en
Feedback
VastuGuruji®

VastuGuruji®

Open in Telegram

We Love VastuGuruji For any information Call 9770888888

Show more
1 423
Subscribers
No data24 hours
-37 days
-730 days

Data loading in progress...

Attracting Subscribers
September '26
September '26
+3
in 0 channels
August '26
+18
in 0 channels
Get PRO
July '26
+10
in 0 channels
Get PRO
June '26
+10
in 0 channels
Get PRO
May '26
+23
in 0 channels
Get PRO
April '26
+10
in 0 channels
Get PRO
March '26
+2
in 0 channels
Get PRO
February '26
+8
in 0 channels
Get PRO
January '26
+12
in 0 channels
Get PRO
December '25
+10
in 0 channels
Get PRO
November '25
+10
in 0 channels
Get PRO
October '25
+6
in 0 channels
Get PRO
September '25
+11
in 0 channels
Get PRO
August '25
+6
in 0 channels
Get PRO
July '25
+12
in 0 channels
Get PRO
June '25
+9
in 0 channels
Get PRO
May '25
+16
in 0 channels
Get PRO
April '25
+16
in 0 channels
Get PRO
March '25
+24
in 0 channels
Get PRO
February '25
+20
in 0 channels
Get PRO
January '25
+25
in 0 channels
Get PRO
December '24
+32
in 0 channels
Get PRO
November '24
+40
in 0 channels
Get PRO
October '24
+35
in 0 channels
Get PRO
September '24
+60
in 0 channels
Get PRO
August '24
+79
in 0 channels
Get PRO
July '24
+60
in 0 channels
Get PRO
June '24
+41
in 0 channels
Get PRO
May '24
+51
in 0 channels
Get PRO
April '24
+68
in 0 channels
Get PRO
March '24
+126
in 0 channels
Get PRO
February '24
+118
in 0 channels
Get PRO
January '24
+297
in 0 channels
Get PRO
December '23
+134
in 0 channels
Get PRO
November '23
+49
in 0 channels
Get PRO
October '23
+12
in 0 channels
Get PRO
September '23
+7
in 0 channels
Get PRO
August '23
+6
in 0 channels
Get PRO
July '23
+5
in 0 channels
Get PRO
June '23
+4
in 0 channels
Get PRO
May '23
+10
in 0 channels
Get PRO
April '23
+11
in 0 channels
Get PRO
March '23
+5
in 0 channels
Get PRO
February '23
+4
in 0 channels
Get PRO
January '23
+13
in 0 channels
Get PRO
December '22
+1 033
in 0 channels
Date
Subscriber Growth
Mentions
Channels
09 September0
08 September0
07 September0
06 September+1
05 September0
04 September+1
03 September0
02 September+1
01 September0
Channel Posts
📚 गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, जीवन जीने की सही राह भी दिखाते हैं। शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन से ही एक बेहतर समाज और उज्ज्व
📚 गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, जीवन जीने की सही राह भी दिखाते हैं। शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन से ही एक बेहतर समाज और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण होता है। 🙏 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌹 — Vastuguruji Rana Sikander #शिक्षकदिवस #TeachersDay #Guru #शिक्षक #ज्ञान #शिक्षा #VastuGuruji #RanaSikander #GuruVandana #शुभकामनाएँ

