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MP Competitive Exam Preparation

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★▬▬▬▬ 🏜 ⚜ ۩ ۞ ۩ ⚜ 🏜▬▬▬▬★ 🔬 Physics 20 Important Facts 🔬 ★▬▬▬▬ 🏜 ⚜ ۩ ۞ ۩ ⚜ 🏜▬▬▬▬★ 1. इंद्रधनुष कितने रंग दिखाता है - 7 2 मृगतृष्णा बनने का कारण है - पूर्ण आन्तरिक परावर्तन 3. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है, जब प्रकाश जाता है - हीरे से कांच में 4 किस गुण-धर्म के कारण पानी से भरे बर्तन में डुबाई गई छड़ी मुड़ी हुई प्रतीत होती है - अपवर्तन 5. सूर्य ग्रहण कब होता है - प्रतिपदा 6. प्रकाश का वेग सर्वप्रथम किसने ज्ञात किया - रोमर 7. प्रकाश में ध्रुवण की घटना से यह सिद्ध होता है कि प्रकाश तरंगें हैं - तरंग एवं कण दोनों के समान 8. प्रकाश का वेग अधिकतम होता है - निर्वात में 9. माध्यम के तापमान में वृद्धि के साथ प्रकाश की गति - वैसी ही रहती है 10. सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का कौन-सा भाग दिखाई देता है -किरीट 11. प्रकाश तरंग किस प्रकार की तरंग है - अनुप्रस्थ तरंग 12. डेसीबल होता है - एक ध्वनि स्तर का मापन 13. सोनार अधिकांशतः प्रयोग में लाया जाता है - नौसंचालकों द्वारा 14. अशुद्धियों के कारण द्रव का क्वथनांक - बढ़ जाता है 15. कमरे को ठंडा किया जा सकता है - सम्पीड़ित गैस को छोड़ने से 16. ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम किस अवधारणा की पुष्टि करता है - ऊर्जा संरक्षण 17. हीरा चमकदार दिखायी देता है -सामूहिक आंतरिक परावर्तन के कारण 18. कौन-सा धातु चुम्बक द्वारा आकर्षित नहीं होता है - बिस्मथ 19. चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक है - वेबर 20. प्रत्यावर्तीधारा को दिष्ट धारा में बदला जाता है - दिष्टकारी या ऋजुकारी या रेक्टिफायर ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★

Emailing MP Patwari Syllabus 2022 (हिंदी में),.pdf

📘 हिंदी प्रश्नोतर परीक्षा सम्बन्धी || ●▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 61 वाक्य दोष होते है - 21 इक्कीस 62 अलंकार के भेद होते है - शब्दालंकार, अर्थालंकार, उभयालंकार 63 अलंकार कहते है - काव्य की शोभा बढाने वाले को। 64 काव्य में अर्थ द्वारा चमत्कार उत्पन्न करते है उसे कहते है - अर्थालंकार 65 मानवीकरण अलंकार किसे कहते है - अचेतन अथवा मानवेतर जड़ प्रकृति पर मानव के गुणों एवं कार्य कलापों का आरोप कर उसे मानव सदृश्य सप्राण चित्रित किया जाता है। अमूर्त पदार्थ एवं भावों को मूर्त रूप दिया जाता है। 66 'मुनि तापस जिनते दुख लहही, ते नरेश बिनु पावक दहही' में अलंकार है - विभावना 67 जहां वास्तव में विरोध न होने पर भी किंचित विरोध का आभास हो वहां अलंकार होता है - विरोधाभास 68 प्रकृति पर मानव व्यवहार का आरोप किया जाता है वहां अलंकार है - मानवीकरण 69 'मेघमय आसमान से उतर रही वह संध्या सुंदरी परी सी' में अलंकार है - मानवीकरण 70 जहां बिना करण या विपरित कारण के रहते कार्य होने का वर्णन हो वहां अलंकार है - विभावना 71 'लोचन नीरज से यह देखो, अश्रु नदी बह आई में अलंकार है' विभावना 72 अलंकारों की निश्चित परिभाषा दी है - दण्डी ने काव्यादर्श में 73 शब्दालंकार के भेद है - आठ 74 यमक अलंकार है- जहां एक शब्द एक से अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ भिन्न हो। 