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दोस्तो मुझे इनकी पुस्तक बहुत पसंद है और वास्तव में आप लोगो को भी बहुत पसंद होगी, पर किसी अच्छे व्यक्ति को ये सब शोभा नहीं देता। प्रवीण सर ने बहुत ही अच्छी पुस्तक बनाई। मैं भी पढता हूँ, पर किसी भी एक अच्छी हस्ती को अपने मान का ख्याल होना चाहिए। मैं भलीभांति जानता हूं कि हमारी एक व्यक्तिगत जिंदगी होती है पर जो व्यक्तिगत है वो व्यक्तिगत ही रहे, भले उसमे कोई भी कैसा भी रिएक्शन दे, पर जब हम उसे सार्वजनिक कर देते हैं तो कमेंट भी सार्वजनिक आते हैं। प्रवीण सर से मेरा निवेदन है कि कृपया आप औरों की तरह बाजारीकरण में न पड़े, आप जिस सिद्धान्त में चलने का प्रयास कर रहे है उसमें भटकाव मत लाएं।
