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रामस्य दासोऽस्म्यहम्

रामस्य दासोऽस्म्यहम्

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🌞श्री राम जय राम जय जय राम 🌞 श्री-सीता-लक्ष्मण-भरत-शतृघ्न-हनूमत्समेत -श्रीरामचन्द्रपरब्रह्मार्पणमस्तु ॥

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Yeh group me aajao sb hi! Iss channel ka owner abhi yahan absent hai. Gauvatsa group me join ho jaao
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Jai Shree Krishna! Mitron. Shubh Navratri Sabko 🚩🙏❤️

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109827133_Sikha_Dharan_Ki_Aavshyakta_Swami_Ramsukhdas_Ji_Gita_Press.pdf5.21 MB

Durgati_Se_Bacho_GitaPress_स_वामी_रामसुख_दास_जी.pdf2.97 MB

अपने इष्टदेव के नाम का जप किया जा सकता है। स्त्री-पुरुष दोनों ही समान रूप से नाम जप कर सकते हैं। इष्ट अनुसार नाम मंत्र- शिव जी- 'शिव-शिव' या 'शिव शङ्कर प्रलयंकर' या 'श्रीरुद्र रुद्र रुद्र' का जप। विष्णु जी- 'नारायण-नारायण' नाम जप या 'अच्युत अनन्त गोविंद' जप। राम जी- 'श्रीरामजयरामजयजयराम' या 'सीताराम' जप या 'राम-राम'। कृष्ण जी- 'अच्युत अनन्त गोविंद' जप या 'कृष्ण-कृष्ण' जप या 'गोविंद-गोविंद' जप या 'गोविंद दामोदर माधवेति' या 'भज गोविंदम्' आदि स्तोत्र। दुर्गा जी- 'मृणानी रुद्राणी शिव शिव भवानी' जप या 'दुर्गा-दुर्गा' जप या 'भज ललिते ललिते...' कीर्तन ब्रह्मलीन द्वारकाशङ्कराचार्य जी विरचित या रामचरितमानस से- 'जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।। जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।। नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।। भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।' गणेश जी- 'गाइये गणपति जगवंदन। शंकर सुवन भवानी नंदन॥ सिद्धि सदन गजवदन विनायक। कृपा सिंधु सुंदर सब लायक॥ मोदक प्रिय मुद मंगल दाता। विद्या बारिधि बुद्धि विधाता॥ मांगत तुलसीदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे॥' अमुक-अमुक देवी-देवताओं के लिए शास्त्रों में जिन-जिन मालाओं का वर्णन किया गया है, उनका प्रयोग उनके नामजप हेतु भी किया जा सकता है। अन्यथा रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला पर। किंतु रुद्राक्ष की माला पर शक्तिमंत्र का जप रात्रि में नहीं करना चाहिए।

भगवान् श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा के पावन शुभावसर पर सभी वैदिक हिन्दुओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। आज 'हरिहर मिलन' की परम्परा के पश्चात् महाप्रभु की रथ यात्रा प्रारम्भ हो जाएगी। हरिहर मिलन में हरि के रूप में स्वयं भगवान् जगन्नाथ और हर के रूप में साक्षात् शिव स्वरूप पुरी शङ्कराचार्य भगवान् होते हैं। परम्परा अनुसार _*पुरी के शङ्कराचार्य भगवान् तीनों रथों का निरीक्षण, दर्शन एवं पूजन करते हैं, उसी के पश्चात् रथयात्रा का क्रम बढ़ता है।

अच्युत!! हे अनंत!! हे गोविन्द!! प्रातः स्मरणीय ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धन मठ पुरीपीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित श्रीमद् जगद्गुरू पूज्यपाद श्रीशंकराचार्य महाभाग "साक्षात श्रीमन्नारायण विग्रह स्वरूप विद्यमान गुरूदेव पूज्यपाद शंकराचार्य भगवान के प्राकट्यपर्व (राष्ट्रोत्कर्ष दिवस) पर अनंत अनंत मंगल बधाई एवं शुभकामनाएं । हर हिन्दू सेना हो, हर हिन्दू सनातनी हो हम भारत भव्य बनाएंगे, हुम हिंदु राष्ट्र बनाएंगे। हर हर महादेव, शिवशंकर प्रलयंकर

भीड़ वाले स्थान ( कल का हादसा)