2
🪢✨ इस रक्षाबंधन, रिश्तों के साथ भविष्य का भी रखें ख्याल! ✨🪢 भाई-बहन के प्यार और विश्वास के इस पावन पर्व पर, अपने प्रियजनों
🪢✨ इस रक्षाबंधन, रिश्तों के साथ भविष्य का भी रखें ख्याल! ✨🪢 भाई-बहन के प्यार और विश्वास के इस पावन पर्व पर, अपने प्रियजनों के उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना करें। ❤️ 🔮 MahaJyotish App के साथ पाएं: 🌟 जन्म कुंडली 🌙 राशिफल 📅 दैनिक पंचांग 🙏 शुभ मुहूर्त 💑 कुंडली मिलान 🪐 ग्रह गोचर एवं दोष विश्लेषण ✨ व्यक्तिगत ज्योतिषीय उपाय 👨‍ astrologers से Chat & Call की सुविधा इस रक्षाबंधन, ज्योतिष का ज्ञान अपनी हथेली पर रखें। 📱🔮 📲 Download MahaJyotish App Now! 👉 https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mahajyotish.app #MahaJyotish #RakshaBandhan #RakshaBandhan2026 #VedicAstrology #Jyotish #JanamKundli #Rashifal #KundliMatching #Panchang #ShubhMuhurat #AstrologyApp #HappyRakshaBandhan
378
3
https://sakarbharat.com/hi/news/chhattisgarh/raipur/vastuguruji-rana-sikander-ji-ne-harsh-aur/
239
4
https://sakarbharat.com/hi/news/chhattisgarh/raipur/rakshabandhan-mahatva-vastuguruji-rana-sikander/
208
5
Now added Hindi/ Suppot
Now added Hindi/ Suppot
370
6
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mahajyotish.app Now listened for public release.
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mahajyotish.app Now listened for public release.
233
7
https://sakarbharat.com/epaper/sakar-bharat-15-august-2026-page-1-5/
345
8
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mahajyotish.app https://play.google.com/apps/testing/com.mahajyotish.app Li
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mahajyotish.app https://play.google.com/apps/testing/com.mahajyotish.app Link to open if get personal invite 🫰🤞
553
9
https://sakarbharat.com/epaper/pn-toln-e-jl/
322
10
https://vastuguruji.in/blog/gita/gita-chapter-16-daivasura-sampad-vibhag-yog/
368
11
श्लोक मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ट्रवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः॥ चाणक्य के अनुसार सच्चा पण्डित वह नहीं
श्लोक मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ट्रवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः॥ चाणक्य के अनुसार सच्चा पण्डित वह नहीं जो शास्त्रों को रटे, बल्कि वह है जिसका आचरण शुद्ध हो। इस श्लोक में तीन कसौटियाँ दी गई हैं। पहली — पराई स्त्री को माता समान देखना। यह संयम और सम्मान की पराकाष्ठा है; जहाँ वासना नहीं, वहीं शुद्ध दृष्टि सम्भव है। दूसरी — पराए धन को मिट्टी के ढेले समान समझना। जिसे दूसरों की सम्पत्ति के प्रति लोभ नहीं, वही सच्चे अर्थों में सन्तुष्ट और ईमानदार है। लोभ ही अधिकांश पतन का मूल कारण होता है। तीसरी — सभी प्राणियों को अपने समान मानना। जब मनुष्य दूसरे के सुख-दुःख को अपना समझने लगे, तभी करुणा और समभाव जन्म लेते हैं। यही आत्मवत् सर्वभूतेषु का भाव है। चाणक्य कहते हैं कि जिसमें ये तीनों गुण एक साथ विद्यमान हों — संयम, निर्लोभता और समभाव — वही वास्तविक पण्डित है। शिक्षा की डिग्री नहीं, चरित्र की शुद्धता ही ज्ञान की सच्ची पहचान है। यह श्लोक बताता है कि बुद्धि का प्रयोग आत्म-नियन्त्रण और परोपकार में हो, तभी वह सार्थक है। https://viratmahanagar.com/chanakya-ke-anusar-saccha-pandit-kaun/
264
12
श्लोक (चाणक्य नीति) आपदर्थे धनं रक्षेद् दारान् रक्षेद्धनैरपि। आत्मानं सततं रक्षेद् दारैरपि धनैरपि॥ विपत्ति के लिए धन बचाओ, धन