75 'अपूर्व थी श्यामल पत्रराशि में कदम्ब के पुष्प कदम्ब की छटा' इस यमक अलंकार में कदम्ब का अर्थ प्रयुक्त हुआ है - वृक्ष और समूह के लिए 76 यमक अलंकार का उदाहण है - - फिर झट गुल कर दिया दिया को दोनों आंखे मीची - भजन कह्यो ताते भयो, भयो न एको बार - भयेऊ विदेह विदेह विसेखी - तीन बेर खाती ते वें तीन बेर खाती है - बसन देहु, व्रज में हमें बसन देहु ब्रजराज - सारंग ले सारंग चली, सारंग पूगो आय 77 अनेक अर्थो का बोध कराने वाला एक शब्द कविता में होता है उसे कौनसा अलंकार कहते है - श्लेष 78 श्लेष अलंकार के उदाहरण है - (रेखांकित) - जो घनीभूत पीड़ा थी, मस्तक में स्मृति छाई - दुर्दिन में आंसू बनकर वह आज बरसने आई - चली रघुवीर सिलीमुख धारी - पानी गये न उबरे मोती मानुष चून - नवजीवन दो घनश्याम हमें - सुबरन को ढूंढत फिरें कवि, कामी अरू चोर 79 सौंदर्यमलंकार उक्ति किसकी है - आचार्य वामन की 80 किसी प्रस्तुत वस्तु की उसके किसी विशेष गुण, क्रिया, स्वभाव आदि की समानता के आधार पर अन्य अप्रस्तुत से समानता स्थापित की जाए तो अलंकार होगा - उपमा अलंकार 81 उपमा के अंग है - उपमेय (प्रस्तुत), उपमान (अप्रस्तुत), वाचक, साधारण धर्म 82 पूर्णापमा कहते है - जिसमें उपमा के चारों अंगों का उल्लेख हो। 83 लुप्तोपमा कहते है - उपमा में चारों अंगों में से एक या एक से अधिक अंग लुप्त हो 84 पूर्णापमा के उदाहरण है - मुख कमल जैसा सुंदर है - कोमल कुसुम समान देह हो। हुई तप्त अंगारमयी 85 लुप्तोपमा के उदाहरण है - मुख कमल जैसा - उन वर जिसके है सोहती मुक्तमाला वह नव नलिनी से नेत्रवाला कहा है 86 जब उपमा में एक उपमेय के अनेक उपमान हो तो अलंकार होगा - मालोपमा 87 मालोपमा के उदाहरण है - - मुख चंद्र और कमल समान है - नील सरोरूह, नील मनी, नील नीरधर श्याम - आशा मेरे हृदय मरू की मंजु मंदाकिनी 88 उपमेय में उपमान की संभावना को अलंकार कहते है - उत्प्रेक्षा 89 उपमेय में संभावना की अभिव्यक्ति के शब्द है - मानो, मनो, जानो 90 उत्प्रेक्षा, रूपक व उपमा से किस कारण अलग होता है - संभावना

📘 हिंदी प्रश्नोतर परीक्षा सम्बन्धी || ●▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 31 महाकाव्य का प्रधान रस होता है - वीर, शृंगार या शांत रस 32 महाकाव्य के प्रारंभ में होता है - मंगलाचरण या इष्टदेव की पूजा 33 रूपक के भेद है - नाटक, प्रकरण, भाण, प्रहसन, व्यायोग, समवकार, वीथि, ईहामृग, अंक 34 महाकाव्य में खण्ड या सर्ग होते है - आठ और अधिक 35 महाकाव्य के एक सर्ग में एक छंद का प्रयोग होता है। इसका परिवर्तन किया जा सकता है - सर्ग के अंत में। 36 मुक्तक काव्य है - एकांकी सदृश्यों को चमत्कृत करने में समर्थ पद्य 37 प्रबंध काव्य वनस्थली है तो मुक्तक काव्य गुलदस्ता है। यह उक्ति किसने कही - आचार्य रामचंद्र शुल्क ने 38 मुक्तककार के लक्षण होते है - मार्मिकता, कल्पना प्रवण, व्यंग्य प्रयोग, कोमलता, सरलता, नाद सौंदर्य 39 मुक्तक के भेद है - रस मुक्तक, सुक्ति मुक्तक 40 काव्य के गुण है - काव्य के रचनात्मक स्वरूप का उन्नयन कर रस को उत्कर्ष प्रदान करने की क्षमता 41 भरत और दण्डी के अनुसार काव्य के गुण के भेद है - श्लेष, प्रसाद, समता, समाधि, माधुर्य, ओज, पदसुमारता, अर्थव्यक्ति, उदारता व कांति 42 आचार्य मम्मट ने काव्य गुण बताए - माधुर्य, ओज और प्रसाद 43 माधुर्य गुण में वर्जन है - ट, ठ, ड, ढ एवं समासयुक्त रचना 44 काव्य दोष वह तत्व है जो रस की हानि करता है। परिभाषा है - आचार्य विश्वनाथ की। 45 मम्मट ने काव्य दोष को वर्गीकृत किया - शब्द, अर्थ व रस दोष में 46 श्रुति कटुत्व दोष है - जहां परूश वर्णो का प्रयोग होता है। 