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गरीब परिवार के बच्चे व महिलाएँ जो प्रतियोगिता परीक्षा की कॉचिंग नहीं ले सकते उन्हें भारत, विश्व सामान्य ज्ञान और हिंदी साहित्य की जानकारी निशुल्क उपलब्ध करवाना

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*गीतांजलि श्री के उपन्यास 'रेत समाधि' जिसका अनुवाद अमेरिकी डेजी रॉकवेल ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ नाम से किया को बुकर पुरस्कार* 🌺🌺 भारतीय साहित्य ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री के नाम गुरुवार को एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गई. दरअसल गीतांजलि श्री और अमेरिकी अनुवादक डेजी रॉकवेल को उपन्यास ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला है. मूल रूप से हिंदी में लिखी गई यह पहली किताब है जो इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने में सफल रही है. लेखिका गीतांजलि श्री को बहुत बहुत बधाई 🌺🌺

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हिन्दी_भाषा_एवं_साहित्य_प्रश्नोतर.pdf3.09 KB

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घटना_चक्र_सामान्य_ज्ञान_2022.pdf6.80 MB

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NCERT कवि लेखक.pdf4.18 MB

$$ अटल बिहारी वाजपेयी $$ @@ भारत के पूर्वप्रधानमंत्री 'अटल बिहारी वाजपेयी' जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन 🙏 @@ ®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®® जन्म-25 दिसम्बर 1924 जन्म स्थान-ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत पिता-कृष्ण बिहारी वाजपेयी माता-कृष्णा देवी #भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री (प्रथम शासनकाल) कार्यकाल 16 मई 1996 – 2 जून 1996 (16 दिन,सबसे कम) (द्वितीय शासनकाल) कार्यकाल 19 मार्च 1998 – 22 मई 2004 #भारत के विदेश मंत्री-1977–79 #अटल जी की प्रमुख रचनाये:-ं उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं :- मृत्यु या हत्या अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह) कैदी कविराय की कुण्डलियाँ संसद में तीन दशक अमर आग है कुछ लेख: कुछ भाषण सेक्युलर वाद राजनीति की रपटीली राहें बिन्दु बिन्दु विचार,। -मेरी इक्यावन कविताएँ / अटल बिहारी वाजपेयी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है #पुरस्कार:- 1992: पद्म विभूषण 1993: डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय) 1994: लोकमान्य तिलक पुरस्कार 1994: श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार 1994: भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार 2014 दिसम्बर : भारत रत्न से सम्मानित। 2015 : डी लिट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय) 2015: 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड', (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त) #जीवन के कुछ प्रमुख तथ्य:- -आजीवन अविवाहित रहे। -वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता (ओरेटर) एवं सिद्ध हिन्दी कवि भी हैं। -परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्निदो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये। -सन् 1998 में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया जिसे अमेरिका की सी०आई०ए० को भनक तक नहीं लगने दी। -अटल सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया अपितु सफलता पूर्वक संचालित भी किया। -अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। #अटल_जी_की_पंक्तियां:- -"भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।" -"क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ" -"मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है| ®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®®