श्लोक (चाणक्य नीति) आपदर्थे धनं रक्षेद् दारान् रक्षेद्धनैरपि। आत्मानं सततं रक्षेद् दारैरपि धनैरपि॥ विपत्ति के लिए धन बचाओ, धन से परिवार बचाओ, पर स्वयं की रक्षा सबसे ऊपर रखो—चाहे इसके लिए धन और परिवार दोनों त्यागने पड़ें। कारण: यदि व्यक्ति स्वयं सुरक्षित नहीं, तो न धन बचा सकता है, न परिवार। जीवित व सक्षम व्यक्ति ही आगे चलकर सब कुछ पुनः अर्जित कर सकता है। यह स्वार्थ नहीं, प्राथमिकता का बुद्धिमत्तापूर्ण क्रम है — पहले स्वयं, फिर परिवार, फिर धन। सार: यह प्राथमिकता का क्रम है, स्वार्थ का उपदेश नहीं — स्वयं की सुरक्षा, तभी धन और परिवार दोनों की सुरक्षा सम्भव है। (स्रोत: चाणक्य नीति)
222
13
https://mahajyotish.com/vastu-devtas
196
14
https://sakarbharat.com/epaper/sakar-bharat/2026/07/30/page/8/
https://sakarbharat.com/epaper/sakar-bharat/2026/07/30/page/8/
501
15
https://mahajyotish.com/vastu-grid
504
16
> कः कालः कानि मित्राणि, को देशः कौ व्ययागमौ। > समय, संगति, स्थान, आय-व्यय, कर्तव्य और सामर्थ्य — इन छह पर बार-बार विचार करो।
> कः कालः कानि मित्राणि, को देशः कौ व्ययागमौ। > समय, संगति, स्थान, आय-व्यय, कर्तव्य और सामर्थ्य — इन छह पर बार-बार विचार करो। — चाणक्य नीति चाणक्य कहते हैं, मनुष्य को छह प्रश्न बार-बार स्वयं से पूछने चाहिए। कः कालः — समय कैसा है, उन्नति का या संकट का? सही निर्णय भी गलत समय पर व्यर्थ हो जाता है। कानि मित्राणि — संगति उठाने वाली है या गिराने वाली? को देशः — जहाँ योग्यता का मूल्य न हो, वहाँ रहना जीवन नष्ट करना है। कौ व्ययागमौ — आय-व्यय का हिसाब न रखने वाला एक दिन अपनी स्वतन्त्रता खो देता है। कस्याहं — मेरे उत्तरदायित्व किसके प्रति हैं? यह प्रश्न अहंकार को सीमा में रखता है। का च मे शक्तिः — अपनी सामर्थ्य को न कम आँको, न अधिक। सार यह कि असफलता प्रायः परिश्रम की कमी से नहीं, आत्म-समीक्षा की कमी से आती है। *(स्रोत: चाणक्य नीति)*
366
17
> अनन्तशास्त्रं बहु वेदितव्यम् > अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्नाः। > यत्सारभूतं तदुपासनीयं > हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥ संक्षि
> अनन्तशास्त्रं बहु वेदितव्यम् > अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्नाः। > यत्सारभूतं तदुपासनीयं > हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥ संक्षिप्त अर्थ: शास्त्र अनन्त हैं, जानने योग्य बहुत कुछ है, किन्तु समय थोड़ा है और विघ्न अनेक। अतः जो सारभूत है, उसी को ग्रहण करो — जैसे हंस जल में मिले दूध को अलग कर लेता है। आचार्य चाणक्य इस श्लोक में जीवन का सबसे व्यावहारिक सत्य रखते हैं — ज्ञान असीम है, पर मनुष्य का जीवन सीमित। संसार में पढ़ने, सीखने और जानने योग्य इतना कुछ है कि यदि कोई सब कुछ समेटने निकले, तो आयु समाप्त हो जाएगी और हाथ कुछ भी पूरा नहीं लगेगा। ऊपर से समय केवल थोड़ा ही नहीं, बाधाओं से भरा भी है — रोग, चिन्ता, उत्तरदायित्व, आजीविका। इन सबके बीच जो थोड़ा-सा समय शेष बचता है, वही वास्तविक पूँजी है। इसलिए, चाणक्य विवेक का समर्थन करते हैं, न कि संचय का। बुद्धिमान वह नहीं है जो सर्वाधिक ज्ञान रखता है, बल्कि वह है जो यह जानता है कि क्या त्यागना है। हंस का दृष्टांत इसी कौशल को दर्शाता है – दूध और जल के मिश्रण में भी, हंस केवल दूध को ग्रहण करता है और जल का परित्याग कर देता है। यही विवेकी दृष्टिकोण है।
348
18
https://mahajyotish.com/free-kundli
427
19
https://sakarbharat.com/hi/news/vastu-shastra/jagannath-rath-yatra-2026-rath-ki-rassi/
423
20
https://mahajyotish.com/numerology
433