47 परूष वर्णो का प्रयोग कहां वर्जित है - शृंगार, करूण तथा कोमल भाव की अभिव्यंजना में 48 परूष वर्ग किस अलंकार में वर्जित नहीं है - यमक आदि में 49 परूष वर्ण कब गुण बन जाते है - वीर, रोद्र और कठोर भाव में 50 श्रुतिकटुत्व दोष किस वर्ग में आता है - शब्द दोष में 51 काव्य में लोक व्यवहार में प्रयुक्त शब्दों का प्रयोग दोष है - ग्राम्यत्व 52 अप्रीतत्व दोष कहलाता है - अप्रचलित पारिभाषिक शब्द का प्रयोग। यह एक शास्त्र में प्रसिध्द होता है, लोक में अप्रसिध्द होता है। 53 शब्द का अर्थ बड़ी खींचतान करने पर समझ में आता है उस दोष को कहा जाता है - क्लिष्टतव 54 वेद नखत ग्रह जोरी अरघ करि सोई बनत अब खात...। में दोष है - क्लिष्टत्व 55 वाक्य में यथा स्थान क्रम पूर्वक पदो का न होना दोष है - अक्रमत्व 56 अक्रमत्व का उदाहरण है - सीता जू रघुनाथ को अमल कमल की माल, पहरायी जनु सबन की हृदयावली भूपाल 57 दुष्क्रमत्व दोष होता है - जहां लोक और शास्त्र के विरूध्द क्रम से वस्तु का वर्णन हो। 58 'आली पास पौढी भले मोही किन पौढन देत' में काव्य दोष है - ग्रामयत्व 59 काव्य में पद दोष कितने है - 16 60 अर्थ दोष कहते है - जहां शब्द दोष का निराकरण हो जाए, फिर भी दोष बना रहे वहां अर्थ दोष होता है।

📘 हिंदी प्रश्नोतर परीक्षा सम्बन्धी || ●▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 1 काव्य के तत्व माने गए है - दो 2 महाकाव्य के उदाहरण है - रामचरित मानस, रामायण, साकेत, महाभारत, पदमावत, कामायनी, उर्वशी, लोकायतन, एकलव्य आदि 3 मुक्तक काव्य के उदाहरण है- मीरा के पद, रमैनियां, सप्तशति 4 काव्य कहते है - दोष रहित, सगुण एवं रमणियार्थ प्रतिपादक युगल रचना को 5 काव्य के तत्व है - भाषा तत्व, बुध्दि या विचार तत्व, कल्पना तत्व और शैली तत्व 6 काव्य के भेद है - प्रबंध (महाकाव्य और खण्ड काव्य), मुक्तक काव्य 7 वामन ने काव्य प्रयोजन माना - दृष्ट प्रयोजन (प्रीति आनंद की प्राप्ति) अदृष्ट प्राप्ति (कीर्ति प्राप्ति) 8 भामह की काव्य परिभाषा है - शब्दार्थो सहित काव्यम 9 प्रबंध काव्य का शाब्दिक अर्थ है - प्रकृष्ठ या विशिष्ट रूप से बंधा हुआ। 10 रसात्मक वाक्यम काव्यम परिभाषा है - विश्वनाथ का 11 काव्य के कला पक्ष में निहित होती है - भाषा 12 काव्य में आत्मा की तरह माना गया है- रस 13 तद्दोषों शब्दार्थो सगुणावनलंकृति पुन: क्वापि, परिभाषा है - मम्मट की 14 काव्य के तत्व विभक्त किए गए है- चार वर्गो में प्रमुखतया रस, शब्द 15 कवि दण्डी ने काव्य के भेद माने है- तीन 16 रमणियार्थ प्रतिपादक शब्द काव्यम की परिभाषा दी है - आचार्य जगन्नाथ ने 17 काव्य रूपों में दृश्य काव्य है - नाटक 18 काव्य प्रयोजन की दृष्टि से मत सर्वमान्य है - मम्मटाचार्य का 19 काव्य प्रयोजनों में प्रमुख माना जाता है। आनंदानुभूति का 20 काव्य रचना का प्रमुख कारण (हेतु) है - प्रतिभा का 21 महाकाव्य और खण्ड काव्य में समान लक्षण है - कथानक उपास्थापन एक जैसा होता है। 22 काव्य रचना के सहायक तत्व है - वर्ण्य विषय(भाव), अभिव्यक्ति पक्ष (कला), आत्म पक्ष 23 मम्मट के काव्य प्रयोजन है - यश, अर्थ, व्यवहार ज्ञान, शिवेतरक्षति, संघ पर निवृति, कांता सम्मलित 24 मम्मट के शिवेतर का अभिप्राय है – अनिष्ट 25 सगुणालंकरण सहित दोष सहित जो होई... परिभाषा है - चिंतामणि की 26 भारतीय काव्य शास्त्र के अनुसार काव्य के तत्व है - 1 शब्द और अर्थ, 2 रस, 3 गुण, 4 अलंकार, 5 दोष, रीतिय 27 आधुनिक कवियों ने काव्य के प्रयोजन में क्या विचार दिए - ज्ञान विस्तार, मनोरंजन, लोक मंगल, उपदेश 28 खण्ड काव्य में सर्गखण्ड होते है - सात से कम 29 शैली के आधार पर काव्य भेद है - गद्य, पद्य, चम्पू 30 दृश्य काव्य के भेद है - रूपक और उप रूपक

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आप सभी को नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं..!!

