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मिर्ज़ा ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब

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‘ ग़ालिब ‘ कौन है पूछते हैं वो की ‘ग़ालिब ‘ कौन है ? कोई बतलाओ की हम बतलायें क्या 😏 Link for boost this channel- https://t.me/boost/mirza_galib

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*हमने ज़िंदगी से शिकायतें करना ही बंद कर दिया *जब समझ आया कि हर चीज़ हमारे हिसाब से नहीं हो सकती!
*हमने ज़िंदगी से शिकायतें करना ही बंद कर दिया *जब समझ आया कि हर चीज़ हमारे हिसाब से नहीं हो सकती!

*हर दर्द दिखाई दे, ये जरुरी नहीं *कुछ घाव के बोझ इंसान मुस्कुराकर भी ढोता है!
*हर दर्द दिखाई दे, ये जरुरी नहीं *कुछ घाव के बोझ इंसान मुस्कुराकर भी ढोता है!

रूह-ए-बेताब को तेरे क़ुर्ब की तलब रही, जिस्म फ़ासलों में रहा, इश्क़ सफ़र करता रहा!
रूह-ए-बेताब को तेरे क़ुर्ब की तलब रही, जिस्म फ़ासलों में रहा, इश्क़ सफ़र करता रहा!

तेरे हिज्र ने सिखाया हमें सब्र का फ़लसफ़ा, वरना हम हर दर्द को ही शिकवा समझते थे।
तेरे हिज्र ने सिखाया हमें सब्र का फ़लसफ़ा, वरना हम हर दर्द को ही शिकवा समझते थे।

*तेरी निगाहों में डूबे तो ये राज़ खुला, समंदर गहरा हो तो साहिल की ज़रूरत नहीं रहती!!
*तेरी निगाहों में डूबे तो ये राज़ खुला, समंदर गहरा हो तो साहिल की ज़रूरत नहीं रहती!!

*तेरी निगाहों में जो कैफ़-ए-इश्क़ देखा था, *उसके बाद किसी और की आँखें अच्छी न लगीं।

तेरी क़ुर्बत की हसरत आज भी बाक़ी है, मुद्दत गुज़र गई, मगर आरज़ू वही है।

कुछ दर्द का इलाज वक़्त भी नहीं कर पाता, जब ज़ख़्म जिस्म पर नहीं, दिल पर लगा हो।

*ज़िंदगी में हर चीज़ हासिल करना ज़रूरी नहीं, *कुछ चीज़ों को छोड़ देना भी फ़तह होती है।

कुछ रिश्ते रूह पर लिखे जाते हैं, वक़्त उन्हें मिटाता नहीं, बस ख़ामोश कर देता है।

जिसे खोकर भी दिल बददुआ न कर सके, समझ लेना मोहब्बत अभी कहीं ज़िंदा है।

मोहब्बत में कोई फ़ैसला आख़िरी कहाँ होता है, दिल टूट भी जाए तो आरज़ू मरती नहीं।

*बेवफाओ के बाजार मे तुम वफ़ा ढूंढ़ते हो.. *बड़े नादान हो ग़ालिब.. *कातिल के घर मे ही जख्म की दवा ढूंढते हो.!!

*दिल चाहता था कि उसकी हर ख़ता माफ़ कर दें, *मगर ज़मीर ने कहा—हर माफ़ी रिश्ते नहीं बचाती।

*हम चाहते तो आज भी उसे अपना कह देते, *मगर कुछ रिश्ते चाहत से नहीं, क़दर से निभते हैं।

*मोहब्बत का तक़ाज़ा था कि तुझे पा लेते, *ख़ुद्दारी ने कहा—जिसे क़दर न हो, उसे छोड़ दो!

*ज़िंदगी ने पूछा, सबसे अज़ीज़ क्या है? *हमने कहा—वो सुकूँ जो किसी के होने का मोहताज न हो।

*हर जुदाई का मतलब बेवफ़ाई नहीं होता, *कुछ फ़ासले मोहब्बत को उम्रभर महफ़ूज़ रखते हैं।

*तेरी क़ुर्बत का असर अब भी रूह मे बाक़ी है, *फ़ुर्क़त में भी दिल को तेरा ही गुमाँ रहता है।

*तेरी निगाहों की इनायत का क्या कहना, *एक नज़र पड़ी और हम अपने न रहे।