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वृन्दावन रस अमृत

वृन्दावन रस अमृत

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जहाँ भक्ति रानी भी आकर हो जाती है फिर से जवां ऐसे श्री धाम वृन्दावन की रस महिमा सुनिए रसिक संतो के श्री मुख से,जिनके सत्संग और भजन सुनकर हमारे जीवन को प्रभु की और अग्रसित होने का मार्ग मिलेगा। स्वागत है आप सभी का प्रभु की प्रेरणा से बनाये हुए इस चेंनल मे।

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🦚 मेरे सांवरिया ,,,,,, !!!❣ *!! सिर्फ दो शब्द !!* #दिल्लगी *!! #बहला लेंगे हम.अपने #दिल को सुनो !!* "बस एक छोटी_सी हिचकी भें
🦚 मेरे सांवरिया ,,,,,, !!!❣ *!! सिर्फ दो शब्द !!* #दिल्लगी *!! #बहला लेंगे हम.अपने #दिल को सुनो !!* "बस एक छोटी_सी हिचकी भेंज दो ना"

स्वयं का स्वयं से प्रश्न (भाग-2) प्रश्न- हरि नाम करते हुए संसार मे मन बहुत भटकता है? उत्तर- संसार में मन जाता है फिर आता है, फिर कोई और विषय ढूँढता है, फिर कोई और बस ऐसे ही मन का सफर है पूरे जीवन चलता रहता है, जन्म जन्म तक इसका सफर कभी पूरा नहीं होता कर्मों की टिकट लेकर न जाने कितने वाहन ( देह ) बदलता है पर सफर चलता रहता है ऐसे पागल मन को तुम "हरि नाम" विमान पर चढ़ा रहे हो तो उसको उस विमान(हरि भजन) , जहां जाना है वो स्थान( ब्रज), किससे मिलना है( श्रीराधागोविंद), क्यूँ मिलना है ( प्रेम सेवा प्राप्ति) यह सब बार बार बताओ ( साधु संग) कभी झगड़ा करेगा, तुम्हें मारेगा पर तुम मत हार मानना हरि नाम, साधु संग करते रहना बस एक दिन मन का कल्याण हो ही जाएगा, श्री राधा गोविंद चरण कमल मिल जाएंगे

स्वयम का स्वयम से प्रश्न भाग- 1 प्रश्न- हरि नाम जप करते हुए उत्साहित कैसे हो? उत्तर- हमारे अनंत जन्म हुए है, जप करते हुए अनंत जन्म के कर्म हमारे मन पर जोर मारते है, अनंत चित्र, संस्कार यह सब एक के बाद एक मन पर प्रभाव करते है और जब साधक निरंतर हरि नाम जप करता है तो साधक इसे जान लेता है श्री कृष्ण वाक्य " बहुत जन्मों के बाद किसी को यह ज्ञान होता है मैं श्री कृष्ण ही सर्वस्व हूं" तब वह प्रसन्न होता है के हाय! क्या वह समय आ गया जब मेरे अनंत जन्म हो गए और अब इस जन्म में हरि नाम से प्रेम हो रहा है बस यही चिंतन इसे श्री कृष्ण भक्ति में बहुत आगे ले जाता है

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