✅ भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम ❑ ईश्वर का निवास स्थान ➭ प्रयाग ❑ पांच नदियों की भूमि ➭ पंजाब ❑ सात टापुओं का नगर ➭ मुंबई ❑ बुनकरों का शहर ➭ पानीपत ❑ अंतरिक्ष का शहर ➭ बेंगलुरू ❑ डायमंड हार्बर ➭ कोलकाता ❑ इलेक्ट्रॉनिक नगर ➭ बेंगलुरू ❑ त्योहारों का नगर ➭ मदुरै ❑ स्वर्ण मंदिर का शहर ➭ अमृतसर ❑ महलों का शहर ➭ कोलकाता ❑ नवाबों का शहर ➭ लखनऊ ❑ इस्पात नगरी ➭ जमशेदपुर ❑ पर्वतों की रानी ➭ मसूरी ❑ रैलियों का नगर ➭ नई दिल्ली ❑ भारत का प्रवेश द्वार ➭ मुम्बई ❑ पूर्व का वेनिस ➭ कोच्चि ❑ भारत का पिट्सबर्ग ➭ जमशेदपुर ❑ भारत का मैनचेस्टर ➭ अहमदाबाद ❑ मसालों का बगीचा ➭ केरल ❑ गुलाबी नगर ➭ जयपुर ❑ क्वीन ऑफ डेकन ➭ पुणे ❑ भारत का हॉलीवुड ➭ मुंबई ❑ झीलों का नगर ➭ श्रीनगर ❑ फलोद्यानों का स्वर्ग ➭ सिक्किम ❑ पहाड़ी की मल्लिका ➭ नेतरहाट ❑ भारत का डेट्राइट ➭ पीथमपुर ❑ पूर्व का पेरिस ➭ जयपुर ❑ सॉल्ट सिटी ➭ गुजरात ❑ सोया प्रदेश ➭ मध्य प्रदेश ❑ मलय का देश ➭ कर्नाटक ❑ दक्षिण भारत की गंगा ➭ कावेरी ❑ काली नदी ➭ शारदा ❑ ब्लू माउंटेन ➭ नीलगिरी पहाड़ियां ❑ अंडों की टोकरी (एशिया) ➭ आंध्र प्रदेश ❑ राजस्थान का हृदय ➭ अजमेर ❑ सुरमा नगरी ➭ बरेली ❑ खुशबुओं का शहर ➭ कन्नौज ❑ काशी की बहन ➭ गाजीपुर ❑ लीची नगर ➭ देहरादून ❑ राजस्थान का शिमला ➭ माउंट आबू ❑ कर्नाटक का रत्न ➭ मैसूर ❑ अरब सागर की रानी ➭ कोच्चि ❑ भारत का स्विट्जरलैंड ➭ कश्मीर ❑ पूर्व का स्कॉटलैंड ➭ मेघालय ❑ उत्तर भारत का मैनचेस्टर ➭ कानपुर ❑ मंदिरों और घाटों का नगर ➭ वाराणसी ❑ धान का डलिया ➭ छत्तीसगढ़ ❑ भारत का पेरिस ➭ जयपुर ❑ मेघों का घर ➭ मेघालय ❑ बगीचों का शहर ➭ कपूरथला ❑ पृथ्वी का स्वर्ग ➭ श्रीनगर ❑ पहाड़ों की नगरी ➭ डुंगरपुर ❑ भारत का उद्यान ➭ बेंगलुरू ❑ भारत का बोस्टन ➭ अहमदाबाद ❑ गोल्डन सिटी ➭ अमृतसर ❑ सूती वस्त्रों की राजधानी ➭ मुंबई ❑ पवित्र नदी ➭ गंगा ❑ बिहार का शोक ➭ कोसी ❑ वृद्ध गंगा ➭ गोदावरी ❑ पश्चिम बंगाल का शोक ➭ दामोदर ❑ कोट्टायम की दादी ➭ मलयाला ❑ जुड़वा नगर ➭ हैदराबाद/सिकंदराबाद ❑ ताला नगरी ➭ अलीगढ़ ❑ राष्ट्रीय राजमार्गों का चौराहा ➭ कानपुर ❑ पेठा नगरी ➭ आगरा ❑ भारत का टॉलीवुड ➭ कोलकाता ❑ वन नगर ➭ देहरादून ❑ सूर्य नगरी ➭ जोधपुर ❑ राजस्थान का गौरव ➭ चित्तौड़गढ़ ❑ कोयला नगरी ➭ धनबाद #PRE

Emailing MP PATWARI SPECIAL MATHS CLASS 3.pdf

*📚✍️ विज्ञान ✍️📚* *♦️🪂मात्रक एवं ईकाई 🪂♦️* 👉 1⃣ नम्बर पक्का 👈 🌞शक्ति का मात्रक है– वाट ━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞बल का मात्रक है– न्यूटन ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞कार्य का मात्रक है– जूल ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞चालक की वैधुत प्रतिरोधकता की मात्रक है– ओम मीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞परकाश वर्ष इकाई है– दूरी का ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞परकाश वर्ष है– वह दूरी, जो प्रकाश 1 वर्ष में तय करता है| ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞एक पारसेक, तारों संबंधी दूरियां मापने का मात्रक, बराबर है– 3.25 प्रकाश वर्ष ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞पारसेक मात्रक है– दूरी की एंपियर मापने की इकाई है– current ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞मगा वाट बिजली के नापने की इकाई है जो– उत्पादित की जाती है ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞तवरण का मात्रक है– मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞आवेश का मात्रक है– न्यूटन सेकंड ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞उष्मा का मात्रक है – कैलोरी ━━━━━━━━━━━━━━━━━━. 