अतीत के पन्ने
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🌸 1828 ई. के अहोम विद्रोह से निम्न में से कौन संबंधित है? [MGSU Ph.D Ent. Exam- 2023]
🙂" बच्चों के कोमल हाथों से जिस भोजन में खिलवाड़ हुआ हो, माता-पिता के लिए वह भोजन अमृत से भी अधिक मधुर होता है"- उक्त सुंदर कथन किस दक्षिण भारतीय कृति में है?
⭐️ शिलालेखों एवं अन्य पुराने अभिलेखों में प्रयुक्त पुराने लिखों के अध्ययन को कहा जाता है - [MGSU Ph.D. Ent. Test-2023]
समुद्रगुप्त के राज्य कवि हरिषेण के पद निम्न थे :-
1. महादंडनायक : मुख्य न्याय अधिकारी
2. कुमारामात्य : एक महत्वपूर्ण मंत्री जो आधुनिक IAS अधिकारियों के समान
3.संधि-विग्रहिक : युद्ध और संधि का मंत्री तथा परराष्ट्र मंत्री
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💥 पूर्वसंचित कर्मों के विनाश की प्रक्रिया को जैन धर्म में क्या कहा जाता है?
💥बौद्ध धर्म के आधारभूत सिद्धांत 'प्रतीत्य समुत्पाद' के नियम के अनुसार दुःख का मूल कारण क्या है?
❤️❤️❤️सभी को नव वर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाये।
ये साल हम सब के लिए नयी सौगातें लेकर आये❤️❤️❤️
🙂 "रण-दुंदुभि का निनाद शांति की घंटियों की टनटन में विलीन हो गया। अशोक ने इस प्रकार युद्ध का बहिष्कार करके 'विश्वशांति के प्रथम प्रवर्तक' का पद प्राप्त किया"। - कथन है?
भींव राज कालवा : मैंने दिवस 19 दिसम्बर 2023 को ईश्वर, ईश्वरतुल्य माता-पिता, बाबासाहेब, आदरणीय गुरूजनों, स्नेहिल भाई-बंधुओं , प्रिय मित्रों के सहयोग और आशीर्वाद से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय होपारडी (फलौदी) में स्कूल व्याख्याता (इतिहास R-212) के रूप में पदभार ग्रहण किया। बीते पाँच वर्ष संघर्ष भरे रहे और कई उतार-चढ़ाव आये , लगातार चार बार JRF (History) और विद्या संबल योजना के अंतर्गत राजकीय कन्या महाविद्यालय, नोखा (बीकानेर) में Visiting lecturer के रूप में सत्र: 2021-22 व 2022-23 में निस्वार्थ अध्यापन करवाने के बाद जो ऊर्जा का संचार हुआ ,जिसके चलते आज यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि अपने पैतृक गाँव 'हिराजसर' (सरदारशहर) से प्रथम स्कूल व्याख्याता बनकर इतिहास रचा।
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🔎 चोर मीनार (दिल्ली)🔍
ईदगाह के दक्षिण-पूर्व में लगभग 200 मीटर पर अनगढ़े पत्थरों से निर्मित एक शुण्डाकार बुर्ज है जो चोर मीनार कहलाता है। यह एक चबूतरे पर स्थित है और इसके अंदर की ओर एक जीना है। संभवतः इसे 'खिलजी काल' में बनाया गया था।
इसके बाहर की ओर अनेक गोलाकार सुराग है, जिनके इस्तेमाल किए जाने के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। यह विश्वास किया जाता है कि जो चोर पकड़े जाते थे उनके सिर कलम कर दिए जाते थे और इन सुराखों में रख दिए जाते थे ताकि दूसरे लोगों को चोरी करने से भय दिखाकर रोका जा सके जिसके कारण इसका यह नाम पड़ा था।
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