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धार्मिक ग्रंथ पौराणिक कथा

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मुक्ति कहे गोपाल से, मेरी मुक्ति बताओ | ब्रज रज जब माथे चड़े, मुक्ति मुक्त हो जाय || ब्रज चौरासी कोस कि परिक्रमा जो देत| तो लख चौरासी कोस के पाप हरि हर लेत ||

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श्री राधा रमण बिहारी मंदिर वृन्दावन
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# श्री राधा रमण बिहारी जी मंदिर वृन्दावन https://www.instagram.com/reel/C-crTXwvAKW/?igsh=dnpic3UyMmlwbjFj
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श्री बांके बिहारी जी मंदिर वृन्दावन
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🙏🙏🙏🙏१६वें अध्याय🙏🙏🙏🙏 देवासुर संपत्ति का विभाग बताया गया है। आरंभ से ही ऋग्देव में सृष्टि की कल्पना दैवी और आसुरी शक्तियों के रूप में की गई है। यह सृष्टि के द्विविरुद्ध रूप की कल्पना है, एक अच्छा और दूसरा बुरा। एक प्रकाश में, दूसरा अंधकार में। एक अमृत, दूसरा मर्त्य। एक सत्य, दूसरा अनृत। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🙏🙏🙏🙏१७वें अध्याय🙏🙏🙏🙏                (श्रद्धात्रय विभाग योग) 👉इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी ही बन जाती है। 👉यज्ञ, तप, दान, कर्म ये सब तीन प्रकार की श्रद्धा से संचालित होते हैं। 👉यहाँ तक कि आहार भी तीन प्रकार का है। उनके भेद और लक्षण गीता ने यहाँ बताए हैं। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🙏🙏🙏🙏१८वें अध्याय🙏🙏🙏🙏                . (मोक्षसंन्यास योग) 👉इसमें गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। यहाँ पुन: बलपूर्वक मानव जीवन के लिए तीन गुणों का महत्व कहा गया है। 👉पृथ्वी के मानवों में और स्वर्ग के देवताओं में कोई भी ऐसा नहीं जो प्रकृति के चलाए हुए इन तीन गुणों से बचा हो। 👉मनुष्य को बहुत देख भागकर चलना आवश्यक है जिससे वह अपनी बुद्धि और वृत्ति को बुराई से बचा सके और क्या कार्य है, क्या अकार्य है, इसको पहचान सके। 👉धर्म और अधर्म को, बंध और मोक्ष को, वृत्ति और निवृत्ति को जो बुद्धि ठीक से पहचनाती है, वही सात्विकी बुद्धि है और वही मानव की सच्ची उपलब्धि है। 👉इस प्रकार भगवान ने जीवन के लिए व्यावहारिक मार्ग का उपदेश देकर अंत में यह कहा है कि मनुष्य को चाहिए कि संसार के सब व्यवहारों का सच्चाई से पालन करते हुए, जो अखंड चैतन्य तत्व है, जिसे ईश्वर कहते हैं, 👉जो प्रत्येक प्राणी के हृद्देश या केंद्र में विराजमान है, उसमें विश्वास रखे, उसका अनुभव करे। वही जीव की सत्ता है, वही चेतना है और वही सर्वोपरि आनंद का स्रोत है। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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