🌞समुद्री जहाज की गति मापी जाती है– नॉट ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞नौसंचालन का मात्रक है– नॉटिकल मील ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞विभवांतर का मात्रक है– वोल्ट ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞परकाश के तरंगधैर्य का मात्रक है – Angastram ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞एक हॉर्स पावर में कितने वाट होते हैं-746 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞ऊर्जा का मात्रक है– जूल ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞दाब का मात्रक है– पास्कल ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞उच्च वेग को प्रदर्शित करता है– मैक(mach) ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞धवनि की प्रबलता की मात्रक है– डेसीबल ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞शक्ति की इकाई है– अश्वशक्ति(हॉर्स पॉवर) ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞नौसंचालन में दूरी की इकाई है– समुद्री मील ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞कयूसेक में मापा जाता है – जल का बहाव ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞ओजोन परत की ऊंचाई मापी जाती है– dabson(डॉबसन) ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞महासागर में डूबी हुई वस्तुओं की स्थिति जानने के लिए यंत्र का प्रयोग करते हैं– सोनार ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞नौसंचालाको द्वारा प्रयोग में लाया जाता है– सोनार ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞धवनि की तीव्रता मापने वाले यंत्र हैं– ऑडियो मीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞वायु की चाल मापने वाला यंत्र है– एनीमोमीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞विधुत प्रतिरोध का मात्रक है– ओम ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞विधुत आवेश का मात्रक है  -कूलाम ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞करेंट का मात्रक है– एम्पिएर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞लम्बाई की न्यूनतम इकाई है– फर्मिमीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞भकम्प की तीव्रता मापी जाती है– रिक्टर पैमाने पर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞डॉबसन इकाई का प्रयोग  जाता है – ओजोन परत की मोटाई मापने में ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞धवनि की तीव्रता को मापने वाला यन्त्र है– ऑडियोमीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞पईरोमीटर मापन में प्रयोग होता है– उच्च ताप ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞मनोमीटर के द्वारा माप की जाती है – गैसों के दाब ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞दाब मापने हेतु प्रयोग की जाती है – बैरोमीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞अमीटर प्रयोग की जाती है – करंट ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞हाइग्रोमीटर मापन में प्रयोग होता है – आर्द्रता ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞रक्त दब मापने के यन्त्र है – स्फिग्मोमैनोमीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞परकाश की तीव्रता मापने के लिए प्रयोग की जाती है – लक्समीटर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞सिस्मोग्राफ क्या रिकॉर्ड करता है– भूचाल ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞रनगेज का प्रयोग होता है – वर्षामापी के लिए ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞मात्रकों का अंतरराष्ट्रीय पद्धति कब लागू हुआ– 1971 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞एस आई पद्धति में लेंस की शक्ति का मात्रक है– डायोप्टर ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞लयूमेन मात्रक है- ज्योति फ्लक्स का ━━━━━━━━━━━━━━━━ ━━ 🌞कडेला मात्रक है– ज्योति तीव्रता का ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌞रडियोऐक्टिव धर्मिता का मात्रक है- क्यूरी

महत्वपूर्ण तथ्य:- हरिगीतिका  छंद का बादशाह:- मैथिलीशरण गुप्त उपमा का बादशाह:-- देव विरोधाभास का बादशाह:-- धनानंद रूपक का बादशाह :--तुलसीदास उत्प्रेक्षा का बादशाह:-- जायसी श्लेष अलंकार का बादशाह:-- सेनापति केली माला:-- हरिदास केली माधुरी :--माधवदास सूरदास की गोपियां :-वाग्विद्गढ़ता नंददास  की गोपियां:-- तर्कशील हरिओंध की गोपियां:-- समाजसेवी भाषाभूषण :--जसवंत सिंह भाषा भूषण:-- श्रीधर कवि भारती भूषण:-- गिरिधर दास भारती भूषण आलोचना:-- अर्जुनदास केडिया आर्या सप्तशती:-- गोवर्धन गाथासप्तशती:-- कवि हाल इश्कलता :--घनानंद इश्कनामा:-- बोधा विरह लीला:-- घनानंद विरहवारीश :-बोधा निशा निमंत्रण:-- बच्चन मौन निमंत्रण:-- पंत मधूलिका:- रामेस्वर शुक्ल अंचल मधुकण:- भगवतीचरण वर्मा नीम के पत्ते:-- दिनकर नीम की पत्तियां:-- रामकुमार कृषक रक्षाबंधन (नाटक):- हरिकृष्ण प्रेमी रक्षाबंधन( कहानी):- विशंभर कौशिक ठहरा हुआ पानी( नाटक):- शांति मेहरोत्रा सोया हुआ जल( उपन्यास):- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना बहता हुआ पानी( उपन्यास ):--राजेंद्र अवस्थी तारा( नाटक):- भगवतीचरण वर्मा तारा( उपन्यास ):-किशोरीलाल गोस्वामी विवर्त(उपन्यास):-शिवानी विवर्त (उपन्यास):- जैनेन्द्र विवर्त(कहानी):--जगदीश चुतर्वेदी सन्यासी (उपन्यास):-इलाचंद जोशी सन्यासनी( उपन्यास):-प्रफुल्ल ओझा टेढ़े मेढ़े रास्ते(उपन्यास) भगवतीचरण वर्मा सीधा-साधा रास्ता( उपन्यास):--राघव मकड़ी का जाला( एकाकी):- जगदीश चंद्र माथुर मकड़ी का जाला( उपन्यास) सन्हैया लाल ओझा शम्बूक( कविता ):-जगदीश चंद्रगुप्त जंबुक( निबंध):- कुबेरनाथ शंबूक की हत्या(नाटक):- नरेंद्र कोहली रिहसल( एकांकी ):-गणेश प्रसाद द्विवेदी रिहसल( उपन्यास):- हिमांशु श्रीवास्तव कठपुतली( उपन्यास) विशम्भर कौशिक कठपुतली( उपन्यास) देवेंद्र सत्यार्थी नदी बहती थी( उपन्यास ):-राजकमल चौधरी नदी बहती रही (उपन्यास) :-अभिमन्यु अनंत हजार घोड़ो का सवार( उपन्यास)यादवेंद्र शर्मा चंद्र सफेद घोड़ा लाल सवार:--( हृदेश) महाभोज:- मन्नू भंडारी का नाटक एवं उपन्यास महाभोज:- शैलेश मटियानी का कहानी संग्रह गरीबी हटाओ( कहानी संग्रह) :--रविंद्र कालिया अब गरीबी हटाओ( नाटक):- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना तनी हुई रस्सी( कविता) अज्ञेय बुनी हुई रस्सी( कविता):- भवानी प्रसाद मिश्र आदमी खोर (कहानी ):-धीरेंद्र अस्थाना आदमखोर( कहानी) चंद्रकरण सोने रिक्शा आदम खोर( उपन्यास) श्रवण कुमार गोस्वामी अग्नि खोर (कहानी):- फणीश्वर नाथ रेणु उन्मादिनी( कहानी संग्रह):-- सुभद्रा कुमारी चौहान उन्मादिनी( कहानी):-- चंडीप्रसाद हृदेश प्रायश्चित (नाटक):- जयशंकर प्रसाद प्रायश्चित( कहानी):- भगवतीचरण वर्मा झूठा सच (उपन्यास):- यशपाल झूठा सच( निबंध):- सियारामशरण गुप्त ठलुआ क्लब( निबंध):- गुलाबराय चक्कर क्लब( निबंध):- यशपाल त्रिशंकु( निबंध ):--- अज्ञेय त्रिशंकु( कहानी संग्रह):- मन्नू भंडारी त्रिशंकु   (नाटक). ब्रजमोहन शाह

