, कसैले और मीठे पदार्थ खायें । तरी आँवला चूर्ण, शतावरी चूर्ण, गुलकंद, एलोवेरा जूस आदि औषधियाँ पित्तशामक हैं ।
🔸(७) पित्त को संतुलित करने का सुंदर आध्यात्मिक उपाय है ध्यान करना । इससे मानसिक तनाव व समस्याएँ दूर होकर पित्त शांत होने में मदद मिलती है ।
🌞 ~ 28 सितम्बर 2023 वैदिक पंचांग ~ 🌞
https://youtube.com/shorts/uitBLAXHIkE?feature=shared
🌤️ दिनांक - 28 सितम्बर 2023
🌤️ दिन - गुरूवार
🌤️ विक्रम संवत - 2080 (गुजरात - 2079)
🌤️ शक संवत -1945
🌤️ अयन - दक्षिणायन
🌤️ ऋतु - शरद ॠतु
🌤️ मास - भाद्रपद
🌤️ पक्ष - शुक्ल
🌤️ तिथि - चतुर्दशी शाम 06:49 तक तत्पश्चात पूर्णिमा
🌤️ नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद 29 सितम्बर रात्रि 01:48 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद
🌤️ योग - गण्ड सुबह 11:55 तक तत्पश्चात वृद्धि
🌤️ राहुकाल - दोपहर 01:59 से शाम 03:30 तक
🌞 सूर्योदय-06:29
🌤️ सूर्यास्त- 18:28
👉 दिशाशूल- दक्षिण दिशा में
🚩 व्रत पर्व विवरण - अनंत चतुर्दशी,गणेश महोत्सव समाप्त,गणेश विसर्जन,पूर्णिमा
💥 विशेष - चतुर्दशी ,पूर्णिमा और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
🌞~वैदिक पंचांग ~🌞
जब तक यह रहेगा हाथ मे तब तक कोई अनिष्ट नही होगा⤵️
https://youtu.be/khLKUaN2jVY
🌷 श्राद्ध पक्ष में अपनाए जाने वाले सभी मुख्य नियम
➡ 29 सितम्बर 2023 शुक्रवार से महालय श्राद्ध आरम्भ ।
👉🏻 1) श्राद्ध के दिन भगवदगीता के सातवें अध्याय का माहात्म पढ़कर फिर पूरे अध्याय का पाठ करना चाहिए एवं उसका फल मृतक आत्मा को अर्पण करना चाहिए।
👉🏻 2) श्राद्ध के आरम्भ और अंत में तीन बार निम्न मंत्र का जप करें l
➡ मंत्र ध्यान से पढ़े :
🌷 ll देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च l
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव भवन्त्युत ll
🙏🏻 (समस्त देवताओं, पितरों, महायोगियों, स्वधा एवं स्वाहा सबको हम नमस्कार करते हैं l ये सब शाश्वत फल प्रदान करने वाले हैं l)
👉🏻 3) “श्राद्ध में एक विशेष मंत्र उच्चारण करने से, पितरों को संतुष्टि होती है और संतुष्ट पितर आपके कुल खानदान को आशीर्वाद देते हैं
➡ मंत्र ध्यान से पढ़े :
🌷 ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा|
👉🏻 4) जिसका कोई पुत्र न हो, उसका श्राद्ध उसके दौहिक (पुत्री के पुत्र) कर सकते हैं l कोई भी न हो तो पत्नी ही अपने पति का बिना मंत्रोच्चारण के श्राद्ध कर सकती है l
👉🏻 5) पूजा के समय गंध रहित धूप प्रयोग करें और बिल्व फल प्रयोग न करें और केवल घी का धुआं भी न करें|
🙏🏻 श्राद्ध महिमा पुस्तक से
🌞 ~ वैदिक पंचांग ~ 🌞
