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𝐋𝐎𝐕𝐄 𝐒𝐇𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈 𝐀𝐃𝐇𝐎𝐎𝐑𝐀 𝐏𝐘𝐀𝐑

𝐋𝐎𝐕𝐄 𝐒𝐇𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈 𝐀𝐃𝐇𝐎𝐎𝐑𝐀 𝐏𝐘𝐀𝐑

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सिर्फ उसकी यादों में तेरा इस कदर तड़पना जरूरी था क्या राख होता हुआ वजूद मुझसे थक कर सवाल करता है मोहब्बत करना तेरे लिए इतना ही जरुरी था क्या @loveshayriuk 𝕆𝕎ℕ𝔼ℝ = ᴋᴀᴘᴛᴀᴀɴ @Bewakoof042

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जो था अच्छा था ...जो है बेहतर है .... जो मिलेगा बेहतरीन होगा .... बस यही सिखा है जिंदगी से... Haapy Teachers day. ❤️

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भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के पावन    पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं❤️‍🔥

जो सरेआम उजाड़ी गई ऐसी बस्ती बहुत हैं देखते-देखते जो डूब गई ऐसी कश्ती बहुत हैं जो तरस ही नही खाते हैं यंहा कत्ल करने में शायद उनके लिए तो जिंदगी सस्ती बहुत हैं!!

वीडियो जिन्होंने भी बनाई है श्रेय मैं उनको ही देना चाहती हूं..🙏🙏 मैंने सिर्फ यह वीडियो अपलोड की है .. जब छोटे थे तब .. *बड़ी-बड़ी बातों में बह गए* और.... जब बड़े हुए तब ... *छोटी-छोटी बातों में बिखर गए।* 😒🙏

वो साँप सीढ़ी में 99 वाला साँप होता है ना... कसम से कुछ अपनों की याद दिला देते है...😜🤭😂

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" कैसी आज़ादी मनाओगे 15 अगस्त को? एक पिंजरे से निकलकर दूसरे पिंजरे में चले आए हो। क्या तुम आज़ाद हो गए जाति से, दहेज से, धार्मिक कट्टरता से, पाखंड से, डर से? झंडा बदल जाने से मनुष्य आज़ाद नहीं होता। पहले तुम सत्ता के सामने झुके थे, आज अंधविश्वास के सामने झुकते हो। गुलामी सिर्फ़ विदेशी नहीं होती - अपनों के हाथों मिली गुलामी भी गुलामी ही होती है। फ़िर भी, 15 अगस्त की शुभकामनाएं उत्सव मनाना अक्सर आज़ाद होने से आसान होता है। Happy independence day 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

ब्लैकलिस्ट में जितने भी कैदी पड़े हैं… 😂 15 अगस्त पर सबको आज़ादी का तोहफा मिलेगा! 🇮🇳🤣 बस वादा करो… बाहर आकर फिर वही कांड नहीं करोगे.... 😎

जो अंत तक निभा सकते थे... असल में उनके हिस्से प्रेम आया ही नहीं... # प्रेम

प्रेम की उच्चतम आयाम पे, तुम्हे क्यों फरेब की सूझी...!!

सम्बन्धों की कुल पाँच सीढ़ियाँ है देखना,अच्छा लगना, चाहना,पाना, यह चार बहुत सरल सीढ़ियाँ हैं सबसे कठिन पाँचवी सीढ़ी है          निभाना

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साँप भी बीन भी मदारी भी हाए क्या बात है तुम्हारी भी कैसे करते हो यार माइक पर शा'इरी भी दुकान-दारी भी हम वली तो नहीं ख़ुदा से मगर जान-पहचान है हमारी भी सिर्फ़ दिल का मु'आमला ही नहीं 'इश्क़ है एक ज़िम्मे-दारी भी हार कर फूल तेरी ख़ुश्बू से ढूँढ़ लेते हैं रिश्तेदारी भी वो जो पिछली क़तार में ख़ुश था आ गई आज उस की बारी भी हम कभी एक साथ करते थे ख़ाकसारी भी शह-सवारी भी आप ख़ामोशियाँ भी सुनते हैं आह सुन लीजिए हमारी भी ~ फ़हमी बदायूनी

मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं
शायद तेरे कल्पनाओं
की प्रेरणा बन
तेरे कैनवास पर उतरुँगी
या तेरे कैनवास पर
एक रहस्यमयी लकीर बन
ख़ामोश तुझे देखती रहूँगी
मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहींया सूरज की लौ बन कर
तेरे रंगों में घुलती रहूँगी
या रंगों की बाँहों में बैठ कर
तेरे कैनवास पर बिछ जाऊँगी
पता नहीं कहाँ किस तरह
पर तुझे ज़रूर मिलूँगी

या फिर एक चश्मा बनी
जैसे झरने से पानी उड़ता है
मैं पानी की बूंदें
तेरे बदन पर मलूँगी
और एक शीतल अहसास बन कर
तेरे सीने से लगूँगी
# अमृता प्रीतम

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सुनो.. ना... लड़के थकते भी हैं... टूटते भी हैं... रोते भी हैं... बस फ़र्क इतना है कि उन्हें कहा जाता है— "मर्द हो... संभाल लो।" 💔