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की रचनाएं काव्य संग्रह– अनामिका (1923) परिमल (1930) गीतिका (1936) अनामिका (द्वितीय) तुलसीदास (1939) कुकुरमुत्ता (1942) अणिमा (1943) बेला (1946) नये पत्ते (1946) अर्चना(1950) आराधना (1953) गीत कुंज (1954) सांध्य काकली अपरा (संचयन) उपन्यास– अप्सरा (1931) अलका (1933) प्रभावती (1936) निरुपमा (1936) कुल्ली भाट (1938-39) बिल्लेसुर बकरिहा (1942) चोटी की पकड़ (1946) काले कारनामे (1950) चमेली इन्दुलेखा कहानी संग्रह लिली (1934) सखी (1935) सुकुल की बीवी (1941) चतुरी चमार (1945) देवी (1948) निबंध– रवीन्द्र कविता कानन (1929) प्रबंध पद्म (1934) प्रबंध प्रतिमा (1940) चाबुक (1942) चयन (1957) संग्रह (1963) कहानी संग्रह– लिली (1934) सखी (1935) सुकुल की बीवी (1941) चतुरी चमार (1945) देवी (1948)

सभी हिन्दी प्रतियोगियों के लिए महत्वपूर्ण ▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱ 🎙आधुनिक युग के चरण हैं?— रामधारी सिंह ‘दिनकर’ 🎙देवताओं की लिपि किसे कहा जाता है?— देवनागरी लिपि 🎙हिन्दी भाषा का प्रथम महाकाव्य किसे कहा जाता है?— पृथ्वीराज रासो ( चन्दबरदाई की रचना ) 🎙हिन्दी गध के प्रतिष्ठापक ?— आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी 🎙हिन्दी खड़ी बोली के जन्मदाता?— भारतेन्दु हरिश्चन्द्र 🎙हिन्दी साहित्य में हालावाद के प्रवर्तक?— हरिवंशराय बच्चन 🎙हिन्दी साहित्य की प्रथम कहानी?— इन्दुमती 🎙हिन्दी के प्रथम कवि?— सिद्ध सरहपा ( 9वीं शताब्दी ) 🎙हिन्दी की प्रथम रचना?— श्रावकाचार ग्रंथ ( देवसेन वमत ) 🎙हिन्दी का प्रथम उपन्यास?— परीक्षा गुरू ( श्रीनिवास दास वमत )

📖  नामवर सिंह के कृतित्व का क्रमवार परिचय ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ 📗  आलोचना पुस्तकें नामवर जी की     ✍आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां - 1954     ✍छायावाद - 1955     ✍इतिहास और आलोचना - 1957     ✍कहानी : नयी कहानी - 1964     ✍कविता के नये प्रतिमान - 1968     ✍दूसरी परम्परा की खोज - 1982     ✍वाद विवाद और संवाद - 1989 साक्षात्कार-     ✍कहना न होगा - 1994     ✍बात बात में बात - 2006 पत्र-संग्रह-     ✍काशी के नाम - 2006 व्याख्यान-     ✍आलोचक के मुख से - 2005 📖  नई संपादित आठ पुस्तकें- आशीष त्रिपाठी के संपादन में आठ पुस्तकों में क्रमशः दो लिखित की हैं, दो लिखित + वाचिक की, दो वाचिक की तथा दो साक्षात्कार एवं संवाद की :-     ✍कविता की ज़मीन और ज़मीन की कविता - 2010     ✍हिन्दी का गद्यपर्व - 2010     ✍प्रेमचन्द और भारतीय समाज - 2010     ✍ज़माने से दो दो हाथ - 2010     ✍साहित्य की पहचान - 2012     ✍आलोचना और विचारधारा - 2012     ✍सम्मुख - 2012     ✍साथ साथ - 2012 ✍  संपादन कार्य:-👇👇 अध्यापन एवं लेखन के अलावा उन्होंने 1965 से 1967 तक जनयुग (साप्ताहिक) और 1967 से 1990 तक आलोचना (त्रैमासिक) नामक दो हिंदी पत्रिकाओं का संपादन भी किया. 