$$ हरिवंश राय बच्चन $$ ®®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®®® @@ आज के दिन हिंदी के इस महान कवि/लेखक का जन्म हुआ ®® जन्म- 27 नवम्बर 1907 इलाहाबाद, आगरा, ब्रितानी भारत (अब उत्तर प्रदेश, भारत) मृत्यु -18 जनवरी 2003 (उम्र 95) मुम्बई, महाराष्ट्र, अभिभावक - प्रताप नारायण श्रीवास्तव, सरस्वती देवी पति/पत्नी - श्यामा बच्चन, तेजी सूरी संतान- अमिताभ बच्चन, अजिताभ बच्चन उपजीविका- कवि, लेखक, प्राध्यापक भाषा- अवधी, हिन्दी काल- आधुनिक काल ,छायावादी युग (व्यक्ति चेतना प्रधान काव्यधारा या हालावाद ) - हालावाद के प्रवर्तक #रचनाएं:- #कविता संग्रह :- . तेरा हार (1929),(प्रथम) . मधुशाला (1935), . मधुबाला (1936), . मधुकलश (1937), . निशा निमंत्रण (1938), . एकांत संगीत (1939), . आकुल अंतर (1943), . सतरंगिनी (1945), . हलाहल (1946), . बंगाल का अकाल (1946), . खादी के फूल (1948), . सूत की माला (1948), . मिलन यामिनी (1950), .प्रणय पत्रिका (1955), .धार के इधर उधर (1957), .आरती और अंगारे (1958), .बुद्ध और नाचघर (1958), .त्रिभंगिमा (1961), .चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962), .दो चट्टानें (1965), .बहुत दिन बीते (1967), .कटती प्रतिमाओं की आवाज़ (1968), .उभरते प्रतिमानों के रूप (1969), .जाल समेटा (1973) #आत्मकथा:- . क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969), . नीड़ का निर्माण फिर (1970), . बसेरे से दूर (1977), . दशद्वार से सोपान तक (1985) ®®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®®® # विविध रचनाएं:- .बचपन के साथ क्षण भर (1934), खय्याम की मधुशाला (1938),(अग्रजी के प्रसिद्ध कवि ' फिट्जेराल्ड' कृत अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर अनुवाद किया है) .सोपान (1953), .मैकबेथ (1957), .जनगीता (1958), .ओथेलो (1959), .उमर खय्याम की रुबाइयाँ (1959), .कवियों के सौम्य संत: पंत (1960), .आज के लोकप्रिय हिन्दी कवि: सुमित्रानंदन पंत (1960), .आधुनिक कवि (1961), .नेहरू: राजनैतिक जीवनचित्र (1961), .नये पुराने झरोखे (1962), .अभिनव सोपान (1964) .चौसठ रूसी कविताएँ (1964) .नागर गीत (1966), .बचपन के लोकप्रिय गीत (1967) .डब्लू बी यीट्स एंड औकल्टिज़्म (1968) .मरकट द्वीप का स्वर (1968) .हैमलेट (1969) .भाषा अपनी भाव पराये (1970) .पंत के सौ पत्र (1970) .प्रवास की डायरी (1971) .किंग लियर (1972) .टूटी छूटी कड़ियाँ (1973) .मेरी कविताई की आधी सदी (1981) .सोहं हंस (1981) .आठवें दशक की प्रतिनिधी श्रेष्ठ कवितायें (1982) .मेरी श्रेष्ठ कविताएँ (1984) .आ रही रवी की सवारी . बच्चन रचनावली के नौ खण्ड (1983), #पुरस्कार/सम्मान :- -इनकी कृति 'दो चट्टाने' को 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मनित किया गया था। -इन्हे 1968 में ही सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार तथा एफ्रो एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। -बिड़ला फाउण्डेशन ने उनकी आत्मकथा के लिये उन्हें सरस्वती सम्मान दिया था। - बच्चन को भारत सरकार द्वारा 1976 में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। #विशेष तथ्य:- - यह मूलतः आत्मानुभूति के कवि माने जाते हैं| - इनको 'क्षयी रोमांस का कवि' भी कहा जाता है| - इनको 1966 ई. में राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया गया था| - सन 1932 ई. में इन्होंने अपना प्रारंभिक साहित्यिक जीवन 'पायोनियर' के संवाददाता के रूप में प्रारंभ किया था| ®®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®®® #पंक्तिया:- -"जो बसे हैं, वे उजड़ते हैं, प्रकृति के जड़ नियम से, पर किसी उजड़े हुए को फिर से बसाना कब मना है?" - "है चिता की राख कर में, माँगती सिन्दूर दुनियाँ"- व्यक्तिगत दुनिया का इतना सफल, सहज साधारणीकरण दुर्लभ है।" - "मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा, फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१।" -" मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर, अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर और दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं," - "हो जाय न पथ में रात कहीं, मंज़िल भी तो है दूर नहीं - यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है! दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!" - "इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए, कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए," नोट:- संकलन में कोई त्रुटि हो तो जरूर बताएं| - मेरा संकलन आपको कैसा लगा अपनी राय जरुर दें| ®®® संकलनकर्ता- रविन्द्र पुनिया ®®®