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वृन्दावन रस अमृत

वृन्दावन रस अमृत

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जहाँ भक्ति रानी भी आकर हो जाती है फिर से जवां ऐसे श्री धाम वृन्दावन की रस महिमा सुनिए रसिक संतो के श्री मुख से,जिनके सत्संग और भजन सुनकर हमारे जीवन को प्रभु की और अग्रसित होने का मार्ग मिलेगा। स्वागत है आप सभी का प्रभु की प्रेरणा से बनाये हुए इस चेंनल मे।

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Jay jay radha vallabh shri hrivansh

🦚 मेरे सांवरिया ,,,,,, !!!❣ *!! सिर्फ दो शब्द !!* #बहला *!! जब रंग मुहब्बत का चढ़ता है !!* #कान्हा "ख़्वाहिशें शौक़ीन हो जाती है" जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधा वल्लभ जय श्री सांवरिया सेठ जय श्री ठाकुर जी महाराज

🦢🦋संतों से सीखिए युक्ति भजन करना कैसे है🦋🦢 🦢🦋🦢क्या है ग्रहस्थी का धर्म🦢🦋🦢

💛💙💞श्री राधा वल्लभ लाल के दर्शन की विधि और युक्ति💞💙💛

श्री राधे आप सभी को🙏 हमने चैनल में कमेंट का ऑप्शन विकल्प रख दिया है आप सभी कमेंट करके चैनल के अंदर क्या पोस्ट चाहते हैं यह हमें बता सकते है, आपके द्वारा मांग की गई सभी पोस्टों को हम शीघ्र अति शीघ्र चैनल के अंदर पोस्ट करने की कोशिश करेंगे साथ साथ ही आप कमेंट करके हमारे द्वारा की गई पोस्ट आपको पसंद आ रही है या नहीं यह भी आप हमें कमेंट करके बताने की कृपा करें।

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🌹पुरी के राजा स्वयं अपने हाथों से झाडू़ लगाते हैं,और वो ~~🌹 🌷 सोने की झाड़ू से होती है सफाई...!🌹 आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते है..तस्वीर में आप इसे साफ साफ देख सकते हैं। महाप्रभु जगन्नाथ को कलियुग का भगवान भी कहते है..। पुरी में जगन्नाथ महाप्रभु अपनी बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम के साथ निवास करते है मगर रहस्य ऐसे है कि आजतक कोई न जान पाया..! हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है,उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को CRPF की सेना चारो तरफ से घेर लेती है...उस समय कोई भी मंदिर में नही जा सकता।मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है...पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है...पुजारी के हाथ मे दस्ताने होते है..वो पुरानी मूर्ती से "ब्रह्म पदार्थ" निकालते है और नई मूर्ती में डाल देते है...ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नही पता...इसे आजतक किसी ने नही देखा. ..हज़ारो सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है... ये एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी इंसान के जिस्म के चिथड़े उड़ जाए। इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है...मगर ये क्या है, कोई नही जानता...ये पूरी प्रक्रिया हर 12 साल में एक बार होती है उस समय सुरक्षा बहुत ज्यादा होती है...मगर आजतक कोई भी पुजारी ये नही बता पाया की महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है...?? कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ में लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था...आंखों में पट्टी थी...हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए... भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देंगी आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे होंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता। झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशामे लहराता है दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती। भगवान जगन्नाथ मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह आपकी तरफ दीखता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है। ये सब बड़े आश्चर्य की बात हैं लेकिन सब सच में इसमे झूठ कुछ भी नहीं...! आप पर और आपके परिवार पर श्री जगन्नाथ महाप्रभु की कृपा सदा बनी रहे.. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🙏🌹भगवान विट्ठल🙏 श्री हरि के अवतार थे। उन्होंने यह अवतार क्यों लिया इसके बारे में एक पौराणिक कहानी में उल्लेख मिलता है। हुआ यूं था कि 6वीं सदी में संत पुंडलिक माता-पिता के परम भक्त थे। एक दिन वे अपने माता-पिता के पैर दबा रहे थे कि श्रीकृष्ण रुक्मिणी के साथ वहां प्रकट हो गए। वे पैर दबाने में इतने लीन थे कि अपने इष्टदेव की ओर उनका ध्यान ही नहीं गया। तब प्रभु ने उन्हें स्नेह से पुकार कर कहा, 'पुंडलिक, हम तुम्हारा आतिथ्य ग्रहण करने आए हैं।' पुंडलिक ने जब उस तरफ देखा, तो भगवान के दर्शन हुए। उन्होंने कहा कि मेरे पिताजी शयन कर रहे हैं, इसलिए आप इस ईंट पर खड़े होकर प्रतीक्षा कीजिए और वे पुन: पैर दबाने में लीन हो गए। भगवान पुंडलिक की सेवा और शुद्ध भाव देखकर प्रसन्न हो गए और कमर पर दोनों हाथ धरकर और पैरों को जोड़कर ईंटों पर खड़े हो गए। कुछ देर बाद पुंडलिक ने फिर भगवान से कह दिया कि आप इसी मुद्रा में थोड़ी देर और इंतजार करें। भगवान को पुंडलिक द्वारा दिए गए स्थान से भी बहुत प्रेम हो गया। उनकी कृपा से पुंडलिक को अपने माता-पिता के साथ ही ईश्वर से साक्षात्कार हो गया। ईंट पर खड़े होने के कारण श्री विट्ठल के विग्रह रूप में भगवान आज भी धरती पर विराजमान हैं। यही स्थान पुंडलिकपुर या अपभ्रंश रूप में पंढरपुर कहलाया। धन्य हैं वो मेरे भाई बहन जिन्हें इस जन्म में माता पिता की सेवा का अवसर मिला 🙏🙏🙏🙏🙏

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