📚 संपादित पुस्तकें नामवर सिंह जी के द्वारा     ✍संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो - 1952 (आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के साथ)     ✍पुरानी राजस्थानी - 1955 (मूल लेखक- डॉ एल. पी. तेस्सितोरी; अनुवादक- नामवर सिंह)     ✍चिन्तामणि भाग-3 (1983)     ✍कार्ल मार्क्स : कला और साहित्य चिन्तन (अनुवादक- गोरख पांडेय)     ✍नागार्जुन : प्रतिनिधि कविताएँ     ✍मलयज की डायरी (तीन खण्डों में)     ✍आधुनिक हिन्दी उपन्यास भाग-2     ✍रामचन्द्र शुक्ल रचनावली (सह सम्पादक - आशीष त्रिपाठी) ✅  नामवर सिंह पर केंद्रित साहित्य आलोचनात्मक साहित्य     ✍आलोचक नामवर सिंह (1977) - सं रणधीर सिन्हा     ✍'पहल' का विशेषांक - अंक-34, मई 1988 ई० – सं -ज्ञानरंजन, कमला प्रसाद, यह विशेषांक पुस्तक रूप में भी प्रकाशित हुआ, लेकिन लंबे समय से अनुपलब्ध है. इसके अलावा पूर्वग्रह (अंक-44-45, 1981ई०) तथा दस्तावेज (अंक-52, जुलाई-सितंबर, 1991) के अंक भी नामवर पर ही केन्द्रित थे.     ✍नामवर के विमर्श (1995) - सं- सुधीश पचौरी, पहल, पूर्वग्रह, दस्तावेज आदि के नामवर जी पर केन्द्रित विशेषांकों में से कुछ चयनित आलेखों के साथ कुछ और नयी सामग्री जोड़कर तैयार पुस्तक.     ✍नामवर सिंह : आलोचना की दूसरी परम्परा (2002) - सं- कमला प्रसाद, सुधीर रंजन सिंह, राजेंद्र शर्मा - 'वसुधा' का विशेषांक (अंक-54, अप्रैल-जून 2002; पुस्तक रूप में वाणी प्रकाशन से     ✍आलोचना के रचना पुरुष : नामवर सिंह (2003) – सं- भारत यायावर, पुस्तक रूप में वाणी प्रकाशन से     ✍नामवर की धरती (2007) - लेखक - श्रीप्रकाश शुक्ल, आधार प्रकाशन, पंचकूला हरियाणा     ✍जे.एन.यू में नामवर सिंह (2009) – सं- सुमन केसरी     ✍'पाखी' का विशेषांक (अक्टूबर 2010) – सं- प्रेम भारद्वाज, पुस्तक रूप में नामवर सिंह: एक मूल्यांकन नाम से सामयिक प्रकाशन से     ✍'बहुवचन' का विशेषांक (अंक-50, जुलाई-सितंबर 2016) - 'हिन्दी के नामवर' शीर्षक से, पुस्तक रूप में अनन्य प्रकाशन, शाहदरा, दिल्ली से 🎗 नामवर जी को मिले प्रमुख : सम्मान 🎗     ✍साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1971 'कविता के नये प्रतिमान' के लिए     ✍शलाका सम्मान हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से     ✍'साहित्य भूषण सम्मान' उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से     ✍शब्द साधक शिखर सम्मान - 2010 ('पाखी' तथा इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी की ओर से)     ✍महावीरप्रसाद द्विवेदी सम्मान - 21 दिसंबर 2010     ✍साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता - 2017

हजारी प्रसाद द्विवेदी के संपूर्ण साहित्य की सूची (कालक्रमानुसार) 1. सूर साहित्य (1936) 2. हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940) 3. कबीर (1942) 4. बाणभट्ट की आत्मकथा (1946) 5. अशोक के फूल (1948) 6. नाथ संप्रदाय (1950) 7. कल्पलता (1951) 8. प्राचीन भारत का कलात्मक विनोद (1952) 9. हिन्दी साहित्य का आदिकाल (1952) 10. मध्यकालीन धर्म साधना (1952) 11. हिन्दी साहित्य : उद्भव और विकास (1953) 12. विचार और वितर्क : (1954) 13. नाथ सिद्धों की बानियां (1957) 14. मेघदूतः एक पुरानी कहानी (1957) 15. संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो (1957) 16. विचार प्रवाह (1959) 17. संदेश रासक (1960) 18. मृत्युंजय रवीन्द्र (1963) 19. चारू चन्द्रलेख (1963) 20. सहज साधना (1963) 21. नाट्य शास्त्र की भूमिका एवं दशरूपक (1963) 22. कुटज (1964) 23. साहित्य सहचर (1965) 24. कालिदास की लालित्य योजना (1965) 25. मध्यकालीन बोध का स्वरूप (1970) 26. आलोक पर्व (1972) 27. पुनर्नवा (1973) 28. अनामदास का पोथा(1974)